Chandresh Gupta
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ये दिल्ली NCR की हर सोसाइटी की सच्चाई है-
इनके पालतू प्रेम ने तीन लड़कियों को पूरे जीवन का ट्रामा दे दिया है।
सोसाइटी वाले कुछ एक्शन ले ले , तो एक महिला सांसद का पूरा गैंग टूर पड़ेगा।
Dog Lover होने में कुछ बुराई नहीं, पर पहले उनको रखने लायक घर बनाओ।
कॉमन सर्विस जैसे लिफ्ट, हाई राइज में ये रखने मेरे हिसाब से तो एकदम उचित नहीं।
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शाहरुख खान से शादी करने के लिए गौरी ने शुरुआत में उनका नाम अभिनव रखा था, ताकि उनके हिंदू परिवार को मनाया जा सके।
वहीं, निकाह के समय गौरी खुद आयशा बन गई थीं।
शाहरुख जब 18 साल के थे, तब उन्हें 14 साल की गौरी से प्यार हुआ था।
यह प्यार इतना गहरा और टिकाऊ रहा कि 7 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद दोनों ने शादी कर ली।
दोनों ने एक-दूसरे के धर्म का पूरा सम्मान किया।
यही वजह है कि आज भी दोनों बॉलीवुड के सबसे बेस्ट कपल माने जाते हैं जिसका रिश्ता बेदाग है।



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सदन किस किस तरह का ‘बढ़िया भरोसा’ देकर तालियाँ पिटवा लेते हैं ये मंत्री लोग!
लोकसभा में दिया गया 18 मार्च 2021 का भाषण है ये नितिन गडकरी का जिसमें वे एक साल के भीतर सारे टोल बूथ हटा कर GPS से टोल लिए जाने की बात कर रहे थे!
पांच साल बीत गए टोल बूथ अभी भी हैं और कईयों पर कई बार वाहनों की लंबी क़तार भी लगती है।
दरअसल पूरा ध्यान इथेनॉल बिज़नेस पर लगा देने से मंत्री अपना असल बिज़नेस तो भूल ही गए!
अब शायद कोई नई डेडलाइन देकर फिर ताली पिटवा
लेंगे। पब्लिक की मेमोरी शॉर्ट होती है।
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सोशल मीडिया मे बहुत ताकत है।
न्यूज़ एजेंसी जो चीज नहीं दिखाती, सोशल मीडिया वो सब कुछ दिखाती है गलत को गलत, सही को सही
ऐसा ही Jacqueline Fernandez, Sonu Thukral or Bpraak की एल्बम Jugni की अश्लीलता के कारण काफ़ी विरोध हुआ, इसके बाद album मे अश्लील सीन हटाने पड़े और re- released करना पड़ा
Ashwini Yadav@iamAshwiniyadav
शर्म बेच खाये हैं ये लोग... केवल गाना वायरल करवाने के चक्कर में न्यूडिटी पर चलने को उतारू हैं। जानबूझकर ऐसे एंगल से शूट करते हैं और एडिटिंग में भी वो सीन रखते हैं ताकि लोग देखें... बेहद शर्मनाक है। @Sonuthukral Sonu Thukral और @BPraak B Praak का एक म्यूजिक वीडियो Jugni रिलीज हुआ है और उसमें ये हाल है कि क्या कहें... एक्ट्रेस जैक्लीन के प्राइवेट पार्ट्स अगर ग़लती से दिख गए तो सवाल ये है कि एडिटिंग में हटाया क्यों गया। वैसे ही गाने में वायरल कर दिया गया है। B Praak जी आप तो आध्यात्मिक हो, भजन गाते हो लेकिन फिर भी आपकी टीम का ये हाल कि उन्हें ये सब का सहारा लेना पड़ रहा है कि वीडियो वायरल हो। ये गाना या तो Edit किया जाए और सीन हटाया जाए नहीं तो वीडियो डिलीट कर दिया जाए, अन्यथा ये कत्तई भी ठीक बात नहीं हुई है।
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कानपुर में सरकारी नौकरी न मिलने से आहत होकर
एक बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी।
साल 2024 में PSIT कॉलेज से बीटेक में टॉप करने वाले इस छात्र ने प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की थी।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उसे गोल्ड मेडल से सम्मानित किया था।
सुसाइड नोट में लिखा - "सॉरी पापा... मैंने 50 बार
सरकारी नौकरी पाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया। मुझे माफ कर देना।"
परिजनों के मुताबिक वो लंबे समय से डिप्रेशन में था।
शुक्रवार दोपहर 1 बजे नौकरानी पहुंची तो दरवाजा नहीं खुला।
सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो छात्र का शव
फंदे से लटका मिला। उस समय घर के लोग बड़े बेटे की शादी तय करने बिहार गए थे।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।


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@Wangchuk66 बिल्कुल success मिलेगी, हम सब आ रहे है 20 जुलाई
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Message from Sonam :
20th JULY
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत
Freedom from injustice (Like paper leaks)
Freedom from Fear (my illegal detention)
India’s 2nd FREEDOM MOVEMENT
March to the Parliament
Please make it a big success
Sent through Gitanjali
from my illegal detention at Safdarjung

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@Sachingupta एक नन्ही बच्ची के साथ ऐसा घिनौना कृत्य करने वाला गिरीश मिश्रा कड़ी से कड़ी सजा का हकदार है।
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उत्तर प्रदेश : लखनऊ में स्कूली वैन के ड्राइवर ने नर्सरी की छात्रा से रेप किया। स्कूल से लौटकर बच्ची की तबियत खराब हो गई। हॉस्पिटल ले जाया गया तो जांच में रेप की पुष्टि हुई। स्कूली वैन का ड्राइवर गिरीश मिश्रा गिरफ्तार हुआ। वैन के बाकी बच्चों से भी पूछताछ चल रही है कि कहीं उनके साथ भी तो ऐसा नहीं हुआ?
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देश में धर्म की अफीम का असर काफी तेजी से फैल रहा हैं !
अब रौशन सर को ही ले लीजिए खुल कर हिन्दू मुस्लिम करने लगे हैं !
आपके भाई के जाने का बहुत दुःख है, लेकिन आपकी ये भाषा सुनकर मुझे कहने में ये शर्म आ रही हैं कि मैं कभी आपका छात्र रहा हूं !
खान सर से आपकी वर्चस्व की लड़ाई बरसों से चल रही हैं , आप लड़िए लेकिन धर्म का सहारा मत लीजिए !
आम आदमी ये काम करें तो समझ आता हैं , आप शिक्षक होकर ऐसा करेंगे तो कई पीढ़िया खराब हो जाएंगी !
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एक गुमनाम नायक की महागाथा: जब देश के युवाओं के लिए दांव पर लगा दी अपनी ज़िंदगी
यह कहानी है अभिजीत दिपके की। एक ऐसा नाम जिसे कुछ समय पहले तक कोई नहीं जानता था। अमेरिका में एक शानदार ज़िंदगी, दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी की डिग्री, एक हाई-प्रोफाइल जॉब और ऐशो-आराम की कोई कमी नहीं, न कल थी, न आज है। लेकिन जब मातृभूमि के युवाओं की चीखें सात समंदर पार पहुंचीं, तो इस शख्स ने अपने करियर और सुख-सुविधाओं को लात मार दी।
अभिजीत ने देश की सबसे शक्तिशाली सत्ता और व्यवस्था से लोहा लेने का फैसला तब किया, जब बड़े-बड़े विपक्ष के नेता घुटने टेक चुके थे, चारों तरफ निराशा थी और आम जनता को लगने लगा था कि अब वोट देने का भी कोई मतलब नहीं रह गया है। वह अच्छी तरह जानते थे कि इतनी बड़ी सत्ता से टकराने का अंजाम क्या हो सकता है, पूरी जवानी सलाखों के पीछे कट सकती है, करियर तबाह हो सकता है, परिवार बिखर सकता है और अपनों के सपने हमेशा के लिए अधूरे रह सकते हैं। जैसे इससे पहले बहुत लोगों के साथ हो चुका है। लेकिन उन्होंने एक पल के लिए भी अपने बारे में नहीं सोचा।
जब देश के युवाओं और बेरोजगारों को एक बेहद ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा अपमानित किया गया, तो अभिजीत ने उसी अपमान को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने जन्म दिया "कॉकरोच जनता पार्टी" को। यह नाम उस व्यवस्था के मुंह पर एक तमाचा था जिसने युवाओं को तुच्छ समझा था। देखते ही देखते, देश के छात्रों और युवाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि मात्र 3-4 दिनों के भीतर 2.3 करोड़ (23 Million) युवाओं ने इस मुहिम को अपना समर्थन दे दिया।
NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जब ऑनलाइन आवाज़ उठाने से बात नहीं बनी, तो अभिजीत अपनी सुख-सुविधाएं छोड़कर, हाथों में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के साथ My Autobiography नामक एक बुक लेकर अमेरिका से सीधे भारत आ गए। उन्होंने भारत के अलग-अलग शहरों में ज़मीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
जब इस बहरी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा, तो आंदोलन का अगला पड़ाव बना दिल्ली का जंतर-मंतर, जहाँ अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुआ। इसके बाद इस आंदोलन को बल देने पहुंचे लद्दाख के पर्यावरण संरक्षक सोनम वांगचुक। जंतर-मंतर पर JNU और AISA के छात्रों के साथ वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।
लगातार 20 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सभी प्रदर्शनकारियों की हालत बद से बदतर होती चली गई। मेडिकल रिपोर्ट्स गंभीर थीं, डॉक्टरों के मुताबिक जान का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन सरकार के कानों पर कोई असर नहीं हुआ। आगामी 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले संसद सत्र को ध्यान में रखते हुए, देश भर के युवाओं के साथ संसद पहुंचकर जवाबदेही मांगने की तैयारी चल ही रही थी कि आज सुबह एक दर्दनाक मोड़ आया।
आज सुबह (अनशन के 21वें दिन) करीब 6:30 बजे, जब सभी आंदोलनकारी सो रहे थे, तभी सैकड़ों की तादाद में दिल्ली पुलिस ने धावा बोल दिया। सोनम वांगचुक जी को मंच से ज़बरदस्ती उठा लिया गया। जब प्रदर्शनकारियों ने रोकने की कोशिश की, तो उन पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया। उसी वक्त अभिजीत दिपके को, जो अपने दोस्त के घर गए हुए थे, कुछ देर के लिए बंधक बना लिया गया।
इस दमनकारी घटना ने एक पल के लिए सभी प्रदर्शनकारियों और अभिजीत के हौसले को झकझोर कर रख दिया। अपनों को अपनी आंखों के सामने पिटते और गिरफ्तार होते देख अभिजीत फूट-फूटकर रो पड़े। लेकिन यह रोना कमज़ोरी का नहीं, उस दर्द का था जो देश के सिस्टम ने उन्हें दिया था।
अभिजीत एक ऐसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके कारण वे लंबे समय तक भूखे नहीं रह सकते। इसके बावजूद, अपनी जान की परवाह न करते हुए, देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के लिए उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, अब सोनम वांगचुक जी की जगह अभिजीत दिपके खुद भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं।
दुख की बात यह है कि आज भी कुछ लोग उनके ख़िलाफ़ हैं, उन्हें परेशान करते हैं, कोई भीड़ का फायदा उठाकर थप्पड़ मारता है तो कोई कालिक पोतता है तो लोग सोशल मीडिया में गाली-गलौज करते हैं तो कोई इस संघर्ष को 'पार्टी स्पॉन्सर्ड' या राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। लेकिन सच यह है कि जो इंसान अपनी करोड़ों की नौकरी और सुरक्षित भविष्य छोड़कर देश की सड़कों पर भूखा बैठने आया हो, उसे किसी पार्टी के टुकड़ों की ज़रूरत नहीं है। यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, भारत के युवाओं के हक और वजूद की लड़ाई है!
@abhijeet_dipke
@CJP_2029
@Cockroachisback
@Wangchuk66
#SupportAbhijeetDipke #StandWithStudents #SaveFuture Of Youth #JantarMantarProtest #CJPProtest #CockroachJantaParty #SonamWangchuk #Delhi
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किसान आंदोलन में जब सबने साथ छोड़ दिया तो राकेश टिकैत मायूस हो गए और उनकी आँखें नम हो गई, फिर जो समर्थन मिला...
मोदी सरकार बैक फूट पर आ गई और तीनों काले कानून वापस लेनी पड़ी थी...
आज वही दृश्य दुहराया जा रहा है सोनम वांगचुक को पुलिस उठा ले गई और अभिजीत दीपके अकेला होकर रोने लगा...
आंदोलन का दृश्य कब बदल जाये कुछ भविष्यवाणी नहीं कर सकते, अभिजीत के साथ कुछ ऐसी संभावना दिखती है या..
अपने हि देश के ट्रोलर उसको ताना मार-मार कर इंग्लैंड भागने पर मजबूर कर देंगे..??


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