Chaste Monk
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Chaste Monk
@chastemonk
Bihari! Simple, ordinary, and rural life is my favorite. Literature-Culture | Spiritual | Photography | Songs-Ghazals | Nature | Reader | Writing...
East Champaran, Bihar Katılım Haziran 2018
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रो पड़ा आसमान भी शिद्दत देख कर हमारी,
वरना रुखसत ए अप्रैल में बरसात नहीं होती
~सुमित कश्यप
#pc @The_MayaXplores ma'am

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@Raghvendra_101 कभी-कभी जीवन हमें वहाँ ले जाकर खड़ा कर देता है जहाँ हमारे सारे तर्क, सारे प्रयास, और सारी समझ जैसे शांत हो जाती है। उस खामोशी में एक अदृश्य आवाज़ जन्म लेती है जो कहती है कि हर चीज़ को समझना ज़रूरी नहीं, कुछ चीज़ों को बस महसूस करना होता है।
- @Raghvendra_101

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कभी-कभी जीवन हमें वहाँ ले जाकर खड़ा कर देता है जहाँ हमारे सारे तर्क, सारे प्रयास, और सारी समझ जैसे शांत हो जाती है। उस खामोशी में एक अदृश्य आवाज़ जन्म लेती है जो कहती है कि हर चीज़ को समझना ज़रूरी नहीं, कुछ चीज़ों को बस महसूस करना होता है।
हम अक्सर बाहर उत्तर खोजते हैं, लोगों में, परिस्थितियों में, किस्मत में, लेकिन सच्चाई ये है कि जो खोज हम बाहर करते हैं, वह हमेशा भीतर से ही शुरू होती है। आत्मा का रास्ता बहुत सीधा होता है, पर हम ही उसे अपने विचारों की भीड़ में उलझा देते हैं।
जब तुम थक जाओ, जब सब कुछ भारी लगने लगे, तो बस थोड़ा रुक जाना, अपने भीतर उतर जाना। वहाँ एक ऐसी शांति है जो किसी शब्द की मोहताज नहीं, एक ऐसा सुकून जो किसी प्रमाण की प्रतीक्षा नहीं करता। वही तुम्हारा असली घर है, वही तुम्हारी सच्ची पहचान।
याद रखो, जीवन में जो भी घट रहा है, वह तुम्हें तोड़ने के लिए नहीं, तुम्हें समझाने के लिए है। हर अनुभव, हर दर्द, हर मुस्कान, सब तुम्हें उसी दिशा में ले जा रहे हैं जहाँ तुम स्वयं को पा सको।
और जब तुम सच में खुद को पा लोगे, तब तुम्हें ये एहसास होगा कि तुम कभी खोए ही नहीं थे...बस रास्ता भूल गए थे।🌼🌼
©® राघवेन्द्र चतुर्वेदी ✍️
(एक लड़का जो हर कहानी में खुद को ढूंढता है)

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@Raghvendra_101 आज फिर एक फूल को देर तक देखता रहा। उसकी पंखुड़ियों के भीतर छिपा पराग जैसे मुझसे कुछ कहना चाहता था, पर उसकी भाषा इतनी धीमी थी कि उसे सुनने के लिए भीतर पूरी तरह शांत होना पड़ता है।
- @Raghvendra_101

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आज फिर एक फूल को देर तक देखता रहा। उसकी पंखुड़ियों के भीतर छिपा पराग जैसे मुझसे कुछ कहना चाहता था, पर उसकी भाषा इतनी धीमी थी कि उसे सुनने के लिए भीतर पूरी तरह शांत होना पड़ता है।
अजीब है न, जो सबसे ज़रूरी होता है, वही सबसे कम दिखाई देता है। पराग भी वैसा ही है न कोई शोर, न कोई आकार, फिर भी उसी के भरोसे पूरी सृष्टि का सिलसिला आगे बढ़ता है।
आज महसूस हुआ कि पराग केवल फूल का हिस्सा नहीं, वह एक भाव है, एक ऐसा भाव, जो अपने होने का प्रमाण नहीं माँगता, बस चुपचाप अपने हिस्से का प्रेम हवा में घोल देता है।
सुबह की हल्की धूप में जब मैंने उँगलियों से उसे छूना चाहा, तो वह उड़ गया, जैसे कोई एहसास, जिसे पकड़ने की कोशिश करते ही वह और दूर चला जाता है। शायद पराग ठहरने के लिए बना ही नहीं, वह तो बस गुजरने के लिए है, एक दिल से दूसरे दिल तक, एक फूल से दूसरे फूल तक।
और इसी गुजरने में उसकी सारी खूबसूरती है। वह कभी शिकायत नहीं करता कि उसे कोई पहचान नहीं मिली, वह कभी ये नहीं पूछता कि उसका अंत कहाँ होगा, वह बस अपने होने को बाँट देता है पूरी निष्ठा से, पूरी सादगी से।
आज लगा कि हम भी कहीं-न-कहीं पराग जैसे ही हैं, हमारे भीतर भी कुछ ऐसा है जो किसी के जीवन में रंग बनकर उतरना चाहता है, किसी के सूनेपन में एक हल्की-सी खुशबू छोड़ जाना चाहता है, पर फर्क बस इतना है, हम ठहरना चाहते हैं, और पराग बह जाना चाहता है। शायद इसलिए वह इतना हल्का है, और हम इतने भारी…
आज डायरी में लिखते-लिखते ये समझ आया कि सुंदरता हमेशा स्थायी होने में नहीं होती, कभी-कभी वह बिखर जाने में भी होती है, और पराग…वह हर बार बिखरकर भी किसी नए जीवन की शुरुआत लिख देता है बिना नाम , बिना शोर के, बस एक अनकही कहानी बनकर..! ❤️
©® राघवेन्द्र चतुर्वेदी ✍️
(एक लड़का जो हर कहानी में खुद को ढूंढता है)

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World Record! ☺️
Happy to share that my surgery has been recognised as a #worldrecord by "World Book of Record London" and included in the book.
Felicitated with the Award at a event organised in Indore India 😊💐
Thank you almighty, my parents & family, patient and friends 🙏🙏
#worldrecord




English

ये ऑफिस वाले रोज़ मजदूरों जैसा काम करवा के,
आज “मजदूर दिवस” की छुट्टी दे रहे हैं,
आज तो हमारा दिन था,आज छुट्टी क्यूँ ही करनी थी यार…!! 🥺
#vitaminshe
#labourday
#1stMay
❣️
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