रोहिणी कमीशन संघर्ष मोर्चा

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@demandrohini

भारत के 40 प्रतिशत आबादी का हक है रोहिणी कमीशन।

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न्याय समता सम्मान अतिपिछड़ों का हक रोहिणी कमीशन ! हमारी मांग रोहिणी कमीशन ! रोहिणी कमीशन संघर्ष मोर्चा ! देश में सर्वप्रथम बिहार में जननायक कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्रित्व काल में 1978 में मुंगेरी लाल कमीशन के सिफारिश पर सरकारी नौकरी व शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण को दो हिस्सों में बांटते हुए पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया। अत्यंत पिछड़े समाज से आने वाले बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर ओबीसी वर्ग के अंदर उपस्थित किसान जाति और गैर किसान जाति के बीच के गैर बराबरी को समझते थे इसलिए उन्होंने ओबीसी आरक्षण को दो भागों में बांटने का सुझाव मान लिया और अलग अलग आरक्षण लागू किया। आज बिहार में अत्यंत पिछड़ी जातियों की स्थिति अन्य राज्यों से बिलकुल अलग और थोड़ा बेहतर दिखाई पड़ती है। जिसके कारण आज बिहार में अत्यंत पिछड़ी जाति के लोग भी शासन-प्रशासन और नौकरियों में देखने को मिलता हैं। धीरे-धीरे सामाजिक न्याय का यह मॉडल कई राज्यों जैसे हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड ने भी अपनाया। ओबीसी आरक्षण को वर्गीकरण करने के मायने में यह मॉडल अबतक का सबसे बेहतर मॉडल साबित हुआ है। लेकिन यह मॉडल देश के अंदरअभी तक सिर्फ 12 राज्यों में लागू हो पाया है। वर्ष 1990 में केंद्र के स्तर पर मंडल कमीशन लागू हुआ लेकिन उस समय भी आरक्षण का बंटवारा नहीं किया गया जिसमें कमीशन के एकमात्र दलित सदस्य एल. आर. नाईक ने ओबीसी आरक्षण को दो भागों में बांटने का सुझाव दिया था, लेकिन उनके सुझावों को वी. पी. मंडल समेत अन्य सदस्यों ने नहीं माना। एल. आर. नाईक के सुझावों को न मानने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि बाकी के अन्य सदस्य अपर ओबीसी से ताल्लुक रखते थे। एल. आर. नाईक इसको एक उदाहरण से समझाते हैं कि "यदि बड़ी मछली और छोटी मछली को एक साथ रखा जाए तो बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाएगी" उनके इस उदाहरण में बड़ी मछली का तात्पर्य किसान जातियों से था जबकि छोटी मछली का मतलब अत्यंत पिछड़ी जाति से था. बिहार में हाल ही में हुई जातीय सर्वेक्षण से साबित हो गया है कि 36.01 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ी आबादी है। कमोबेश यही स्थिति पूरे देश में होगी लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी में (लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधानपरिषद तथा सभी राजनैतिक दलों) इनकी संख्या लगभग नगण्य है। देश की आजादी के बाद जिन जातियों को पिछड़े वर्ग में शामिल किया गया, वे संवैधानिक तौर पर तो एक वर्ग में रखे गए; लेकिन इन सभी जातियों की सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और राजनैतिक हैसियत बेहद अलग-अलग है। पिछड़े वर्ग की जातियों को हम इस तरह से समझ सकते हैं जैसे- सभी धर्मों की किसान जातियां, ब्राम्हण समतुल्य जातियां, बनिया जातियां, कारीगर जातियां, हुनरमंद जातियां, सेवादार जातियां, नदी तालाब से जुड़ी जातियां, कामगार जातियां, शिल्पकार जातियां, चारवाह करने वाली जातियां, कलाकार जातियां, व सब्जी-बागवानी करने वाली जातियां शामिल हैं। क्या अन्य सारी पिछड़ी जातियों को किसान जातियों, ब्राम्हण समतुल्य जातियों, बनिया जातियों के साथ रखा जा सकता है? इसी गैर बराबरी को कम करने के लिए वर्ष 2017 में जस्टिस रोहिणी कमीशन का गठन किया गया। इस कमीशन का प्रमुख कार्य केन्द्रीय स्तर पर ओबीसी आरक्षण का न्याय पूर्ण बँटवारा करना है। समाचार पत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2633 पिछड़ी जातियों में सिर्फ 1 प्रतिशत जाति ही ओबीसी आरक्षण का 50 प्रतिशत लाभ लिया है, 27 प्रतिशत कोटे में केवल 10 जातियों के लोग ही ओबीसी आरक्षण का लगभग एक चौथाई हिस्सा का लाभ ले रही है। वहीं दूसरी तरफ ओबीसी की 1000 जातियों का प्रतिनिधित्व हर जगह शून्य है। इसलिए हमारा मानना है कि पिछड़े वर्ग के अन्दर बराबरी व न्यायपूर्ण बँटवारे के लिए जस्टिस रोहिणी कमीशन के सिफारिशों को या यूँ कहें कि ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण को जल्द से जल्द लागू करवाने के लिए पूरे देश भर में आन्दोलन को तेज करने की जरुरत है और ओबीसी आरक्षण के न्यायपूर्ण बँटवारे के सन्देश को जन-जन तक ले जाना है। सामजिक न्याय जिंदाबाद! ओबीसी आरक्षण का न्यायपूर्ण बँटवारा तुरंत करो! अतिपिछड़ों की एकता जिंदाबाद! राह हमारे कबीर है, हम रैदास के संग । एक हुनर एक कारीगर, करें नया सृजन ।। भारत की 40% आबादी का हक है रोहिणी कमीशन ! संपर्क: 7544099299, 9415576902
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जातिवादी आतंकी गुंडे कालीचरण यादव ने नाई समाज से आने वाले श्री शंभू ठाकुर जी की आंख फोड़ दी!! ये सामंती गुंडे अतिपिछड़ों को अपना गुलाम समझते हैं। माननीय @NitishKumar जी से अपील है ऐसे सामंती आतंकियों पर तत्काल कड़ी कड़ी से कार्यवाही करें। @aajtak
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कांग्रेस ने इन महाशय को OBC सेल का चेयरमैन बनाया है लेकिन इनकी हरकतें "यादव सेल" के कार्यकर्ता वाली ही है। क्या @INCIndia की ओबीसी सेल केवल यादव सेल है??? वाह @RahulGandhi जी वाह!
Dr. Arunesh Yadav (डॉ अरुणेश यादव)@YadavArunesh

पत्रकार ने जब चालाकी से यादव समाज के डोमिनेंस और समृद्धता की बात कहीं तो मिशन मैन हमारे चेयरमैन साहब डॉ अनिल जयहिंद जी का बेहतरीन जवाब क्या रहा, जरूर सुनिए.... @drjaihind

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कांग्रेस के नेता @RahulGandhi जी OBC OBC करते रहते हैं। लेकिन @INCIndia के OBC विभाग के चेयरमैन अनिल जयहिंद यादव अतिपिछड़ों के भागीदारी के सवाल पर ब्लॉक करके भाग जाते हैं!!! हमारा सवाल राहुल जी से है, क्या आपके 'Idea of OBC' में केवल यादव आते हैं?? अतिपिछड़ों से आपको कोई मतलब नहीं है???
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रोहिणी कमीशन संघर्ष मोर्चा@demandrohini

कांग्रेस और @RahulGandhi के लिए OBC का मतलब केवल यादव होता है. राहुल गाँधी ने @INCIndia OBC विभाग के लिए चेयरमैन नियुक्त किया - @DrJaihind (अनिल जयहिन्द यादव) | इस विभाग में अबतक 4 नियुक्तियां हुईं,--- चारों केवल यादव की. मतलब OBC की 100% नियुक्तियाँ केवल यादव की. इसीलिए अतिपिछड़ी जातियों को राहुल गाँधी के OBC से कोई मतलब नहीं रहता. OBC लाठी खायेगा और जब पद मिलने की बारी आएगी तो कोई यादव नियुक्त हो जायेगा. अतिपिछड़ों को OBC में कोई भागीदारी नहीं मिल सकती. इसीलिए अतिपिछड़ों की पहली मांग है रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट और OBC आरक्षण का बंटवारा! #RohiniCommission #EBC #OBC_Subcategorisation

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बेंगलुरु में कांग्रेस के OBC विभाग की नेशनल एडवाइजरी काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में 25 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने वाले OBC नेतृत्व भागीदारी महासम्मेलन की रणनीति तय की गई। 📍 कर्नाटक
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ये है @INCIndia और @RahulGandhi जी की मोहब्बत की दुकान??? अतिपिछड़ों का सवाल भी बर्दाश्त नहीं हुआ @DrJaihind उर्फ अनिल जयहिंद 'यादव ' जी को??? ये ही कांग्रेस के ओबीसी विभाग की सच्चाई है!!! ये OBC विभाग नहीं "यादव विभाग" है। कांग्रेस के लिए OBC का मतलब केवल "यादव" है।
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बिहार चुनाव का मजाक बना रहे हैं BJP-JDU और चुनाव आयोग 👇
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कांग्रेस और @RahulGandhi के लिए OBC का मतलब केवल यादव होता है. राहुल गाँधी ने @INCIndia OBC विभाग के लिए चेयरमैन नियुक्त किया - @DrJaihind (अनिल जयहिन्द यादव) | इस विभाग में अबतक 4 नियुक्तियां हुईं,--- चारों केवल यादव की. मतलब OBC की 100% नियुक्तियाँ केवल यादव की. इसीलिए अतिपिछड़ी जातियों को राहुल गाँधी के OBC से कोई मतलब नहीं रहता. OBC लाठी खायेगा और जब पद मिलने की बारी आएगी तो कोई यादव नियुक्त हो जायेगा. अतिपिछड़ों को OBC में कोई भागीदारी नहीं मिल सकती. इसीलिए अतिपिछड़ों की पहली मांग है रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट और OBC आरक्षण का बंटवारा! #RohiniCommission #EBC #OBC_Subcategorisation
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कांग्रेस और @RahulGandhi के लिए OBC का मतलब केवल यादव होता है. राहुल गाँधी ने @INCIndia OBC विभाग के लिए चेयरमैन नियुक्त किया - @DrJaihind (अनिल जयहिन्द यादव) | इस विभाग में अबतक 4 नियुक्तियां हुईं,--- चारों केवल यादव की. मतलब OBC की 100% नियुक्तियाँ केवल यादव की. इसीलिए अतिपिछड़ी जातियों को राहुल गाँधी के OBC से कोई मतलब नहीं रहता. OBC लाठी खायेगा और जब पद मिलने की बारी आएगी तो कोई यादव नियुक्त हो जायेगा. अतिपिछड़ों को OBC में कोई भागीदारी नहीं मिल सकती. इसीलिए अतिपिछड़ों की पहली मांग है रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट और OBC आरक्षण का बंटवारा! #RohiniCommission #EBC #OBC_Subcategorisation
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कांग्रेस और @RahulGandhi के लिए OBC का मतलब केवल यादव होता है. राहुल गाँधी ने @INCIndia OBC विभाग के लिए चेयरमैन नियुक्त किया - @DrJaihind (अनिल जयहिन्द यादव) | इस विभाग में अबतक 4 नियुक्तियां हुईं,--- चारों केवल यादव की. मतलब OBC की 100% नियुक्तियाँ केवल यादव की. इसीलिए अतिपिछड़ी जातियों को राहुल गाँधी के OBC से कोई मतलब नहीं रहता. OBC लाठी खायेगा और जब पद मिलने की बारी आएगी तो कोई यादव नियुक्त हो जायेगा. अतिपिछड़ों को OBC में कोई भागीदारी नहीं मिल सकती. इसीलिए अतिपिछड़ों की पहली मांग है रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट और OBC आरक्षण का बंटवारा! #RohiniCommission #EBC #OBC_Subcategorisation
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नफरत को सिर्फ मोहब्बत ही मिटा सकती है
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Voice of OBC@obc_journalist·
@demandrohini @grok increase obc reservation, gen ke pass 10%+40% pehle se hi hai, ye 52 logo ka kam hai ek dusre se ladao, mai khud EBC hu
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अतिपिछड़ों (EBC) को अलग से आरक्षण मिलने का विरोध मुख्य रूप से कुछ ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समूहों, खासकर उन जातियों द्वारा किया जा रहा है, जो पहले से ही ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रही हैं। इसका कारण यह है कि ओबीसी के भीतर आरक्षण को उप-वर्गीकृत करके EBC के लिए अलग कोटा बनाने से मौजूदा लाभार्थी जातियों, जैसे यादव और कुर्मी, को मिलने वाला हिस्सा कम हो सकता है। ये समूह, जिनके पास सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक प्रभाव है, मानते हैं कि 27% ओबीसी आरक्षण का बड़ा हिस्सा पहले से ही उनके पास है, और EBC के लिए अलग कोटा उनके अवसरों को कम कर सकता है। इसके अलावा, कुछ राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन, जो इन प्रभावशाली ओबीसी समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं, भी इस उप-वर्गीकरण का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह उनके वोट बैंक और राजनीतिक प्रभाव को कमजोर कर सकता है। उदाहरण के लिए, बिहार में जहां EBC की आबादी 36% है, वहां कुछ राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर असहमति जताई है, क्योंकि यह उनके पारंपरिक समर्थक समूहों के हितों के खिलाफ जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि EBC के लिए अलग आरक्षण की मांग को सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक मानने वाले संगठन और नेता, जैसे कि बिहार में नीतीश कुमार और पूर्व में कर्पूरी ठाकुर, इसका समर्थन करते हैं। विरोध और समर्थन का यह मुद्दा जटिल है और सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक गतिशीलता पर निर्भर करता है।
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