

क्या कांग्रेस का गहलोत-पायलेट युग ढल रहा है ? !!!!!! आलाकमान ! राहुल गांधी राजस्थान आते हैं जहाँ एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने राजस्थान कांग्रेस के सभी बड़े चेहरे शामिल होते हैं जिनमें अशोक गहलोत , सचिन पायलेट ,टीकाराम जूली और PCC चीफ़ गोबिन्द सिंह डोटासरा भी मौजूद रहे वहीं एक वाक़या घटता है जब राहुल गांधी PCC चीफ़ और टीकाराम जूली के पास पहुँचते हैं तो उनका यह कहना “ आप दोनों यानी की PCC चीफ़ और CLP लीडर जिस तरह साथ मिलकर काम कर रहे हैं और राज्यों को सीखना चाहिए” अपने आप में एक बड़ा संदेश था जो राजस्थान से उन्हें लगातार मिल रही सफलता की निशानी है जब से ही इन दोनों को PCC चीफ़ और CLP लीडर पद पर क़ाबिज़ किया है। कांग्रेस आलाकमान के लिए गुटबाज़ी हमेशा से ही एक बड़ा रिसाव हर राज्य में उनके निवेश को लेकर रहा है जिसके चलते कांग्रेस आला कमान केंद्र सरकार पर जिस ऊर्जा के साथ हमलावर रहना चाहती है वह नहीं रह पाती है क्योंकि उसकी ऊर्जा का एक बड़ा भाग राज्यों की उनकी ख़ुद की फौज को मैनेज करने में लगा रहता है। इस रिसाव में पहली बार राजस्थान के PCC चीफ़ गोबिन्द सिंह डोटासरा एवं CLP लीडर टीकाराम जूली ने एक बाँध का काम किया है। गुटबाज़ी ! राजस्थान कांग्रेस पिछले 10 सालों से संगठन एवं पर क़ाबिज़ की लड़ाई में दो गुटों से जूझ रहा है जिसके चलते राजस्थान कांग्रेस को शर्मसार करने वाली मानेसर कांड जैसी घटना भी हुई एवं आला कमान को नीचा दिखाने जैसे प्रयास दोनों गुटों ने अपनी अपनी शक्ति परीक्षण से किये जिसमें दोनों ही बार अशोक गहलोत सफल रही और सचिन पायलेट असफल। कांग्रेस आलाकमान यह जान चुका है कि यह मुद्दा (गहलोत-पायलट) राजस्थान कांग्रेस में स्थाई मुद्दा है जो आला कमान को मज़बूत करने या मुद्दों पर खड़ा नहीं है बल्कि ख़ुद की राजनीतिक लालसा की पूर्ति में तलवार खींची हुए है। इसी की तो वार्ड में इन आला कमान PCC चीज़ जो जाट समुदाय से आते हैं और CLP लीडर दलित समुदाय से आते हैं को लेकर एक ऐसा अकाट्य गठबंधन किया है जो मुद्दों पर लड़ता भी है और गुटों में बँटा हुआ नहीं है इसमें आला कमान के पास एक फ़ायदा यह भी है कि यह दोनों समुदाय राजस्थान कांग्रेस की कोर वोट बैंक इन दोनों का ही आला कमान को आँख दिखाने जैसा ख़तरा नगण्य है। नेतृत्व ! PCC चीफ़ गोबिन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस संगठन है जो दो गुटों में बँटा हुआ था उसे आदेशात्मक ए वहाँ कार्यात्मक रूप से एक धुरिय यानी केंद्रीय आला कमान के निर्देशों के अधीन ला खड़ा किया है एवं संगठनों की अंतिम पंक्ति तक गांधी परिवार और कांग्रेस की विचारधारा का झंडा पकड़ा कर संगठित किया है जो पिछले 10 सालों से दिशाहीन होकर गहलोत पायलट गुट के प्रति समर्पित होकर कांग्रेस को कमज़ोर कर रहा था। दलित वर्ग से आने वाले CLP लीडर टीकाराम जूली ने जिस आक्रामकता और मुद्दों से सदन में भजनलाल सरकार को घेरा है उसने ही उन को लेकर कांग्रेस आलाकमान की किसी भी शंका को दूर कर दिया है। दलित वर्ग में उन्हें है वह चेहरा मिल गया है जो हर सीट पर अब किसी पहचान का मोहताज नहीं है और कांग्रेस नेतृत्व का झंडा हर घर में अंबेडकरवादी तरीक़े से ले जाने का माद्दा रखता है। यह इन दोनों के नेतृत्व क्षमता का ही कमाल है कि अक्सर पाँच साल कांग्रेस विपक्ष में रहकर कभी विपक्षी जैसी नहीं लगती थी वह अब चौतरफ़ा हमले BJP पर कर रही है अशोक गहलोत और सचिन पायलट इतने सक्रिय ख़ुद के नेतृत्व काल में भी नहीं देखे गये जितना भी PCC चीफ़ गोविन्द सिंह डोटासरा और CLP लीडर टीकाराम जूली की लोकप्रियता के चलते उपजे नेतृत्व से दिख रहे हैं। जातीय गणित - भले ही PCC चीफ़ गोबिन्द सिंह डोटासरा और CLP लीडर टीकाराम जूली परिस्थितियों की उपज थे लेकिन उनके नेतृत्व में कांग्रेस के प्रदर्शन और उनकी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता ने कांग्रेस आलाकमान को तो उनके नेतृत्व के प्रति आश्वस्त किया ही है अपितु दोनों के वर्ग मैं भी यह बात अंदर तक पैठ कर गई है की जब सचिन पायलेट गुर्जर समाज जिसका तुलनात्मक रूप से विधानसभा की उतनी सीटों पर प्रभाव नहीं है जितना जाट एवं दलित वर्ग का है वो अपने जातीय प्रभाव से आला कमान से मुख्यमंत्री पद की सौदेबाज़ी कर सकते हैं तो वे दोनो वर्ग तो कांग्रेस का परंपरागत वोट भी है उन्हें तो अपना हक़ माँगना ही चाहिए। अब यह मसला केवल PCC चीफ़ गोविंद सिंह डोटासरा ये टीकाराम जूली की महत्वकांक्षा का नहीं रहा अब इन वर्गों का अपनी प्रतिनिधित्व को लेकर सजगता और आयी हुई जागरूकता का है जो आला कमान को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि यहाँ झंडा इन्हें सौंपिये सीटों का गणित हम बैठाएंगे। @RahulGandhi



















