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@devibijani

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Devi Bijani@devibijani·
@arvindchotia स्कूल रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया कितनी जटिल है इसका अंदाजा ही नहीं किसी को सिर्फ कहने भर से नहीं होता सब
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
शिक्षा विभाग को विवादों में रहना है बस... सप्ताह भर पहले घोषणा की गई कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अटपटे नाम शिक्षक सुधार सकेंगे। प्रथमदृष्टया यह एक अच्छा फैसला लगा और हमने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह एक बहुत सिंपल सी बात थी कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनका कोई अर्थ होता होगा लेकिन कालांतर में वे नाम बच्चों के लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाते हैं। कोई 10-12 साल पहले की बात है। जोधपुर की एक यूनिवर्सिटी में एक कुलपति की नियुक्ति हुई। नाम था बागड़ाराम चौधरी‌। मैं अखबार में काम करता था। कुलपति महोदय की स्पेशल रिक्वेस्ट आई कि उनका नाम अखबार में बीआर चौधरी छापा जाए। हमने ऐसा ही किया भी। लेकिन समझ में आ गया कि कुलपति महोदय को अपना वह नाम पसंद नहीं है। अभी सप्ताह भर पहले ही ट्रेन में यात्रा कर रहा था। टीटीई साहब आए। वे प्रत्येक सवारी से नाम पूछ कर सीट नंबर कंफर्म कर रहे थे। मेरे सामने वाली सीट पर एक लड़की बैठी थी। उसने बहुत धीमे से अपना नाम बताया- धोळी। निश्चित ही उसको भी अपना नाम पसंद नहीं रहा होगा। यह एक सच्चाई है कि हमारे ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के ऐसे नाम होते हैं जो उनसे पूछ कर तो रखे नहीं जाते लेकिन समय के साथ जब वे बच्चे शहरों में निकलते हैं तो उन्हें अपने नाम निरर्थक लगने लगते हैं लेकिन तब कुछ किया नहीं जा सकता। इस मायने में शिक्षा विभाग की यह पहल सराहनीय थी लेकिन शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री जी का विवादों से नाता अत्यधिक पुराना होने के कारण शिक्षा विभाग इस बार भी विवादों में घिर गया है। शिक्षा विभाग में बाकायदा नामों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में भी ऐसे ऐसे नाम हैं जो कोई भी बच्चा अपना नाम रखना नहीं चाहेगा। अब समझ में नहीं आने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग को नामों की लिस्ट जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी? सरकारी स्कूल में जो शिक्षक हैं, वे अच्छे पढ़े लिखे हैं। नाम परिवर्तन का जो आदेश है, उसका मर्म अच्छे से समझते हैं। यह उनके ऊपर ही छोड़ दिया जाना चाहिए था कि वे अभिभावकों की सहमति से बच्चों का क्या नाम रखते हैं। वे निश्चित रूप से बच्चों के बहुत अच्छे-अच्छे नाम रख देते और यह अभियान सार्थक हो जाता। कम से कम एक बेमतलब का विवाद खड़ा नहीं होता। एक बहुत अच्छे विचार की इस प्रकार हत्या होते हुए देखना दर्दनाक है।
Arvind Chotia@arvindchotia

बहुत ही अच्छा और प्रशंसनीय आदेश... सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के नामकरण का दायित्व भी अब शिक्षकों के हिस्से आने जा रहा है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने निर्देश दिए हैं कि शिक्षक अभिभावकों से संवाद कर बच्चों के लिए अच्छे, सार्थक और सकारात्मक अर्थ वाले नाम सुझाएं, ताकि आगे चलकर बच्चों में किसी तरह की हीन भावना नहीं पनपे। असल में ग्रामीण क्षेत्र में आपको 100-50 साल पहले वाले दौर के नाम छोटे-छोटे बच्चों के मिल जाएंगे। कुछ नाम तो सच में इतने निरर्थक होते हैं कि बड़े होने के बाद बच्चों को बताने में भी शर्म आती है। हालांकि नई पीढ़ी के नाम ग्रामीण क्षेत्र में भी एकदम से बदल गए हैं लेकिन फिर भी किसी न किसी कारण से ऐसे नाम रख दिए जाते हैं और स्कूल में भी वही नाम लिखवा दिए जाते हैं जो घर में बोले जाते हैं। इस आदेश के लिए मदन दिलावर की बधाई के पात्र हैं। बच्चे भी याद रखेंगे कि उनका नाम गुरुजी का दिया हुआ है।

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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@PravinJain121 @arvindchotia गलत जानकारी 2002 में सूची में नाम नहीं है तो माता या पिता या भाई के सीरियल नम्बर चाहिए एपिक नम्बर वैकल्पिक है।
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praveen jain 🇮🇳
praveen jain 🇮🇳@PravinJain121·
@arvindchotia दुसरी सबसे बड़ी दिक्कत, फ़ार्म लेने के बाद आनलाइन फार्म अपडेट करना बीएलओ की जिम्मेदारी है साइट कभी भी बंद हो जाती है जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं है उनके लिए माता पिता का 2002 सूची वाला इपिक नम्बर चाहिए है माता पिता के 2002 के वोटर कार्ड अपडेट हो गए इपिक नम्बर बदल गए
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
बड़ा ही अजब है... SIR की प्रकिया में बिहार जैसे पिछड़े राज्य में कोई बीएलओ परेशान नहीं होता है। वहां वैसे भी शिक्षा की दर कम है। लेकिन वहां से एक भी बीएलओ की आत्महत्या करने की खबर नहीं आई। बताओ अब प.बंगाल में शिक्षा दर में करीबन 80 प्रतिशत है, फिर भी बीएलओ परेशान हैं, और मर भी रहे हैं। राजस्थान में शिक्षा दर करीबन 70 प्रतिशत है। फिर भी बीएलओ व्याकुल हैं। मरने की खबरें भी आई हैं। क्यों ?
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@arvindchotia मामला फॉलो करते रहिएगा। 99% केसेज में बयान बदल जाते हैं और एक भी केस रिवर्स पॉस्को का नहीं सुना। और यह बिना लेन देन संभव नहीं।
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
थोड़ी सी अच्छी खबर भी है... जालोर के चितलवाना क्षेत्र में स्कूली छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी शिक्षक मनोहर लाल बिश्नोई को निलंबित कर दिया गया है। दिनभर यह खबर आती रही कि यह मामला भारी दबाव में ले-देकर निपटा दिया गया है। लेकिन सोशल मीडिया की ताकत आज एक बार फिर प्रमाणित हुई है। आप लोगों के सहयोग और समर्थन का असर हुआ है। आगे और भी होगा। यह केस इतना बड़ा बनना चाहिए कि एक नज़ीर बने। इस मामले में आरोपी और भी हैं और उनसे बड़े आरोपी हैं समझौता करवाने वाले। बेटियों के साथ छेड़छाड़ और गलत काम के मामले में किसी भी कीमत पर समझौता होना और बड़ी आपदा को बुलावा देने जैसा है। ऐसे केस में सिर्फ और सिर्फ कड़ी कार्रवाई ही होनी चाहिए। सभी दोषियों के खिलाफ होना चाहिए। इस मामले में अभी तक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जालोर पुलिस को खुद के स्तर पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। @BhajanlalBjp @madandilawar @RajCMO @PoliceRajasthan @DmJalore @JalorePolice
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Arvind Chotia@arvindchotia

ये कुटीजते शिक्षक???? जालौर जिले के चितलवाना तहसील के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेसावा के चलते विद्यालय में एक टीचर मनोहर लाल साहु ने एक लड़की को बहला फुसलाकर अपने साथी टीचर राजेन्द्र मीणा के रूम पर बुलाकर लड़की के साथ छेड़छाड़ की। जब लड़की चिल्लाई तो स्कूल के बच्चों ने जाकर देखा तो एक अध्यापक लड़की के साथ छेड़छाड़ करते दिखा। बाद में गांव के लोगों ने पकड़कर धुनाई कर दी। आखिर में प्रदेश के मुखिया और शिक्षा मंत्री लगातार शिक्षा विभाग में हो रही ऐसी घटनाओं पर बड़ी कार्यवाही क्यों नहीं करते हैं आये दिन ऐसी घटनाएं होती रहती है जब एक पवित्र विद्या के मन्दिर में इस प्रकार की घटनाएं आम हो जाती है तो बच्चों के अभिभावक किसके ऊपर विश्वास करके बच्चों को विद्यालय में पढ़ने के लिए भेजते हैं जब एक रक्षक स्वयं भक्षक बन जाता है तो। गांव से जैसा संदेश आया, वैसा ही @BhajanlalBjp @madandilawar बहुत कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा

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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
SIR related order सभी PEEO/UCEEO को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य का HELP DESK प्रभारी नियुक्त किया गया है। सभी PEEO/UCEEO को पालनार्थ प्रेषित। स्कूल चलाने वालों की पीड़ा... 6 दिसंबर के बाद होने वाली अर्धवार्षिक परीक्षा 15 नवम्बर से है। BLO पहले से नहीं आ रहे ऊपर से यह एक्स्ट्रा काम। कोर्स कैसे करवाएंगे? @madandilawar @RajCMO
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, लेक्चरर, अध्यापक, प्री प्राइमरी टीचर को बनाया BLO एक ही स्कूल से 4-4 टीचर को लगाया BLO कार्य के लिए शिक्षा विभाग के लोग हैरान भी हैं और परेशान भी। हालांकि बोलने की हालत में नहीं हैं। विद्यालय व्यवस्थाओं को बनाए रखते हुए ही चुनाव कार्य होना चाहिए
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
गरीब को जितना दबाओ, उतना कम... यह कहावत यूं ही नहीं बनी। और इस कहावत को स्थापित करने और निरंतर मान्यता देने के लिए कुछ लोग विशेष प्रयास करते हैं। नीचे आप जो लिस्ट देख रहे हैं, ये दरें प्रतियोगी परीक्षा में सवेरे 7 बजे से शाम 6 बजे तक तैनात सरकारी कार्मिकों को मिलने वाले मानदेय की है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पूरे दिन के 190 रुपए दिए जा रहे हैं। लेकिन इतना ही काफी नहीं है। उसे दो पारी की परीक्षा के बाद रुककर स्कूल में सफाई भी करनी पड़ेगी। बाकी कर्मचारियों और अधिकारियों के मानदेय भी देखने लायक है। श्रमिक कानूनों का उल्लंघन करने पर राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड पर कार्रवाई का कोई प्रावधान है भी या सरकार की सहमति से यह शोषण हो रहा है? @RPSC1 @alokrajRSSB
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@arvindchotia हम तो शुक्रगुजार हैं विभाग के कि जीते जी अंगदान के आदेश जारी नहीं किए वरना ज्यादातर शिक्षकों को टारगेट पूरा करने के लिए एक आंख, एक किडनी, रक फेफड़े से कम चलाना पड़ता ।
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
और इस बीच खबर यह है कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों और 18 वर्ष से ऊपर के छात्र-छात्राओं से अंगदान के शपथ पत्र भरवाए जा रहे हैं। साथ ही इस काम को जल्दी से जल्दी पूरा करने का हुक्म दिया गया है।
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@sarviind माँ बाप पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। बकरियों की तरह बच्चे स्कूल वालों ने ठूंस ठूंस के भरे हैं या माँ बाप ने
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Arvind Sharma
Arvind Sharma@sarviind·
मारोगे यार...इतना बच्चा! जोधपुर के एक स्कूल के बच्चों को टेंपों में बकरियों की तरह ठूस दिया गया। इसकी जांच होनी चाहिए। कौनसी स्कूल है?
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Devi Bijani@devibijani·
@BhaveshPurohiit विभाग कार्यवाही नहीं कर रहा पर उन माता पिता का क्या जो अपने बच्चों की जान दाव पर लगा रहे हैं।
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Bhavesh M Rajpurohit
Bhavesh M Rajpurohit@BhaveshPurohiit·
झालावाड़ में एक स्कूल की छत गिरी पूरे प्रदेश में विभाग सतर्क हो गया। विद्यार्थियों को जर्जर भवनों में नहीं बैठाने के आदेश हो गए। लेकिन स्कूल में लगे वाहनो में मासूम बच्चों को ठूस-ठूस कर भरकर लाते है। शिक्षा विभाग व परिवहन विभाग कोई भी कार्रवाई नहीं कर रही है। क्या सरकार इस लापरवाही में भी कोई हादसे का इंतजार कर रही है? यह वीडियो जालोर के केसवाना-आलासन के बीच का है। एक ऑटो रिक्शा में 20 से अधिक बच्चे सवार हैं। अब देखने वालीं बात ये कि जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है। @8PMnoCM @arvindchotia @DmJalore @BhajanlalBjp @RajCMO @madandilawar @rajeduofficial @RajGovOfficial @_lokeshsharma
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Devi Bijani@devibijani·
@blockbylibrandu @arvindchotia बच्चे बिल्डिंग के अंदर नही बैठेंगे यह किसने कहा कि बच्चों को पढ़ाया नहीं जाएगा । भारत मे शिक्षकों को पेड़ के नीचे पढ़ाने की आदत है
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मनुवादी3
मनुवादी3@blockbylibrandu·
@arvindchotia ताकि उनको काम न करना पड़े क्या वो ये कह सकते है कि जब तक सुरक्षा पूरी तरह से नहीं होती तब तक कोई भी शिक्षक सैलरी नहीं लेगा
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
केवल इतना ही कर दो, जब तक सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिलता, कोई संस्था प्रधान बच्चों को कक्षा कक्ष में बैठने की अनुमति नहीं देगा। चाहे भवन नया ही क्यूं न बना हो इसे ही आंदोलन बना लो (शिक्षकों के बीच चल रहा एक मैसेज)
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@arvindchotia बताया जा रहा है 2022 में पंचायत द्वारा रिपेयर कार्य हुआ था निर्माण की मोनिटरिंग करने वालों को सस्पेंड किया तो निर्माण से जुड़े व्यक्तियों अब तक पर 7 बच्चों की हत्या का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
#झालावाड़ स्कूल हादसे बड़ी कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी सहित कई अधिकारी निलंबित* शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर झालावाड़ प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी नरसो मीणा सहित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार बालासोरिया, पूर्व मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी चंद्र शेखर लुहार, मनोहर थाना पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मनपसर प्रभुलाल कारपेंटर, समग्र शिक्षा के सहायक अभियंता झालावाड़ तथा तत्कालीन प्रारंभिक पंचायत शिक्षा अधिकारी राधेश्याम मीणा को जांच विचाराधीन रखते हुए निलंबित कर दिया है। मनोहर थाना के कनिष्ठ अभियंता जो संविदा पर कार्यरत है की संविदा समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं।
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@arvindchotia पता नहीं मेरी जाति का कोई सांसद है नहीं तो अच्छा कैसे हो सकता है फिर सबसे अच्छा तो तभी होगा न जब मेरी रिश्तेदारी में होगा😁
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
आपके हिसाब से राजस्थान के सर्वश्रेष्ठ सांसद?
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@Khurpench_ क्योंकि वहाँ बलि चढ़ने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। शिक्षक झाड़ू लगा दे, टॉयलेट साफ कर दे बिल्डिंग रिपेयर कर दे, बिल्डिंग गिरे तो जिंदा न बचे और जिनकी इन कामों के लिए बजट देने की जिम्मेदारी है वो क्या करें?
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खुरपेंच Satire
खुरपेंच Satire@Khurpench_·
>लोकसभा की छत क्यों नहीं गिरती ? >विधानसभा की छत क्यों नहीं गिरती? >जज साहब के 3 बीघे वाली हवेली की छत क्यों नहीं गिरती ? >डीएम साहब के 2 बीघे वाली कोठी की छत क्यों नहीं गिरती ? >मंत्री जी के सरकारी आवास की छत क्यों नहीं गिरती? >सांसदों और विधायकों के सरकारी आवास की छत क्यों नहीं गिरती ? नोट : अगर गिरती है तो आपलोग मुझे गलत साबित कीजिए ये बताकर कि फलाना सांसद, विधायक, मंत्री , जज या DM की मौत सरकारी छत गिरने से हो गई।
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
@vishal6109 @arvindchotia क्यों शिक्षक अपनी सेलेरी क्यों देंगे शिक्षकों ने मरम्मत के बजट को रोक रखा था ? शिक्षक झाड़ू लगा दे, टॉयलेट साफ कर दे बिल्डिंग रिपेयर कर दे, बिल्डिंग गिरे तो जिंदा न बचे और जिनकी इन कामों के लिए बजट देने की जिम्मेदारी है वो क्या करें
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Vishal
Vishal@vishal6109·
@arvindchotia चोटिया जी मान लिया प्रशासन ओर विभाग तो मर चुका है, इनके कोई फर्क ना पड़े जिंदा लाशे है सब लेकिन ये 1-1 लाख की तनख्वाह लेने वाले मास्टर अगर मानवता दिखाकर अपनी 1 महीने के सैलेरी से स्कूलों की टूट फूट की मरम्मत तो करवा सकते है, जिससे ऐसी कोई अनहोनी तो ना हो किसी की जान तो ना जाए।
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
चलो निलम्बित ही हुए, जीवित तो हैं? यदि शिक्षक भी दबकर मर जाते तो किसको निलम्बित करते?? विद्यालय शिक्षकों ने बनाया था क्या? #झालावाड़
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
आज स्कूलों में रौनक लौट आई... स्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया गया। दृश्य जोधपुर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भाकरासनी का है। सभी बच्चों के थंब इंप्रेशन विविध रंगों में इस प्रतीक रूप में लिए गए कि शिक्षक अपने ज्ञान का बीजारोपन कर इस बीज से बने एक विशाल वृक्ष की शाखाओं और पत्तियों के रूप में अपने शिक्षार्थियों को देखता है। बहुत सुंदर और सकारात्मक। सरकारी स्कूलों में स क्रिएटिविटी उम्मीद बढ़ाने वाली है।
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R.E.S.Association
R.E.S.Association@RESAssociation1·
माननीय ⁦@madandilawar⁩ जी स्कूल शिक्षा परिवार के संरक्षक के रूप में संज्ञान लेकर तत्काल अधिकारियों को पाबन्द करें। कृष्ण गोदारा, प्रदेशाध्यक्ष व RESA परिवार ⁦@k36godara⁩ ⁦@BhajanlalBjp
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Devi Bijani
Devi Bijani@devibijani·
अब समय है मौन तोड़ने का, सच्चाई के साथ खड़े होने का। हर नागरिक की जिम्मेदारी है—आतंक के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना। #UniteAgainstTerror #jodhpur
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
पता नहीं कौन ये परीक्षा के टाइम टेबल बना देते हैं और कौन अप्रूव कर देते हैं? अप्रैल के आखिरी और मई के शुरुआती दिन राजस्थान में तपती गर्मी वाले होते हैं और इन दिनों में दूसरी पारी (दोपहर 1.15 बजे से 4.30 बजे तक) में परीक्षाएं रखी गई हैं। बच्चों को बेवजह दोहरी परीक्षा देनी पड़ेगी जबकि ये परीक्षाएं पहली पारी में आराम से ली जा सकती हैं। शिक्षा मंत्री जी, थोड़ा इस पर विचार जरूर कीजियेगा। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एसी कमरों में बैठे अफसर अर्धवार्षिक परीक्षा के कैलेंडर को ही वार्षिक परीक्षा में काॅपी-पेस्ट कर रहे हों बिना यह विचार किए कि कुछ हिस्से इन दिनों की दोपहर में बहुत ज्यादा तपते हैं। @madandilawar @BhajanlalBjp @8PMnoCM
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