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@devonverma

Katılım Nisan 2012
129 Takip Edilen18 Takipçiler
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Dev@devonverma·
@Flipkart @flipkartsupport so this is flipkart service....I think I have to uninstall flipkart ... product mention karte hai aur fir khud hi time dete hai aur us time par khud hi btate hai ke hame issue hai isliye hum delivery nhi kar paenge......ab to main cancel hi karunga
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DOUBLE-R
DOUBLE-R@Naam_kafi_hai·
Comment your name & get best signature ✍🏻
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BlockDAG Network
BlockDAG Network@blockdagnetwork·
We are excited to share our global launch of our keynote video: blockdag.network/keynote ✅ RT this post please for mass adoption!
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Dev
Dev@devonverma·
@PiCoreTeam Aaj crash ho hua hai aapka PI network $40 to below $1 just check coin market
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Pi Network
Pi Network@PiCoreTeam·
We did it! Pi Network has hit an amazing 3 MILLION followers! Congrats to every Pioneer who helped make this possible. We're so excited to reach this milestone, as the Pi community continues its journey to Open Network.
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पूर्णिमा
पूर्णिमा@Sanatani_Purnim·
आपबीती कौन से जूते दिखाऊँ साहिब? दुकान का नौकर मुझसे पूछ रहा था और मैं वहीं शो-केस में सजे हुए महँगे जूतों को निहार रहा था। दुकान वाले ने मुझे कई बड़ी कंपनियों के जूते दिखाये व अंत में मैंने कोई दो हज़ार रुपये वाले जूते पसंद किए। पैसे देते वक़्त मेरी आँखों के कोर भीग गए थे। “क्या हुआ साहिब?” दुकानदार पूछता ही रह गया और मैं घर की ओर चल दिया, अपने उन्हीं प्लास्टिक के जूतों की ओर, जिन्हें माँ ने बीस साल पहले अपनी हैसियत अनुसार दिलवाए थे। हाँ, वही प्लास्टिक के जूते, जिन्हें मैं हर मौक़ों पर पहन कर अपने-आप को शहज़ादे से कम न समझता। यही तो वो काले जूते थे, जिन्हें मैं गर्मी-सर्दी, बरसात, हर मौसम में पहनता, जिन्हें कई पैबंद लग चुके थे। स्कूल में भी वही जूते पहन कर जाया करता था। जिन बच्चों के जूतों में चमक न होती, मास्टर जी उनको प्रार्थना सभा से बाहर कर देते। इस सज़ा से बचने के लिये मैंने भी एक नायाब तरीक़ा निकाल लिया था। मैं जूतों पर सरसों का तेल लगा लेता था, जिससे उन जूतों पर थोड़ी देर के लिए चमक बनी रहती, जो मेरे बचाव के लिये काफ़ी होती। चार बहनें, एक भाई तथा माता-पिता सहित सात लोगों के हमारे परिवार ने निर्धनता को बहुत क़रीब से झेला था। टाट की बोरी के बस्ते लेकर स्कूल जाना, जिन्हें माँ बड़ी मेहनत से सीलती। किताबों का एक ही “सैट” जो बारी-बारी से सब भाई-बहनों के काम आया। शायद ही कोई किताब नई ली हो, ऐसा जान नहीं पड़ता। शायद ग़रीबी दुर्लभ वस्तुओं को सम्भालने की अक़्ल दे देती है। हम सब ख़ूब लगन और मेहनत से पढ़ते। मेहनत, लगन और निष्ठा का यह पाठ हमने अपनी माँ से सीखा था। जिन्होंने अनेक मुसीबतों में भी मेहनत व भगवान का दामन नहीं छोड़ा था। पिता जी जो थोड़ा बहुत कमाते, वो शराब लील लेती। माँ जवान होते बच्चों की दुहाई देती मगर नतीजा वही “ढाक के तीन पात”। आख़िर माँ ने स्वयं ही मेहनत करने का निर्णय लिया। अपनी बची हुई कान की बालीयाँ बेच कर स्वेटर बुनने वाली मशीन ली। किसी दुकानदार से ठेका कर लिया, एक स्वेटर के दस रुपये। घर पर खूब ऊन आती। माँ हमें लालच देती- पाँच ऊन के गोले बनाने वाले को पच्चीस पैसे दिए जाएँगे (जो आज के पाँच रुपये के बराबर थे)। लालच व स्पर्धा में खूब गोले लपेटे जाते। माँ का काम हो जाता और हमें “पॉकेट मनी “ मिल जाती। शायद उसी पॉकेट मनी से माँ ने मुझे जूते दिलवाए थे। तब अलग अलग जूते नहीं हुआ करते थे। वही स्कूल के लिए, वही शादी ब्याह के मौक़ों पर। मैं ऐसे में उनको तेल से अवश्य चमकाता, चाहे ऐसे में लोग मुझे मूर्ख ही समझते हों लेकिन मैं अपनी अक़्लमंदी पर बहुत इतराता। कहते हैं सोने को जितना तपाओ वो उतना ही चमकता है। ग़रीबी और अभावों की तपिश में शायद मैं भी कुंदन बन गया था। अच्छे अंकों से दसवीं पास की। पिताजी से हम बहुत डरते थे। सो उनसे चोरी छिपे एयरफ़ोर्स का फ़ार्म भर दिया। इंटरव्यू के लिए बुलावा आया तो बड़ी बहन ने ट्यूएशन द्वारा जमा किए गए पैसों से भेजा। माँ के आशिर्वाद से मुझे कदम कदम पर सफलता मिल रही थी। मेरी नियुक्ति हो गई। छह महीने की ट्रैनिंग के बाद जब पहली बार माँ की हथेली में अपनी तनख़्वाह रखी तो माँ बहुत रोई। सबकी आखों में ख़ुशी के आसूँ थे, शायद अब जूतों को तेल से चमकाने वाले दिन गये। इस ख़ुशी में एक और ख़ुशी शामिल हुई की पिताजी ने शराब छोड़ दी। हमने निर्धनता को प्रतिस्पर्धा में पछाड़ दिया था। बहिनों ने खूब लगन से मेहनत की व सरकारी नौकरियाँ प्राप्त कर अच्छे घरों में चली गयीं। माँ की कोख सफल हुई। परंतु आज भी कभी हम सब भई-बहन इकट्ठे होते हैं तो उन प्लास्टिक के जूतों को देख कर खूब हंसते हैं तथा हंसते-हंसते रोते चले जातें हैं अतीत की ग़ुरबत को याद करके। यह देख कर मेरी पत्नी तथा मेरी बहनों के पति हमें हैरानीं से देखते हुए पागल समझते हैं और हम सब भाई-बहनें थोड़ी देर के लिए पागल ही बने रहना चाहतें हैं क्योंकि ऐसा कर हम अपनी अतीत की जड़ों से जुड़े हुए महसूस करतें हैं। 👍🙏
पूर्णिमा tweet media
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Dev
Dev@devonverma·
@SanataniPurnima Wah didi ....aapki kahaniya padh kar ek baar yu lagta hai k ye scene chal raha hai.....bahut hi sunder lekhan hai
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पूर्णिमा
पूर्णिमा@Sanatani_Purnim·
"सुकून की दौलत" .... सवारियो के इंतजार मे आटो स्टैण्ड पर अपने आटो में बैठा मोहन.. बाजू के आटो में बैठे दीनू चाचा से बातें कर रहा था... कया बात है मोहन... आज तो तेरे चेहरे पर एक अलग ही मुसकान है.... अरे चाचा.... आपको पता है कल रात मैंने एक मन के सुकून का काम किया.....मुझे सुकून की दौलत मिली... दीनू चाचा-कया...सुकून की दौलत... अरे हमें भी तो पता चले ...हमारे छोटे ने कया सुकून भरा काम किया .....और उसे कैसे सुकुन की दौलत मिली... क्या किसी बडे मंत्रीजी को आटो में बैठाकर शहर में घुमाया या किसी फिल्मी एक्टर को अपने आटो में बैठाया........ अरे....नहीं चाचा... मैंने लोभ, लालच और बेईमानी को हराकर, ईमानदारी का परचम लहराया, एक गरीब और मजबूर परिवार को होनेवाले बहुत बड़े नुकसान से बचाया... दीनू चाचा - क्या कह रहा है छोटे....ऐसा क्या किया तूने... तो मोहन बोला..चाचा कल रात मैं रोज की तरह लगभग ग्यारह बजे सवारियो का इंतजार कर रहा था कि एक महिला और एक 12-13 साल का लड़का, जिनके पास दो-तीन झोले, चादर, कंबल, एक पानी की केन, स्टोव आदि बहुत सा सामान था, बस से उतरकर सीधे मेरे पास आये और बोले, भैया सिटी हास्पिटल चलोगे... मैंने बोला हां चलो, उन्होंने आटो में फटाफट अपना सामान रखा और खुद भी बैठ गये हम लोग 15-20 मिनिट में सिटी हास्पिटल पहुंच गये वे दोनों आटो से उतरे और जल्दी-जल्दी अपना सामान उठाया और सीधे हास्पिटल के अंदर चले गये। और मैं भी आटो लेकर बारह बजे वाली बस की सवारियों के लिये वापस बस स्टैण्ड आ गया... स्टैण्ड पर आटो खड़ा कर, सोचा पीछे की सीट पर थोड़ा लेट जाता हूं, पीछे गया तो देखा सीट के पीछे एक नीले रंग की पन्नी में कुछ बंधा हुआ पड़ा है, खोलकर देखा तो उसमें पांच-पांच सौ के नोटों की दो गड्डियां थी... साठ सत्तर हजार से कम नहीं रहे होंगे... एकपल को तो मुझे लगा, यार आज तो लॉटरी लग गयी है शाम से सवारियों ले जा रहा हूं कोई पूछने भी नहीं आया मन में आया कि इन पैसों को मैं ही रख लेता हूं, फिर थोड़ी देर सोच-विचार किया तो मुझे लगा कहीं ये पैसे अभी हास्पिटल जानेवाली महिला और उसके साथवाले लड़के के तो नही.. यही सोचकर मैंने, तुरंत आटो स्टार्ट किया और सिटी हास्पिटल चला गया और वहां उस महिला और लड़के को ढूंढने लगा, तो देखा वे दोनों वहीं बाहर ही शेड के नीचे बैठे फूट-फूट कर रो रहे थे... मैंने पूछा तो वह महिला कहने लगी, भैया हम लोग दूर गांव से आये है मेहनत-मजूरी करके जीवन यापन करते है मेरे पति यहां भर्ती हैं, उनके ब्रेन ट्यूमर का आप्रेशन होना है गांव में पैतृक जमीन का आधे एकड़ का टुकड़ा था, उसे बेचकर आप्रेशन के लिये पैसे लाये थे गांव से चले तो पैसे मेरे पास ही इस छोटे झोले में ही रखे थे, पर यहां आकर देखा तो पैसे की पन्नी है ही नहीं समझ ही नहीं आ रहा कि पैसे कहां चले गये... मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं भैया, डॉक्टर कहते हैं कि पति का आप्रेशन नहीं होगा तो उनकी जान का खतरा हैं..... ना जाने पैसे कहां गिर गये कहकर वह लगातार रोये जा रही थी... मैंने बोला आप चिंता मत करो...रामजी की दया से सब ठीक हो जायेगा.... अच्छा बताओ पन्नी किस रंग की थी, वह बोली भैया नीले रंग की पन्नी थी और पांच-पांच सौ के नोटों की दो गड्डियां थी पूरे सत्तर हजार रूपये थे भैया.... मैंने जेब से पन्नी निकाली और बोला यह लो तुम्हारे पैसे जल्दी-जल्दी में मेरे आटो में सीट के पीछे गिर गये थे... पैसे लेकर उस महिला के जान में जान आई पन्नी खोलकर मुझे दो हजार रूपये देने लगी, बोली यह रख लो भैया... मैंने बोला नहीं-नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं यह आपका पैसा है आप शांति से अपने पति का इलाज कराओ, सब ठीक हो जायेगा... मैं लौटने लगा तो वह महिला मेरे पैर पड़ने लगी मैंने उसे मना किया और वापस आ गया। दीनू चाचा बोले... वाह......छोटे तूने वाकई बहुत अच्छा काम किया बेटा, आज जबकि समाज में कई लोग हजार-पांच सौ के लिये अपना ईमान बेच देते हैं, इतनी बड़ी रकम पाकर भी तूने अपना ईमान डिगने नहीं दिया, बहुत बढ़िया छोटे... बेटा सच्चाई, ईमानदारी और संतोष से बढ़कर कोई दौलत नहीं है ... ईमानदारी की एक नेक पहल किसी का जीवन संवार सकती है और एक बेईमानी किसी का जीवन तबाह कर सकती है बेईमानी से हमें क्षणिक सुख भले मिल जाये, पर उसका अंत हमेशा दुखद ही होता है... छोटे, मुझे तुझ पर गर्व है बेटा... दीनू चाचा के मुंह से ये सुनकर मोहन का चेहरा और भी खिल उठा ..🙏🙏🙏
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पूर्णिमा
पूर्णिमा@Sanatani_Purnim·
थोड़ा सा समय निकाल कर पढ़िएगा जरूर........ मैं एक घर के करीब से गुज़र रहा था की अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज़ आई। उस बच्चे की आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जा कर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका। अंदर जा कर मैने देखा कि एक माँ अपने दस साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती। मैने आगे हो कर पूछा बहनजी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मार रही हो? जब कि आप खुद भी रोती हो। उस ने जवाब दिया भाई साहब इस के पिताजी भगवान को प्यारे हो गए हैं और हम लोग बहुत ही गरीब हैं, उन के जाने के बाद मैं लोगों के घरों में काम करके घर और इस की पढ़ाई का खर्च बामुश्किल उठाती हूँ और यह कमबख्त स्कूल रोज़ाना देर से जाता है और रोज़ाना घर देर से आता है। जाते हुए रास्ते मे कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता है जिस की वजह से रोज़ाना अपनी स्कूल की वर्दी गन्दी कर लेता है। मैने बच्चे और उसकी माँ को जैसे तैसे थोड़ा समझाया और चल दिया। इस घटना को कुछ दिन ही बीते थे की एक दिन सुबह सुबह कुछ काम से मैं सब्जी मंडी गया। तो अचानक मेरी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना घर से मार खाता था। मैं क्या देखता हूँ कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो उन से कोई सब्ज़ी ज़मीन पर गिर जाती थी वह बच्चा उसे फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता। मैं यह नज़ारा देख कर परेशानी में सोच रहा था कि ये चक्कर क्या है, मैं उस बच्चे का चोरी चोरी पीछा करने लगा। जब उस की झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा कर वह सब्जी बेचने लगा। मुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आंखों में नमी, ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ । अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिस की दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी, उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाज़ुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया। वह बच्चा आंखों में आंसू लिए चुप चाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्ज़ी एक दूसरे दुकान के सामने डरते डरते लगा ली। भला हो उस शख्स का जिस की दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही दुकान लगाई उस शख्स ने बच्चे को कुछ नहीं कहा। थोड़ी सी सब्ज़ी थी ऊपर से बाकी दुकानों से कम कीमत। जल्द ही बिक्री हो गयी, और वह बच्चा उठा और बाज़ार में एक कपड़े वाली दुकान में दाखिल हुआ और दुकानदार को वह पैसे देकर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की और चल पड़ा। और मैं भी उस के पीछे पीछे चल रहा था। बच्चे ने रास्ते में अपना मुंह धो कर स्कूल चल दिया। मै भी उस के पीछे स्कूल चला गया। जब वह बच्चा स्कूल गया तो एक घंटा लेट हो चुका था। जिस पर उस के टीचर ने डंडे से उसे खूब मारा। मैने जल्दी से जा कर टीचर को मना किया कि मासूम बच्चा है इसे मत मारो। टीचर कहने लगे कि यह रोज़ाना एक डेढ़ घण्टे लेट से ही आता है और मै रोज़ाना इसे सज़ा देता हूँ कि डर से स्कूल वक़्त पर आए और कई बार मै इस के घर पर भी खबर दे चुका हूँ। खैर बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढ़ने लगा। मैने उसके टीचर का मोबाइल नम्बर लिया और घर की तरफ चल दिया। घर पहुंच कर एहसास हुआ कि जिस काम के लिए सब्ज़ी मंडी गया था वह तो भूल ही गया। मासूम बच्चे ने घर आ कर माँ से एक बार फिर मार खाई। सारी रात मेरा सर चकराता रहा। सुबह उठकर फौरन बच्चे के टीचर को कॉल की कि मंडी टाइम हर हालत में मंडी पहुंचें। और वो मान गए। सूरज निकला और बच्चे का स्कूल जाने का वक़्त हुआ और बच्चा घर से सीधा मंडी अपनी नन्ही दुकान का इंतेज़ाम करने निकला। मैने उसके घर जाकर उसकी माँ को कहा कि बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है। वह फौरन मेरे साथ मुंह में यह कहते हुए चल पड़ीं कि आज इस लड़के की मेरे हाथों खैर नही। छोडूंगी नहीं उसे आज। मंडी में लड़के का टीचर भी आ चुका था। हम तीनों ने मंडी की तीन जगहों पर पोजीशन संभाल ली, और उस लड़के को छुप कर देखने लगे। आज भी उसे काफी लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल दिया। अचानक मेरी नज़र उसकी माँ पर पड़ी तो क्या देखता हूँ कि वह बहुत ही दर्द भरी सिसकियां लेकर लगा तार रो रही थी, और मैने फौरन उस के टीचर की तरफ देखा तो बहुत शिद्दत से उसके आंसू बह रहे थे। दोनो के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हों ने किसी मासूम पर बहुत ज़ुल्म किया हो और आज उन को अपनी गलती का एहसास हो रहा हो। उसकी माँ रोते रोते घर चली गयी और टीचर भी सिसकियां लेते हुए स्कूल चला गया। बच्चे ने दुकानदार को पैसे दिए और आज उसको दुकानदार ने एक लेडी सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट ले लो, बच्चे ने उस सूट को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया। आज भी वह एक घंटा देर से था, वह सीधा टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रख कर मार खाने के लिए अपनी पोजीशन संभाल ली और हाथ आगे बढ़ा दिए कि टीचर डंडे से उसे मार ले। टीचर कुर्सी से उठा और फौरन बच्चे को गले लगा कर इस क़दर ज़ोर से रोया कि मैं भी देख कर अपने आंसुओं पर क़ाबू ना रख सका। मैने अपने आप को संभाला और आगे बढ़कर टीचर को चुप कराया और बच्चे से पूछा कि यह जो बैग में सूट है वह किस के लिए है। बच्चे ने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ अमीर लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं कोई जिस्म को पूरी तरह से ढांपने वाला सूट नहीं और और मेरी माँ के पास पैसे नही हैं इस लिये अपने माँ के लिए यह सूट खरीदा है। तो यह सूट अब घर ले जाकर माँ को आज दोगे? मैने बच्चे से सवाल पूछा। जवाब ने मेरे और उस बच्चे के टीचर के पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकाल दी। बच्चे ने जवाब दिया नहीं अंकल छुट्टी के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए दे दूँगा। रोज़ाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़े थोड़े पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं। टीचर और मैं सोच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे समाज में गरीबों के साथ ऐसा होता रहेगा उन के बच्चे त्योहार की खुशियों में शामिल होने के लिए जलते रहेंगे आखिर कब तक। क्या ऊपर वाले की खुशियों में इन जैसे गरीब का कोई हक नहीं ? क्या हम अपनी खुशियों के मौके पर अपनी ख्वाहिशों में से थोड़े पैसे निकाल कर अपने समाज मे मौजूद गरीब और बेसहारों की मदद नहीं कर सकते। आप सब भी ठंडे दिमाग से एक बार जरूर सोचना ! ! ! ! अगर हो सके तो इस लेख को उन सभी सक्षम लोगो को बताना ताकि हमारी इस छोटी सी कोशिश से किसी भी सक्षम के दिल मे गरीबों के प्रति हमदर्दी का जज़्बा ही जाग जाये और यही लेख किसी भी गरीब के घर की खुशियों की वजह बन जाये।
पूर्णिमा tweet media
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VISHNU KUMAR MEENA
VISHNU KUMAR MEENA@vsmeenagarhi·
@Kirtich567 @JA2018official @LDC3600 @Ldc_Gp3600 @ministerialSr @News18Rajasthan @news4rajasthan @1stIndiaNews अच्छा मैडम ऐसे तो सारे कर्मचारी पे ग्रेड बढ़वाएंगें और इन बाबुओं की वजह से कर्मचारियों को सैलरी न मिलने में कितनी परेशानी हो रही इसका भी पता रखो
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पेंचकस
पेंचकस@penchakas·
#राजस्थान का कोई #सरकारी कर्मचारी इन #गहलोत जी को वोट नहीं देगा 😡कितने महीने से #कर्मचारी बेचारे अनशन पर हैं, न तो 2017 #वेतन कटौती बहाल,,,,,ना ही #प्रोबेशन में कंप्लीट सैलरी,,, @JA2018official @LDC3600 @Ldc_Gp3600 @ministerialSr @News18Rajasthan @news4rajasthan @1stIndiaNews
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Dev
Dev@devonverma·
@DirtyR3dcoat @LisaLuvsLiberty @elonmusk In 1920, Jai Singh Prabhakar, the Maharaja of Alwar, bought 7 new Rolls-Royce cars and employed them for garbage collection after he was refused a test drive in England.
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Dan 🇬🇧 🇺🇲
Dan 🇬🇧 🇺🇲@DirtyR3dcoat·
@devonverma @LisaLuvsLiberty @elonmusk Tesla needs to sell cars before they build a factory. They have to know what the market in India is like before investing in a multi billion $ factory. You get your India made Teslas when Tesla is allowed to sell there.
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Elon Musk
Elon Musk@elonmusk·
Thanks Dave!
Dave Wolf 🏳️‍🌈🚀🔭@davewolfusa

If people understood how good the driving experience is with a @Tesla, they'd never be able to build enough at any price. My trip to Texas to see @SpaceX's SuperHeavy/Starship initial launch was my first time driving a Tesla Model Y for an extended trip. I drove 1500 miles across Texas, from San Antonio to Brownsville, and then all the way up to near Fort Worth over 10 days. For 7 of those days, I camped out in the back of the Model Y using its "Camp Mode", keeping me cool in the heat and humidity of the Texas Gulf Coast. All of that driving and the AC only cost me $151. The integration with your phone is amazing: 1) You never have to lock your car, it locks it when you walk away, and unlocks it when you return. 2) Want a comfortable car when you get in, turn the climate control on from your phone. 3) Some idiot parked too close to your driver's door? Just use your phone to back it out. I can't wait to get mine! Starting July 1st, Colorado will provide a $5000 rebate to the $7,500 federal rebate. This means that you'll be able to get a base Model Y for $29,740. Note: The price below only includes $2000 Colorado's 7/1/2023 $5000 rebate.

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Dev
Dev@devonverma·
@LisaLuvsLiberty @elonmusk Because they want to make in outside of India and sell in India.....It's India "Make in India" for India
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Dave Wolf 🏳️‍🌈🚀🔭
If people understood how good the driving experience is with a @Tesla, they'd never be able to build enough at any price. My trip to Texas to see @SpaceX's SuperHeavy/Starship initial launch was my first time driving a Tesla Model Y for an extended trip. I drove 1500 miles across Texas, from San Antonio to Brownsville, and then all the way up to near Fort Worth over 10 days. For 7 of those days, I camped out in the back of the Model Y using its "Camp Mode", keeping me cool in the heat and humidity of the Texas Gulf Coast. All of that driving and the AC only cost me $151. The integration with your phone is amazing: 1) You never have to lock your car, it locks it when you walk away, and unlocks it when you return. 2) Want a comfortable car when you get in, turn the climate control on from your phone. 3) Some idiot parked too close to your driver's door? Just use your phone to back it out. I can't wait to get mine! Starting July 1st, Colorado will provide a $5000 rebate to the $7,500 federal rebate. This means that you'll be able to get a base Model Y for $29,740. Note: The price below only includes $2000 Colorado's 7/1/2023 $5000 rebate.
Dave Wolf 🏳️‍🌈🚀🔭 tweet media
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Dev
Dev@devonverma·
@BigFloppaEth @elonmusk Please check TATA from INDIA and compare worldwide n domestically.....
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Big Floppa
Big Floppa@BigFloppaEth·
@elonmusk I saw that Tesla became the 3rd highest number of cars sold in the world, that's a very cool figure! I didn't expect you guys to do so well😅 Keep crushing🫡
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राष्ट्रीय अधिकारी/कर्मचारी संघ(Unified)
#गहलोतजी_बाबू_की_सुनो @RajCMO @RajGovOfficial माननीय मुख्यमंत्री महोदय आपके जन्मदिन को मंत्रालयिक कर्मचारियों ने 03 मई को 1000 यूनिट रक्तदान करके ऐतिहासिक बनाया है, आप हमारी मांगे पूरी करो @ashokgehlot51 @zeerajasthan_ @RajCMO @JA2018official
राष्ट्रीय अधिकारी/कर्मचारी संघ(Unified) tweet media
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राष्ट्रीय अधिकारी/कर्मचारी संघ(Unified)
राज. राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ द्वारा महापड़ाव का आगाज आज 17अप्रैल से शुरू,सभी जिलों से मंत्रालयिक कर्मचारी शानदार भीड़ के साथ शिप्रा पथ मानसरोवर में बैठ गए है। माननीय मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 से निवेदन हैं बाबुओं की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय मांगों को जल्द पूरा करे।
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