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Devindraa Singh
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Devindraa Singh
@devsr84
Working on Ergonomics, IITian, Blogger, Tech Enthusiast, Wannabe Entrepreneur, Student of History & Geo-Politics ...
NCR Katılım Nisan 2010
4.6K Takip Edilen980 Takipçiler
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After mihirbhoj.com , Team Kshatriya Parishad is happy to launch pratihar.com as an endeavour to preserve the history and present of Pratihāra kshatriyas, who survive as Parihar or Padhiyar rajputs to this day.
A more interactive version of the previous one. Please drop your suggestions, if any.

English
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सरकार को जनता की बढ़ती जागरूकता से भय लग रहा है! यह भय अच्छा है, क्योंकि लोकतंत्र में मालिक जनता है, नेता सिर्फ़ चौकीदार है और चौकीदार हमेशा भय में जीता है!
इंदिरा गांधी ने भयवश ऐसे ही जनता की आवाज को कुचलना चाहा था, अब 'अजैविक सरकार' भी उसी रास्ते पर चल पड़ी है!
पिछले दो कार्यकाल में इन्हें डर नहीं लगा था, क्योंकि हम जैसे लाखों हिंदुओं ने इनकी तरफ से आंखें बंद कर ली थी और इनको राष्ट्रवादी और हिंदुवादी समझ लिया था!
जब इनके पसमांदावादी, जातिवादी और अमेरिकावादी होने का राज खुलने लगा तो पहले इन्होंने अपने ट्रोलरों से इसे कंट्रोल करना चाहा, लेकिन जब इनका आईटी सेल, थर्ड पार्टी ठेकेदार कंपनी और पेड ट्रोलर मिलकर भी जनता की आवाज नहीं दबा सके तो यह कानून बनाने जा रहे हैं ताकि सोशल मीडिया पर केवल इनकी चापलूसी वाला कंटेंट ही रह सके, सवाल उठाने वाले कंटेंट को यह डिलीट कर सकें। इनको गुमान है कि जब चुनाव आयोग जेब में है तो फिर जनता की आवाज क्यों सुनी जाए?
पत्रकारिता में एक उदाहरण हमेशा दिया जाता है। 'जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो!' यह भूल गये कि आवाज उठाकर यहां की जनता ने अंग्रेजी राज समाप्त कर दिया था, आप तो फिर भी 'अमेरिकी पिट्ठू' हो; और जब आज अमेरिका स्वयं अपनी जनता के आक्रोश का सामना कर रहा है तो वह आपको क्या बचाएगा?
#SandeepDeo

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@nishikant_dubey सरकार दिन रात जाती आधारित समाज बना रहीं हो तो हिंदुराष्ट्र की बात करना भी बेमानी है?

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कांग्रेस का काला अध्याय
15. नेपाल सदा के लिए चीन के हाथों चला गया नेहरु जी के अहंकार और फुफकार के कारण, 21 मार्च 1960 को नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री बीपी कोयराला ने चीन के साथ एक समझौता किया,नेहरु जी ने कोयराला साहब को धमकी भरा पत्र आज ही के दिन 31 मार्च 1960 को भेजा,कोयराला जी को ज़बरदस्ती भारत बुलाया ।नेपाल के राजा महेंद्र जी ने नेपाल में यह घोषणा की कि भारत नेपाल को अपने देश में मिलाना चाहता है,नेपाली जनता में असंतोष भड़का,चुनी हुई बीपी कोयराला जी की सरकार बर्खास्त हुई ।नेपाल के राजा महेंद्र जी ने भारत के सीने पर कील ठोककर 31 अक्टूबर 1961 में नेपाल चीन बाउंड्री एग्रीमेंट कर लिया ।नेपाल से हमारी दूरी की कहानी चालू हो गई,हिंदू राष्ट्र ख़त्म हुआ ।
#CongressDarkHistory




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Why did Modi’s side kick Nishikant Dubey attack a towering leader like BIJU PATNAIK? And called him a CIA agent?
In all probabilities it’s because it’s time for BJP to amplify its HISAB CHUKTA politics in Odisha, pit Hindus against each other
Something Biju Patnaik was very against…
Do you know ? Biju was against ‘Mandal commission’
He was uncomfortable with the Mandal style OBC reservations and had publicly opposed VP Singh’s decision to implement the recommendations in the early 1990s.
his govt had vehemently refused to enforce the Mandal formula, arguing that the state’s politics had historically been above caste based calculations and that such a move would only fuel social division.
Nishikant dubey could not have done this alone , he for sure got clearence from Modia & Shah to attack Patnaik !
Evil , so evil..

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Adani vs Vedanta
एक समय की इंफ्रास्ट्रक्चर की भारत की दिग्गज कंपनी Jaypee के अधिग्रहण के मुद्दे पर बवाल मचा हुआ है।
कंपनी पहले ही दिवालिया हो चुकी थी। उसकी नीलामी में 18,000 करोड़ की बोली लगाते हुए वेदांता ग्रुप ने उसे खरीद लिया था और सौदा कागजों में भी पक्का हो गया था।
फिर एक बड़ा ट्विस्ट आया और वेदांता से कम बोली लगाने वाली अदाणी को 14,000 करोड़ में बेच दिया गया।
अब इस पर वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भगवद गीता के उद्धरण के साथ पब्लिक में अपनी बात रखी है, साथ ही मामला सुप्रीम कोर्ट भी ले गए हैं।
अब इस पूरे मामले में अदाणी के आने से जो ट्विस्ट और टर्न आया, उसके पीछे की कहानी तो नहीं मालूम है, लेकिन जिस वजह से ऐसा किया गया है, वह भी कम दिलचस्प नहीं है।
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गृहमंत्री जी कह रहे हैं कि देश से माओवाद का सफाया हो गया है।यह सच नहीं है। माओवाद को बौद्धिक खुराक देने वाले लोग स्लीपर सेल में चले गए हैं। यह सब लोग सोशल मीडिया से दूर हो गए हैं और बिना किसी हो हल्ला और प्रदर्शन के और कहीं कहीं तो मलाई खाने वाली जगहों में घुसे हुए हैं।
गृहमंत्री जी गलतफहमी में हैं!
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जिस देश के राष्ट्रपति की पहचान डेढ़ अरब लोगों की प्रथम नागरिक होने के बावजूद भी "आदिवासी" ही है,‼️
जिस देश का प्रधानमंत्री 12 साल मुख्यमंत्री और 12 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी खुद को अभी भी "पिछड़ा" बताता हो, हर रैली और हर कार्यक्रम में "मोदी तेली है" कहता हो…
वहाँ केवल एक बीघा जमीन पर गुजारा करने वाला सवर्ण परिवार "सक्षम, योग्य और दबंग" माना जाता है।

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इस केस में भी सच वहीं निकला
जो हर बार जांच में निकलता है
दलित एक्टिविस्ट अपनी आदत के अनुसार यहां भी लड़की छेड़ रहे थे
फिर दूसरी कहानी बनाई मुआवजा लेने के लिए

पवन@Voiceofpavan
हिन्दू राष्ट्र ऐसे बनाएंगे?
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@Profdilipmandal जैसे राजपूत क्षत्रिय कोई भी जाती का हो सकता है और किसी का कॉपीराइट नहीं नहीं, वैसे ही यादव सरनेम भी कोई भी रख सकता है...इसमें यानी क्यों सुलग रहीं है?
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प्रतीक शर्मा डॉक्टर नीमो यादव के फर्जी नाम से एकाउंट क्यों चला रहा था? उसने "यादव" नाम ही क्यों रखा होगा?
शर्मा में क्या समस्या थी? फेक न्यूज के लिए यादवों को बदनाम करने के पीछे क्या उद्देश्य रहा होगा?
पहले भी हम देख चुके हैं कि एक पाकिस्तानी एकाउंट वाल्मीकि नाम से चलाया जा रहा था. उसका काम मुस्लिम एजेंडा पुश करना था. पहचान खुलते ही लापता हो गया. ऐसे दर्जनों केस पकड़ में आए हैं.
साथ ही कोर्ट में दायर प्रतीक शर्मा की याचिका में कहा गया है कि ये एकाउंट उसकी रोजी रोटी है और उस पर चोट पड़ रही है.
प्रतीक विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत रिलीफ नहीं मांग रहा है. यानी ये विचार और अभिव्यक्ति का मामला नहीं है. कमाई और रोजगार का मैटर बताकर कोर्ट से छूट पाने की कोशिश है.
कमाई के लिए फेक न्यूज चलाने की छूट मांगने का ये अद्भुत मामला है.
उसे ये क्यों लगा होगा कि यादव नाम रखकर वह अपना धंधा बेहतर चला पाएगा.

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