Divyeshsingh Chauhan

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@divyesh2302

Mahadev & Hanuman Bhakt 🕉️ | Living a simple life with pure faith | Har Har Mahadev | Jai Bajrangbali

Ahmadabad City, Bharat Katılım Mayıs 2010
183 Takip Edilen95 Takipçiler
Manoj Singh
Manoj Singh@PracticalSpy·
कमेंट में Hello लिखें और 60+ फॉलोवर्स बढ़ाए कमेंट बॉक्स खोलकर एक दूसरे को फॉलो करें
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The Jaipur Dialogues
The Jaipur Dialogues@JaipurDialogues·
Cornering Annamalai in Tamil Nadu has costed the BJP Vote Share Dropped from 11% to 3%
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@SonOfBharat7·
योगीजी ने बंगाल की 47 सीटों पे प्रचार किया और उन 47 में से 45 पे BJP जीत रही है✊ और कुछ UP के दो कौड़ी के पिल्ले बोलते हैं वो UP में योगीजी को हराकर सत्ता बदल देंगे... भक्क्कक्क... BSD.. K🖐️
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Anand Ranganathan
Anand Ranganathan@ARanganathan72·
DMK has been eradicated.
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Manoj Singh
Manoj Singh@PracticalSpy·
थोड़ी देर में सनातनी साथियों का प्रमोशन करूंगा फटाफट अपना 🆔 कमेंट करके रिपोस्ट कीजिए सभी एक्टिव अकाउंट को प्राथमिकता दिया जाएगा
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Bhagawad Gita
Bhagawad Gita@Bhgawad_Gita·
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Vivek Sharma 🇮🇳
Vivek Sharma 🇮🇳@SaffRonicMan·
।। भगवान विष्णुनाकृतम् देवीस्तोत्रं ।। श्रीभगवानुवाच - नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नमः । कल्याणै कामदायै च वृद्ध्यै सिद्ध्यै नमो नमः ॥ १॥ सच्चिदानन्दरूपिण्यै संसारारणये नमः । पञ्चकृत्यविधात्र्यै ते भुवनेश्यै नमो नमः ॥ २॥ सर्वाधिष्टानरूपायै कूटस्थायै नमो नमः । अर्धमात्रार्थभूतायै हृल्लेखायै नमो नमः ॥ ३॥ ज्ञातं मयाऽखिलमिदं त्वयि सन्निविष्टं त्वत्तोऽस्य सम्भवलयावपि मातरद्य । शक्तिश्च तेऽस्य करणे विततप्रभावा ज्ञाताऽधुना सकललोकमयीति नूनम् ॥ ४॥ विस्तार्य सर्वमखिलं सदसद्विकारं सन्दर्शयस्यविकलं पुरुषाय काले । तत्त्वैश्च षोडशभिरेव च सप्तभिश्च भासीन्द्रजालमिव नः किल रञ्जनाय ॥ ५॥ न त्वामृते किमपि वस्तुगतं विभाति व्याप्यैव सर्वमखिलं त्वमवस्थिताऽसि । शक्तिं विना व्यवहृतो पुरुषोऽप्यशक्तो वम्भण्यते जननि बुद्धिमता जनेन ॥ ६॥ प्रीणासि विश्वमखिलं सततं प्रभावैः स्वैस्तेजसा च सकलं प्रकटीकरोषि । अत्स्येव देवि तरसा किल कल्पकाले को वेद देवि चरितं तव वै भवस्य ॥ ७॥ त्राता वयं जननि ते मधुकैटभाभ्यां लोकाश्च ते सुवितताः खलु दर्शिता वै । नीताः सुखस्य भवने परमां च कोटिं यद्दर्शनं तव भवानि महाप्रभावम् ॥ ८॥ नाहं भवो न च विरिञ्चि विवेद मातः कोऽन्यो हि वेत्ति चरितं तव दुर्विभाव्यम् । कानीह सन्ति भुवनानि महाप्रभावे ह्यस्मिन्भवानि रचिते रचनाकलापे ॥ ९॥ अस्माभिरत्र भुवने हरिरन्य एव दृष्टः शिवः कमलजः प्रथितप्रभावः । अन्येषु देवि भुवनेपु न सन्ति किं ते किं विद्म देवि विततं तव सुप्रभावम् ॥ १०॥ याचेऽम्ब तेऽङ्घ्रिकमलं प्रणिपत्य कामं चित्ते सदा वसतु रूपमिदं तवैतत् । नामापि वक्त्रकुहरे सततं तवैव सन्दर्शनं तव पदाम्बुजयोः सदैव ॥ ११॥ भृत्योऽयमस्ति सततं मयि भावनीयं त्वां स्वामिनीति मनसा ननु चिन्तयामि । एषाऽऽवयोरविरता किल देवि भूया- द्व्याप्तिः सदैव जननी सुतयोरिवार्थे ॥ १२॥ त्वं वेत्सि सर्वमखिलं भुवनप्रपञ्चं सर्वज्ञता परिसमाप्तिनितान्तभूमिः । किं पामरेण जगदम्ब निवेदनीयं यद्युक्तमाचर भवानि तवेङ्गितं स्यात् ॥ १३॥ ब्रह्मा सृजत्यवति विष्णुरुमापतिश्च संहारकारक इयं तु जने प्रसिद्धिः । किं सत्यमेतदपि देवि तवेच्छया वै कर्तुं क्षमा वयमजे तव शक्तियुक्ताः ॥ १४॥ धात्री धराधरसुते न जगद्बिभर्ति आधारशक्तिरखिलं तव वै बिभर्ति । सूर्योऽपि भाति वरदे प्रभया युतस्ते त्वं सर्वमेतदखिलं विरजा विभासि ॥ १५॥ ब्रह्माऽहमीश्वरवरः किल ते प्रभावा- त्सर्वे वयं जनियुता न यदा तु नित्याः । केऽन्ये सुराः शतमखप्रमुखाश्च नित्या नित्या त्वमेव जननी प्रकृतिः पुराणा ॥ १६॥ त्वं चेद्भवानि दयसे पुरुषं पुराणं जानेऽहमद्य तव संनिधिगः सदैव । नोचेदहं विभुरनादिरनीह ईशो विश्वात्मधीरिति तमःप्रकृतिः सदैव ॥ १७॥ विद्या त्वमेव ननु बुद्धिमतां नराणां शक्तिस्त्वमेव किल शक्तिमतां सदैव । त्वं कीर्तिकान्तिकमलामलतुष्टिरूपा मुक्तिप्रदा विरतिरेव मनुष्यलोके ॥ १८॥ गायत्र्यसि प्रथमवेदकला त्वमेव स्वाहा स्वधा भगवती सगुणार्धमात्रा । आम्नाय एव विहितो निगमो भवत्यै सञ्जीवनाय सततं सुरपूर्वजानाम् ॥ १९॥ मोक्षार्थमेव रचयस्यखिलं प्रपञ्चं तेषां गताः खलु यतो ननु जीवभावम् । अंशा अनादिनिधनस्य किलानघस्य पूर्णार्णवस्य वितता हि यथा तरङ्गाः ॥ २०॥ जीवो यदा तु परिवेत्ति तवैव कृत्यं त्वं संहरस्यखिलमेतदिति प्रसिद्धम् । नाट्यं नटेन रचितं वितथेऽन्तरङ्गे कार्ये कृते विरमसे प्रथितप्रभावा ॥ २१॥ त्राता त्वमेव मम मोहमयाद्भवाब्धे- स्त्वामम्बिके सततमेमि महार्तिदे च । रागादिभिर्विरचिते वितथे किलान्ते मामेव पाहि बहुदुःखकरे च काले ॥ २२॥ नमो देवि महाविद्ये नमामि चरणौ तव । सदा ज्ञानप्रकाशं मे देहि सर्वार्थदे शिवे ॥ २३॥ ।। इति श्रीमद्देवीभागवतमहापुराणे तृतीयस्कन्धान्तरगतम् चतुर्थोऽध्याये विष्णुनाकृतं देवीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।
Vivek Sharma 🇮🇳 tweet media
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Ms.Bhumi
Ms.Bhumi@ibmindia20·
एक बार "राम राम" लिखकर तो देखो, सारे बिगड़े काम न बनने लगे तो कहना...🚩 जय जय श्री राम 🚩 जय वीर हनुमान 🚩
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Vikram Pratap Singh
Vikram Pratap Singh@VIKRAMPRATAPSIN·
Want to explore network with RSS VHP Hindu Nationalist BJP supporters . If you also want to add few such as your network Z Write “ Jai Hind “ in thread . Follow me for 💯 follow back . Likeminded people only 🙏🏽 Let’s connect.
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Manoj Singh
Manoj Singh@PracticalSpy·
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Chandan Sharma
Chandan Sharma@ChandanSharmaG·
थोडी देर में प्रमोशन करूंगा फटाफट अपना 🆔 कमेंट करके RT करें सभी एक्टिव अकाउंट को प्राथमिकता दिया जाएगा
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Jaya_Upadhyaya
Jaya_Upadhyaya@Jayalko1·
POWERFUL SHANI MANTRAS 🪐 (Should be chanted under proper guidance) Shani occupies the 7th place among nine planets Shani takes around 2-2.5 years to pass through each zodiac sign (known as Dhaiya/ढ़ैया) To escape adverse effects, one can chant specific Shani mantras 1. ॐ शं शनैश्चराय नम:॥ Effective in Shani Mahadasha/Sadhesati/weak Shani 2. ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:॥ This Beej Mantra is extremely powerful and helps in taking away sorrows and problems. One can chant this mantra 1, 3, 9, 27, or 108 times. 3. ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः॥ Vedic mantra to atone for sins. 4. ॐ भग-भवाय विदमहे मृत्यु-रूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात् ॥ Shani Gayatri Mantra to calm negative effects of Shani in horoscope 5. ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥ To appease Shani and get his blessings
Jaya_Upadhyaya tweet media
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Soul Of Bharat
Soul Of Bharat@SoulOf_Bharat·
The happiness is not anout having everything, is about enjoying what you have 🥹
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Amrendra Bahubali 🇮🇳
Amrendra Bahubali 🇮🇳@TheBahubali_IND·
मौत की लहरे तेज थी हर कोई अपनी जान बचाने लगा था पर एक मां वो खुद को नहीं अपने बच्चे को बचा रही थी पानी बढ़ता गया सांसे कम होती गई पर उसकी बाहों की पकड़ मजबूत होती गईं कहते अंतिम पल में हर कोई खुद को बचाता पर एक मां आखरी सांस तक अपने बच्चे को थामे रही आज वो हार गई पर ममता जीत गई
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