Dr Anuj Kumar
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Dr Anuj Kumar
@dranuj_k
Craniofacial Surgeon | Public Health Expert | Campaigner for Healthy Jharkhand
Ranchi, India Katılım Nisan 2020
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Puppy ke nakhoon se nishan ho gaya hai but blood nahi nikla hai is case main vaccine leni hai kya?
@dranuj_k
@thebrainyogi

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क्या वेंटीलेटर सिर्फ़ पैसा बनाने की मशीन है❓❓❓
अक्सर आपने लोगों को ये कहते हुए सुना होगा की वेंटीलेटर पर जाने वाला वाले मरीज़ ठीक नहीं होते या अस्पताल सिर्फ़ पैसा लूटने के लिए मरीज़ को वेंटीलेटर पर रखते हैं।
आइये जाने आज बिलकुल सामान्य भाषा में की वेंटीलेटर है क्या।
सामान्य अवस्था में शरीर में साँस लेने और छोड़ने का काम फ़ेफ़रा करता है।
लेकिन अगर शरीर की अवस्था ऐसी है कि
1) मरीज़ फेफरे की किसी चोट या बीमारी के कारण ख़ुद से साँस नहीं ले सकता ।
2) इसका डर है कि मरीज़ की स्थिति कभी भी ख़राब हो सकती है जिसकी वजह से उसकी साँस लेने की क्षमता प्रभावित हो जाएगी।
3) मरीज़ के मस्तिष्क में ऐसी चोट है कि मरीज़ को पूरी तरह बेहोश रखा जाए ताकि मस्तिष्क पर दवाब ना पड़े
तो ऐसे परिस्थिति में मरीज़ को वेंटीलेटर पर रखा जाता है।
⭕️ और इन परिस्थितियों में वेंटीलेटर का मुख्य काम है की जब तक मरीज़ ख़ुद से साँस लेने के लायक़ ना हो जाये तब तक एक कृत्रिम फ़ेफरे की तरह काम करना। ⭕️ 🫁
✅ वेंटीलेटर फ़ेफरे की जगह मरीज़ को साँस देता है ताकि सुचारू रूप से मरीज़ को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता रहे।
वेंटीलेटर में कई mode होते हैं जो मरीज़ के स्थिति के अनुसार बदले जा सकते हैं।
उदाहरण के लिए अगर मरीज़ का फ़ेफ़रा पूरी तरह ख़राब है तो उसमें mode अलग होगा और अगर फ़ेफ़रा 50% ख़राब है तो उसका mode अलग होगा|
इसे आप ऐसे भी समझें की अगर मरीज़ का फ़ेफ़रा पूरी तरह से ख़राब है तो वेंटीलेटर पूरी तरह से फ़ेफरे का काम कर सकता है ।
और फ़ेफ़रा अगर आधा ही काम कर रहा तो फेफरे का बचा हुआ आधा काम वेंटीलेटर कर सकता है ताकि फ़ेफरे पर कम दवाब पड़े जिससे की वो जल्द ठीक हो जाए।
जैसे जैसे मरीज़ के साँस लेने की क्षमता ठीक होती है, वैसे वैसे वेंटिलेटर के mode में बदलाव किया जाता है। और जब मरीज़ ख़ुद से अच्छे तरीक़े से साँस लेने लगता है तो उसे वेंटीलेटर से हटाया जाता है।
चूँकि वेंटीलेटर पर रखे जाने वाले मरीज़ की स्थिति काफ़ी गंभीर रहती और और वो बेहोश रहते हैं या उन्हें बेहोश रखा जाता है इसीलिए जानकारी के अभाव में लोगों में यह संशय रहता है कि उन्हें धोखे में रखा जा रहा है।
तो हमेशा ध्यान रखें कि अगर मरीज़ की साँस लेने की क्षमता किसी भी बीमारी/चोट से प्रभावित हो सकती है तो उन्हें वेंटीलेटर पर रखने की ज़रूरत पड़ सकती है।
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@StarHealthIns के एक नहीं हज़ारों ऐसे मामले हैं ।
अगर हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे हैं तो star health को avoid ही करना बेहतर ।
अगर ले रखा है तो किसी और कंपनी में अगले बार switch कर लें
Naresh Jain@NareshJ57438
@drprashantmish6 #StarHealthInsurance my father is having fever for last 8 days , fever of more 100°f , needed admission, star health says patient does not need admission, we (star health ) wont pay for same. For what purpose do we buy medical insurance?
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जी कर दिया रिप्लाई ।
100 साल जिएँ आप 🙏🏼🙏🏼
Ramesh Saraswat@c_saraswatRam
@dranuj_k आपको सुबह DM में मैसेज किया है, पढ़ लेते तो मेरी जान बच जाती😣
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पुरानी पोस्ट मेरी ।
पढ़ लेते तो 10,000 बच जाते!!!!!
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अभी बुख़ारों का मौसम चल रहा है।
कई बार बुख़ार आते ही लोग घबरा कर ख़ुद से तरह तरह के जाँच करा लेते हैं जिससे बेवजह पैसे की बर्बादी होती है।
ज़्यादातर मौसमी बुख़ार ख़ुद से ही 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं।
क्या करें अगर बुख़ार आए
1) ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें
2) बुख़ार आने पर पैरासिटमोल की गोली लें
3) ज़्यादा से ज़्यादा पेय पदार्थ लें
4) सुपाच्य भोजन लें।
ये एक ग़लत अवधारणा है की बुख़ार में चावल या अंडा नहीं ख़ाना चाहिये। आप बिलकुल ले सकते हैं।
5) पीने का पानी उबाल कर फिर ठंढा कर के पियें।
6) गरम पानी में नमक डाल कर gargle करें
7) ORS घोल का उपयोग करें
❌कब हो जायें सतर्क और तुरंत लें चिकित्सकीय परामर्श ?❌
1) अगर आप पहले से ही अन्य बीमारी से ग्रसित हैं
2) अगर दवाई से भी बुख़ार कम ना हो या 3 दिनों के बाद भी बुख़ार आये
3) बुख़ार के साथ साथ पेट दर्द, डायरिया जैसे लक्षण हों
4) शरीर पे लाल धब्बे जैसे निशान आ जाएँ।
ऐसी परिस्थिति में अपने नज़दीकी चिकित्सक से मिल कर दिखाएं।
Prashanth Rangaswamy@itisprashanth
Just a simple fever - went to @ApolloClinics for consultation . Total bill - 9000 rupees . Blood test , swab test etc etc etc . Plus tablets worth 900 rupees . Absolutely not worth it .
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सही डॉक्टर का चुनाव कैसे करें:
1.अगर किसी भी क्लिनिक या अस्पताल का प्रचार कोई social media influencer कर रहा हो तो वहाँ कभी न जाएँ।
याद रखें, मार्केटिंग के एक-एक पैसे का बोझ मरीजों पर ही पड़ता है।
अगर किसी भी क्लिनिक को प्रचार के लिए influencer की ज़रूरत पड़ रही है तो वहाँ डॉक्टरों का स्तर न्यूनतम होगा।
2.ज़्यादातर Google रिव्यू फेक रहते हैं। उस पर आँख बंद कर भरोसा न करें।
3.मरीज को क्या बीमारी है, वो बीमारी क्यों हुई, इलाज के क्या-क्या उपाय हैं, इलाज न कराने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं —
ये सारी जानकारी अगर डॉक्टर न दें या न दे पाएँ तो second opinion लीजिए।
4.किसी भी डॉक्टर का अगर अपना फार्मेसी है तो वो चाहेंगे कि आप वहाँ से दवाई लें।
ये चाहने में कोई दिक्कत नहीं।
लेकिन “दवाई यहीं मिलेगी” या “दवा यहीं से लेनी पड़ेगी” — अगर वो ये कहते हैं तो इसमें दिक्कत है।
फिर डॉक्टर बदल लीजिए।
इसी तरह अगर कोई डॉक्टर कहे कि बस उनके यहाँ की लैब की रिपोर्ट ही मान्य होगी तो ऐसे डॉक्टर से बचें।
5.इलाज की गारंटी देने वालों से दूर रहिए।
ज़्यादातर वे गड़बड़ निकलते हैं।
6.Second opinion लेने की बात पर अगर कोई डॉक्टर भड़क उठे तो वो डॉक्टर ठीक नहीं।
7.ज़्यादातर समय, ख़ासकर ICU में गंभीर मरीज के बारे में लोग अक्सर डॉक्टर से सवाल करते हैं कि मरीज़ कब तक ठीक हो जाएँगे।
इस सवाल का जवाब किसी डॉक्टर के पास नहीं होता। वो भविष्यवक्ता नहीं हैं कि भविष्यवाणी करें।
मरीज़ की स्थिति कैसी है और जो इलाज चल रहा है उससे स्थिति में क्या बदलाव आ रहा है —
अगर डॉक्टर ये अच्छे से बता रहे हैं तो ठीक है।
8.डॉक्टर की डिग्री ज़रूर देखें।
डिग्री अच्छे से उनके पर्चे पर लिखी होनी चाहिए।
9.इलाज के खर्च को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए।
10.अगर डॉक्टर कोई जाँच या दवा लिखते हैं तो ज़रूर पूछें कि वो जाँच किस लिए लिखी जा रही है।
अच्छे डॉक्टर ज़रूर बताएँगे कि किस जाँच या किस दवा का क्या उद्देश्य है।
ये सारी चीज़ें प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर लागू होती हैं।
सरकारी अस्पतालों में समय के अभाव के कारण डॉक्टर ज़्यादा समय नहीं दे पाते,
लेकिन जो बुनियादी चीज़ें हैं वो उन्हें भी देनी चाहिए।
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रामगढ़ में Curesta Clinic का शुभारंभ, मरीजों को मिलेंगी सुपरस्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं lagatar.in/curesta-clinic… @dranuj_k
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आप अगर रामगढ़ या उसके आस पास के रहने वाले हैं तो ये जानकारी आपके लिए ।
Curesta Hospital रामगढ़ नर्सिंग होम के सौजन्य से Curesta Clinic की शुरुआत कर रहा है ।
Superspeciality स्वास्थ्य सेवाएँ रामगढ़ जैसे शहरों तक पहुँच सके इसके लिए ये एक अच्छी पहल है ।
इस क्लिनिक में कई विशेषज्ञ चिकित्सक जैसे
न्यूरोसर्जन, यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, जेनरल सर्जन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ नियमित रूप से रामगढ़ में परामर्श देंगे ।
कल से एक हफ़्ते निःशुल्क OPD रहेगी ।
अगर आप रामगढ़ या उसके आसपास रहते हैं तो इसका लाभ ले सकते हैं ।
कृपया इस जानकारी को साझा करें ।
और कल कोई साथी मौजूद हैं रामगढ़ में तो मिलते
हैं वहाँ 😊

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आपके मुँह की साफ़ सफ़ाई हृदय रोग के जोखिम से जुड़ी हुई है ।
कई रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि मुँह की साफ़ सफ़ाई ठीक से नहीं रहने पर हृदय रोग का ख़तरा बढ़ता है।
इसके दो मुख्य कारण हैं।
पहला ये कि मुँह की गंदगी की वजह से मसूड़ों में लंबे समय तक inflammation रहती है और शरीर में कहीं भी लंबे समय तक ऐसा inflammation हृदय रोग के ख़तरे को बढ़ाता है।
दूसरा ये कि मुँह के इन्फेक्शन में पाये जाने वाले कीटाणु आपके हृदय को भी आघात पहुँचा सकते हैं।
मुँह की साफ़ सफ़ाई ना सिर्फ़ आपके हृदय की बीमारियों को प्रभावित करती है बल्कि इसका संबंध मधुमेह/diabetes से भी है।
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@dranuj_k सर आपसे एक निवेदन है मेरी माँ को मुंह में 1 हफ्ते से छाले पड़े हुए है गले के अंदर कुछ खाने पर उसमे लगता है । गले के अंदर खराश जैसे बना हुआ है।
सर कोई मेडिसिन लिख दीजिए प्लीज सर। 🙏🙏
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रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की खबर अत्यंत दुखद और स्तब्ध करने वाली है।
एक ऐसी सेवा जो जीवन बचाने के लिए होती है, उसी का इस तरह हादसे का शिकार हो जाना हम सभी के लिए पीड़ादायक है।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें।
साथ ही आशा है कि इस दुर्घटना की गहन जांच हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और एयर मेडिकल ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा और मजबूत हो।

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