
ये वीडियो संघ के चौथे सरसंघचालक “राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया” का है…
जब दुनिया में कैरियर और मोटी सैलरी को लेकर अंधी दौड़ मची हुई थी, तब 1960 के रज्जू भैया ने ठीक उलटा रास्ता चुना।
फिज़िक्स के प्रोफेसर और HOD होते हुए उन्होंने VRS लिया और संघ के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण को ही अपना जीवन बना लिया।
तब देश के महान आणविक वैज्ञानिक होमी भाभा ने कहा था-
“संघ ने आणविक विज्ञान (मॉलिक्यूलर साइंस) की एक प्रतिभा को छीन ली।”
नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. सी.वी. रमन उनके उत्तरों, तर्कशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टि से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपने गाइडेंस में रिसर्च के लिए लेक्चरर का पद प्रदान किया।
संघ के प्रचारक के रूप में उन्होंने उत्तर भारत में बौद्धिक वर्ग, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रवादी चेतना को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रज्जू भैया के पिता ने प्रयागराज के सिविल लाइंस में उनके लिए एक घर बनवाया, किंतु उन्होंने उसे निजी संपत्ति मानने से इंकार किया और सरस्वती शिशु मंदिर को दान कर दिया…
भारत में #वामपंथी, #सेक्युलरवादी और #लिबरल जमात जहाँ एसी कमरों में बैठकर गरीबों के दुःखों पर विमर्श करती है,
वहीं रज्जू भैय्या ज़मीन पर उतरे, गाँव, बस्ती और विद्यालय तक पहुंचे… ताकि राष्ट्र भीतर से मज़बूत हो सके।
1977 में सह सरकार्यवाह,
1978 में सरकार्यवाह
1994 में सरसंघचालक बने।
यह वीडियो 30-35 वर्ष पुराना है लेकिन उनकी कहीं एक एक बात आज भी प्रासंगिक हैं…
सुनिए और समझिए राष्ट्र के लिए संघ के स्वयंसेवकों ने सदा सम्भ्रांत कमरे त्यागे हैं, अपनी नौकरी अपना व्यापार का नुक़सान किया है…
क्योंकि उनका नेतृत्व डॉ. हेडगेवार, गुरु जी और रज्जू भैया जैसे त्यागी और तपस्वी व्यक्तित्वों ने किया है।
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