
Financial Astrology- पंचांग का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अंग है तिथि। तिथि का सीधा संबंध चंद्रमा और सूर्य के बीच की दूरी से है। ज्योतिष शास्त्र में तिथि को 'मन की अवस्था' माना गया है और शेयर बाजार पूरी तरह से जनता के मन पर चलता है। तिथियों को गहराई में समझने के लिए इन्हें पांच वर्गों में बांटा गया है- नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा। इन्हें एक पौराणिक प्रवाह में इस तरह समझा जा सकता है जैसे समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकलने से पहले की विभिन्न अवस्थाएं रही होंगी। जब हम 'नंदा' तिथि (1, 6, 11) की बात करते हैं तो यह आनंद और नई शुरुआत का प्रतीक है। बाजार के संदर्भ में यह वह समय है जब निवेशक नई ऊर्जा के साथ खरीदारी शुरू करते हैं ठीक वैसे ही जैसे मंथन के आरंभ में देवताओं में उत्साह था। इसके विपरीत 'रिक्ता' तिथियां (4, 9, 14) खालीपन का प्रतीक हैं। इन्हें 'खाली हाथ' वाली तिथियां कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इन्हें वर्जित माना गया है क्योंकि इस समय की गई मेहनत का फल अक्सर नहीं मिलता। बाजार में भी 'रिक्ता' तिथियों के दौरान अक्सर वॉल्यूम कम रहता है या अचानक बिना किसी ठोस कारण के बिकवाली आ जाती है। यदि ट्रेडर रिक्ता तिथि के स्वभाव को नहीं समझता तो वह बाजार के उस जाल में फंस सकता है जहाँ सब कुछ सही दिखने के बावजूद ट्रेड गलत हो जाता है। वहीं 'जया' (3, 8, 13) विजय की तिथि है और 'पूर्णा' (5, 10, 15) पूर्णता की। जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं की ओर बढ़ता है (शुक्ल पक्ष) तो बाजार में लिक्विडिटी और उत्साह बढ़ता है लेकिन जैसे ही वह घटता है (कृष्ण पक्ष) बाजार में संकुचन या मुनाफावसूली हावी होने लगती है। तिथि का क्षय होना या वृद्धि होना बाजार में बड़े गैप (Gap up/down) का कारण बनता है। गहराई में देखें तो तिथि केवल एक नंबर नहीं है बल्कि यह बाजार के भीतर छिपे 'डर' और 'लालच' के संतुलन को मापने का पैमाना है। Jai Kedar..Kripa Apaar 🖤✨ #FinancialAstrology #Astrology








