Gopesh Tiwari

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Gopesh Tiwari

Gopesh Tiwari

@gopesh2009

Silent Observer…….

Sultanpur-Lucknow-Pune Katılım Temmuz 2010
333 Takip Edilen554 Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
उत्तिष्ठ प्राप्य वरान्निबोधत।
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
ब्राह्मण हिंदू पर अभिशाप भी हैं और अंत में कूल बनने के लिए “ सभी ब्राह्मण बुरे नहीं हैं” भी लगा लिया! अतुल जी की भी महिमा अपरंपार है ! खैर! कहानियाँ कभी मूर्खतापूर्ण अथवा नकली नहीं होती! प्रायः ही सबकी अपनी अलग कहानी होती है और विरोधाभासी भी उससे किसी की दृष्टि नहीं बदलती ! 😅
Atul Pal@Atul__pal

Brahmins are a curse on Hinduism. All these chootiyapanti had been taught by Brahmins. All stupid stories and these rituals. May Bhagwan Vishnu take care of our religion from these Bakchod Brahmans. PoV: Not all the Brahmans are bad. Only few of them who think that they are thekedar of our religion.

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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
हाँ मानते हैं कि सार्वजनिक जीवन जीने वाले का कुछ व्यक्तिगत नहीं होता है किंतु उस पर व्यर्थ टिपण्णी करके , अपने अनुमान मिश्रित तथाकथित सत्य को इस सार्वजनिक पटल पर रख आप ही कौन सा कद्दू में तीर मार ले रहे हैं !
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
वो आत्मतत्व कभी भी किसी भी कर्म से अपकर्ष को नहीं प्राप्त होता है किंतु उसमें असहजता आती है वैसी ही असहजता जैसे स्नान किए व्यक्ति को मैले कपड़े पहनने से होती है ! जो जानते हैं वो ही जान पाते हैं ! 😊😊
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
@Ps140692 स्कूल में कुल तीन बार में से दो बार मैं हँसने के लिए ही मार खाया हूँ ! भला बतावो अपने पहले ही दिन कोई अध्यापक आकर कहे कि देखो नया जानकर सब कुछ करना लेकिन हँसना नहीं तो भला कौन अपनी हँसी रोक सकेगा सो मेरे नाम नए अध्यापक द्वारा उसके पहले ही सत्र में मार खाने का रिकॉर्ड है! 😭😭
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Ekantt
Ekantt@ekantt·
June born are always jovial 🤷‍♂️
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
एक श्लोक था जिसमें तीन प्रकार के हस्तलेख वर्णित हैं ! १. ऐसा कि ख़ुद तो पढ़ ही लो दूसरे भी पढ़ पायें ! २. ख़ुद तो पढ़ लो किंतु आपका लिखा दूसरे ना पढ़ सकें ! ३. दूसरों को तो छोड़ो अपना लिखा कुछ समय बाद ख़ुद भी ना पढ़ सकें ! मैं स्वयं को हिंदी में ६/१० और अंग्रेजी में ५/१० दूँगा
Ekantt@ekantt

If you were to rate your own handwriting , how would you rate it on a scale of 1-10 Mine : 4

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tripti 1/0
tripti 1/0@tapai02·
@gopesh2009 मातृका शक्तियों का अपमान होता है
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tripti 1/0
tripti 1/0@tapai02·
Worst trend here is to criticize people without naming them in guise of TBH If you can not have courage to say it on face,don't say it Don't say anything you are not sure of
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
@Ps140692 सैफ मंझे हुए अभिनेता हैं इसमें किसी को कोई भी संदेह नहीं होना चाहिए !
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
@Vaibhavsingh008 मम्मी तो नहीं लेकिन गांव में किसी को ये कहते सुना है - “नर्री बहुत बाढ़ गै बाय ना तोहाय , एक्कै कंटाप मा सही होय जाये !”
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Vaibhav Singh Rajput 🇮🇳🚩
मैं जैसे ही घर में आवाज ऊंची करता हूं माता जी उधर से बोलती हैं नटइया धई के चीर देब... मित्रों आप लोग के वहां क्या प्रतिक्रिया होती है
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
थोड़ा सा छोटी हो सकती थी किंतु कहानी और अभिनय दोनों ही बढ़िया है !
Gopesh Tiwari@gopesh2009

So its #Mareesan time guys 😊😊😊

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Pankaj Sharma
Pankaj Sharma@Ps140692·
@gopesh2009 आजकल तो केवल दूल्हा, उसके पिता जी और भाई ही बचते हैं सुबह तक 😂
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
दशक भर पहले बारात में जब सब द्वारचार एवं भोजन इत्यादि में व्यस्त होते तो प्रायः गाँव के बच्चों की चण्डाल चौकड़ी जनवासे आकर टेंट वाली चारपाई को इस तरह व्यवस्थित करते कि उस पर बैठते ही अधेड़ लोग गिर पड़ें ! क्या ही दिन थे वो ! अब तो दस लोग भी रुकने वाले नहीं होते बारात में !
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
“देव विधान नहीं बनाते किंतु वो विधानों का सम्मान अवश्य करते हैं ! प्रकृति किसी विधान को नहीं मानती है ! ये द्वैध भी लोगों को मोहित कर देते हैं ! माया महज एक ही रूप में सामने नहीं आती हैं !” “इस संदर्भ में मोह क्या है ? देवों द्वारा विधानों का सम्मान अथवा प्रकृति की स्वतंत्रता ?”
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Gopesh Tiwari
Gopesh Tiwari@gopesh2009·
हमने देखा है देवों को शापित होते हुए ! जीवन निष्ठुर हो सकता है किसी के लिए भी ! जीवन में व्याप्त कष्टों के आधार पर किसी के चरित्र का अनुमान लगाना कठिन है ! संत जन इससे बचते हैं !
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