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Aadil_Hashmi7806
@hashmi7806
Nisar Teri Chehal Pehal Par Hazaron Eiden Rabiul Awal Siwae Iblees K Jahan Me Sabhi To Khushiyan Mana Rahe Hain Nareeeeeeeee RIsalat ya RASOOL ALLAHA
Katılım Aralık 2021
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क्या "उनके" इलाके से शोभायात्रा निकालना गलत है? क्या वे हिन्दू इलाको से ताजिये के जुलूस नहीं निकालते?
क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन को दिक्कत नही। मुसलमानों को क्यो है? हिन्दू अपने देश में डरकर रहे, क्या यही सेकुलरिज्म है?
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ऐसे सवाल, तोहमतें है।
जवाब सिलसिलेवार समझ लें।
मुस्लिमो को आपने टेरराइज कर रखा है। डरा हुआ व्यक्ति, रस्सी को भी सांप समझ लेता है।
फिर तो जो लोग शरारतन उनके इलाके में नग्नोत्सव मनाते हुए घुसते है, असल में साँप ही है।
क्योकि इनके इरादों पर किसी को शक नही पूरा विश्वास है। ये लोग उनकी मान, मर्यादा, भावनाओ और सुरक्षा को ठेस पहुचाने के इरादे से ही वहां से जुलूस निकाल रहे है।
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और अपने बाल बच्चो के पास लहराता सांप देखकर आप पूछते नही की- भैया, जहरीले हो, या मासूम वाले..
उस सांप को मरना ही है।
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किसी भी जुलूस का रूट प्रशासन को तय करना है। एप्रूवल लिए बगैर, जुलूस निकलना गलत है,
संवेदनशील रुट से एप्रूवल दिया गया, तो प्रशासन की भी मिलीभगत है। क्योकि उसका काम किसी समस्या से निपटना कम, समस्या को पैदा नही होने देना ज्यादा है।
तो कौन मूर्ख अफसर है, जो शोहदों का जुलूस ऐसे इलाके से जाने दे, जहां की हरकतों से दंगा भड़कने के पूरे चांस हो?
अब या तो अफसरों को नौकरी की परवाह नही, या फिर उन्हें ऊपर से आदेश है।
याने खेला कोई और कर रहा है।
तो सोचो, पत्थर किसने फ़ेंकवाये होंगे?
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ताजिये बिल्कुल निकलते है, हिन्दू इलाको से निकलते हैं।
पर किसी मंदिर पर चढ़, भगवा उखाड़ कर, हरा झंडा लगाते नही देखा। अगर करे, तो यह क्लियर प्रोवोकेशन है।
असामाजिक गतिविधि है,
गुंडई है।
किसी का आजाद अधिकार नही। अगर कोई ऐसा करे, और मारा जाए- तो कतई सहानुभूति नहीं।
अब वह झंडा किसी भी हिन्दू धर्म का उखाड़ रहा हो, या इस्लाम का। पुलिस की गोली से मरे या अपोजिट दंगाई की गोली से..
देश हित मे उसे जल्द मरने दो।
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क्रिश्चियन को भी दिक्कत है, जहां जहां उन्हें टारगेट किया गया है। मणिपुर देख लो।
बौद्धों, जैनों को टारगेट किया जाने लगेगा, तो उन्हें भी दिक्कत होगी। वे भी हर रस्सी को सांप, और सांप को एनाकोंडा समझेंगे। यह होस्टाइल एटमॉस्फियर में रहने वाले की साइकी है।
आप तो लठमार संघी बने, लेकिन वह गांधीवादी हो जाये, आपके तय करने की चीज नही। वो कुछ और हो सकता है।
डू एट योर ओन रिस्क।
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मेरा सेकुलरिज्म यह कहता है कि ऐसे तमाम जुलूस बन्द होने चाहिए। ताजिये, नमाज, पंडाल, विसर्जन, परकास पर्व, सब बन्द करो।
नोच डालो लाउडस्पीकर,
मन्दिरो, मस्जिदों, गुरुद्वारों से।
अपना उत्सव अपने घर मे मनाओ, या धार्मिक स्थल की चारदीवारियों में। शान्ति से -बिना शोर, नाच, हथियार, भीड़ के बगैर।
बाहर आये तो हंटर पड़ें।
धर्म, शौच निजी चीज है। निर्धारित जगह पे करें। घूम घूमकर करेंगे तो गंदगी, बीमारी और अश्लीलता फैलेगी। सड़क पर तो कतई इजाजत न हो।
सड़क चलने के लिए है।
सिर्फ चलने के लिए।।
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सवाल यह भी की कोई इलाका "उनका" कैसे है?
इसलिए कि आपने उन्हें हर कालोनी, हर मोहल्ले से भगा दिया है। उन्हें एक दड़बे, एक घेट्टो, एक बाड़े में तो कैद कर दिया है।
अब उस बाड़े में चैन से जीने दो। वहां भी क्यो घुसना चाहते हो। मुर्गियों को दड़बे में बंद कर दिया, इतनी विजय से संतोष नहीं। दड़बे में भी घुसकर कौन सोता है जनाब??
तो वह "उनका इलाका" है।
ग्रांट करो, शांति उसी में है।
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हां, यह अफसोसनाक है। इसका इलाका- उसका इलाका नही होना चाहिए। सबको सर्व धर्म समभाव से रहना चाहिए। लाउडस्पीकर भी एलाउ हो, जुलूस भी।
पर इसका डेकोरम मेंटेंन करने का शऊर नही, तो बन्द करना श्रेयस्कर है।
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वरना याद रखें, सहने की सीमा होती है। तब तक, जब तक जान माल और मान गए नही, बस जाने का डर बना हो।
पर जब बाल बच्चे, जानोमाल जाना तय ही लगने लगे, तो दुनिया की कोई कौम-वह हिन्दू हो, मुस्लिम हो, क्रिश्चियन, कम्बाला बुन्तु या शिंतो हो, कमिकाजे बन जाता है।
और जो मरने की ठान ले, उसका कुछ नही जाता, बस जान जाती है। लेकिन उसके परिवेश के चीथड़े उड़ जाते हैं।
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वो परिवेश, आपका मेरा घर है। हमारे बच्चे, दोस्त, घर, गांव, शहर देश है।
जब देश टूटेगा, तो दस पांच नए प्रधानमंत्री की कुर्सी बनेगी। नेताओ का लाभ है, आपको कुछ नही मिलेगा। बस, आगे दो पीढियां फिर शांत बैठेंगी, जैसे देश तोड़वाने वालो की पिछली दो पीढियां शांत बैठी।
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फिर आपके जैसी एक नई मूर्ख पीढ़ी आएगी। जो पूछेगी
क्या "उनके" इलाके से शोभायात्रा निकालना गलत है? क्या वे हिन्दू इलाको से ताजिये के जुलूस नहीं निकालते?
क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन को दिक्कत नही। मुसलमानों को क्यो है? हिन्दू अपने देश में डरकर रहे,
क्या यही सेकुलरिज्म है?

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''पूरा घर जला हुआ है। बच्चों को भी फूंक देते। हम लोगों की कोई गलती नहीं है। उनसे हमारा कोई संबंध नहीं है। बस मुसलमान हैं, ये लेना-देना है। कुछ नहीं रह गया, दुनिया जल गई हमारी। एक दिन का खाना तक नहीं छोड़े, वो भी जला दिया''
बहराइच, यूपी हिंसा पीड़ित की जुबानी...
@ImAvdheshkumar
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आज गोपाल मिश्रा की मौत का सुनकर बहुत बुरा लगा.. एक हँसता खेलता जीवन हिंसा की भेंट चढ़ गया...
इस वीडियो को आज पोस्ट करना बनता है.
कैसे सियासत SC ST, ओबीसी के बच्चों का उपयोग करती है..
कभी देखा है नेताओं के बच्चों को तलवार उठाते हुए?? सुनिए
#Behraich
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घटना बीती रात की है। रामलीला मंचन के दौरान हरिद्वार जेल से दो कैदी फ़रार हो गए। इधर माता सीता की खोज हो रही थी उधर दो वानर रूपी कैदी दीवार फाँद कर भाग निकले। सब रामलीला मंचन के दृश्यों में डूब थे और ये दोनों सीढ़ी लगाकर दीवार लांघ गए।
फ़रार हुए दोनों क़ैदी जघन्य अपराधों के दोषी है। प्रदेश की जेलों से 500 से ज़्यादा क़ैदी पहले ही फ़रार है दो और निकल लिए। तलाश जारी है।
@pushkardhami
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@ChandanSharmaG का नया बाप लॉरेंस बिश्नोई कितने लोग सहमत है।
Chandan Sharma@ChandanSharmaG
लॉरेंस विश्नोई का जलवा है 🔥 सलमान खान की मुंह बोली बहन राखी सावंत अब #LawrenceBishnoi से डरकर पूरे विश्नोई समाज से माफी मांग रही है। लॉरेंस बिश्नोई तो फालतू में बदनाम है, वह तो साबरमती जेल में बंद है और एक व्यक्ति जेल में बंद होकर क्या कर सकता है? लेकिन डर अच्छा है काले हिरण का शिकार करने से पहले सलमान खान को एक बार सोचना चाहिए था
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___आज सुप्रीम कोर्ट में ,,
मुफ़्ती सलमान अज़हरी साहब का ज़मानत पर सुनवाई है।
खुसूसी दुआ ज़रूर करे ❤️!!
#ReleaseSalmanAzhari

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भाजपा शासित महाराष्ट्र और हरियाणा में बीते 24 घंटे में मॉब लिंचिंग की दो वारदात हुई हैं।
महाराष्ट्र में ट्रेन में सफर कर रहे हाजी अशरफ पर गौमांस ले जाने का आरोप लगाकर जानवरों की तरह पीटा गया, शुक्र है उनकी जान बच गई।
हरियाणा के चरखी दादरी में बंगाल के मजदूर साबिर मलिक को सिर्फ संदेह में तथाकथित गौरक्षकों ने पीट-पीट कर मार डाला।
दोनों ही घटनाएं असहनीय और अस्वीकार्य है।
मॉब लिंचिंग की इन वारदातों के ख़िलाफ सरकारें सख्त नहीं हो रही हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि आखिर कब तक हमारे लोगों को "मॉब लिंचिंग" के नाम पर यूं ही बेरहमी से कत्ल किया जाता रहेगा?
मॉब लिंचिंग करने वालों को मृत्यू दंड दिया जाना चाहिए, वरना मॉब लिंचिंग की ये घटनाएं होती रहेंगी। मैं सम्बन्धित राज्य सरकारों से मांग करता हूं मॉब लिंचिंग में जान गंवाने वाले मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपया बतौर मुआवज़ा दिया जाए और मुआवज़े की ये रक़म मॉब लिंचिंग करने वालों से वसूली जाए। ताकि पता चले कि हमारे लोगों की जान, उनका लहू इतना सस्ता नहीं है कि उसे यूं ही बहा दिया जाए। सरकार या तो इन घटनाओं पर पूर्ण विराम लगा ले, वरना मैं पूरे देश में आंदोलन करूंगा।
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