रुद्र ✍️

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@hello_dhruv_

MBBS 🩺, टॉक्सिक, अल्हड़, शायर, घुमक्कड़, और आवारा हूं। कभी-कभी कहानियां भी लिखता हूं । ✨

नर्क की आग से शब्द चुराते हुए। Katılım Temmuz 2025
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
कुछ दिन पहले की बात है, रात का समय था, बारिश हो रही थी। मैं एक सुनसान बस स्टॉप पर पहुंचा, वहां एक लड़की खड़ी थी। उसकी साड़ी बारिश में भीग चुकी थी, और वह ठंड से कांप रही थी। उसका चेहरा थोड़ा उदास था, शायद वह देर रात अकेले इस सुनसान जगह पर होने से घबराई हुई थी ।
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राधा
राधा@Prem_Ki_Boli·
माँ के जाने के बाद मायक़ा मायक़ा सा नहीं लगता 😔
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
यदि तुम एक पुरूष हो.. और तुम्हारी सांसें चल रही हैं तो तुम्हे कदापि यह अधिकार नही कि तुम जीवन में हार मान जाओ, शर्त यह है कि यदि तुम पुरूष हो।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
वर्तमान समय में पुरुषों को बहुत धन कमाना अति आवश्यक हो गया है क्योंकि कमाई से ही उनकी पहचान होती है, सिर्फ पालन पोषण से कुछ नही होता आजकल, स्त्री के सभी शौक भी पूरे होने चाहिए, वह त्याग करके पुरुष के साथ नहीं रहना चाहती, जो पुरुष कम कमाते हैं स्त्री उनका सम्मान कभी नही करती ।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
आज भी और पिछले बहुत समय से मुझे कई लोगों ने पूछा कि जो कहानीयां मैं लिखता हूं उनका मेरे जीवन से क्या ताल्लुक है । मैंने कई लोगों को उत्तर दिया और आप सभी से कहना चाहता हूं कि आप कहनियों का सिर्फ़ आनंद लें, इन कहानियों के पीछे कुछ प्रेरणा होती है और सभी कहानियां काल्पनिक हैं ।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
मैं अनायास ही अक्सर खुद को चोटिल करता रहता हूं, क्योंकि दर्द मुझे हमेशा से ही अच्छा महसूस होता है। मै उसे अपने शब्दों मे पिरोता हूँ, कविताओं मे जीने देता हूँ, कहानियों मे साँस लेने देता हूँ। यह मेरे भीतर का वह ज्वालामुखी है जो कभी-कभी शांत दिखता है लेकिन अंदर लावा हमेशा रहता है।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
अगर तुम पुरूष हो तो संघर्ष करो, अपनी परिस्थिति से डर कर भागो नही उससे लड़ो, डटकर सामना करो, पुरूष खूबसूरती के लिए नहीं बनाया गया है, लेकिन तुम संघर्ष करते रहो एक दिन तुम सबकुछ पा लोगे क्योंकि सुकून मुर्दों पर अच्छा लगता है, एक मर्द पर नही ।
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राघवेन्द्र चतुर्वेदी
इस सुनहरी रात में, जब खिड़की के बाहर चाँद अपनी रेशमी रौशनी को धरती पर धीरे-धीरे बिखेर रहा है और सारी दुनिया जैसे अपने सपनों की चादर ओढ़कर सो चुकी है, मेरी कलम अब भी जाग रही है। वह किसी किताब के लिए नहीं लिख रही, किसी कहानी के लिए नहीं लिख रही, वह सिर्फ तुम्हारे लिए लिख रही है। ऐसा लगता है जैसे मेरे हाथ में पकड़ी ये साधारण सी कलम आज स्याही से नहीं, तुम्हारी यादों से भरी हुई है। मैं जब भी कोई शब्द लिखता हूँ, ऐसा महसूस होता है मानों उन शब्दों के बीच कहीं तुम्हारी उँगलियाँ छिपी हुई हैं। हर वाक्य में तुम्हारी आहट है, हर विराम में तुम्हारी खामोशी, हर पंक्ति में तुम्हारी मुस्कान और सच कहूँ, आज रात मैं तुम्हें लिख नहीं रहा, मैं तुम्हें महसूस कर रहा हूँ। कितना विचित्र है ना, कोई इंसान सामने न हो, फिर भी उसकी उपस्थिति चारों ओर फैली हुई लगे। जैसे तुम इस कमरे में नहीं हो, फिर भी इस कमरे की हर चीज़ तुम्हारी बात कर रही है। मेरी मेज़ पर रखी डायरी, आधी भरी हुई चाय की प्याली, खिड़की पर टिके परदे, यहाँ तक कि दीवार पर पड़ती चाँदनी भी जैसे तुम्हारा नाम जानती हो। आज मेरी कलम जब कागज़ पर चलती है तो ऐसा लगता है जैसे वह शब्दों में तुम्हें छू रही हो। तुम्हारे माथे पर बिखरी हुई लटों को सहेज रही हो। तुम्हारी हथेलियों की गर्माहट को महसूस कर रही हो। तुम्हारी आँखों में उतरकर वहाँ छिपे उन अनगिनत अनकहे भावों को पढ़ रही हो जिन्हें शायद तुमने कभी किसी से नहीं कहा। तुम्हें पता है, प्रेम हमेशा बड़े-बड़े इज़हारों में नहीं मिलता। कभी-कभी वह किसी शांत रात में एक अकेले आदमी की डायरी के पन्नों पर उतर आता है। वह उन शब्दों में बस जाता है जिन्हें कोई पढ़े या न पढ़े, पर लिखने वाला उन्हें लिखकर थोड़ा और जीवित हो जाता है। आज मैं तुम्हें किसी उपमा में नहीं बाँधना चाहता। तुम चाँद हो, सितारा हो, फूल हो, नदी हो, ऐसी बातें दुनिया बहुत करती है। मैं तो बस इतना जानता हूँ कि जब तुम्हारा ख़याल आता है तो मन के भीतर फैला हुआ सारा शोर धीरे-धीरे शांत होने लगता है। जैसे किसी बेचैन झील पर अचानक हवा रुक जाए और पानी अपने भीतर आसमान को समेट ले। तुम्हारी याद मेरे लिए किसी उत्सव जैसी नहीं है जो कुछ घंटों के लिए आए और चला जाए। वह तो किसी मंदिर में जलते हुए उस अखंड दीपक की तरह है जो बिना शोर किए, बिना किसी प्रदर्शन के लगातार प्रकाश देता रहता है। मैं अपने दिनों की थकान, अपनी बेचैनियाँ, अपने अधूरेपन, अपनी छोटी-छोटी खुशियाँ सब उसी दीपक के सामने रख देता हूँ। इस रात की सुनहरी नीरवता में मुझे ऐसा लगता है जैसे ब्रह्मांड की सारी दूरियाँ समाप्त हो गई हों, जैसे समय ने चलना बंद कर दिया हो, जैसे मैं और तुम किसी ऐसी जगह बैठ गए हों जहाँ शब्दों की आवश्यकता ही नहीं रह गई। वहाँ सिर्फ एहसास हैं, सिर्फ धड़कनों की भाषा है, सिर्फ वह मौन है जिसमें प्रेम अपने सबसे शुद्ध रूप में जन्म लेता है। मेरी कलम अभी भी चल रही है। वह शायद जानती है कि तुम्हारे बारे में लिखते हुए कोई अंत नहीं होता। प्रेम का कोई अंतिम वाक्य नहीं होता। वह तो हर पूर्ण विराम के बाद एक नया पृष्ठ खोल देता है। और इसीलिए, इस रात के अंतिम पहर में, जब चाँद अपनी रौशनी समेटने की तैयारी कर रहा है, मैं अपनी डायरी में तुम्हारे लिए बस इतना लिखना चाहता हूँ.... कि अगर कभी मेरे शब्दों को छुओ, तो तुम्हें उनमें मेरी उँगलियों की गर्मी नहीं, मेरा हृदय धड़कता हुआ मिलेगा। अगर कभी मेरी लिखी हुई पंक्तियों को पढ़ो, तो उनमें अक्षर नहीं, तुम्हारे लिए रखी गई अनगिनत प्रार्थनाएँ मिलेंगी। और अगर कभी इस सुनहरी रात जैसी किसी शांत घड़ी में मेरी याद आए, तो ये समझ लेना कि कहीं कोई इंसान अपनी मेज़ पर झुका हुआ, आधी रात के सन्नाटे में, अब भी तुम्हें शब्दों में छूते हुए महसूस कर रहा है इतनी कोमलता से, जैसे कोई भक्त अपने आराध्य के चरणों पर फूल रखता है, इतनी श्रद्धा से, जैसे कोई नदी समुद्र से मिलते समय अपने समूचे अस्तित्व को समर्पित कर देती है, और इतनी मोहब्बत से कि उसके पास कहने को बहुत कुछ हो, फिर भी वह अंत में सिर्फ तुम्हारा नाम लिखकर चुप हो जाए। ❣️😌 ©® राघवेन्द्र चतुर्वेदी ❣️ (एक लड़का जो हर कहानी में खुद को ढूंढता है)
राघवेन्द्र चतुर्वेदी tweet media
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
रातें लंबी और उदासीन हो चली हैं.. लेकिन फिर भी, इस सबके बीच एक अजीब सी शांति है। मुझे खुशी है कि मेरा एक दोस्त है- दुःख..। ये दोस्त कभी धोखा नहीं देता। ये मेरे साथ बैठता है, जब कोई और नहीं होता, मेरी पीड़ा को समझता है। दुःख मेरा साथी है, जो मुझे सिखाता है कि जीवन सिर्फ़ हँसी नही।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
सारे दरवाजों के पीछे स्वयं से एक सवाल.. तूने क्या किया, जो सब छोड़ गया? अब थक गया हूँ कोशिशो से.. ये दुख भरा हुआ है इतना कि हर कोशिश पर एक नई चोट है। खुद को कोसता हूँ रात-रात भर, क्यों जीया तू, क्यों न मर गया? पीड़ा अब हड्डियों मे समाई है, कोशिशें व्यर्थ है.. बस अनंत दुख ही बचा।
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रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
उसकी यादों से मेरे भीतर के गहरे घाव सुलग उठते हैं, फिर भी जब मुझे याद आती है उसकी हंसी की कोमल गर्माहट तब मेरा दर्द पिघलकर भीतर ही शून्य हो जाता है। जब वो पास आती है, मेरी सांसे रुक सी जाती है, और उन आंखों से वो मेरे हृदय मे प्रेम के उम्मीद रूपी पेड़ की नरम जड़ें बो देती है ।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
मैं उनसे भीतर का दर्द कहता रहा, वो कहानियां समझ कर वाह कहते रहे ।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
मेरी प्रिए, तुम्हारे बिन ये अकेलापन ऐसा दर्द बन गया है जो मेरे दिल को हर पल चीरता है। तुम्हारी वो सुंदर सी काली बिंदी अब खालीपन की निशानी बनकर मेरे सामने तैरती है। वो कमरा जहाँ तुम्हारी हंसी गूंजती थी अब सन्नाटे का ठिकाना बन गया है, और हर कोना मुझे तुम्हारी कमी का एहसास कराता है।
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रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
मैं उससे दूर हूँ, पर उसकी याद मेरे अंतर्मन को काट-काट कर चिथड़ों में बिखेर देती है, जैसे भूखे शिकारी किसी शिकार की मांस को नोच-नोच कर हड्डियाँ तक साफ कर दें। मन अब एक मृत गुफा है जहाँ सिर्फ़ दर्द की चीखें गूंजती हैं और मैं उस गुफा में अकेला बैठकर अपनी लाश को गले लगाएं बैठा हूं ।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
विरह की प्रत्येक सांस एक आग का गोला है, जो मेरे अंतर्मन को झुलसा देता है। रात मेरे दर्द की नर्क-कुंड है, जहाँ अंधेरा एक जल्लाद है, जैसे भूखे शवभक्षी.. जो मांस को नोच-नोच कर लहूलुहान कर दें। मेरा दिल एक जलता अंगारा है, उस आग मे झुलसकर अपनी ही पीड़ा को चूमते हुए खत्म हो जाता हूँ।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
कभी-कभी लगता है ये दर्द अब मेरा साथी है। जो कांटे मेरे दिल में चुभे है इन्हे निकालने की हिम्मत नहीं बची। क्योंकि अगर इन्हें निकाल दिया, तो शायद तुम्हारी आखिरी निशानी भी मुझसे छिन जाएगी। मैं इस दुख में डूबकर भी तुम्हें जी रहा हूँ, क्योंकि ये दर्द ही अब मेरे प्रेम की आखिरी कड़ी है।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
कभी-कभी रात के सन्नाटे मे, मै तुमसे बात करने की कोशिश करता हूँ। मै तुम्हें बताना चाहता हूँ कि ये दर्द कितना गहरा है, कि तुम्हारे बिना ये दुनिया कितनी बेरंग, कितनी ठंडी हो चुकी है। पर मेरे शब्द हवा में तैरते हुए बिखर जाते हैं, और जवाब में सिर्फ चारों ओर चुप्पी भरा सन्नाटा होता है।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
तुम जब मेरे पास होती हो तो समय ठहर सा जाता है, पुरानी यादें मन को कसकर जकड़ लेती हैं, जैसे बंधन बन जाएँ। नजरों में एक स्नेह की नदी बहती है, जो मेरे सूखे दिल में प्रेम की हरी भरी घास बो देती है.. स्पर्श से मेरी आत्मा थरथराती है, दर्द की जंजीरें ढीली पड़ने लगती हैं, पर टूटती नहीं।
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रुद्र ✍️
रुद्र ✍️@hello_dhruv_·
मेरा प्रेम एक काला साया है, जो मुझे दफन करता है उसकी यादों में, हर सांस एक कांटा, जो फेफड़ों को चीरकर जीवन चूस लेता है। रातें मेरे दर्द के लिए श्मशान हैं, जहां मै उससे दूर हूँ, पर उसकी याद मेरे जिस्म को चीरती है, जैसे कोई बेरहम हवा आग की लपट से सूखी पत्तियों को तार-तार कर रही हो।
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