Isht Deo Sankrityaayan

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@idsankrityaayan

Just a man of letters; having two restless legs... Thoughts personal. Retweet ain't endorsement.

Ghaziabad Katılım Nisan 2010
509 Takip Edilen745 Takipçiler
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
@arvindvnsingh अब ये बुरी तरह हारने के बाद न हारने की एक नई परंपरा शुरू की जानी चाहिए। अभी तक राहुल गांधी नैतिक जीत का ही नया रिवाज चला पाए थे, अखिलेश जी नीचे से जीतने की परंपरा कायम करेंगे। लोकतंत्र को गुंडातंत्र बनाने वाले पिता-पुत्र से और अपेक्षा ही क्या की जाए!
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
“भारत में लोकतंत्र ख़त्म, संविधान की उड़ी धज्जियाँ” “आप चुनाव हारी नहीं हैं” — अखिलेश यादव जी ने ममता बनर्जी से कहा था। किंतु फिर भी राज्यपाल ने ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। अब जब अखिलेश जी ने कह दिया था, तो बात वहीं समाप्त मान लेनी चाहिए थी। चुनाव आयोग, राज्यपाल और राष्ट्रपति जी — सबको इसे स्वीकार कर लेना चाहिए था। आख़िर वह एक मुख्यमंत्री के सुपुत्र हैं, स्वयं भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, और सबसे बड़ी बात — सैफ़ई से चलकर केवल यह बताने के लिए कोलकाता पहुँचे थे। अगर उनकी बात भी नहीं मानी गई, तो फिर लोकतंत्र और संविधान का मतलब ही क्या रह गया!
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
बंगलोर में एक सेंटर पर यही हुआ तो तीन प्रोफेसर सस्पेंड कर दिए गए। गुजरात में यही करने वालों पर कार्रवाई कब होगी? या भाजपा का हिन्दूप्रेम केवल वोट बटोरने तक सीमित है? यह #examterrorism है। ●
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
“हृदय में काबा और नयन में मदीना” गाने वाली टीएमसी की सांसद सुश्री सायोनी घोष ने मंच से किया दुर्गा सप्तशती के मंत्र का अशुद्ध और अभद्र पाठ…… वोट के लिए टीएमसी की सांसद सुश्री @sayani06 ने मंच से जिस प्रकार दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र के पावन मंत्र का अशुद्ध, त्रुटिपूर्ण और अभद्र उच्चारण किया है, उससे स्पष्ट होता है कि उन्हें दुर्गा उपासना के पवित्र ग्रंथ “दुर्गा सप्तशती” के प्रति न तो श्रद्धा है और न ही समुचित जानकारी। यदि होती, तो वे उसका पाठ अत्यंत श्रद्धा और शुद्धता के साथ करतीं। मंत्र है — “रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।” (हे माँ! रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और द्वेष का नाश कीजिए।) सायोनी ने पढ़ा — “रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो देहि।” उन्होंने “द्विषो जहि” के स्थान पर “द्विषो देहि” कहा, जिसका अर्थ हुआ — “विद्वेष, अर्थात् ईर्ष्या/द्वेष/कलह दीजिए।” जो माँगा जाता है, वही प्राप्त होता है। आज नहीं तो कल उनकी पार्टी में विद्वेष, ईर्ष्या और कलह अवश्य दिखाई देंगे। दुर्गा सप्तशती के मंत्र अमोघ माने जाते हैं। @AmitShah @BJP4India @sunilbansalbjp @amitmalviya @scribe9104 @Sanjay_Dixit
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@arvindvnsingh कुल मिलाकर सारे राजनीतिक दल केवल आरक्षण के भरोसे जीना चाहते हैं। अयोग्य लोग अयोग्यता को सिर चढ़ाना चाहते हैं। यह भारत के राजनैतिक दलों की दिशाहीनता और दृष्टिहीनता दोनों को उजागर करता है।
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
Rahul के खानदान की “सच्चाई”: इनके परनाना Jawaharlal Nehru एक प्रतिशत भी आरक्षण दिए जाने के पक्ष में नहीं थे। इनकी दादी Indira Gandhi ने Mandal Commission की सिफारिशों को लागू नहीं होने दिया। इनके पिता Rajiv Gandhi ने अपने जीवन का सबसे लंबा भाषण भारत की संसद में आरक्षण के विरोध में दिया था। और अब ये बाबा राहुल नब्बे प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। ग़ज़ब है। इनको दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों से कोई लेना-देना नहीं; ये सिर्फ देश में आग लगाना चाहते हैं। जिस व्यक्ति की भारतीय नागरिकता संदिग्ध हो, उससे और क्या उम्मीद की जा सकती है?
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
“मध्ये सुधाब्धि मणिमण्डप रत्नवेद्यां, सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णाम्। पीताम्बराभरणमाल्य विभूषिताङ्गीं, देवीं स्मरामि धृतमुद्गर वैरिजिह्वाम्॥” ब्रह्मास्त्र स्वरूपिणी, दशमहाविद्याओं में अष्टम महाविद्या, शक्ति और स्तम्भन की अधिष्ठात्री माँ बगलामुखी के पावन प्राकट्य दिवस पर आप सभी को अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ पीताम्बरा दुष्टों के अहंकार, अन्याय और असत्य का नाश कर धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना करती हैं। उनकी आराधना से शत्रुओं के दुष्ट विचारों का स्तम्भन होता है, वाणी में अद्भुत प्रभाव आता है, और साधक को साहस, विजय एवं आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह पावन अवसर हम सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्थिरता, बुद्धि और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा लेकर आए। माँ बगलामुखी की कृपादृष्टि आप सभी पर सदैव बनी रहे। 💐🙏 जय माँ पीताम्बरा 🙏💐
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
@arvindvnsingh इन्होंने तो पूरे देश को धोखा दिया है। दो-चार अगर इन्हें भी धोखा दे दें तो कौन सी बड़ी बात हो जाएगी!
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
बाप के नाम पर टिके हुए लोग, ईमान से बिके हुए लोग। करते हैं बरगद कि बातें, ये गमले में उगे हुए लोग !!🤔
Surendra Rajput ‏@ssrajputINC

कभी सोचिएगा की यह कौन सी मिट्टी से बने हुए लोग हैं । इनके अपने,बेहद क़रीबी, बहुत सगे बनने वाले इन्हें धोखा देकर निकल जाते हैं । जिनपर इनके हज़ारहाँ एहसान हों,वह इन्हें पीठ दिखाकर चले जाते हैं । यह अपना सियासी सफ़र साफ़ सुथरा शुरू करते हैं, तो लोग चाहते हैं यह थोड़ा मक्कार क्यों नही बन जाते । जब यह अपनी मिट्टी को आगे बढ़कर दुनिया से मुकाबला करने वाला सपना लेकर खड़े होते हैं, तो इनसे कहा जाता है वह पिछली तिकड़म भरी सियासत क्यों नही करते । जब यह युवाओं में नौकरी और तरक्की का जज़्बा पैदा करते हैं, तो इनसे कहा जाता है कि विभिन्न खाँचो में बाँटने की बात क्यों नही करते । आख़िर यह क्यों होता है कि जो हमारी बेहतरी के लिए सपने सँजोता है, हम उसकी आँखों से सपना तो छोड़िए,उसकी आंखें ही नोच लेने पर आमादा हो जाते हैं । आप तीनों को देखिये,यह बेहद सौम्यता से उस आदमी को भी मनाते हैं, जो इनके ख़िलाफ़ होते हैं । यह सहजता से उनकी तमाम मांगो को पूरा करते हैं । जो इन्हें छोड़कर जाता है, वह उल्टे इन्ही पर इल्ज़ाम धरता है कि इनसे बात नही हो पाई । यह एरोगेंट हैं । यह परिपक्व नही हैं । यह नौसिखिया हैं । यह गम्भीर नही हैं । हर जाने वाला इनपर एक लेबल चिपका के चला जाता है, कभी उससे क्यों नही पूछते की जब तुम्हारे जैसों को यह पलकों पर लिए घूम रहे थे,तब तो तुम्हे यह कमी नही दिखी । यह रोज़ भागते हुए चवन्नी छाप लोग, इनसे पूछते हैं कि यह गम्भीर नही हैं । मुझे खुशी है कि यह तीनों आजकी तारीख़ में अपनी बुनियादी सोच के साथ खड़े हैं । यह दुनिया भर का ज़ुल्म सह रहे हैं मगर टस से मस नही हो रहे हैं । चलिए मानते हैं कि इनके पास आज हुक़ूमत बनाने की गिनती पूरी नही है मगर यह पीठ दिखाकर भाग तो नही रहे हैं । अहंकार के चाबुक के सामने सर तो नही झुका रहे हैं । यह तीनों अपने अपने तरीकों से लड़ रहे हैं । यह मुकाबला कर रहें हैं बिना रीढ़ गवाए,तो क्या हम इनकीं इज़्ज़त न करें । मेरी नज़र में इन तीनों की बहुत अहमियत है । मैं ख़ुद को इन तीनो से जोड़ता हूँ । तीनो अपनी अपनी मिट्टी और जुझारू युवाओं की टीम के साथ हर बार खड़े होते हैं । इनकीं पीठों पर इनके करीबियों के ख़ंजर के घाव हैं, फिर भी यह हर बार मुस्कुराते हुए खड़े होते हैं । अपने लोगों में हौंसला भरते हैं । वह हुक़ूमत,जो हर एक को झुका लेने का अहंकार भरती हैं, इनके सामने तड़प कर रह जाती है । अहंकार से भरा एक बूढ़ा हुक्मरान इनपर हर तरह से वार करता है, धन से,बल से,छल से,प्रपंच से,मगर यह फिर भी झुकते नही हैं । वह बूढ़ा इन्हें प्रलोभन देता है मगर यह डिगते नही हैं । वह इन्हें बदनाम करता है, मगर यह घबराते नही हैं । वह इनकी माली इमदाद पहरे बैठा देता है, फिर भी यह हंसते हुए कहते हैं कि हम।खाली जेब से भी लड़ लेंगे,हमारे पुरखों ने भी लड़ा था । मैं इन तीनों को देखता हूँ और सोचता हूँ कि यह किस मिट्टी के बने हैं । इन्होंने जिन्हें अपना करीबी समझा,अपना बुज़ुर्ग समझ इज़्ज़त दी,अपना युवा दोस्त समझ,साथ बैठाया,लोगों पर भरोसा किया । उनमें से ज़्यादातर धोखा दे गए । लोग धोखा देने वालों से नही पूछते । लोग भागने-पलटने वालों से सवाल नही करते । लोग इनसे पूछते हैं कि भाई,तुम क्यों नही रोक पाए । लोग इस क़दर निचली सोच के हो गए हैं कि अच्छाई को बुरी नज़र से देखने लगे हैं । मैं हज़ारों लोगों को जानता हूँ,जिनकी ज़िन्दगी इन लोगों ने आसान की है । आज वह इनपर बरसते हैं । इनके ख़िलाफ़ अपनी ज़बान को खड़ा करते हैं । इनके दुश्मनों से मिलकर इन्हें खत्म करने के मंसूबे बनाते हैं मगर दोस्त यह जनता है, बहुत दिनों तक धोखेबाज़ों को दूध नही पिलाएगी । मेरी इन तीनो से बस एक ही अपेक्षा है । अपने आप पर भरोसा कीजिये,सिर्फ अपने आप पर । यह टिकानी वाले चलताऊ सहारों से खुद को आज़ाद कीजिये । आपकी अपनी बुनियादी सोच,उसपर चलने वाले कार्यकर्ता,उसको बढ़ाने वाले बुज़ुर्ग,काफ़ी हैं बदलाव के लिए,बस एक बार आप उन सबको लेकर,खड़े हो जाइये । आप तीनो पर्याप्त हैं किसी भी अहंकार को तोड़ने के लिए,आप तीनो में असीम सम्भावनाए हैं । आपके साथ एक बहुत बड़ा युवा वर्ग है, जो झूठ,प्रपंच,धोखेबाजी, गंदी सियासत से ऊब चुका है । वह एक साफ़ सुथरा भारत चाहता है, जहां न सड़क पर गंदगी हो और ना ही दिलों में,आप तीनो उसतक पहुँचिये,चीज़ें बदल जाएंगी । यह देश अभी भी सच्चे और दूरंदेशी नेतृत्व की कद्र करता है, बशर्ते उसे एहसास हो कि आपके पास बेहतर कल का सच्चा सपना है । आप तीनों जिसदिन हिंदी बेल्ट की पहचान बन जाएंगे,उस दिन यह हिंदी बेल्ट गर्व से चलेगी,सम्मान से आगे बढ़ेगी और पूरे भारत के साथ बोल उठेगी,हममें से कोई अलग नही है, कोई पीछे नही है, कोई नीचे नही है ।@kidwai_hafeez #hashtag #हैशटैग

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@arvindvnsingh पुरुषोत्तम जी सच्चे अर्थों में गांधीवादी हैं। मुझे इसमें कोई शक नहीं। पिछली सदी में पाखंड के महान पुरोधा गांधी जी थे। करोड़ों हिंदुओं का नरसंहार कराकर अहिंसा के पुजारी बने रहे। नई सदी में उन्हीं की विरासत संभाल रहे हैं पुरुषोत्तम अग्रवाल।
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय त्रिवेदी जी के शो में विदेशी कंपनी एप्पल की महंगी घड़ी पहनकर और आँखों पर विदेशी कंपनी के आयातित लेंस लगाकर अपनी पुस्तक “मजबूती का नाम महात्मा गांधी – सत्य, न्याय और धर्म” की व्याख्या करते हुए वामपंथी सोच को बढ़ावा देने वाले, सोवियत संघ के आर्थिक सहयोग से स्थापित जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल……… विदेशी उपक्रमों के सहारे जीविका चलाने वाला कोई बुद्धिजीवी यदि विदेशी लेंस से गांधी को देखता है और विदेशी घड़ी के समयानुकूल गांधी की व्याख्या करता है, तो वह व्याख्या वैसी ही होती है जैसी पुरुषोत्तम अग्रवाल कर रहे हैं। धर्म पर ज्ञान भी दे रहे हैं और बता रहे हैं — “धर्म माने स्वभाव।” जबकि धर्म के बारे में यह भी कहा गया है — “धर्म: इति धारयति”, अर्थात धर्म वह है जिसे धारण किया जा सके। धर्म धारण करने की वस्तु है, प्रवंचना की नहीं। भारतीय मनीषा कहती है — “सत्यम् वद, धर्मं चर”, अर्थात सत्य बोलो और धर्म को आचरण में उतारो। यदि कोई विद्वान गांधी को धारण करेगा, तो उसकी कलाई पर स्वदेशी घड़ी होगी, आँखों पर भारतीय लेंस होंगे और विचारों में भारतीय दृष्टि होगी। यही गांधी की दृष्टि थी, ऐसा ही उनका स्वभाव था और इसी को उन्होंने अपना धर्म माना था, जिसे अपने आचरण में उतारने की कोशिश वे आजीवन करते रहे। @puru_ag @scribe9104 @Aamitabh2 @Sanjay_Dixit @ARanganathan72
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
@arvindvnsingh निश्चित रूप से किसी गली-मोहल्ले एक्सप्रेस टाइप फर्जी अखबार में काम करता रहा होगा। ये बस ये नहीं बता रहा कि मोदी की जगह केजरीवाल, सिसोदिया की जगह राहुल, जैन की जगह अम्बानी का नाम भी करता रहा है खबरों में।
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
खुद कबूलनामे में फ़र्ज़ीवाड़ा, और मंच पर नैतिकता का प्रवचन — यही है सपा प्रवक्ता की राजनीति। राजकुमार भाटी खुलेआम बता रहे हैं कि उनके उपसंपादक रहते उनके द्वारा राशिफल को “अदल-बदल” कर 15-15 दिन तक छापा जाता था — मेष को वृष, तुला को वृश्चिक… मैटर वही, सिर्फ नाम बदलकर। यानी मेहनत बचाने के लिए पाठकों के साथ सीधा छल। और हैरानी देखिए — इसी जुगाड़ को मज़ाक में नहीं, गर्व से सुना रहे हैं। जो अख़बार में सच से खेलता रहा, वह टीवी डिबेट में तथ्यों से क्या करेगा — समझना मुश्किल नहीं। हद है बेशर्मी की। फ़र्ज़ीवाड़ा पहले पन्नों पर था, अब बहसों में है?
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@TNNavbharat @arvindvnsingh @VidyaNathJha अब टोटी चुराने और सरकारी आवास का फर्श तोड़ने वाले तय करेंगे कि कोई योगी कैसे बनेगा और कैसे नहीं? अपनी पत्नी को मौलाना ने नंगी बोलकर दुनिया भर के सामने अपमानित कर दिया तब तो जुबान को लकवा मार गया था।
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Isht Deo Sankrityaayan
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@arvindvnsingh इतने सारी गड़बड़ियों के बावजूद शासन के 11 साल बीत जाने पर भी मोदी जी ने नेहरू परिवार के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनके सारे कदम उस सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं जो हर कदम पर उनके साथ रहा।
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Arvind Singh अरविंद सिंह (मोदी का परिवार)
अमिताभ जी! देखिए—कोई और भले ही ग़लत हो जाए, पर राहुल गांधी या नेहरू–गांधी परिवार कभी ग़लत नहीं हो सकता। ये साधारण मनुष्य नहीं, ब्रह्म पदार्थ हैं। ये नियम, क़ानून और संविधान से ऊपर हैं। •जवाहरलाल नेहरू को अंतरिम पीएम और कांग्रेस अध्यक्ष बनना था—राज्यों की सहमति की क्या ज़रूरत? •इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला इंदिरा गांधी के खिलाफ आया—तो फ़ैसले को ठेंगा, देश को इमरजेंसी। •CJI दीपक मिश्रा के फ़ैसले पसंद नहीं—महाभियोग। • Chairman- रजयसभा जगदीप धनखड़ अनुकूल नहीं—महाभियोग। •अब ओम बिरला की बारी। •मुख्य चुनाव आयुक्त रास नहीं—“उन्हें जाना चाहिए।” •EVM मनचाहा वोट नहीं निकाल रही —EVM हटाओ। अब मुद्दा जेनरल मनोज मुकुंद नरवाने की किताब के प्रकाशन का है। राहुल जी ने कह दिया—प्रकाशित—तो वही अंतिम सत्य। Penguin ग़लत हो सकता है, पर राहुल गांधी ग़लत हों? असंभव। — @rashtravaaniIND की डिबेट में वरिष्ठ पत्रकार श्री @Aamitabh2 के प्रश्न के उत्तर में कि - "जनरल नरवाने की पुस्तक के प्रकाशन पर सत्य कौन बोल रहा है?"
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Surya Kumar Tripathi
Surya Kumar Tripathi@tripathisk8·
मेरे सांसद @ravikishann विधायक और मुख्यमंत्री @myogiadityanath मेरे गृहजनपद के सांसद @shashankmanibjp विधायक @shalabhmani राज्यसभा सदस्य @AgrawalRMD कुछ बोलेंगें। या सवर्णों को अब रास्ता दिखाना चाहिए @INCIndia की तरह @BJP4India को। @avanindra43 @idsankrityaayan #UGC_RollBack
The Jaipur Dialogues@JaipurDialogues

Let’s not forget! Roll back of Draconian UGC Guidelines is Important Spread it like Wildfire! Compel the Central Government to Act

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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
'नहीं है' का तो प्रश्न ही नहीं उठता। वह रहस्य क्या है, यह जानने का हक़ देश को है। इस मुद्दे पर मोदी और उनकी सरकार लगातार देश को सिर्फ गुमराह कर रहे हैं। #rollbackugc #indirajaisingh #secretfiles #secrecymaintened? #whatsecrets? #boycottbjp
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
इंदिरा जयसिंह का दबाव अगर इतना कारगर है कि वह यूजीसी के रेगुलेशंस के ड्राफ्ट को बदलवा सकता है तो इसका अर्थ यह है कि इंदिरा जयसिंह के पास कुछ बहुत बड़ा रहस्य है। ऐसा रहस्य जो पूरी व्यवस्था को हिला सकता है। 1/2
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
All animals are equal, some animals are more equal. - George Orwell in his novel 'Animal Farm' •• All castes are equal, some castes are more equal. - Modi Government in its 'UGC Regulations' ●
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
विकल्प बनते नहीं, बनाए जाते हैं। जिसने आपके साथ विश्वासघात किया, उसे विकल्प के रूप में आपने खड़ा किया। तय करिए, दस साल पेंडुलम और केंचुआ सरकारें आएंगी और जाएंगी। फिर एक मजबूत विकल्प खड़ा हो जाएगा। #rollbackugc
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Isht Deo Sankrityaayan@idsankrityaayan·
एक बहुरूपिया धूर्त पाखंडी से स्पष्ट डकैत हमेशा बेहतर होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि वह डकैत है, चोर है, आतंकी है। आप यह भी जानते हैं कि वह आपसे घृणा करता है, क्योंकि उसकी घृणा छुपी हुई नहीं है। आप उस पर विश्वास नहीं करते, विश्वासघात का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। #ROLLBACKUGC
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