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जगन्नाथ दुबे
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जगन्नाथ दुबे
@imJDubey_
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर। ट्विटर का उपयोग निजी विचारों को साझा करने के लिए करता हूं। इसका मेरे पद से कोई रिश्ता नहीं है।
Gonda U. P. India Katılım Şubat 2019
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आख्यान और स्मृति, उद्घाटन वक्तव्य, वरिष्ठ कथाकार अखिलेश youtu.be/JPejyCRgoY4?si… via @YouTube

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आख्यान और स्मृति विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में पंजीकरण हेतु निम्न लिंक साझा कर रहा हूं। आप इसके माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
docs.google.com/forms/d/e/1FAI…
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काशी साहित्य कला उत्सव ( Banaras Literature Festival): अज़ीज़ दोस्तों से पुनर्मिलन, नए विद्वानों से मुलाकात और मैत्री ने सूरज की धूप से खिले दिन को और अधिक महका दिया। शुक्रिया आप सबका।
share.google/EMqpptF2VZLxYX…




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हार्दिक बधाई @NamitaGokhale_ जी
jaipurlitfest@JaipurLitFest
Namita Gokhale, writer, publisher, Festival curator, and an iconic voice who continues to tirelessly shape India’s literary landscape, has been awarded the Bhartendu Harishchandra Lifetime Achievement Award at the Banaras Literature Festival. Congratulations Namita on this well-deserved honour! @NamitaGokhale_
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इधर दो संस्थाओं को लेकर दो किताबें आई हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन पर यह और काशी नागरी प्रचारिणी सभा पर अमिष वर्मा की किताब।इन दोनों की पर्याप्त चर्चा भी है। सम्मेलन पर शुभनीत कौशिक को पढ़ते हुए लग रहा है कि चर्चा वाजिब है।
इस किताब के बनने में सुधीर चंद्र, वसुधा डालमिया, वीर भारत तलवार और फ्रांचेस्का ऑर्सीनी का काम पृष्ठभूमि के रूप में मौजूद है। इनके काम की अनुगूंज यहाँ सुनाई देती है।
इस किताब को पढ़ते हुए लगता है कि हिंदी-उर्दू क्षेत्र के नवजागरण के दौर का अभी बहुत कुछ है जिसपर काम करने की जरूरत है। उन बहुत कुछ में से दो संस्थाओं पर ये दो किताबें एक जरूरी दस्तावेज जैसी हैं। ऐसी ही अन्य अनेक संस्थाएं हैं जिनके बारे में विचार करने की जरूरत है।
शुभनीत जी गंभीर शोधार्थी के रूप में पहले ही अपनी पहचान बना चुके हैं। इस किताब में वे एकबार फिर इसकी पुष्टि करते हैं। इसे पढ़कर ना सिर्फ उस दौर की साहित्यिक संस्थाओं की संस्कृति का परिचय मिलता है बल्कि हिंदी लोकवृत्त के बन रहे स्वरूप की दूसरी कई परतें जो अब तक बंद थीं, खुलती हैं।
इसे पढ़े जाने की जरूरत है। इस पर बात करने की भी जरूरत है। सबकुछ सहमति-मूलक ही नहीं है। कई ऐसी बातें भी हैं जो सवाल करने को उकसाती हैं। उनपर विस्तार से कहीं बात की जाएगी। फ़िलहाल शुभनीत जी को इस महत्वपूर्ण काम के लिए हार्दिक बधाई।

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