
इस तरह की हरकत करने के बाद भी बिहार के मुख्यमंत्री कार्यालय से ये सज्जन सही सलामत लौट आए। बिहार बदल रहा है।
राहुल 🇮🇳
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@im_Rahulk8
Law Student | Fierce Ambedkarite | Committed to social justice and equality | Always ready to lend a helping hand |

इस तरह की हरकत करने के बाद भी बिहार के मुख्यमंत्री कार्यालय से ये सज्जन सही सलामत लौट आए। बिहार बदल रहा है।



“सखी सैंया तो ख़ूब ही कमात हैं महँगाई डायन खाए जात है” कई हैंडल से गाना डिलीट करा दिया गया है। छोटा सा टुकड़ा यहाँ सुनिए







Intermediate caste thinkers are obsessed with reservation and Brahmin bashing, nothing beyond that. They take pride in their caste identities, unfortunately. They are more brahmanical than even brahmins themselves. Brahmanical system and structure survives on Intermediate castes. Laxman wants to consolidate Yadav caste identity, he isn't there for annihilation of caste identities.



अखिलेश जी गैर-यादव ओबीसी समाज को उनका हक आखिर कब मिलेगा? वोट हमारा, राज तुम्हारा! तुम हमसे दंगे करवाओ, हमें लोगों से लड़वाओ और ओबीसी समाज का नारा दो। इतिहास में तुम्हारा कहीं कोई नाम नहीं मिलता। किसी विदेशी से संघर्ष नहीं किया। पहले मुगलों की सेना में सिपाही बनकर हमें मारते थे। अंग्रेजों की सेना में उनका सिपाही बनकर मारते थे। अब हमें एक दूसरे से लड़ाकर मूर्ख बनाकर राजनीतिक रूप से मारते हो। हमारा इतिहास महाराजा सुहेलदेव राजभर, रानी अवंती बाई लोधी का इतिहास है। हम अपना राजनीतिक अधिकार लेते रहेंगे। गरीब-गुरबा की पीठ पर यादवों की लाठी के निशान हैं। अखिलेश की सत्ता के लिए हम दरी नहीं बिछाएंगे। जय महाराजा सुहेलदेव राजभर, जय सुभासपा, जय ओबीसी


बहन जी आप लड़ाई में ही नहीं हो इसलिए मीडिया भी आपका ध्यान नहीं देती आप चिंता मत करिए आराम से एक दो जो भी लोग बचे हैं सब का निष्कासन कर दीजिए बस मिश्रा जी को रहने दीजिएगा किसी का ध्यान आपकी तरफ नहीं जा रहा क्योंकि आप लड़ाई में ही नहीं हो आदरणीय,

बिहार के पॉपुलर शहर लंदन से बंगाल जाने के बाद ऐसा ही लगता है।

National Stock Exchange (NSE) tweets, "NSE building shines in blue tonight in tribute to Bharat Ratna Dr BR Ambedkar, on the eve of his birth anniversary (14 April). Honouring the visionary behind India’s Constitution and the values of justice, equality, and dignity he upheld."











1. सपा व कांग्रेस आदि ये दलित-विरोधी पार्टियाँ, इस बार यू.पी. में विधानसभा आमचुनाव के नज़दीक आते ही, इनके वोटों के स्वार्थ में बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की सोची-समझी रणनीति के तहत् जयंती मनाकर तथा कांग्रेस पार्टी तो अपनी केन्द्र की सरकार में रहकर इनको ’भारतरत्न’ की उपाधि ना देकर, अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की माँग कर रही है, यह हास्यास्पद नहीं है तो क्या है? 2. जबकि ये पार्टियाँ शुरू से ही, बी.एस.पी. को ख़त्म करने में लगी रही हैं, जिस पार्टी की मान्यवर श्री कांशीराम जी ने ख़ुद नींव रखी है। जिसे इनकी एकमात्र उत्तराधिकारी व बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीते-जी कोई हिला नहीं सकता है। 3. इतना ही नहीं बल्कि इससे ऐसा भी लगता है कि इन पार्टियों के महापुरुषों में कोई जान नहीं रही है, जो अब ये हमारे महापुरुषों को भुनाने में लगे हैं, जिन्होंने मान्यवर श्री कांशीराम जी के जीते-जी हर मामले में हमेशा इनकी उपेक्षा की है। 4. तथा इनके सम्मान में बी.एस.पी. सरकार द्वारा किये गये कार्यों को भी सपा सरकार द्वारा अधिकांशः बदल दिया गया है। यह है इन पार्टियों का इनके प्रति दोग़ला चाल व चरित्र। इसलिए यदि सपा व कांग्रेस आदि के ख़ासकर दलित चमचे चुप रहें तो उनके लिए यह बेहतर होगा। यही सलाह। हालाँकि ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही मान्यवर श्री कांशीराम जी ने ’चमचा युग’ के नाम से अंग्रेज़ी में एक किताब भी लिखी है।