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@Zubair99778 घमंड ले डूबा कांग्रेस के विरुद्ध अपना पार्टी बनाई थी इसलिए बीजेपी लाभ ले ली
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@Rudhrayadav001 वहां के लोग गोबर गोबर ही समझते है यही अंतर वहां के नागरिकों में हिंदू शब्द बीजेपी के लिए बना है 🤣
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@RccShashank1 जो शादी के पहले ही दान दे वही वह महादानी होता है शादी के बाद किसी को दान दे सकता है ये बात लड़के समझते है 🤣
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दिल्ली की गर्म दोपहर में स्नेहा और अर्पित जो पिछले दो साल से रिलेशनशिप में थे मिलने और समय बिताने के लिए OYO होटल बुक करते हैं।
दोनों ने साथ में खाना पीना शुरू किया फिर OYO में किया जाने वाला काम किया, इसके बाद स्नेहा ने बताया कि उसकी शादी की बात चल रही है।
इतना सुनने के बाद अर्पित भड़क जाता है और दोनों में बहस होने लगती है, स्नेहा बोलती हैं कि तुम अपने घरवालों के साथ आओ और शादी की बात करो
अर्पित बोलता है कि ठीक है अगले हफ्ते आते हैं, स्नेहा के घर में सारी तैयारियां जोरों पर थी अर्पित के आने का समय होता है पूरा घर इंतजार में था।
लेकिन अर्पित नहीं जाता है क्योंकि दो दिन पहले बैंक में काम करने वाली लड़की का रिश्ता उसके लिए आता है, अर्पित ने अपना नम्बर भी बदल दिया है।
इसके बाद स्नेहा ने भी दूसरी जगह शादी की लिए हां कर दी है, आजकल का प्यार हवस देखता है शादी जैसा कमिटमेंट किसी और जगह ही होता है।


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ये बनारस के रहने वाले शिवकांत पांडेय जी हैं , फर्जी डिग्री से गाजीपुर के एक इंटर कॉलेज में शिक्षक बन कर सालों से पढ़ा रहे थे !
किसी जलनखोर ने इनकी शिकायत कर दिया , जांच में आरोप सही पाए गए , अब पांडे जी को जेल भेज दिया गया हैं !
अब 88 लाख रुपए सैलरी के रूप में ले चुके हैं , जिसकी ब्याज सहित भरपाई भी की जाएगी !
कही पाण्डेय जी को किडनियां न बेचनी पड़े सरकार का पैसा वापस करने के लिए !
अगर ठीक से जांच हो जाए तो ऐसे लाखों लोग मिल जाएंगे , जो गलत तरीके से भर्ती होकर आज नौकरी कर रहे हैं !

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@DhruvRathenx कोई हॉस्पिटल में पूंजी जरूर लगाया होगा तभी दर्द हो रहा है वरना इतने अच्छे काम का कोई आलोचना करता है
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विजय थलपती को तमिलनाडु जीतने की बधाई लेकिन स्टालिन सामाजिक न्याय के योद्धा थे,
कुछ लोग इसको आंबेडकरवाद की जीत बता रहे हैं जबकि थलपती के वादों में एक भी वादा सामाजिक न्याय का नहीं है,, और ना ही किसी प्रकार से उनके वादों में कोई सामाजिक बराबरी का प्वाइंट है, डॉक्टर अम्बेडकर सामाजिक बराबरी और न्याय को आगे रखकर चलते थे,,ये आंबेडकरवादी भी बहुत भोले हैं कोई भी इन्हें बाबा साहब की तस्वीर दिखा दे तो उसके गुलाम हो जाते हैं,उसका असली चेहरा सामने आने पर फिर उसकी बुराई करते फिरते हैं,, हमें केवल तस्वीर नहीं बाबा साहब के विचार चाहिए,
स्टालिन ने दलितों पिछड़ों के लिए सामाजिक न्याय की नीयत अपने कार्यप्रणाली ने खुलकर लागू की,,
देखते हैं थलपाति इसको कितनी साफ नीयत से लागू कर पाते हैं,,
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@PratikVoiceObc बदलाव में खून की मांग होती है ये केवल बीजेपी वाले जानते है 🤣 अगर दूसरे भी यही करने लगे तो बीजेपी बैकफुट में आ जाएगी 😃
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आज सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट और ओडिशा के कई ट्रायल कोर्ट द्वारा दलित एवं आदिवासी समुदाय के व्यक्तियों की जमानत के समय पुलिस स्टेशनों में दो महीने तक लगातार सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक साफ-सफाई करने की जातिगत भेदभावपूर्ण शर्तों को बेहद शर्मसार करने वाला फैसला बताया।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महोदया, आप इसी ओडिशा राज्य और उसी आदिवासी समुदाय से आती हैं, जिसे आज न्याय व्यवस्था से ही जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
ओडिशा हाई कोर्ट के निर्देशों पर गंभीर एतराज जताते हुए आज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इन शर्तों को जातिगत भेदभाव को दर्शाने वाला बताया और कहा कि, "हम बहुत निराश और हताश हैं, और ओडिशा राज्य की न्यायपालिका जिस तरह से ऐसी भारी, अपमानजनक और बेइज्जती भरी शर्तें लगाकर असल में एक पुरानी सोच की ओर लौट गई है, उससे हम पूरी तरह नाराज हैं, जो साफ तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करती हैं। ऐसी शर्तें न्याय को आगे बढ़ाने के बजाय आरोपी की गरिमा पर चोट करती हैं और दोषी होने के आधार पर कार्रवाई करती हैं, जो कानून में पूरी तरह गलत है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि किसी भी राज्य की न्यायपालिका को ऐसी जाति-आधारित और दमनकारी शर्तें नहीं लगानी चाहिए, जिनसे गंभीर सामाजिक टकराव पैदा होने का खतरा हो"। साथ ही, आदेश की एक प्रति देशभर के सभी हाई कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्तों से यह प्रतीत होता है कि ओडिशा राज्य की न्यायपालिका जातिगत भेदभाव से ग्रसित है, क्योंकि सभी आरोपी पिछड़े समुदायों से थे।
सुनवाई के दौरान ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा: "दुर्भाग्य से, ओडिशा में हाईकोर्ट और कुछ ट्रायल कोर्ट ऐसी जमानत शर्तें लगा रहे हैं, जो अनुचित हैं और जाति के आधार पर भेदभाव दर्शाती हैं तथा न्यायपालिका की छवि को धूमिल कर रही हैं।"
जानकारी में आया है कि ओडिशा राज्य में मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच जातिगत भेदभाव वाले ऐसे आठ आदेश पारित किए गए, जिनमें से छह आवेदक दलित समुदाय के थे और दो आदिवासी समुदाय से थे।
#SupremeCourt #Odisha #CasteDiscrimination #HumanRights @rashtrapatibhvn @indSupremeCourt @ndtv @IndianExpress @TOIIndiaNews

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@Sheetal2242 पेरियार की भूमि है कोई भी आएगा इसी तरह चलना होगा गोबर पट्टी कभी नहीं बनेगा
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> इस इंसान ने तमिलनाडु के लिए वह सब कुछ किया जो वह कर सकता था।
> इसने इसे देश के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक बना दिया।
> इसने लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ज़रूरतों पर ध्यान केंद्रित किया।
> इसने राज्य को सांप्रदायिकता से दूर रखा।
नतीजा: अपनी खुद की सीट हार गया।
CM स्टालिन, आपको याद रखा जाएगा।❣️❣️

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@Sheetal2242 कांग्रेस में चाणक्य छिपा हुआ लेकिन गोबर भक्त पप्पू बोलते है 🤣
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@speak000000 शिक्षा की स्तर बढ़ेगा तभी हार सकता है जो संभव नहीं है महंगी शिक्षा,शिक्षा पर भी gst, सरकारी स्कूल बंद करना चाणक्य नीति है 🤣 मनु महाराज यहीं की उपज थे शूद्रों की शिक्षा रोकने की धर्म से जोड़ दिया था आज तक पिछड़ा बना हुआ है
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भाजपा को हराना बहुत मुश्किल है...
भाजपा को एक ही पार्टी हरा सकती है वो राष्ट्रीय पार्टी है !
बताओ कौन सी पार्टी ..???
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
आम आदमी पार्टी (AAP)
बहुजन समाज पार्टी (BSP)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M)
नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP)
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ट्रेन में एक बिहार का व्यक्ति सिर्फ नमक के साथ प्याज खाकर सफर कर रहा था
उसके पास खाना खरीदने तक के पैसे नहीं थे।
हैरानी की बात ये नहीं है,
हैरानी की बात ये है कि यही आज भी असली भारत की तस्वीर है,
जहां लाखों लोग मजबूरी में घर छोड़कर दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं,
और सफर में पेट भरने के लिए सिर्फ नमक-प्याज से गुजारा कर लेते हैं।
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