Indresh Maikhuri

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@indreshmaikhuri

CPI (ML) Liberation (@cpimlliberation), Central Committee Member & State Secretary, Uttarakhand

Katılım Ocak 2014
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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
वाहियात, गाली गलौच वाली भाषा पर कोई सवाल पूछे तो छिछोरे अंदाज में कहो कि मेरी भाषा तुमसे अच्छी है ! फिर हेकड़ी दिखाते हुए कहो- आप क्यों मुझसे सवाल पूछ रहे हो ! यानि जनाब इस कदर तानाशाह हुए जाते हैं कि सवाल सुनना ही नहीं चाहते ! जैसी भाषा आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वो अकड़ने की नहीं शर्मिंदगी का सबब है, हिमंता बाबू ! कुछ तो शरम करो सरमा जी !
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छोटा पंडित
नेताओं को डूबने के लिए पानी की कमी नहीं होगी अब।
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri

यह तो खुला भ्रष्टाचार है ! अमर उजाला में छपी खबर बता रही है कि गैरसैंण में जल्द झील निर्माण की उम्मीद जगी है. खबर के अनुसार 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण में झील निर्माण की घोषणा की थी. सरकारी तंत्र कितनी तेजी से काम करता है कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा 8 साल में क्रियांवित नहीं हो सकी और अभी भी केवल उम्मीद ही जगी है, धरातल पर योजना जाने कब तक उतर सकेगी ! लेकिन इस खबर में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अभी झील निर्माण की स्वीकृति मिली नहीं है, लेकिन टेंडर जारी कर दिये गए हैं ! खबर के अनुसार " स्वीकृति की प्रत्याशा में विभाग ने टेंडर जारी कर दिये हैं " आठ साल में भी स्वीकृति मिली नहीं है और अब स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद में टेंडर जारी कर दिये गए हैं, कमाल हैं ! अगर स्वीकृति जल्द मिल ही जानी है तो स्वीकृति से पहले टेंडर जारी करने की जल्दी क्यों है, जबकि मामला आठ साल से लंबित है ? ऐसा कौन सा नया नियम आ गया सरकारी विभागों के पास कि वे बिना काम की स्वीकृति मिले ही टेंडर जारी करने के अधिकारी हो गए ? माना कि भाजपा की सरकार है और विधायक भी भाजपा के हैं पर फिर भी नियम कायदों से तो चलना ही होगा ! सस्ती लोकप्रियता के लिए नियम- कानूनों को धता बता कर खुला भ्रष्टाचार है ये तो ! बिना काम की स्वीकृति के टेंडर जारी करने को धाकड़ कार्रवाई माना जाएगा या धुरंधर कारनामा, मुख्यमंत्री जी ?

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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
यह तो खुला भ्रष्टाचार है ! अमर उजाला में छपी खबर बता रही है कि गैरसैंण में जल्द झील निर्माण की उम्मीद जगी है. खबर के अनुसार 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण में झील निर्माण की घोषणा की थी. सरकारी तंत्र कितनी तेजी से काम करता है कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा 8 साल में क्रियांवित नहीं हो सकी और अभी भी केवल उम्मीद ही जगी है, धरातल पर योजना जाने कब तक उतर सकेगी ! लेकिन इस खबर में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अभी झील निर्माण की स्वीकृति मिली नहीं है, लेकिन टेंडर जारी कर दिये गए हैं ! खबर के अनुसार " स्वीकृति की प्रत्याशा में विभाग ने टेंडर जारी कर दिये हैं " आठ साल में भी स्वीकृति मिली नहीं है और अब स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद में टेंडर जारी कर दिये गए हैं, कमाल हैं ! अगर स्वीकृति जल्द मिल ही जानी है तो स्वीकृति से पहले टेंडर जारी करने की जल्दी क्यों है, जबकि मामला आठ साल से लंबित है ? ऐसा कौन सा नया नियम आ गया सरकारी विभागों के पास कि वे बिना काम की स्वीकृति मिले ही टेंडर जारी करने के अधिकारी हो गए ? माना कि भाजपा की सरकार है और विधायक भी भाजपा के हैं पर फिर भी नियम कायदों से तो चलना ही होगा ! सस्ती लोकप्रियता के लिए नियम- कानूनों को धता बता कर खुला भ्रष्टाचार है ये तो ! बिना काम की स्वीकृति के टेंडर जारी करने को धाकड़ कार्रवाई माना जाएगा या धुरंधर कारनामा, मुख्यमंत्री जी ?
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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
देहरादून पुस्तक मेले में प्राप्त पुस्तकें बातचीत के लिए रीजनल रिपोर्टर की संपादक गंगा असनोड़ा जी का शुक्रिया💐💐 यह संक्षिप्त बातचीत नीचे दिये लिंक पर है : facebook.com/share/v/1B9s49…
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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
दो दिन पहले जोशीमठ के मोल्टा के रहने वाले बलवंत सिंह को हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने और फिर पुलिस हिरासत में उनकी तबियत खराब होने व मृत्यु होने की खबर आई. इस मामले में कुछ सवाल हैं : # बलवंत सिंह को गिरफ्तार करते हुए क्या हरियाणा पुलिस ने चमोली पुलिस को विश्वास में लिया था ? # बलवंत सिंह को यदि गिरफ्तार किया गया तो क्या उन्हें अदालत के समक्ष पेश करके, उनकी ट्रांजिट रिमांड ली गयी थी ? किसी दूसरे प्रदेश की पुलिस, अन्य प्रदेश से सीधे तो किसी व्यक्ति को ऐसे ही, बिना कानूनी प्रक्रिया के उठा कर नहीं ले जा सकती. # गिरफ्तारी के बाद क्या बलवंत सिंह का मेडिकल परीक्षण करवाया गया था ? # बलवंत सिंह की मृत्यु होने पर हरियाणा पुलिस , उन्हें अस्पताल में छोड़ कर चली क्यों गयी ? # बलवंत सिंह क्या संगीन अपराधी थे, जिनको हरियाणा की पुलिस का आनन- फानन में उत्तराखंड आ कर उठा ले जाना जरूरी था ? व्यक्ति कितना बड़ा दुर्दांत अपराधी ही क्यों न हो, पुलिस को तो उससे कानूनी प्रक्रिया से ही निपटना चाहिए. # जिसे हरियाणा पुलिस कहा जा रहा है, वो हरियाणा के किस जिले की पुलिस थी ? हो सकता है, इनमें से कुछ सवालों के जवाब पुलिस के पक्ष में ही हों, लेकिन पूरी तस्वीर तो साफ होनी चाहिए. दो दिन से श्रीनगर (गढ़वाल) में इस मामले पर बवाल हो रहा है, लेकिन ना पौड़ी पुलिस की ओर से और ना ही उत्तराखंड पुलिस की ओर से इस मामले पर कोई पक्ष सामने आया है. पौड़ी पुलिस का फेसबुक पेज देखिये तो अजब तरह की मसखरेबाजी है, एक अपराधी को जिला बदर करने की पोस्ट डाली गयी है और बैकग्राउंड में गाना बज रहा है- तेरी गलियों में रखेंगे ना कदम, आज के बाद ! हरियाणा पुलिस पूरी तरह नदारद है ही !
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#अंकिता_न्याय_यात्रा के दूसरे चरण पर त्रिलोचन भट्ट जी की रिपोर्ट भाकपा (माले) के हिंदी मुखपत्र- समकालीन लोकयुद्ध- में #justiceforankitabhandari
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Indresh Maikhuri
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
पीड़ित दर- दर की ठोकर खाए तो किस बात की "मित्र पुलिस", किसकी " मित्र पुलिस " ? ललिता चौधरी जी के जज्बे और हिम्मत को सलाम. पर जिस काम को डेढ़ साल तक लग कर ललिता चौधरी जी ने किया, उसी काम को शायद पुलिस के प्रशिक्षित जांचकर्ता करते तो शायद है कि ज्यादा जल्दी करते ! लेकिन वे तो संवेदनहीनता की चपेट में थे तो कैसे करते ? इस मामले में न केवल जांच दोबारा होनी चाहिए बल्कि पहले जांच में लापरवाही बरत कर मामले को बंद करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए .
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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
गुजरात फाइल्स से शुरू हुआ सिलसिला एपस्टीन फाइल्स तक पहुंच चुका है ! चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री जी ने जब कुछ फिल्मों का जिक्र किया तो याद आया ! कभी गुजरात फाइल्स के पन्ने पलट कर देखिये, एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करने की हिम्मत भी जुटाइये 56 इंची नॉन बायोलॉजिकल महाप्रभु !
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Maneesh Kothari
Maneesh Kothari@ManeeshKothari·
@INCIndia कृपया संज्ञान लें भाई @UKGaneshGodiyal जी से अनुरोध है कि कृपया अपनी युवा ब्रिगेड को कमर कसने के लिए कहिये | यदि आप टिकट बंटवारे के बाद ही सक्रिय होने की तैयारी में हैं तो यकीन जानिये आप जनता से दूरी बनाये रखने में ही सफल हो पायेंगे | @indreshmaikhuri भाई की बात को जाया न जाने दें |
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri

उत्तराखंड कांग्रेस के मित्रों से निवेदन : # लड़ना भाजपा से है # पर्दाफाश भी भाजपा का ही करना है - भ्रष्टाचार का, उसके जन विरोधी चेहरे का # लोकतंत्र और लोकतांत्रिक ताकतों को मजबूत करना है # मतभिन्नता लोकतांत्रिक बात है. मतभिन्नता और शत्रुता दो अलग- अलग चीजें हैं, दोनों को मिलाइये मत ! यूं तो जो कुछ हो रहा है, वो आपका आंतरिक मामला है पर चूंकि वह आंतरिक रूप से नहीं सार्वजनिक तौर पर हो रहा है, इसलिए टिप्पणी करनी पड़ रही है. लोकतंत्र, संविधान को बचाने और एक फ़ासिस्ट, तानाशाह हुकूमत के खिलाफ लड़ाई, एक बड़ी लड़ाई है. इसके लिए व्यापक एकता और समझदारी की जरूरत है.

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बेहद संगीन, सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए. हिमंता ने पवन खेड़ा को एफआईआर करके जेल भेजने की धमकी दी है. हिमंता जब कांग्रेस में थे तो भाजपा ने 2015 में उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए, बकायदा एक पुस्तिका निकाली थी. तब हिमंता ने क्या किया था ? क्या उन्होंने भाजपा के किसी नेता पर एफआईआर करके जेल भेजने की धमकी दी थी ? नहीं, हिमंता ने तब चुपचाप दिल्ली जा कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी ! दोनों बार भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रतिक्रिया में इतना अंतर क्यों ? क्योंकि 2015 में हिमंता जानते थे कि यदि वे भाजपा में न गए तो जरूर जेल चले जाएंगे ! और इस बार हिमंता जानते हैं कि आरोप कितने ही संगीन क्यों न हो, अब वे भाजपा की सुरक्षित खोह में हैं, इसलिए भाजपा उन्हें कतई जेल नहीं जाने देगी, उनका बाल तक बांका नहीं होने देगी ! भ्रष्टाचार के कीचड़ में ही तो चुनावी सफलता का " कमल " खिला हुआ है !
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Indresh Maikhuri
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है" अदम गोंडवी की ये पंक्तियां, विज्ञापनों में चमचमाते उत्तराखंड और नारों -जुमलों में धाकड़ से धुरंधर होते मुख्यमंत्री पर सटीक बैठती हैं. अब दो दिन पहले की इस खबर को ही देखिये. कर्णप्रयाग ब्लॉक के सकंड गांव में वीरेंद्र सिंह बिष्ट का अंगूठा कट गया तो उन्हें साढ़े नौ किलोमीटर पैदल चल कर सड़क पर आना पड़ा. गौचर अस्पताल में पहुंचे तो वहां इलाज नहीं मिला तो उन्हें रुद्रप्रयाग जाना पड़ा, तब जा कर उपचार हो सका. नारों और जुमलों में तस्वीर कितनी ही चमकती- दमकती क्यों न हो पर धरातल पर हकीकत यही है.
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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
उफ्फ ऐसी बेकद्री, लानत है हुकूमत तुझ पर ! एक 45 वर्षीय महिला जंगली जानवर की शिकार हो गयी और विज्ञापनों में विकास की नई ऊंचाई छूते राज्य के पास उस महिला का शव सम्मानजनक तरीके से गांव पहुंचाने का इंतजाम भी नहीं था. महिला के तीनों बेटे राज्य के खो-खो खिलाड़ी हैं, एक तो नैशनल भी खेल चुका है. लेकिन मौके पर सरकारी अमला उनके मां के शव के लिए स्ट्रेचर का इंतजाम भी न कर सका. लोगों को शव कपड़े की पोटली में बांध कर लाना पड़ा ! एक खबर है कि लंगूर के हमले में घायल महिला की मौत हो गयी. अब तक बाघ, भालू के हमलों में ही पहाड़ में लोग प्राण गंवा रहे थे, अब लंगूर और बंदर के हमले भी जानलेवा हो चले हैं. इस सबसे बेपरवाह मुख्यमंत्री गदगद हो कर कह रहे हैं कि धुरंधर की पदवी मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारी बढ़ गयी है ! लोग जंगली जानवरों के आतंक से बचाए जा सकें, यह शायद उस धुरंधर जिम्मेदारी के दायरे में नहीं आता होगा !
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मुंशी जी™
हर शहर के मेयर का हो इक सपना साकार टाउन हॉल के मद से हो अपना जीर्णोद्धार
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri

देहरादून का टॉउन हॉल क्या मेयरों के लिए धनवर्षा यंत्र है ? ऐसा धनवर्षा यंत्र कि मेयर साहब और उनके ठेकेदारों के पास धन की कमी हो तो टॉउन हॉल का रेनोवेशन करवा लिया जाए ? बीते दो- ढाई दशक में देहरादून के नगर निगम बनने के बाद अधिकांश समय भाजपा के ही मेयर रहे. दस साल विनोद चमोली, पांच साल सुनील उनियाल गामा और अब सौरभ थपलियाल. और हर कोई टॉउन हॉल का जीर्णोद्धार ही करवा रहा है ! एक भाजपाई मेयर द्वारा करवाया गया टॉउन हॉल का जीर्णोद्धार, दूसरे भाजपाई मेयर तक नहीं टिक रहा है ! यह कैसा विकास का मॉडल है, भाई लोगो ? जीर्णोद्धार तो टॉउन हॉल का हो रहा था पर इससे उद्धार किसका हो रहा है ?

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Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
देहरादून का टॉउन हॉल क्या मेयरों के लिए धनवर्षा यंत्र है ? ऐसा धनवर्षा यंत्र कि मेयर साहब और उनके ठेकेदारों के पास धन की कमी हो तो टॉउन हॉल का रेनोवेशन करवा लिया जाए ? बीते दो- ढाई दशक में देहरादून के नगर निगम बनने के बाद अधिकांश समय भाजपा के ही मेयर रहे. दस साल विनोद चमोली, पांच साल सुनील उनियाल गामा और अब सौरभ थपलियाल. और हर कोई टॉउन हॉल का जीर्णोद्धार ही करवा रहा है ! एक भाजपाई मेयर द्वारा करवाया गया टॉउन हॉल का जीर्णोद्धार, दूसरे भाजपाई मेयर तक नहीं टिक रहा है ! यह कैसा विकास का मॉडल है, भाई लोगो ? जीर्णोद्धार तो टॉउन हॉल का हो रहा था पर इससे उद्धार किसका हो रहा है ?
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Clifton D' Rozario
Clifton D' Rozario@clifroz·
From the beginning, lawyers from AILAJ have been providing assistance across various districts in West Bengal. Sharing our Helpline Directory by District- please contact if you or anyone else needs help
AILAJ_HQ@AilajHq

Millions of citizens are being stripped of their voting rights through SIR in West Bengal. From the beginning, lawyers from AILAJ have been providing assistance across various districts. Sharing our Helpline Directory by District- please contact if you or anyone else needs help

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Indresh Maikhuri
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
सी.ए.एफ. (केंद्रीय सशस्त्र बल) विधेयक पर चर्चा में लोकसभा में भाकपा (माले) सांसद कॉमरेड सुदामा प्रसाद का वक्तव्य
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राजू अल्फा
राजू अल्फा@raju_alfa_ji·
@harishrawatcmuk जी कभी सुन लिया करो।
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उत्तराखंड कांग्रेस के मित्रों से निवेदन : # लड़ना भाजपा से है # पर्दाफाश भी भाजपा का ही करना है - भ्रष्टाचार का, उसके जन विरोधी चेहरे का # लोकतंत्र और लोकतांत्रिक ताकतों को मजबूत करना है # मतभिन्नता लोकतांत्रिक बात है. मतभिन्नता और शत्रुता दो अलग- अलग चीजें हैं, दोनों को मिलाइये मत ! यूं तो जो कुछ हो रहा है, वो आपका आंतरिक मामला है पर चूंकि वह आंतरिक रूप से नहीं सार्वजनिक तौर पर हो रहा है, इसलिए टिप्पणी करनी पड़ रही है. लोकतंत्र, संविधान को बचाने और एक फ़ासिस्ट, तानाशाह हुकूमत के खिलाफ लड़ाई, एक बड़ी लड़ाई है. इसके लिए व्यापक एकता और समझदारी की जरूरत है.

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Anjul Negi (Kotdwar ❤)
लोकतंत्र, संविधान को बचाने और एक फ़ासिस्ट, तानाशाह हुकूमत के खिलाफ लड़ाई, एक बड़ी लड़ाई है. इसके लिए व्यापक एकता और समझदारी की जरूरत है. बस‌ इतनी सी बात समझ जाए 🫰
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri

उत्तराखंड कांग्रेस के मित्रों से निवेदन : # लड़ना भाजपा से है # पर्दाफाश भी भाजपा का ही करना है - भ्रष्टाचार का, उसके जन विरोधी चेहरे का # लोकतंत्र और लोकतांत्रिक ताकतों को मजबूत करना है # मतभिन्नता लोकतांत्रिक बात है. मतभिन्नता और शत्रुता दो अलग- अलग चीजें हैं, दोनों को मिलाइये मत ! यूं तो जो कुछ हो रहा है, वो आपका आंतरिक मामला है पर चूंकि वह आंतरिक रूप से नहीं सार्वजनिक तौर पर हो रहा है, इसलिए टिप्पणी करनी पड़ रही है. लोकतंत्र, संविधान को बचाने और एक फ़ासिस्ट, तानाशाह हुकूमत के खिलाफ लड़ाई, एक बड़ी लड़ाई है. इसके लिए व्यापक एकता और समझदारी की जरूरत है.

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CPIML Liberation
CPIML Liberation@cpimlliberation·
CAPF Bill | Sudama Prasad, MP, CPI(ML) Liberation, speaks against the Modi govt's CAPF Bill that seeks to override the Supreme Court’s 2025 judgment limiting IPS deputation in top positions of Central Armed Police Forces.
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Rudra (खस कम्युनिस्ट)
यही आज के समय की मांग है I सभी राजनैतिक दलों का उद्देश्य मात्र भाजपा को हराना है I कांग्रेस से गुजारिश रहेगी कि आगामी विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के तहत सभी दलों के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले और उचित सीट शेयरिंग करके घटक के अन्य दलों को भी मौका दें I
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri

उत्तराखंड कांग्रेस के मित्रों से निवेदन : # लड़ना भाजपा से है # पर्दाफाश भी भाजपा का ही करना है - भ्रष्टाचार का, उसके जन विरोधी चेहरे का # लोकतंत्र और लोकतांत्रिक ताकतों को मजबूत करना है # मतभिन्नता लोकतांत्रिक बात है. मतभिन्नता और शत्रुता दो अलग- अलग चीजें हैं, दोनों को मिलाइये मत ! यूं तो जो कुछ हो रहा है, वो आपका आंतरिक मामला है पर चूंकि वह आंतरिक रूप से नहीं सार्वजनिक तौर पर हो रहा है, इसलिए टिप्पणी करनी पड़ रही है. लोकतंत्र, संविधान को बचाने और एक फ़ासिस्ट, तानाशाह हुकूमत के खिलाफ लड़ाई, एक बड़ी लड़ाई है. इसके लिए व्यापक एकता और समझदारी की जरूरत है.

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