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इंदु के अब्बू
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इंदु के अब्बू
@indukepapa
इंदु की कहानियां, मेरी जुबानी यह एक पैरोडी और एंटरटेनमेंट अकाउंट है, इसका किसी भी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है, यह सिर्फ एंटरटेनमेंट उद्देश्य से बनाया गया है
प्रयागराज Katılım Ocak 2025
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–:तुमने कहा श्री कृष्णा यादव हैं- ब्राह्मण ने कहा, भगवान हैं
–:तुमने कहा श्री राम क्षत्रिय हैं- ब्राह्मण ने कहा, भगवान हैं
–:तुमने कहा बुद्ध शाक्य हैं- ब्राह्मण ने कहा, भगवान हैं
–:तुमने कहा विश्वकर्मा बढ़ई हैं- ब्राह्मण ने कहा, भगवान हैं
–:तुमने कहा रावण ब्राह्मण है- ब्राह्मण ने कहा, राक्षस है
फिर भी जातिवादी ब्राह्मण ही हैं 😂😂😂

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गमले में उगे हुए लोग
आजकल बरगद पर ताने देते है....!!!
पिछले कुछ ही वर्षों से अचानक एक विचारधारा अपनाने वाले लोग, उस विचारधारा के सौ वर्षों से अपना सर्वस्व निछावर करने वाले संगठन पर उंगलियां उठाते है
गजब के लोग है
नया मूला ज्यादा प्याज खाता है शायद..!!!
(तस्वीर–: नेहरू जी 1894 जब वो 5 साल के थे, तब उनके पास कितना पैसा था देखिए)

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स्वीडन की एक न्यूज़ मैगज़ीन ने लिखा है...!
F16 के जमीदोज होते ही अमेरिका को पता चल गया था, भारत पर इसके इस्तेमाल से अमेरिका गुस्से में था?।
पर उस समय ये भी जरुरी था कि पाक को भारत के गुस्से से कैसे बचाया जाए, क्योकि भारत का एक पायलट पाक कब्जे में जाते ही भारत ने बड़ी कार्यवाई के लिये ब्रम्होस मिसाइलें तैयार कर ली थी।
प्लान यही था कि पाकिस्तान एयर फोर्स को रात में ही तहस नहस कर दिया जाये, जिसकी भनक अमेरिका को लग गयी।
अमेरिका ने तुरन्त पाकिस्तान को चेता दिया कि कब्जे में रखे भारत के पायलट को कोई नुक्सान नहीं होना चाहिये, नहीं तो भारत को रोकना नामुमकिन होगा, और चेताया कि युद्घ की स्थिति में वो F16 के इंजन को लॉक कर देगा।
भारत की सम्भावित कठोर कार्यवाई से घबराये खुद बाजवा ने UAE से बात की, और उधर अमेरिका ने अरब और रूस से बात की।
अरब ने भारत से एक रात रुकने की सलाह दी, अरब ने करीब दोपहर में ही पीएमओ नयी दिल्ली से सम्पर्क साध लिया था और पाक को फटकार लगायी..।
रूस, अमेरिका ने पाक को समझा दिया की कल सुबह तक हर हाल में इंडियन पायलट को छोड़ने की घोषणा करे, वो भी बिना शर्त।
यही नहीं, पाक ने चीन से भारत के आसमान पर निगरानी कर रहे उपग्रह से डायरेक्ट लिंक मांगा, जिसे चीन ने मना कर दिया।
अन्त में पाक ने टर्की से मदद मांगी।
उसने फ़ौरन ही मना कर दिया पायलट को छोडने को कहा। इधर भारत क्या कर सकता है, इसकी जानकारी के लिये पूरे विश्व के बड़े देशो के उपग्रह भारत पर नजर रख रहे थे।
24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक रात में, पाक के बड़े फौजी अधिकारी घर में बने बन्करों में रहते थे।
पाक बिलकुल असहाय था!
ऐसा इसलिए था क्योंकि देश की बागडोर किसी जेलेंस्की जैसे पप्पू के हाथों में नहीं बल्कि एक मजबूत हाथ में थी।
#अभिनंदन

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आखिर आला 🔒 चाहता क्या है???
पाकिस्तान में पेलाई चालू आहे..!!
अफगानिस्तान में दीन वाले मर रहे है
ईरान में सुप्रीम गच्च से पेल दिए गए
सऊदी में सूअर मर रहे
दुबई में आला 🔒 ने जाने कितनों को मरवा दिया
बहरीन में हाहाकार है
जॉर्डन में इनके परखच्चे उड़ गए
UAE, में मौत तांडव कर रही
आखिर आला 🔒 है किसकी तरफ?
क्या आला 🔒 खुद चाहता है कि ये सब निपट जाएं?
आला खुद इनके मजे ले रहा है, इनसे परेशान है सेक्स के भूखे भेड़ियों से शायद
इनकी मां बहन एक करवा रहा काफिरों से मिलकर

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भारत के सूअरों का दुख काहे खत्म नहीं होता ..??
साले समझ नहीं पा रहे कि उनका बाप कौन है
किसको सपोर्ट करें?
1–पाकिस्तान
2–अफगानिस्तान
3–ईरान
4–UAE
5–जॉर्डन
6–कतर
आखिर में रमजान के महीने में लगता है आला 🔒 बहुत नाराज है
अब इतनी 72 कहां से रोज मैन्युफैक्चर करेगा वो?
साला भारत के सूअरों का दुख खत्म काहे नहीं होता बे...!!!

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ईरान युद्ध और विश्लेषण–:
अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। साथ में उनकी बेटी, दामाद, नाती की भी मौत हुई है। ईरान की सेना इसके बाद भी लड़ने का दम दिखा रही है, लेकिन अब बहुत लड़ाई बची नहीं है। यह तय मानिये कि ईरान में सत्ता बदल रही है और अमेरिका-इजरायल के हितों का ध्यान रखने वाली नयी सरकार बनने जा रही है। जैसा सीरिया में हुआ, जैसा वेनेजुएला में हुआ, वैसा ही ईरान में होना तय है।
अमेरिका-इजरायल ने 24 घंटे भी नहीं लगने दिये और ईरान की सत्ता का शीर्ष समाप्त कर दिया। मतलब अमेरिका-इजरायल की तैयारी जबरदस्त थी। बहुत होमवर्क किया गया होगा और उसे अच्छे से जमीन पर उतारा गया होगा। लोग बता रहे हैं कि मोसाद ने ईरान में चलने वाले एक ऐप को हैक कर लिया, जिस ऐप पर लोग धार्मिक कार्यों के लिए निर्भर करते थे। उसे हैक कर लोगों को भ्रमित करने वाले नोटिफिकेशन भेजे गये। इससे पहले एक रिपोर्ट आयी थी, उसमें बताया गया था कि ईरान ने अपनी सरकार-सेना में मोसाद की घुसपैठ पकड़ने के लिए एक एलीट यूनिट बनायी। बाद में मालूम हुआ कि उस एलीट यूनिट में भी 20 से ऊपर लोग मोसाद के लिए काम कर रहे थे। सोच सकते हैं मोसाद ने कहाँ तक घुसपैठ की होगी! ईरान की मौजूदा व्यवस्था में गहरी पैठ के बिना इतनी जल्दी खामेनेई का पतन संभव नहीं था। मोसाद ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के लिए एक नया चैप्टर जोड़ दिया है। अब बैठकर सब पढ़ें इसे।
दुनिया में दो तरह के लीडर होते हैं। एक लीडर, जो अपने लोगों के बेहतर भविष्य के लिए समझौते करते हुए चलता है। संतुलन बनाते हुए अपने देश और अपने लोगों को मजबूत बनाता है। सबसे बढ़िया उदाहरण- देंग श्याओपिंग। इस भाई ने कन्फ्यूसियस के सिद्धांतों का पालन किया। चुप मारकर चीन को आर्थिक ताकत बनाया। बहुत समझौते किये इसके लिए। उसी का परिणाम है आज जिनपिंग को ट्रंप के सामने निहुरना नहीं पड़ता है। दूसरा लीडर स्वाभिमान से संचालित होता है। वह मिट जायेगा, लेकिन स्वाभिमान नहीं बेचेगा। ऐसे लीडर्स का अंत सुखद नहीं होता, लेकिन अंत के बाद भी सम्मान मिलता है। खामेनेई इसके ताजा उदाहरण। खामेनेई की उम्र 86 साल थी। सोच सकते हैं 86 साल का एक बुजुर्ग, सामने तय मौत देखकर भी लड़ने के जज्बे के साथ खड़ा था। इसके लिए इतिहास इस बुजुर्ग को सदा सम्मान ही देगा।
एक और बड़ी सीख है कि कोई भी सत्ता हो, उसे इस हद तक निरंकुश नहीं होना चाहिए, कि अपने लोगों को ही बल से चलाना अपरिहार्य हो जाये। सत्ता के लिए शक्ति का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन उसकी एक हद होनी चाहिए। वर्ना आप जिनके लिए लड़ने-मरने को तैयार होंगे, वही ऐन मौके पर दुश्मन से मिल जायेंगे।
इस घटनाक्रम ने दो स्पष्ट निष्कर्ष भी निकाले हैं। चीन की आर्थिक ताकत असंदिग्ध है, लेकिन उसके हथियारों की ताकत शुद्ध संदिग्ध है। पहले दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर में चीनी हथियारों का हश्र देखा। वेनेजुएला में अमेरिकी सेना आयी और राष्ट्रपति को उठाकर ले गयी। चीनी एयर डिफेंस धरा रह गया। और अब ईरान में। अमेरिका-इजरायल आया, सुप्रीम लीडर को सपरिवार साफ कर गया, और चीनी एयर डिफेंस देखता रह गया। जो देश चीनी हथियारों के दम पर शेर बन रहे हैं, अब सभी आराम से बैठकर सोच-विचार करेंगे। खुद चीन भी। दूसरा निष्कर्ष है:- फिलहाल चचा की चौधर बरकरार है और रहने वाली है। पुतिन भी ढीले पढ़ रहे हैं। उधर से खबर आ रही है कि रूस अब अमेरिका की वह शर्त मानने को तैयार हो गया है, जिसमें यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी देने की बात है। मतलब जो शांति समझौता होगा, उसमें यूक्रेन को अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी मिलेगी। रूस इस शर्त को सिरे से खारिज करते आया है, लेकिन अब स्वीकार करने के लिए तैयार हो रहा है।
भारत के लिए भी इसमें लेसन हैं। कल दुनिया ने कई अरब देशों में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को गिरते देखा। बहुतों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन कई सारे निशाने तक पहुँचे। जबकि उन सभी देशों के पास अमेरिकी एयर डिफेंस है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत पर पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन-मिसाइल छोड़े। एक भी ड्रोन-मिसाइल निशाने पर नहीं लगा। यह हमारी सेना की तैयारी और उनके कौशल का प्रमाण है। हमारे पास कोई दैवीय तकनीक या हथियार नहीं है, लेकिन हमारे पास सेना बहुत अनुशासित और काबिल है। भारत के लिए एक और लेसन यह है कि पुरानी पीढ़ी के शानदार योगदानों को याद करें, उनका धन्यवाद कहें। इंदिरा गाँधी से अटल बिहारी वाजपेयी तक और भाभा से कलाम तक, हमारे बुजुर्गों ने हमें परमाणु शक्ति संपन्न नहीं बनाया होता, तो हमारी स्थिति भी ईरान-वेनेजुएला जैसी ही होती।
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तुम्हारी भी बहुत बेइज्जती करते है हम लोग
तुम भी देख लो अपना कुछ..!!!
Arfa Khanum Sherwani@khanumarfa
“ज़िल्लत की ज़िंदगी से बेहतर है इज़्ज़त की मौत” - इमाम हुसैन
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