Iqrambar

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@iqrambar

Poetess and Entrepreneur

Ghaziabad Katılım Mart 2024
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
दिल जो करता है इतना रोने को इक तअल्लुक़ है तर्क होने को शर्म आती है हाल पर अपने कुछ भी हासिल नहीं है खोने को शुक्र इतना है,मेरे दामन पर दाग़ कोई नहीं है धोने को शेर उसको नहीं सुनाऊँगी उसने पीतल कहा है सोने को उसको पाने का रास्ता है मगर दिल नहीं करता जादू टोने को @iqrambar ✍️
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Iqrambar
Iqrambar@iqrambar·
@Kavya_Ras Bahot bahot shukriya 💐💐💐
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
#ग़ज़ल बेहतर यही है लौट जा मुझको पुकार कर मेरी तरह तू आग का दरिया न पार कर गुज़रे हैं अपने दिन जो मुलाक़ात के बग़ैर वो दिन भी मेरे हिज्र में जानाँ शुमार कर मैं उसके सामने नहीं आती हूँ इसलिये कैसे नज़र मिलाएगा दिल से उतार कर ~इकरा अम्बर @iqrambar
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
मेरी हसरत, थक कर वापस लौट रही है, आख़िर तितली कितना ऊंचा उड़ सकती थी। ~इक़रा अम्बर #Iqra_Ambar @iqrambar #Hasrat #Shair
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Abid Zaidi
Abid Zaidi@AbidZaidi1·
वैसे, हमारा साथ, घड़ी, दो घड़ी का था, लेकिन ये लग रहा है सफर, इक सदी का था। ~ आबिद ज़ेदी
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
वो मुझको देख के पहचानता नहीं है जब मलाल होता है, लेकिन बुरा नहीं लगता ~Iqra Ambar @iqrambar #Bura #Shair
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दिलीप जोशी
दिलीप जोशी@Medilipjoshi·
खेल नये शब-ओ-रोज़ दिखाती है दुनिया रोज़ सबक नया हमको सिखाती है दुनिया शै न लगाव-वगाव सी कोई दिल में वो देख मफ़ाद को उंस जताती है दुनिया जो भी असर कोई होना अगर तो हो जाये आग तो ख़ूब वो घर में लगाती है दुनिया * उंस : लगाव ~ दिलीप जोशी 'दीवाना' #बज़्म #बज़्म_काव्यमंच
#बज़्मकाव्यमंच@BazmKavyamanch

बज़्म काव्यमंच – दैनिक प्रतियोगिता 🗓️ दिनांक – 1812/2025 ✍️ विषय – #दिन / #रात आइए! आज की रचनाओं में उन पलों की नज़ाकत,उनकी झिलमिल परतों में सहेजे अनकहे भाव और उन यादों के पीछे छुपी धड़कनों की कहानी को महसूस कीजिए। चाहे कविता हो, ग़ज़ल हो या कहानी अपनी कलम से इन बीते पलों की महक को जीवन दीजिए #बज़्म, #बज़्म_काव्यमंच पर। ✍️🌹 🔗 हमारी कम्युनिटी से जुड़ें: x.com/i/communities/…

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Iqrambar
Iqrambar@iqrambar·
Bahot bahot shukriya 🥰🥰
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
वफ़ा के साथ गुज़ारा नहीं हो सकता क्या! वो शख़्स सिर्फ़ हमारा नहीं हो सकता क्या!! ~इकरा अम्बर✍️ (Iqra Ambar) @iqrambar
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ShadaB
ShadaB@ShadabFaridi92·
@iqrambar तवील लगते हैं दिन इंतज़ार में, वरना हज़ार दिन का कहाँ एक साल होता है । अच्छा लिखा है 💯
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Iqrambar
Iqrambar@iqrambar·
ताज़ा / تازہ किसी के ज़िक्र से कैसा कमाल होता है नज़र के सामने ताज़ा ख़याल होता है तवील लगते हैं दिन इंतज़ार में, वरना हज़ार दिन का कहाँ एक साल होता है ज़रा सी बात थी उसने मुझे नहीं देखा ज़रा सी बात का कितना मलाल होता है @iqrambar
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Abid Zaidi
Abid Zaidi@AbidZaidi1·
तेरी ख़ामोश आँखें, कह रही हैं, मुझे अब कुछ नहीं कहना है तुमसे। ~ आबिद ज़ैदी
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
वो काश मुझसे पूछता क्या मेरा हाल है वापस मैं आई हूँ तो लबों पर सवाल है यानी मैं लौट जाऊँगी आई जहाँ से हूँ यानी मेरे उरूज की मंज़िल ज़वाल है देखा है आज उसको किसी ग़ैर के क़रीब दिल है शिकस्ता मेरा, नज़र भी निढाल है ~इकरा अम्बर @iqrambar
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