Urvi

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@itsmiling_face

If beauty had only one color, it would be kesari 🧡

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Urvi
Urvi@itsmiling_face·
Nandi - The face of true and selfless devotion 🔱
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The Bharat News 🇮🇳
The Bharat News 🇮🇳@BharatNewsX·
BREAKING: Impact reported at Haifa oil refinery complex in Israel following an Iranian ballistic missile launch.
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चंदन सिंह
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।। माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे... जय माता दी🙏
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Urvi
Urvi@itsmiling_face·
@shuklaemrs Om Namah Shivaye
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Subhash LP Shukla
Subhash LP Shukla@shuklaemrs·
जय श्री महाकालेश्वर महादेव
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The Indian
The Indian@theindian25·
दधाना करपद्माभ्यां अक्ष माला कमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
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श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम
भावनाएं मोह माया में जब भागती हैं तो ईश्वर से दूर होती हैं ईश्वर से दूरी नहीं नजदीकी सुख देता है जय श्री राम
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Subhash LP Shukla
Subhash LP Shukla@shuklaemrs·
जय श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
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Urvi
Urvi@itsmiling_face·
@VedaRicha Jay Shree Krishna
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मधु शर्मा
श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार अष्टादश अध्याय: मोक्षसंन्यासयोग (सिद्धि और शरणागति का शिखर) पूछा अर्जुन ने, "हे महाबाहु! संन्यास क्या है? त्याग और संन्यास का, गहरा यह भेद क्या है? किस विधि से कर्म बंधन, कट जाते हैं सखा! सत्य कहिए मुझे, जो ज्ञान का है अनूप सखा!" बोले केशव, "पार्थ! सुन, कामनाओं का जो त्याग, विद्वान उसे ही कहते, सच्चा संन्यास और राग। पर सब कर्मों के फल का, जो कर दे अर्पण त्याग, वही त्यागी श्रेष्ठ है, जिसमें न मोह न राग।" कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन। सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः॥ (१८.९) कर्तव्य मान जो कर्म करे, तज फल की सब आस। सात्त्विक त्याग वही सखा, काटे जो भव-पाश॥ "अपने-अपने कर्मों में, जो तत्पर होकर रमता, ईश्वर को अर्पित कर कर्म, वही सिद्धि को वरता। स्वधर्म चाहे दोषपूर्ण हो, परधर्म से श्रेष्ठ महान, सहज कर्म को न तजे, जो है ईश्वर का वरदान।" सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ (१८.६६) सब धर्मों को छोड़ कर, आ मेरी ही शरण। पाप मुक्त मैं करूँगा, तज दे शोक और भरण॥ "भक्ति केवल भाव नहीं, वाणी का सम्मान भी है, कृष्ण तक पहुँचने का, गीता ही प्रमाण भी है। ज्ञान बिना जो भक्ति करे, वह मार्ग अधूरा जान, वाणी के उस दर्पण में ही, होते प्रभु के दर्शन दान।" कृष्ण भक्ति ही पूर्ण नहीं, वाणी पढ़ना सार। गीता पथ पर चल मधु, होगा बेड़ा पार॥ समापन सूत्र (मधु की कलम से): "भक्ति का द्वार ज्ञान से खुलता है।" कृष्ण से प्रेम करना सरल है, परंतु उन्हें समझना महान है। श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, स्वयं भगवान की वाणी है। जब तक हम उनकी इस वाणी का अध्ययन और मनन नहीं करते, तब तक हमारी भक्ति अधूरी है। गीता के माध्यम से ही हम कृष्ण के हृदय तक पहुँच सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #मोक्षसंन्यास_योग #गीता_सार_काव्यरूप
मधु शर्मा tweet media
मधु शर्मा@VedaRicha

श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार सत्रहवां अध्याय: श्रद्धात्रयविभाग योग (तीन प्रकार की श्रद्धा) पूछा अर्जुन ने, "हे माधव! संशय एक सताता है, शास्त्र-विधि बिन जो भजें, उनका क्या हो जाता है? उनकी निष्ठा कैसी केशव, सात्त्विक या राजस जानूँ? या तामस गुण के वश में, मैं उनको ही पहचानूँ?" बोले केशव, "पार्थ! सुनो, श्रद्धा त्रिविध (तीन) विधाता, देहधारियों के स्वभाव से, उपजे यह सब नाता। सात्त्विक, राजस और तामस, तीनों के गुण भारी, जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, यह रीति है जग सारी।" त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा। सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु॥ (१७.२) जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, जानो कुन्ती-लाल। तीन गुणों से बंधा है, यह जग का सारा हाल॥ "सात्त्विक भोजन सुख-आयु दे, रसदार और स्निग्ध महान, राजस भोजन दुख-रोग दे, तीखा-कटु अज्ञान। तामस भोजन दुर्गंधमय, बासी और उच्छिष्ट (जूठा) जान, इन तीनों के लक्षण से, पहचानो अन्न का दान।" "विधि-विधान से यज्ञ करे, फल की चाह न होय, वह सात्त्विक यज्ञ कहाता है, जिससे जग सुख सोय। दम्भ और मान के लिए जो, राजस यज्ञ रचाये, और तमस यज्ञ विधि-हीन, श्रद्धा-दान बिन जाय।" देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ (१७.१४) देव, गुरु और ज्ञानी की, पूजा, शुद्धि, सरलता धर। अहिंसा, ब्रह्मचर्य ये, शारीरिक तप जान, तू डर॥ "मन की शांति, सौम्यता और, मौन-आत्म-विनिग्रह (संयम), भाव-संशुद्धि ये सात्त्विक तप, काटे सब भव-जखम। सत्कार-मान के लिए जो, राजस तप किया जाय, और तमस तप मूढ़ता से, पीड़ा सह कर लाय।" "देश-काल-पात्र समझ, जो दान दिया जाता, फल की चाह रहित वह, सात्त्विक दान कहाता। प्रत्युपकार की चाह में, राजस दान है भारी, और तमस दान अपमानित, अश्रद्धा से दीखारी।" श्रद्धा-तप-भोजन-दान में, मधु सात्त्विक गुण धार। कृष्ण नाम का जप सखी, होगा बेड़ा पार॥ जीवन सूत्र: "आप जो हैं, आपकी श्रद्धा वैसी ही है।" हमारा स्वभाव ही हमारी श्रद्धा, हमारे भोजन और हमारे कर्मों को निर्धारित करता है। गीता हमें सिखाती है कि हमें तामस और राजस प्रवृत्तियों को त्याग कर, अपने जीवन के हर पहलू (श्रद्धा, भोजन, तप, दान) में 'सत्त्व' गुण को बढ़ाना चाहिए, तभी हम सच्चे अर्थों में उन्नति कर सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #श्रद्धात्रयविभाग_योग #गीता_सार_काव्यरूप

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Harsha Patel 🇮🇳
Harsha Patel 🇮🇳@harshagujaratan·
जय जगन्नाथ चक्का नयन नीलांचल वले
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Ayodhya Darshan
Ayodhya Darshan@ShriAyodhya_·
महाराजाधिराज श्री हनुमान जी महाराज का आज का मंगला श्रृंगार आरती का भव्य दिव्य दर्शन। श्री हनुमान जी महाराज आपका कल्याण करें। !! जय सियाराम !!
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Urvi@itsmiling_face·
@scorprian Jay Shree Krishna
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