Upadhyay Krishna
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@itsokkrishna
श्री काशी विश्वनाथो विजयतेतराम...


बिहार सरकार की ओर से ईशान किशन को ₹1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान किए जाने को आप कैसे देखते हैं ? #IshanKishan #Bihar

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में दूसरी बार नीट परीक्षा के पेपर लीक हो गए हैं। इसबार 22 लाख छात्रों ने एग्जाम दिया था , कंजर्वेटिव आंकड़ा भी लेते हैं तो लगभग 11 लाख छात्र गंभीर रूप से तैयारी करते होंगे। दिन के न्यूनतम दस घंटे पढ़ते होंगे। अगर लीक हुआ पेपर 50 हज़ार छात्रों तक भी पहुँचा होगा तो इन छात्रों के दो-तीन साल के मेहनत का अब कोई फ़ायदा नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में मोदी सरकार की रेपुटेशन वैसे ही लालू यादव जैसी है। धर्मेंद्र प्रधान ने इसे राबड़ी देवी के कार्यकाल जैसा बना लेने का ठान लिया है। कांग्रेस में अगर कोई भी दिमाग वाला बचा हो तो दिल्ली में बड़े आंदोलन की तैयारी करनी चाहिए। पूरे देश भर से NSUI के छात्रों को बुलाओ और दिल्ली भर दो। कम से कम हर युवा के फ़ोन में यह न्यूज़ जानी चाहिए कि कांग्रेस उसके हक़ के लिए गंभीरता पूर्वक लड़ रही थी। नरेंद्र मोदी चाहें बहुमत के अकड़ में रहें और जनता/विपक्ष की सुने या ना सुने।





आप विधाता हैं, आप ही ने ब्रह्मांड रचा है, आप कभी गलत नहीं हो सकते। आप इतने बड़े आकलनकर्ता हैं कि आप एक करोड़ लोगों की रैली चाहते हैं। नहीं आए लोग रैली में, नहीं थी यूनिटी सवर्णों में, झाँट नहीं उखाड़ सकते सवर्ण! यही है न आपका आकलन? फिर इस बात का उत्तर दीजिए (पर आप कैसे देंगे क्योंकि आप शाह-मोदी से अधिक तो नहीं जानते होंगे) कि हाउस अरेस्ट की नौबत क्यों आ गई? इसका है कोई उत्तर? रहने दीजिए। आपको अन्ना टाइप आंदोलन चाहिए? याद है कितने महीने की तैयारी थी? आप पचास दिन में चाहते हैं कि रामलीला मैदान में एक करोड़ भर जाए? और आपको यह लगता है कि सारा सवर्ण रैली में उतर जाएगा? जिस समूह की आज तक कोई चिंता ही नहीं हुई, न कोई संगठन है, आपकी माँग है कि दस लाख लोग सड़कों पर क्यों नहीं आए! ये है आपकी समझ? आप क्या सामान्य वर्ग को नहीं समझते या राजनैतिक समूहों के रैली में मोबिलायजेशन को? केजरीवाल की फंडिंग और ये 10-12 लोगों के व्यक्तिगत आह्वान को आप एक स्तर पर देख रहे हैं, वो भी 50 दिनों में! ईश्वर आपकी इच्छा पूरी करेगा, हर आंदोलन ऐसे ही दर्जन भर लोग आरंभ करते हैं। मैं तो आंदोलन चाहता भी नहीं, मैं तो इस जातिवादी मानसिकता से संचालित सरकार को झकझोड़ कर जगाना मात्र चाहता हूँ कि अपनी ही क्षति मत करो। क्या मुझे नहीं दिख रहा कि हर बीतता दिन इन पर कितना भारी पड़ेगा और कौन चुपचाप ‘अपना’ काम बनता देख कर आनंद में हैं? सवर्ण प्रभाव दिखाएगा। आप ही बोल रहे हैं न 2022-24 का? नकारात्मक हो या सकारात्मक, प्रभाव यूपी में दिखा या नहीं? मैं भी तो उनको गरिया ही रहा था कि ये जातिवाद मत करो, मेरा बल भी आपके साथ था, फिर भी प्रभाव पड़ा या नहीं? तो आप, संख्या गिनते रहो। मेरा कोई संगठन नहीं है, और मैं दो कौड़ी का हूँ फिर भी मेरे लिए बारह पुलिसकर्मी आते हैं कि मत जाओ। मेरे जैसों का प्रभाव हमने इकट्ठा हो कर भी दिखा दिया जब आप और आप जैसों ने ‘चार लोग नहीं आएँगे’ का कटाक्ष किया था। सवर्णों का प्रभाव भीड़ में भी दिखेगा, वोट में भी। आप और आपके जैसे जितने भी लोग हैं, जितना उपहास करोगे, उतनी ही पार्टी और विचारधारा को क्षति पहुँचेगी। बाकी, जैसा कि माननीय मोदी जी पानी पीते हुए कहते हैं: दोस्ती, बनी रहे!







