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@jay44singh

मेरा उद्देश्य किसी की भावना को आहत करना नहीं है 🤗

India Katılım Ağustos 2014
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
राजस्थान की धरती पर राजनेता छत्तीस क़ौम की बातें करते हैं; लेकिन इस प्रदेश में क़ौम छत्तीस नहीं, तीन सौ साठ से भी अधिक हैं। लेकिन अगर खेजड़ियाँ ही नहीं, समस्त वृक्ष, ओरण, गोचर और वन्य जीवों को बचाने की बात आए तो सामूहिक रूप से केवल एक ही धर्म के लोग सामने आते हैं और वे हैं बिश्नोई धर्म के। जैव संरक्षण में, जो भूमिका बिश्नोई निभाते हैं, वह शायद ही किसी की हो, जबकि इन दिनों इस धर्म के लोगों को नकल प्रकरण में जमकर बदनाम किया जा रहा है और जब वह कहीं सकारात्मक भूमिका में हों तो बाकी सब भी श्रेय लूटने आ ही जाते हैं। इस समय बीकानेर मे बिश्नोई साधु ही प्रमुख रूप से आगे हैं। कोई पूछे कि बाकी संत साधु कहाँ हैं, जो आए दिन नफ़रत फैलाने और अंधविश्वासों का प्रसार करने में जुटे रहते हैं। कौम छत्तीस नहीं, तीन सौ साठ हैं। यह कथन सिर्फ़ विविधता का उत्सव नहीं, हमारी सामाजिक स्मृति का आईना भी है। पर इस आईने में जब हम प्रकृति की परछाईं खोजते हैं; वृक्ष, ओरण, गोचर और वन्य जीवन की लीलाओं के संकट को देखते हैं तो एक चेहरा असाधारण स्पष्टता से उभर आता है और वह है बिश्नोई धर्म के लोगों का। खेजड़ी के साथ बिश्नोई का रिश्ता किसी प्रतीक या नारे का नहीं, जीवन-नियम का है। यह रिश्ता उपदेशों से नहीं, आचरण से पहचाना जाता है। इतिहास गवाह है, हम जहाँ भी देखें, जहाँ भी बिश्नोई गाँव होंगे, वहाँ मोर, मृग और ममत्व निडर होकर विचरण करता मिलेगा। और जहाँ वृक्ष काटने का प्रश्न आया, वहाँ बिश्नोई ने देह आगे की; जहाँ हिरण पर संकट आया, वहाँ अपने प्राणों की परवाह नहीं की। यह कोई एक घटना नहीं, सदियों से चली आ रही सामूहिक चेतना है, जिसमें प्रकृति “संसाधन” नहीं, सहचर है। आज हम अहिंसा और शाकाहार पर गर्व करते हैं तो जैन धर्म और ब्राह्मण धर्म के लोग सबसे अधिक ऊंची आवाज़ में बात करते हैं। यह गर्व अनुचित नहीं। पर एक विनम्र प्रश्न मन में उठता है: अहिंसा अगर सिर्फ़ थाली तक सीमित रह जाए तो क्या वह पूर्ण होती है? वृक्ष की छाल पर, ओरण की सीमा पर, गोचर की मिट्टी पर—अहिंसा का प्रमाण कहाँ दिखता है? मैंने अपने अनुभव में जैनों या ब्राह्मणों को बिश्नोई धर्म की तरह एकजुट होकर वृक्ष, ओरण, गोचर और वन्य जीवों की रक्षा में सामूहिक रूप से खड़े होते कभी नहीं देखा। अपवाद होंगे—पर आंदोलन नहीं, परंपरा नहीं। आप आम तौर पर ब्राह्मणों को गौ-रक्षा की बातें करते और गौरक्षा के लिए फांसी देने तक के मांग पत्र लिए घूमते देखे होंगे; लेकिन जब गोचरों का विनाश किया जा रहा है तो जाने ये लोग कहाँ चले जाते हैं और ढूंढ़े भी नहीं मिलते। बातें बहुत होती हैं मंचों से, पोस्टरों से, नारों से। लेकिन गौचर—जहाँ गाय चरती है—उसे बचाने के लिए कौन आगे आता है? बिना गोचर के गौ-रक्षा कैसी? बिना ओरण के जल-संरक्षण कैसा? और बिना वृक्ष के मरुस्थल में जीवन कैसा? लेकिन आज मैं जब पूरी दुनिया को पर्यावरणीय संकट में पाता हूँ तो सिर्फ़ और सिर्फ़ बिश्नेाई धर्म के लोग दिखते हैं जो इस चिंता पर जुटे रहते हैं। बिश्नोई धर्म इन सवालों का उत्तर भाषण से नहीं, संरक्षण से देता आया है। यह कहना किसी और धर्म और समाज को नीचा दिखाना नहीं है। यह तो एक निमंत्रण है कि हम सब बिश्नोई धर्म से सीखें। सीखें कि धर्म किताबों में नहीं, कर्म में होता है; कि पर्यावरण नीति सरकारी फाइल नहीं, सामुदायिक शपथ होती है; कि प्रकृति की रक्षा अकेले किसी की जिम्मेदारी नहीं, साझा संकल्प है। आज जब राजस्थान जल-संकट, भूमि-क्षरण और जैव-विविधता के संकट से जूझ रहा है, तब बिश्नोई धर्म ही का रास्ता हमें दिशा देता है—शोर नहीं, संयम; दावे नहीं, दृढ़ता; प्रतीक नहीं, प्राण। अगर आज आदि धर्मी, अहीर, अहेरी, अरोड़ा, बड़ी, बगड़ी, बागड़ी, बैरवा, बेरवा, बाजीगर, बलई, बांसफोड़, बांसफोड़, बावरी, बैरागी, बावरिया, बेड़िया, बारिया, भांड, बाल्मीकि, बिड़ाकिया, बोला, बदवा, बगरिया, बंजारा, बलाड़िया, बढ़ई, ब्राह्मण, बनिया, भांभी, रैदास, रेगर, रामदासिया, गुरड़ा, गरोड़ा, गावरिया, गोधी, गड़रिया, गायरी, घोसी, ग्वाला, गाड़िया लोहार, गडोलिया, घांची, गिरि, गोसाईं, गुर्जर, गद्दी, जुलाहा, जोगी, जाट, जगरी, जनवा, जांगिड़, कालबेलिया, कंजर, कुंजर, काछी, कुशवाहा, कलाल, कंडेरा, कणबी, कालबी, कुलमी, किरार, किराड़, कुम्हार, कुमावत, कोली, कोरी, कुचबंद, कोरिया, खरोल, खरवाल, खेरवा, खीलदार, खंगार, खटीक, खत्री, खरड़िया, लखारा, लोधी, लोढ़ा, लोहार, पंचाल, लोधे तंवर, मदारी, महार, मारू, मोची, मजबी, मेघवाल, माली, महाब्राह्मण, मिरासी, मंगणियार, मोगिया, मोग्या, मेव, मल्तानी, मलकाना, पटवा, पटेल, पाटीदार, पासी, रायका, रेबारी, रावत, रायसिख, राठ, रावल, राजपूत, सिख, सपेरा, सांसी, साटिया, सरभंगी, सरगरा, सिंगीवाला, साद, साध, स्वामी, सिंधी, सिकलीगर, संदूकसाज़, सिरकीवाल, स्वर्णकार, सुनार, सोनी, सहरिया, सहारिया, सिंधी मुसलमान, यादव आदि मिलकर काम करें यानी सबके सब और काेई भी छूटे नहीं और प्राकृतिक संसाधनों जैसे खेजड़ियों को, पीपल को, नीम को, हमारे आसपास के हर पेड़ को, टहनी को, पत्ती को, ओरण को, गोचरों को, कुओं को, बावड़ियों को, अरावली आदि आदि को बचाने में लगें तो किसकी ताक़त है कि नहीं बचें। सब लोग बिश्नोई धर्म से सीखें। सबसे बड़े महामानव और ईश्वर तुल्य देवपुरुष जांभो जी से सीखें। थोड़ा-सा भी उस संकल्प को अपने जीवन में उतार लें, जो जांभोजी ने बताया तो खेजड़ी ही नहीं, समूची धरती सुरक्षित हो सकती है। यह लेख आरोप नहीं, आह्वान है। आइए, अहिंसा को थाली से बाहर—ओरण तक, गोचर तक, जंगल तक, अरावली तक, वन्य जीवों तक—ले चलें। बिश्नोई धर्म ने राह दिखाई है। भगवान् जंभैश्वर ने जो रास्ता दिखाया है; वही दुनिया को बचाने की राह है। और बिश्नोई धर्म के बाद अब बारी हमारी है। क्योंकि मानव धर्म तो एक ही है।
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
बीकानेर की इस रात का दृश्य किसी उत्सव का नहीं, किसी तमाशे का नहीं; एक सामूहिक जागरण का है। ऊपर से लिया गया यह दृश्य बताता है कि धरती के लिए जब मनुष्य खड़ा होता है, तो वह अकेला नहीं रहता। खेजड़ी बचाओ आंदोलन की यह तस्वीर सिर्फ़ एक भीड़ नहीं दिखाती, यह उस नैतिक ऊर्जा का प्रमाण है, जो अक्सर रेगिस्तान की खामोशी में दबा दी जाती है, लेकिन मिटती नहीं। हज़ारों लोगों का एक साथ इकट्ठा होना अपने आप में असाधारण नहीं है; असाधारण यह है कि वे किसी नेता के वादे के लिए नहीं, किसी तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, एक पेड़ के लिए; एक जीवन-रेखा के लिए; एक साथ खड़े हैं। खेजड़ी, जो मरुस्थल में सिर्फ़ पेड़ नहीं है, संस्कृति है, अर्थव्यवस्था है, पशुधन की छाया है, और सबसे बढ़कर भविष्य की शर्त है। यह आंदोलन उसी शर्त को बचाने का संकल्प है। तस्वीर में दिखती रोशनी सिर्फ़ मंच की नहीं है। यह रोशनी उन चेहरों की है, जो शायद पहली बार यह महसूस कर रहे हैं कि पर्यावरण कोई दूर की, शहरी शब्दावली नहीं, बल्कि उनके रोज़मर्रा के जीवन का सवाल है। यह भीड़ किसान की है, पशुपालक की है, छात्र की है, बुज़ुर्ग की है और उन बच्चों की भी, जिनके लिए खेजड़ी सिर्फ़ किताबों में नहीं, ज़मीन पर बची रहनी चाहिए। बीकानेर जैसे शुष्क क्षेत्र में खेजड़ी का सवाल जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर है। यह पेड़ पानी को थामता है, मिट्टी को बाँधता है, और मनुष्य को यह याद दिलाता है कि विकास का अर्थ सिर्फ़ कंक्रीट और खनन नहीं होता। इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताक़त यही है कि यह विकास-विरोधी नहीं है; यह अंधे, हिंसक, और संवेदनहीन, मनुष्यता विरोधी, जैव विविधता विरोधी, गोधन विरोधी, ऊँट बकरी भेड़ विरोधी विकास के ख़िलाफ़ है। इस दृश्य में एक और बात साफ़ दिखती है—यह आंदोलन किसी एक संगठन या चेहरे तक सीमित नहीं है। यह नीचे से उठी हुई आवाज़ है। कोई एक झंडा, एक नारा, एक चेहरा केंद्र में नहीं है; केंद्र में है खेजड़ी। यही इसे नैतिक रूप से मज़बूत बनाता है। जब मुद्दा व्यक्ति से बड़ा हो जाए, तभी आंदोलन इतिहास बनते हैं। आज जब जलवायु संकट को अक्सर आँकड़ों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों तक सीमित कर दिया जाता है, बीकानेर का यह दृश्य बताता है कि असली जलवायु राजनीति ज़मीन पर होती है। यह आंदोलन उम्मीद देता है कि मरुस्थल भी प्रतिरोध कर सकता है—शांत, संगठित और सामूहिक तरीके से। खेजड़ी बचाओ आंदोलन का यह क्षण हमें यह भी सिखाता है कि आशा हमेशा नारों में नहीं, दृश्यों में जन्म लेती है। जब लोग रात में भी घर लौटने के बजाय धरती के साथ खड़े रहना चुनते हैं, तब भविष्य थोड़ी देर के लिए सुरक्षित महसूस होने लगता है। यही इस तस्वीर की सबसे बड़ी उपलब्धि है—यह हमें यह भरोसा देती है कि अभी बहुत कुछ बचाया जा सकता है। #खेजड़ी #खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव #खेजड़ी_बचाओ #खेजड़ी_बचाओ_पर्यावरण_बचाओ #खेजड़ी_सरंक्षण_क़ानून_लागू_करो #खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
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यह निर्णय केवल एक कार्यालय का नहीं, बल्कि जनभावनाओं, प्रशासनिक न्याय और जिला पुनर्गठन की मूल भावना से जुड़ा हुआ है। अतः जनहित को ध्यान में रखते हुए यह अत्यंत आवश्यक है कि ADM कार्यालय गुड़ामालानी में ही खोला जाए, किसी अन्य स्थान पर नहीं।(3/n) @BhajanlalBjp @kkvishnoibjp
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Jay🎯🫵@jay44singh·
यदि ADM कार्यालय को गुड़ामालानी के स्थान पर किसी अन्य जगह स्थापित किया जाता है, तो इससे गुड़ामालानी क्षेत्र के नागरिकों में गहरा असंतोष उत्पन्न होगा और मंत्री महोदय को स्वयं गुड़ामालानी में विरोध का सामना करना पड़ सकता है।(2/n)
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Jay🎯🫵@jay44singh·
🚨निवेदन🚨 जिला पुनर्गठन की प्रक्रिया में गुड़ामालानी स्पष्ट रूप से केन्द्र बिंदु (Centre Point) है। भौगोलिक स्थिति, आवागमन, प्रशासनिक संतुलन एवं जनसुविधा,सभी दृष्टि से गुड़ामालानी ही ADM कार्यालय के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है।(1/n) @kkvishnoibjp
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Jay🎯🫵@jay44singh·
गुड़ामालानी और धोरीमना को बालोतरा ज़िले में शामिल करने के लिए माननीय मंत्रीजी का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद। #केके_विश्नोई #केके_बिश्नोई @kkvishnoibjp @BhajanlalBjp
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@shekharcanada Surjewala Rajasthan se Rajya sabha MP hai, isliye Rajasthan ko MPLAD ka fund diya hai. Wo unki responsibility bhi hai.But Rajasthan ke MP other state ko kyu de rahe hai ye samajh me nhi aa raha.Koi emergency ho toh de toh koi bat nhi.
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Shekhar Choudhary
Shekhar Choudhary@shekharcanada·
अब राहुल कस्वां जी और अन्य दो सासंदो की टीम ये बोल रही है रणदीप सुरजेवाला जी ने चूरू, भरतपुर और झुंझुनू में इतना बजट दिया और हमने सिर्फ इतना वापिस दिया... मैंने थोड़ी सी रिसर्च करके पता लगाया कि रणदीप सुरजेवाला जी ने 10 करोड़ के लगभग कार्यों की अनुशंसा की जिसमे से लगभग 9 करोड़ से अधिक राजस्थान के अनेक जिलों को मिले है जिनके नाम इस प्रकार है:- अलवर, जैसलमेर, सीकर, झुंझुनू, हनुमानगढ़, बहरोड़, बीकानेर, डीग, जोधपुर, बालोतरा, नीमकाथाना, जयपुर ग्रामीण, गंगानगर, धौलपुर, डूंगरपुर, दौसा , गंगापुरसिटी, भीलवाड़ा आदि..... तो क्या इसका मतलब ये है कि इन जिलों से संबंधित सभी सांसद सुरजेवाला जी के लिए कैथल में बजट के अनुशंसा करेंगे? इसका सीधा जवाब है नहीं.... तो @RahulKaswanMP जी हमने आपको वोट दिया है तो हमें ये बताओ आपने किस वजह से बजट की अनुशंसा दूसरे राज्य में की?
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The Hunter
The Hunter@newsthehunter·
सच्ची और आमजन की खबरों का नया ठिकाना – The Hunter News "द हंटर" पर खबरें मिलेंगी बेबाक अंदाज़ में, बिना किसी डर और दबाव के..हम पूछेंगे सिस्टम से सवाल, खोजेंगे अंदर का सच और बनेंगे जनता की आवाज. Please Subscribe... youtu.be/rlCVIcwgbxk?si… #TheHunterNews
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Ankit Kumar Avasthi
Ankit Kumar Avasthi@kaankit·
आप सभी के साथ एक खुशखबरी साझा कर रहा हूँ!! अरु और परू के नन्हे भाई का आगमन इस दुनिया में हुआ है।👶🏼 ईश्वर की कृपा से माँ और बच्चा, दोनों स्वस्थ हैं। आप सभी का आशीर्वाद यूं ही बना रहे!
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Joraram Kumawat
Joraram Kumawat@JoraramKumawat·
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को नया अवसर देते हुए पशुपालन विभाग में 1100 वेटरिनरी अधिकारियों की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं व युवाओं के कल्याण को समर्पित इस ऐतिहासिक निर्णय हेतु माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार एवं धन्यवाद। @BhajanlalBjp @RajGovOfficial @rajanimalhus
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Rajasthan Police
Rajasthan Police@PoliceRajasthan·
श्री उत्कल रंजन साहू: राजस्थान पुलिस के गौरवशाली सेवा सफर से आरपीएससी अध्यक्ष तक जयपुर। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) उत्कल रंजन साहू (RR:88 बैच) को मंगलवार को राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। श्री साहू वर्ष 1989 से भारतीय पुलिस सेवा में कार्यरत हैं। ओडिशा के निवासी हैं साहू ने एम.टेक (इंजीनियरिंग - जियोलॉजी) की शिक्षा प्राप्त की है। एक लंबा और प्रतिष्ठित करियर श्री साहू ने अपनी लंबी सेवा अवधि में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए राजस्थान पुलिस को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग वर्ष 1991 में एएसपी जोधपुर ईस्ट के रूप में हुई। इसके बाद, 1993 में वे कमांडेंट आठवीं बटालियन आरएसी अगरतला में कार्यरत रहे। एसपी के रूप में उन्होंने धौलपुर, बाड़मेर, आरएसबीआई जयपुर, हनुमानगढ़, सीकर, बांसवाड़ा, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और जोधपुर शहर जैसे विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दीं। जोधपुर शहर से पदोन्नति के बाद वे उपमहानिरीक्षक के पद पर एसीबी (स्पेशल विजिलेंस) में कार्यरत रहे। इसके पश्चात, उन्होंने आईजी एसीबी (स्पेशल विजिलेंस), कोटा रेंज, पुलिस मुख्यालय, रूल्स, प्लानिंग एवं मॉडर्नाइजेशन, इंटेलिजेंस जैसे वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के रूप में, उन्होंने इंटेलिजेंस, इंटेलिजेंस एवं मुख्यमंत्री सुरक्षा, गृह रक्षा एवं प्लानिंग एवं मॉडर्नाइजेशन में भी उल्लेखनीय कार्य किया। वे डीजी प्लानिंग एवं मॉडर्नाइजेशन एवं गृह रक्षा भी रहे। सम्मान और नवाचार वर्ष 2024 से श्री साहू राजस्थान पुलिस के पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे। उन्हें उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 2016 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से और 2005 में पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। श्री साहू के नेतृत्व में पुलिस बल की कार्यशैली में नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिला है, जिससे पुलिस व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। उनका लंबा और बेदाग करियर उन्हें आरपीएससी चैयरमैन जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है, जहां उनकी अनुभव और निष्ठा से सार्वजनिक सेवा में और अधिक पारदर्शिता और दक्षता आएगी। प्रमुख तैनातियाँ ° पुलिस महानिदेशक, राजस्थान: 2024 से वर्तमान तक ° डीजी, होम गार्ड्स एवं प्लानिंग: 2020-2024 ° एडीजी के पद पर: 2014-2020 ° डीआईजी, आईजी के पद पर: 2005-2014 ° एसपी, विभिन्न जिलों में: 1994-2005 तक #UtkalRanjanSahu #RajasthanPolice #RPSCPresident #DGPofRajasthan
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
Great news! India’s strides in environmental conservation are happening with great vigour and are powered by public participation.
Bhupender Yadav@byadavbjp

Tally 91! On the eve of #EnvironmentDay, India has two new entrants to the list of Wetlands of International Importance. The latest to join the list of Ramsar sites in India are: 1⃣ Khichan, in Phalodi, Rajasthan 2⃣ Menar in Udaipur, Rajasthan This addition takes our tally to 91. The achievement is yet another testament to the fact that PM Shri @narendramodi ji's focus on environmental conservation is successfully helping India build a greener tomorrow. Congratulations, India, especially the people of Rajasthan!

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Rohit Sharma
Rohit Sharma@ImRo45·
With every passing moment, with every decision taken I feel extremely proud of our Indian Army, Indian Airforce & Indian Navy. Our warriors are standing tall for our nation’s pride. It’s important for every Indian to be responsible and refrain from spreading or believing any fake news. Stay safe, everyone! #OperationSindoor #JaiHind 🇮🇳
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Rajnath Singh
Rajnath Singh@rajnathsingh·
भारत माता की जय!
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Mr.Rajput🇮🇳
Mr.Rajput🇮🇳@MrRajput_1·
हर मुश्किल हो जाती है आसान जब अपनी शरण में ले लेते हैं जय श्री राम
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Jay🎯🫵@jay44singh·
श्री अनंतराम बिश्नोई को बाड़मेर भाजपा जिला अध्यक्ष निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !!! @AnantramBhanwar
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Jay🎯🫵@jay44singh·
🇮🇳🇮🇳💪
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