Sabitlenmiş Tweet
DEEPAK BALOT🍁
6.3K posts

DEEPAK BALOT🍁
@k_deepak077
Social Activist | Graduate 🎓 (BscMLT) | Son Of Farmer | Tweets Are Personal |
Jaipur Katılım Kasım 2024
3.3K Takip Edilen3K Takipçiler

DEEPAK BALOT🍁 retweetledi
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi

बिना शादी के एक बेटी को दिया था जन्म ...
ये है अभिनेत्री नीना गुप्ता ।
ये अस्सी दशक में वेस्टइंडीज के क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ अपने सम्बन्ध को लेकर चर्चा में रहीं।
इन्होंने बिना शादी के हि अपनी बेटी मसाबा को जन्म दिया था जो की एक फ़ैशन डिजायनर हैं।
उस जमाने में बडा कदम उठाना बहुत बड़ी बात थी...

हिन्दी
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi

ये है डांसर गोरी नौगोरी ।
ये राजस्थान कि प्रसिद्ध डांसर हैं।
इनका असली नाम तस्लीमा भानो हैं इनका जन्म नागौर में हुआ हैं।
ये bigg Boss17 का हिस्सा रह चुकी हैं।
ये अपने बोल्ड डांस मूव्स के लिए फेमस हैं।
इन्होंने 9 साल की उम्र में डांस करना शुरू कर दिया था।
इनके डांस की वजह से घर वाले ओर आसपास के लोग खुश नहीं थे।
घरवालों ने 12 दिन के लिए कमरे में बंद कर दिया था ।
ये ले फोटो ले, से चर्चा में आईं थी।
इनका डांस राजस्थान ओर हरियाणा में प्रसिद्ध हैं।

हिन्दी
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi

In a game full of competition, they chose loyalty.
Rajat Dalal 🤝 Rachit Ojha
Real friendship > strategy
The50 show ka sabse solid bond? 👀
#RachitStealsTheShow


English
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi
DEEPAK BALOT🍁 retweetledi

जीवन का एक कड़वा सच: एक कैंसर जिसका इलाज असंभव-सा लग रहा है
जन्म लेते ही जब हम इस दुनिया में आते हैं, तो सबसे पहले माँ-बाप की गोद मिलती है। हम घुटनों के बल चलते हैं, गिरते हैं, रोते हैं—और हर बार कोई हाथ हमें उठाने को तैयार रहता है।
माँ अपनी नींद त्यागकर हमें सुलाती है, पिता थकान छिपाकर स्कूल छोड़ने जाता है। बचपन में हमारी हर छोटी-बड़ी जरूरत परिवार पूरा करता है। माँ खाना बनाती है, पिता फीस भरता है। दोनों मिलकर भविष्य का सपना बुनते हैं।
लेकिन जैसे ही उम्र 16-18 की होती है, अचानक आजादी का शोर बढ़ जाता है। माता-पिता की सीख बंधन लगने लगती है। संस्कार पुराने विचार लगने लगते हैं और यदि वे गलत रास्ते से रोकें तो उन्हें दकियानूसी कह दिया जाता है।
युवावस्था में यदि कोई भटक जाए, अय्याशी में जीवन बिगाड़ ले तो वही संतान कहती है—माँ-बाप ने रोका क्यों नहीं?
सच यह है कि सच्चे और जिम्मेदार व्यक्ति को परिवार की आवश्यकता हमेशा रहती है। परिवार केवल साथ रहने का नाम नहीं है। यह मर्यादा, अनुशासन और संस्कार की सीमा है।
हाँ, अगर कोई अय्याशी करना चाहे तो परिवार उसे अनुमति नहीं देगा। घर को कभी कोठा नहीं बनने देगा। क्योंकि घर इज्जत का स्थान है, संस्कारों की नींव है और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है।
परिवार रोकता है—क्योंकि वह गिरते हुए नहीं देख सकता।
टोकता है—क्योंकि उसे चिंता होती है।
डाँटता है—क्योंकि उसके पीछे प्रेम है।
आज जरूरत है यह समझने की कि परिवार हमारी स्वतंत्रता का दुश्मन नहीं, बल्कि बर्बादी से बचाने वाला प्रहरी है।
जिस दिन हम यह समझ लेंगे, उस दिन आजादी और संस्कार दोनों साथ चलेंगे।

हिन्दी















