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Kanker, Chhattisgarh Katılım Haziran 2010
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kamal shukla@kamalkanker·
क्या बिना किसी साक्ष्य के हजारों वकीलों पर फर्जी होने का आरोप लगाया जा सकता है, जबकि कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता? रही बात संदेह जताने की, तो इसका अधिकार केवल न्यायाधीशों को नहीं, बल्कि मुझ जैसे साधारण व्यक्ति को भी है। न्यायाधीश की डिग्री पर संदेह करने का अधिकार भी मुझे है। बस सवाल यही है कि मुझ जैसे व्यक्ति के आरोप या शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट क्या देश के सभी न्यायाधीशों की योग्यता की जांच का आदेश देगी? #न्याय_अब_कोर्ट_में_नहीं #NarendraModi #देशहित #न्यायाधीश #न्याय #कोर्ट #सुप्रीमकोर्ट
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kamal shukla@kamalkanker·
"आज हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री #नरेंद्र_मोदी और ज्यादा गिर गए" “देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर शेयर बाजार की चमक से नहीं, बल्कि रुपये की गिरती कीमत से दिखती है। आज भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹96 के पार पहुंच गया। सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है — इसका असर पेट्रोल, डीज़ल, गैस, दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स और आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो देश की जेब कमजोर होती है। और जब सरकार केवल प्रचार में मजबूत दिखे, तो अर्थव्यवस्था का सच आखिर छुपता नहीं।” #Narendra_Modi #PMModi #GodiMedia #मोदी #कमल_शुक्ला #रुपया_गिरा_रे #रुपया
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देश को डर और भ्रम से नहीं, बल्कि सच और जवाबदेही से चलाना चाहिए। जब भाजपा महंगाई और बेरोजगारी को 'संकट' कहती है, तो 12 साल से सत्ता में कौन है? 🧐 समस्या दूसरों पर थोपकर उपलब्धियों का श्रेय अकेले क्यों? जनता पूछ रही है, क्या यही अमृतकाल है, जहाँ युवा भटक रहे हैं और अर्थव्यवस्था गलत नीतियों के बोझ तले दबी है? 😥 हमें भाषण नहीं, मजबूत आर्थिक नीति और रोजगार चाहिए। ✊ #देशहित #आर्थिकनीति
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kamal shukla@kamalkanker·
“जब देश का युवा बेरोज़गारी, महंगाई और असुरक्षा से जूझ रहा हो, तब अगर न्यायपालिका से ऐसी टिप्पणियाँ आएँ कि ‘बेरोज़गार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं’, तो यह केवल एक बयान नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के आत्मसम्मान पर चोट जैसा महसूस होता है। न्याय व्यवस्था केवल कानून से नहीं, जनता के विश्वास से चलती है। लेकिन जब फैसलों से ज़्यादा केवल टिप्पणियाँ सुनाई दें, जब आम आदमी को न्याय दूर और सत्ता करीब दिखे, तब लोगों के मन में गुस्सा और अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है। न्यायपालिका की कुछ गतिविधियां देखकर ऐसा लगता है कि न्याय व्यवस्था पर से जनता का भरोसा उठ गया है। क्या अब न्याय से जुड़े अधिकारियों को गलियों में या सीधे कोर्ट में जूते खाने पड़ेंगे? देश के लिए यह बेहद खतरनाक स्थिति होगी अगर जनता का भरोसा अदालतों से उठने लगे। न्यायपालिका को याद रखना होगा कि सम्मान पद से नहीं, निष्पक्ष न्याय से मिलता है। ⚖️🇮🇳😟⚖️🧐 #न्यायव्यवस्था #न्यायपालिका #बेरोजगारी #युवा #न्याय #लोकतंत्र
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kamal shukla@kamalkanker·
सोशल मीडिया में देश के विभिन्न विद्वानों के आ रहे पोस्ट और दी जा रही जानकारी के अनुसार देशवासियों से विदेश न जाने और सोना न खरीदने की अपील कर खुद ही आर्थिक आपातकाल की स्थिति में देश को छोड़कर विदेश रवाना होने के पीछे जो कहानी सामने आ रही है, वह बहुत ही भयावह और निंदनीय है। एक तो देश के ऐसे कठिन समय में विदेश यात्रा देश को फायदा पहुंचाने वाली किसी महत्वपूर्ण नीति के लिए होनी चाहिए थी, मगर प्रधानमंत्री जी की यह यात्रा उद्देश्यहीन है। साथ ही यह यात्रा देश हित में नहीं, बल्कि अपने मित्र अडानी के हित में ज्यादा प्रतीत हो रही है। एक तरफ अमेरिका में अडानी को आरोपमुक्त करने के एवज में हुई डील के तहत रूस और ईरान से तेल लेना बंद कर देश को भयंकर महंगाई में धकेल दिया गया है। वहीं प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा को भी वहां की सरकार द्वारा अडानी के निवेश पर लगाए गए रोक के मामले को सुलझाने के लिए की गई यात्रा के रूप में देखा जा रहा है। मतलब साफ है कि 8:30 हजार करोड़ के विमान में करोड़ों का खर्च कर इन देशों की यात्रा देश के नागरिकों के हित में नहीं, बल्कि अपने मित्र उद्योगपति अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए ही है, ऐसा प्रतीत होता है। #देशहित #आर्थिकनीति #रुपया_गिरा_रे #GodiMedia #नरेंद्रमोदीजी #मोदी #NarendraModi
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"अगर विश्व भूगोल में किसी और देश में सबसे घटिया चीफ जस्टिस मिल गया तो भारत की नाक तो बच जाएगी।" यह पोस्ट आदरणीय Kanak Tiwari जी का है । मगर इसके नीचे का पोस्ट मेरा है, जिसके लिए मैं स्वयं जिम्मेदार हूं । न्यायपालिका की कुछ गतिविधियां देखकर ऐसा लगता है कि न्याय व्यवस्था पर से जनता का भरोसा उठ गया है। क्या अब न्याय से जुड़े अधिकारियों को गलियों में या सीधे कोर्ट में जूते खाने पड़ेंगे? 😟⚖️🧐 #न्यायव्यवस्था #न्याय #न्यायाधीश #न्याय_अब_कोर्ट_में_नहीं
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कॉकरोच बहुत जीवट प्रजाति के जीव होते हैं, यह जब संगठित होकर कुछ कर डालना चाहते हैं तो सब कुछ चट कर जाते हैं। अपने और अपने पूरे परिवार की कई पीढ़ियों की व्यवस्था सत्ता की दलाली करके करने वाले जस्टिस महोदय, जान लीजिए यह वही कॉकरोच हैं जिन्होंने बड़े-बड़े देशों की सत्ता बदल दी है। हाल ही में आपने नेपाल में देखा है, हाल ही में ही श्रीलंका में देखा है। दुनिया की तमाम क्रांतियों में इन कॉकरोच की एकजुटता का बहुत बड़ा योगदान होता है, समझे #जस्टिस!! #न्याय_अब_कोर्ट_में_नहीं #न्याय #न्यायव्यवस्था #न्यायाधीश #GodiMedia #देशहित #NarendraModi #नरेंद्रमोदीजी #देश_भर_के_काकरोच_एकजुट_हो #न्याय #युवा #बेरोजगारी #लोकतंत्र #देशहित
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देशवासियों को मुसीबत में छोड़कर विश्व गुरु का ऐशबाजी शुरू हो गया है, देश में मुसलमान अछूत और विदेश जाते ही बरसों से बिछड़े भाई !! वाह रे विदेशनीति !! साढ़े आठ हजार करोड़ के विमान में करोड़ों रुपया खर्च कर ये लाला गले मिलने ( पड़ने ) गया है !! #GodiMedia #देशहित #NarendraModi #विदेश #विदेशनीति
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दोहा पूरा करें- Leak Leak पेपर होएं Leak ही होए नीट ..................... ..................... यह अपील आज Deepak Pachpore जी ने फेसबुक पर किया, मेरा मन तो पहले से कुछ करने, कुछ लिखने के लिए आक्रांत था, सो आज अपने अंदर के राक्षस को रोक नहीं पाया । उनकी अपील पर दूसरी लाईन निम्न है "युवाओं को बेरोजगार बनाकर दंगे में घसीट" मगर अब इसे दोहा और चौपाई में पूर्ण पढ़ लीजिए पेपर लीक सदैव ही, होत नीट की राह। बेरोजगारी दे युवा, झोंकत दंगा माह।। ​लीक होत नित नीट परीक्षा। जस नहिं बची कौतुक दीक्षा।। युवा वर्ग सब फिरे बेकारा। अंधकारमय भयउ संसारा।। ​रोष अनल महुँ सब कोउ धावै। दंगहि माहिं सीस कहुँ पावै।। छली व्यवस्था सुधि नहिं लेई। छिनहिं भाग्य दुख दारुण देई।। #peper_leak #NEET #neetcoaching #न्याय_अब_कोर्ट_में_नहीं #नीट
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नॉर्वे के सरकारी वेल्थ फंड ने हाल में #AdaniGreenEnergy को कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय जोखिम के आधार पर अपनी निवेश सूची से बाहर किया था। � मोदी जी की नार्वे यात्रा को भी विद्वान लोग इसी संदर्भ में देख रहे हैं #modimagic #नरेंद्र_मोदी #PMForentour
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“जब देश का सर्वोच्च न्याय मंच बेरोजगार युवाओं की पीड़ा को समझने के बजाय उन्हें ‘कॉकरोच’ कहने लगे, तब सवाल केवल एक बयान का नहीं रह जाता — सवाल व्यवस्था की संवेदनहीनता का बन जाता है। बेरोजगारी कोई अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का आईना है। लोकतंत्र में सवाल पूछने वालों को अपमानित करना नहीं, सुना जाना चाहिए।” #बेरोजगारी #लोकतंत्र #न्यायपालिका #Narendra_Modi #GodiMedia #हरामखोर #न्याय_अब_कोर्ट_में_नहीं #PMModi #मोदी
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Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal@ArvindKejriwal·
सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।
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kamal shukla@kamalkanker·
न्यायपालिका किसी भी लोकतंत्र की अंतिम उम्मीद होती है। जब जनता सरकार, व्यवस्था और सत्ता से निराश होती है, तब उसकी आख़िरी नज़र अदालतों पर टिकती है। लेकिन यदि आम नागरिकों के मन में यह भावना घर करने लगे कि न्याय केवल शक्तिशाली लोगों के लिए तेज़ है और आम लोगों के लिए वर्षों तक टलता रहता है, तो यह स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर संकेत है। आज देश में बढ़ती हुई नाराज़गी, लंबित मामलों का बोझ, अलग-अलग मामलों में दिखने वाली असमान गति, और कई फैसलों को लेकर उठते सवाल — इन सबने जनता के एक हिस्से के भीतर न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा किया है। यह अविश्वास यदि लगातार बढ़ता गया, तो समाज में अराजकता और भीड़तंत्र की मानसिकता जन्म ले सकती है, जहाँ लोग अदालतों के निर्णयों को मानने के बजाय दबाव, आक्रोश या ताकत के रास्ते पर उतरने लगें। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरनाक होगी। न्यायपालिका की गरिमा केवल संवैधानिक पद से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से बनी रहती है। इसलिए अदालतों को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि जनता को निष्पक्ष दिखाई भी देना चाहिए। लोकतंत्र में न्याय की ताकत डंडे से नहीं, विश्वास से चलती है। और जिस दिन जनता का भरोसा पूरी तरह टूट गया, उस दिन संविधान की सबसे मजबूत दीवारें भी कमजोर पड़ जाएंगी।
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“जब लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों पर सवाल उठते हैं, तब देश की जनता न्यायपालिका की ओर उम्मीद से देखती है। लेकिन अगर सर्वोच्च अदालत केवल ‘कड़ी टिप्पणी’ तक सीमित रह जाए और व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव दिखाई न दे, तो लोगों के मन में निराशा और असहायता पैदा होना स्वाभाविक है। लोकतंत्र केवल बहस और टिप्पणियों से मजबूत नहीं होता, बल्कि निष्पक्ष और प्रभावी फैसलों से जनता का विश्वास कायम रहता है। आज सवाल केवल चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का नहीं है, बल्कि उन संस्थाओं की स्वतंत्रता का है जिन पर देश के लोकतंत्र की नींव टिकी हुई है। जनता अदालतों का सम्मान इसलिए करती है क्योंकि उसे न्याय की उम्मीद होती है, केवल शब्दों की नहीं। यदि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर लगातार प्रश्न उठते रहें और समाधान सिर्फ टिप्पणियों तक सीमित रहे, तो लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता का भरोसा भी डगमगाने लगता है। देश को मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं चाहिए — ऐसी संस्थाएं जो सत्ता से नहीं, संविधान से संचालित हों।”
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अरविंद केजरीवाल के भाषण को एक बार फिर से देखिए, उसने कहीं से ऐसा नहीं कहा है जैसा आईटी सेल द्वारा लोगों को उल्लू बनाने की कोशिश की जा रही है। हां, उसने देश की जनता को वर्तमान राजनीति की सच्चाई और दिशा दिखाई है। वास्तव में मैं देश की जनता को भड़काना नहीं, बल्कि यह जरूरी बात समझाना चाहता हूं कि अगर अभी सत्ता को उखाड़कर नहीं फेंकते तो तुम किसी का कुछ उखाड़ने लायक भी नहीं रह जाओगे। एवीएम की करतूतें, देश के नागरिकों के वोट काटकर या देश के मतदाताओं को बदलकर, देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं को डरा-धमकाकर या प्रलोभन देकर देश के लोकतंत्र को खत्म करने वाली किसी भी सरकार को आज तक देश की युवा पीढ़ी ने ही उखाड़ फेंका है, चाहे वह नेपाल हो या कोई भी देश! इसमें नया क्या है? 🤔💔😂👍🚫💯
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kamal shukla@kamalkanker·
मैं स्वयं ब्राह्मण समाज से आता हूँ. इसलिए पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि राजकुमार भाटी जैसे व्यक्ति पर जातिवाद का आरोप लगाना गलत और दुर्भावनापूर्ण है. सच्चाई यह है कि भाटी के तर्क और उनकी राजनीतिक समझ सत्ता को सबसे ज्यादा असहज करती है. इतिहास, संविधान और उत्तर भारत की सामाजिक संरचना पर उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि बहस में अक्सर विरोधी पक्ष निरुत्तर दिखाई देता है. मैंने उन्हें लंबे समय से सुना है. उन्होंने हमेशा तथ्यों और शालीनता के साथ अपनी बात रखी है. लेकिन आज माहौल ऐसा बना दिया गया है कि जो भी सरकार से तीखे सवाल पूछे, उसे तुरंत बदनाम करने की कोशिश शुरू हो जाती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजकुमार भाटी ने अपने बयान को लेकर अगर किसी को ठेस पहुँची हो तो उसके लिए माफी भी मांग ली है. इसके बाद इस विवाद को अब यहीं खत्म कर देना चाहिए. किसी व्यक्ति को लगातार निशाना बनाना, उसकी नीयत पर सवाल उठाना और राजनीतिक नफरत फैलाना बिल्कुल गलत है. लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, बहस हो सकती है, लेकिन किसी पढ़े-लिखे और तार्किक व्यक्ति को सिर्फ इसलिए घेरना कि वह सत्ता से कठिन सवाल पूछता है, स्वस्थ राजनीति की निशानी नहीं है. भाटी जी. आप मुद्दों पर बोलते रहिए. आपकी आवाज़ राजनीतिक बहस को गंभीरता और स्तर देती है@rajkumarbhatisp
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kamal shukla@kamalkanker·
सुनो मित्रों !! बहुत हो गया मोदी का विरोध ! अगर आप सही में मोदी विरोधी हो तो मुझे सोने का हार दिलवा कर दिखाओ और विदेश यात्रा कराओ, तब मानूंगा। 🤣👍😂💃🕺
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kamal shukla@kamalkanker·
प्रधानमंत्री Narendra Modi जी की “स्वस्थ भारत” वाली अपील के बाद रायपुर पुलिस प्रशासन से विनम्र निवेदन है कि शहर के कुछ रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी विशेष अभियान चलाया जाए। क्योंकि हालात अब ऐसे हो चुके हैं कि — सब्ज़ी में तेल नहीं डाला जाता, तेल में सब्ज़ी को “डुबकी” लगवाई जाती है। कुछ जगहों पर तो दाल देखकर लगता है जैसे उसने तैराकी प्रतियोगिता जीत ली हो। पनीर इतना ऑयली आता है कि उसे खाने से पहले NOC और लाइफ जैकेट की जरूरत पड़ जाए। अतः मांग है कि — “आवश्यकता से अधिक तेल उपयोग अधिनियम” के तहत कार्रवाई हो, और जो रसोइये एक कड़ाही में आधा लीटर तेल डालते पकड़े जाएं, उनसे पूछताछ की जाए कि वे खाना बना रहे हैं या पेट्रोलियम भंडारण कर रहे हैं। 😄
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Sanjay Gupta 🇮🇳
Sanjay Gupta 🇮🇳@sanjukgupta1987·
🚨 रेल में शिकायत की कीमत इतनी भारी पड़ेगी… किसी ने सोचा भी नहीं था.! 😱 ट्रेन में सफर कर रहे एक यात्री ने सिर्फ इतना किया कि उसने कैटरिंग स्टाफ द्वारा extra चार्ज लेने की शिकायत कर दी… शिकायत के बाद यात्री का PNR और सीट डिटेल्स आगे भेजी गईं फिर कैटरिंग वाले आए और यात्री को बुरी तरह पीट दिया! कपड़े फाड़े, थप्पड़-लातें चलीं। वीडियो वायरल होने के बाद IRCTC ने ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया, ₹5 लाख जुर्माना लगाया और FIR दर्ज हुई। लेकिन सवाल ये है कि अगर शिकायत करने पर यात्री को ही पीटा जाएगा, तो कौन शिकायत करेगा?
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