@puji1110 ख्वाब देखना कोई बुरी बात नहीं मैडम ममता का पतन हो चुका है पूरी जिंदगी में वापस नहीं आएंगे बंगाल की जनता दोबारा गलती नहीं करेगी, अभी तो उसको जेल जाना है, कितने साल की सजा होगी देखते जाओ मैडम आगे आगे क्या क्या होने वाला है, तूने कल्पना भी नहीं की होगी समझी काबा मदीना वाली मैडम।
@jpsin1 चलो यह मन भी लिया तुमने जो गलती की उसकी माफी मांगी वह भी मान लिया पर अभिषेक के साथ तूने फ्लैट पार्टनरशिप में लिया तो रिश्ता क्या है ? इसका भी जरा खुलासा कर दो मैडम आप खुलासा करो या ना करो पर अब बंगाल की गद्दी पर दादा आ गए हैं समझ में आया।
सोचिए कितनी नीच और झूठी महिला है
इसने अपने ट्विटर हैंडल से शिवलिंग पर कंडोम चढ़कर ट्वीट किया था और खुद जिसे स्वीकार भी किया था कि हां यह ट्वीट मैंने किया था लेकिन तब ममता बनर्जी सरकार में थी और यह चौड़े होकर हिन्दुओ को हिन्दू धर्म को अपमानित कर रही थी
लेकिन आप जब सरकार बदल गई है तब यह नीचे महिला झूठ बोल रही है कि वह ट्वीट मेरे हैंडल से किसी और ने किया था फिर यह कह रही है कि उस वक्त मेरी उम्र मात्र 22 साल थी मुझसे गलती हो गई थी और जैसे ही मुझे गलती का एहसास हुआ मैंने डिलीट कर दिया
@mishra_satish सर मैनेआपका पूरा विश्लेषण देखा मैं अचंभित रह गया आज तक किसी ने पूरी सच्चाई नहीं बताई दिल्ली का लुटियन मीडिया कभी भी सच्चाई बताता नहीं राजीव गांधी का असली कातिल कौन है वो तो समझ में आ गया पर इतने सालों से पर्दा क्यों ?
@janardanspeaks@janardanmis ये फूहड़ गालीबाज जोकर को लगता हे कि वो बहुत बड़ा बुद्धिशाली हे, पर जनता ने उसकी पार्टी को रौंद डाला इसलिए वो फालतू की बकवास करता हे, वैसे वो नौटंकीबाज तो हे बस अब उनका यही काम बचा हे ।
अब इस जमुरे की सुनो.. 🤔🤣🤔🤣
कल्याण बनर्जी ने अभी-अभी देश से मानो संस्थाओं को ठुकराकर सड़कों पर उतरने की अपील कर दी है।
टीएमसी सांसद। वर्तमान सांसद।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील।
आज उनके सटीक शब्द थे:
🗣️ “लोकतंत्र को अब केवल तभी बचाया जा सकता है जब लोग सड़कों पर उतरें।”
🗣️ “अब कोई संस्था लोकतंत्र को नहीं बचा सकती। दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब सुप्रीम कोर्ट भी लोकतंत्र को नहीं बचा सकता।”
इसे दोबारा पढ़िए। एक ऐसा व्यक्ति जो:
→ हर हफ्ते उसी सुप्रीम कोर्ट में बहस करके करोड़ों कमाता है।
→ उसी संविधान के तहत संसद में बैठता है।
→ उसी भारतीय करदाता के पैसों से सांसद का वेतन लेता है।
वही अब देश से कह रहा है कि संस्थाओं को छोड़कर सड़कों पर उतर जाओ।
यह लोकतंत्र के खतरे में होने की बात नहीं है। यह एक विफल राजनीतिक दल द्वारा यह परखने की कोशिश है कि व्यवस्था कितनी दूर तक झुकेगी।
बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया।
अदालतों ने उनके खिलाफ फैसले दिए।
संविधान ने उनके मुताबिक काम करना बंद कर दिया। तो अब सहारा — सड़क का।
अगर यही बात किसी भाजपा सांसद ने कही होती, तो मीडिया में “लोकतंत्र की मौत” पर हफ्तों तक बहस चल रही होती। शरजील इमाम इससे कम बात पर जेल जा चुके हैं।
तो पहले क्या होना चाहिए —
कल्याण बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट में वकालत से प्रतिबंधित किया जाए, या संसद से निष्कासित?
ये ही वो MC है जो उपराष्ट्रपति धनकड़ जी की संसद के बाहर मिमिक्री करता है..
सदन के नेताओं और अपनी पार्टी की महिला को बेहद गंदे तरीके से जलील करता है..
देश के गृह मंत्री को गालियां देता है..
बेहद बदमिजाज, बदतमीज और घमंडी..
@NandKis99362043@janardanspeaks यह ममता का जमूरा कितना भी उछल-कूद कर ले पर अब उसकी कोई सुनने वाला नहीं करता है, बकवास करने दो इसे चांडाल के बकवास से क्या फर्क पड़ता है,
@janardanspeaks खराब मानसिकता का इलाज अस्पताल मे है जीवन बर्बाद कर लोगो मे नफरत भरकर सत्ता पाने की सोच वाले देश की चिंता नहीं करते
तो ऐसा अविश्वास फैलाते
संविधान मैं अगर इसके लिए कुछ दंड देने की व्यवस्था है
तो माननीय कोर्ट ऐसी अराजकता का ऐलान करने को स्वत संज्ञान से इनकी प्रैक्टिस पर रोक लगावे?
@w7688071@JagranNews पारदर्शिका लानी हे तो क्यों न सुप्रीम कोर्ट से चालू किया जाय कॉलेजियम सिस्टम हटाया जाए ताकि जजों की नियुक्ति में पारदर्शिका लाए जाए और भाईभतीजावाद को खत्म किया जय ?
@JagranNews मै तो बोलता हु सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी मुख्यालय शिफ्ट करके अभी सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग में एक 5 स्टार होटल खोला लेने होना 😂😂😂 संविधान का हवाल दे रहे हैतो संविधान पारदरर्शिता की बात करता है ईसा नियम से पारदरर्शिता कहा है भाई साहब
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति पैनल से सीजेआई को हटाने के फैसले को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि संविधान में चुनाव आयोग की नियुक्ति समिति में न्यायिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है और न्यायपालिका का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी सदस्य को शामिल करना एक विधायी विकल्प है न कि कोई संवैधानिक अनिवार्यता।
नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक स्वतंत्रता लाने के उद्देश्य से 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों वाली पीठ ने फैसला सुनाया था कि एक अंतरिम उपाय के तौर पर जब तक कोई कानून नहीं बन जाता तब तक नियुक्तियां एक ऐसे पैनल द्वारा की जानी चाहिए जिसमें प्रधानमंत्री, सीजेआई और विपक्ष के नेता (LoP) शामिल हों।
इसके बाद संसद ने सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम पारित किया, जिसके तहत नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। अब इस कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
एक हलफनामे में सरकार ने याचिकाकर्ता के इस तर्क का खंडन किया कि सीजेआई की जगह किसी कैबिनेट मंत्री को शामिल करने से ईसी की स्वतंत्रता पर आंच आएगी। सरकार ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून में कोई खामी नहीं है और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कभी भी प्रभावित नहीं हुए हैं। तब भी जब नियुक्तियां पूरी तरह से कार्यपालिका द्वारा की जाती थीं, जैसा कि सात दशकों से भी अधिक समय से होता आ रहा है।
इस तथ्य का हवाला देते हुए कि पिछले सभी सीईसी और ईसी की नियुक्तियां कार्यपालिका द्वारा ही की गई थीं, सरकार ने कहा कि नियुक्तियों में कार्यपालिका के विशेष अधिकार और संस्थागत स्वतंत्रता की कमी के बीच जिस सांठगांठ का सुझाव दिया गया है, वह केवल एक कोरी कल्पना है।
#SupremeCourt#CJI#DainikJagran
@bstvlive@yadavakhilesh तु इतनी भी कोशिश करले जबतक बीजेपी सरकार हे तबतक तू ख्वाब ही देखता रह evm को लेके सुप्रीम कोर्ट जा चुके ओर क्या sc ने कहा औंधे मुंह की खानी पड़ी भूल गया क्या।
दिल्ली से पर्ची आ गयी क्या?
सुना है यूपी में कैबिनेट का विस्तार हो रहा है या यूँ कहें कि मुख्यमंत्री जी की शक्ति का ‘कटाव छटाव’ हो रहा है। जिनका मंत्रिमंडल है उनसे भी तो कोई पूछ ले। हमारी माँग है कि यूपी के मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं को आरक्षण दिया जाए।
वैसे ये सवाल भी कुलबुला रहा है : ‘अगल-बगल’ की जोड़ी का कुछ हला-भला होगा या फिर वो ‘अगले-बगले’ ही झांकते रह जाएंगे या सिर्फ़ रील बनाते…
शुभेंदु अधिकारी ~ ब्राह्मण
भजन लाल शर्मा ~ ब्राह्मण
हिमांता विश्व शर्मा ~ ब्राह्मण
देवेंद्र फडणवीस ~ ब्राह्मण
योगी आदित्यनाथ: ठाकुर
पुष्कर सिंह धामी ~ठाकुर
रेखा गुप्ता : बनिया
मनिक साहा: बनिया
बीजेपी के देश में 17 मुख्यमत्री है जिसमे एक भी दलित मुख्यमंत्री नहीं है, ऐसा क्यों ?
@BoltaHindustan@MalviyaHemendra देखना है संवैधानिक संस्थाओं की कर्मठता, ईमानदारी, जवाबदेही व पारदर्शिता ।
लोकतंत्र को बचाने और मजबूत करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय को तत्काल प्रभाव से कार्यवाही करनी चाहिए और लोकतंत्र के लुटेरों से आम जनता को बचाना चाहिए ।
बुढ़िया तो अभी से रोने लगी...
अरे बूढ़ा अभी तो ढंग से शुरुआत भी नहीं हुई है।
मज़ा तो अब आयेगा जब शुभेंदु दादा CM की कुर्सी पर बैठेंगे, नीचे से डालेंगे, गले से निकालेंगे..!!!
@sureshkapse मुझे लग रहा है, इन जैसे फ्राड नेता लोग को रोड़ पर दौड़ा दौड़ा के पीटना चाहिए। चाहे वो पप्पू, संजय सिंह, ममता, अखिलेश, स्टालिन तेजस्वी इस पर आपकी क्या राय है। कमेंट में जरुर बताना। 🤔
@BoltaHindustan बस जर्मनी में बैठ कर यूट्यूब पर ज्ञान पेलते रहो। इतना ही गुदा है तो यहीं से वीडियो बना। इसे लग रहा यूट्यूब पर वीडियो बनाने से क्रांति आ जाएगी। केवल तेरे अच्छे पैसे बन रहे।