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भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए संचालक : @ambar_abhishek

Katılım Nisan 2009
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Kavita Kosh@kavitakosh·
कविता कोश का मोबाइल एप्प अब प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है: लिंक: play.google.com/store/apps/det…
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Narpati C Pareek 🇮🇳
Narpati C Pareek 🇮🇳@pareeknc7·
रवि दग्ध है तपती धरा, खग वृन्द प्यासे हैं विकल। तृण-तृण तृषित हो जल रहा, अदृश्य हैं मृदु स्रोत जल॥ हैं रिक्त सर सरि बावड़ी, हत अश्रुपूरित झील हैं। थाती धरा की कह रही, ठोंकी मनुज ने कील हैं॥ - अनामिका सिंह 'अना' #कविता_कोश  #लेखनी✍️ @kavitakosh @SamyakLalit
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आरती सिंह
ये है 'कविता कोश' अनुपम, अलंकारों से जड़ा जितना लूटोगे इसे आश्चर्य मय! उतना बढ़ा जब कोई साथी हमें, मिलता नहीं परिवेश में साथ साँचा पा सकेंगे, मित्र 'कविता कोश' में! ~डॉ मृदुल कीर्ति #कविता_कोश #लेखनी✍️ @kavitakosh के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं 💐 संस्थापक:@SamyakLalit
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आरती सिंह
@Yasmeen80859727 @ParmarA03 @kavitakosh @SamyakLalit @pareeknc7 @ShwetaJha01 @alokrsrivastav @ambar_abhishek @ShardaSuman5 @kr0271amit @GeetaNatha @margret_017 @Sksio3 @ArchanaVed @SaritaaroraS @tripathiarun123 @MengiKuldip @Tohopeislife @madhuleka @MaltiVishwaka12 @arorafbd @Syadav02 @Arvindhse2 @vipranagarkar @mkanoujia78 @DileepS94728729 @VineshGaba @vds31175 @Dev__Prakash @PeetamberC @LLuckyghatela13 @Sujitkumartiw11 पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश, पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश ! मेखलाकर पर्वत अपार अपने सहस्‍त्र दृग-सुमन फाड़, अवलोक रहा है बार-बार नीचे जल में निज महाकार, -जिसके चरणों में पला ताल दर्पण सा फैला है विशाल ! ~ सुमित्रानंदन पंत #कविता_कोश 💐 #लेखनी ✍️
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Abhishek Kumar Ambar
Abhishek Kumar Ambar@ambar_abhishek·
उदासी ने कभी जब पर उठाए तेरी यादों के तब ज़ेवर उठाए कोई दीवाना जब भी सर उठाए ज़माने ने तभी पत्थर उठाए लगा यादों के जब-जब फूल चुनने मेरे हाथों ने बस नश्तर उठाए - अभिषेक कुमार अम्बर
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Mohan Pargaien IFS🇮🇳
कुछ और रंग भरे मौज भरे होली के मतवाले दृश्य 👇लोहघाट से (साभार देवभूमि ग्रुप) गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में भारतेंदु हरिश्चंद्र
Mohan Pargaien IFS🇮🇳 tweet mediaMohan Pargaien IFS🇮🇳 tweet mediaMohan Pargaien IFS🇮🇳 tweet mediaMohan Pargaien IFS🇮🇳 tweet media
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Kavita Kosh@kavitakosh·
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा - अमजद इस्लाम अमजद #श्रद्धांजलि
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Kavita Kosh@kavitakosh·
छब्बीस जनवरी है बड़ा दिन महान है ख़ुशियां मना रहा मिरा हिन्दोस्तान है देखी अनेकता में यहां हम ने एकता जमहूरियत की अपनी अनोखी ही शान है हिन्दू हो कोई सिख हो मुसिलमान हो कोई वतने-अज़ीज़ सब का ये हिन्दोस्तान है - राजेन्द्र नाथ रहबर #26january #RepublicDay2023 #RepublicDayIndia
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@SumanKeshari5 ईश्वर सब अच्छा करेगा मैम, शुभकामनाएँ 🙏🙏
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Suman Keshari
Suman Keshari@SumanKeshari5·
आप लोगों की दुआओं की जरूरत है। आज अभी थोड़ी देर में पुरुषोत्तम अग्रवाल जी की आँख की सर्जरी है।
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Kavita Kosh@kavitakosh·
कैलेण्डर 2023 ====== कविता कोश कैलेण्डर ऑर्डर करने में कोई भी प्रॉब्लम हो तो, आप लोग 8447540078 पर कविता कोश टीम से सम्पर्क कर सकते हैं। धन्यवाद
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Kavita Kosh@kavitakosh·
बहुत कठिन है वफ़ा की डगर तो क्या कीजे न हमसफ़र न कोई राहबर तो क्या कीजे - अमीता परसुराम मीता
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Kavita Kosh@kavitakosh·
फर्क है तुझमें, मुझमें बस इतना, तूने अपने उसूल की ख़ातिर, सैंकड़ों दोस्त कर दिए क़ुर्बा, और मैं ! एक दोस्त की ख़ातिर, सौ उसूलों को तोड़ देता हूँ। - राजेन्द्र नाथ रहबर
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Kavita Kosh@kavitakosh·
इतिहास में कई बार तानाशाहों का अंत कई बार हो चुका है, लेकिन इससे उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें लगता है कि वे पहली बार तानाशाह हुए है।। ~ मंगलेश डबराल #पुण्यतिथि
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Kavita Kosh@kavitakosh·
तुम हमारे किसी तरह न हुए वरना दुनिया में क्या नहीं होता - मोमिन ख़ाँ मोमिन
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Tej@$wini
Tej@$wini@Tejaswinii_11·
@AarTee33 @margret_017 @ShwetaJha01 @JaunSee @TarunaMisra @AAlkA_Suthar @pareeknc7 @tripathiarun123 @Yasmeen80859727 @ambar_abhishek @alokrsrivastav @kr0271amit @VineshGaba @GeetaNatha @MaltiVishwaka12 जिनको दुनिया की निगाहो से छुपाये रखा जिनको इक उम्र कलेजे से लगाये रखा जिनका हर लफ़्ज़ मुझे याद था पानी की तरह याद थे मुझको जो पैग़ाम-ए-ज़ुबानी की तरह मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह तेरे ख़त आज मैं गंगा मे बहा आया हूं आग बहते हुये पानी मे लगा आया हूं #राजेंद्रनाथ_रहबर 🙏
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आरती सिंह
आरती सिंह@AarTee33·
#राजेंद्रनाथ_रहबर जी #विनम्र_श्रद्धांजलि 🙏 तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त, मैं जलाता कैसे, प्यार में डूबे हुये ख़त, मैं जलाता कैसे, तेरे हाथों के लिखे ख़त, मैं जलाता कैसे? फिल्म : अर्थ (1983) @margret_017 @ShwetaJha01 @JaunSee @TarunaMisra @AAlkA_Suthar youtu.be/QWrPySCCiW0
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आरती सिंह
आरती सिंह@AarTee33·
महताब नहीं निकला सितारे नहीं निकले देते जो शब-ए-ग़म में सहारे नहीं निकले। क्या छोड़ के बस्ती को गया तू कि तिरे बा'द, फिर घर से तिरे हिज्र के मारे नहीं निकले ! #राजेंद्रनाथ_रहबर (1931-2022) #विनम्र_श्रद्धांजलि🙏 #लेखनी✍️ @pareeknc7 @BatraK9
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Abhishek Kumar Ambar
Abhishek Kumar Ambar@ambar_abhishek·
विश्वप्रसिद्ध शायर,'तेरे ख़ुशबू में बसे खत' के लेखक, मेरे उस्ताद श्री राजेन्द्र नाथ रहबर 92 वर्ष की आयु में आज अनन्त यात्रा पर रवाना हो गए.! ईश्वर उनको अपने श्रीचरणों में स्थान दे! @rekha_bhardwaj @iamrana @MunawwarRana @AalokTweet @teekhar @Hindi_Kavitaa @hindi_house_
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Kavita Kosh@kavitakosh·
वतन की सर-ज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते हैं ज़रूरत हो तो मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते हैं ये जुरअत ये शुजाअत ये बसालत हम भी रखते हैं - जोश मलसियानी #IndiaIndependenceDay
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Kavita Kosh@kavitakosh·
मैं ने ये सोच के बोए नहीं ख़्वाबों के दरख़्त कौन जंगल में उगे पेड़ को पानी देगा - अज़ीज़ बानो दाराब 'वफ़ा'
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Kavita Kosh@kavitakosh·
कहीं ज़मीं से तअल्लुक़ न ख़त्म हो जाए बहुत न ख़ुद को हवा में उछालिए साहिब ~ राजेन्द्र नाथ रहबर
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