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Delhi Katılım Nisan 2026
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दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर इलाके में DDA जमीन पर अवैध निर्माण का बड़ा खेल! सूत्रों के अनुसार Plot No. 302, CN-213, गली नंबर 3, छतरपुर एन्क्लेव फेज-1 में DDA भूमि पर अवैध कमर्शियल बिल्डर फ्लैट का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। आरोप है कि यह पूरा खेल DDA, MCD और थाना मैदान गढ़ी के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत और मोटी रिश्वत के दम पर चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय संरक्षण देने में लगे हैं। आखिर किसके इशारे पर सरकारी जमीन पर यह अवैध कब्जा और निर्माण हो रहा है? दिल्ली प्रशासन, DDA, MCD और पुलिस विभाग से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और बिल्डर माफिया पर सख्त कार्रवाई की जाए। 📍 पता: Plot No. 302, CN-213, Gali No. 3, Chhatarpur Enclave Phase-1, New Delhi #DDA #IllegalConstruction #Chhatarpur #MaidanGarhi #Delhi #BuilderMafia #Corruption #MCD #DDAland #DelhiNews #IllegalBuilders @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @guptarekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @DelhiPolice @MCD_Delhi
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🚨 दक्षिण दिल्ली के executive club घिटोरनी इलाके में रात के अंधेरे मे अवैध बोरिंग का बड़ा घोटाला चलने की सूचना सामने आई है जिसमे प्रदीप बीट अफसर थाना फतेहपुर बेरी फर्जी पर्मिशन बना कर मोटी रिस्वत लेकर अवेध बोरिंग करवा रहा है जानकारी के अनुसार फॉर्म नंबर 13, बजाज फॉर्म, क्लब ड्राइव रोड, executive club घिटोरनी में कथित तौर पर फर्जी परमिशन तैयार कराकर धड़ल्ले से बोरिंग कराई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में प्रदीप नामक पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। मामला थाना फतेहपुर बेरी क्षेत्र का है जिसकी पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर शिकायत करी परंतु कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। दिल्ली में पहले से ही भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, बावजूद इसके नियमों को ताक पर रखकर अवैध बोरिंग का काम जारी है। सवाल यह है कि बिना वैध अनुमति के आखिर मशीनें कैसे चल रही हैं? क्या संबंधित विभाग और प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ मिलीभगत से हो रहा है? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इलाके में भूजल संकट और गंभीर हो सकता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन सीधे-सीधे कानून और पर्यावरण दोनों के खिलाफ है। प्रशासन, दिल्ली जल बोर्ड, SDM और विजिलेंस विभाग को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अवैध बोरिंग माफियाओं पर रोक लग सके। प्रदीप बीट अफसर थाना फतेहपुर बेरी अपनी पद पावर का गलत इस्तेमाल कर फर्जी पर्मिशन बना कर मोटी रिस्वत लेकर अवेध बोरिंग करवा रहा है तथा शिकायत होने पर खुद मशीन को भगा रहा है। #Delhi #SouthDelhi #Gadaipur #Ghitorni #IllegalBoring #WaterMafia #GroundWater #FatehpurBeri #DelhiPolice #SaveWater #BreakingNews #DelhiNews #EnvironmentalCrime @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @guptarekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP
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दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर विधानसभा थाना मैदानगढ़ी के हरगोबिंद एन्क्लेव इलाके में डीडीए की जमीन पर कथित कब्जे और हरे-भरे पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि DN Fitness Unisex Gym और CNG Pump के पीछे, पुलिस बूथ के पास लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। मामले को लेकर 112 पर शिकायत भी की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कथित तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता को पुलिस की तरफ से कहा गया कि मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा। रात के समय भी चल रही गतिविधियां- स्थानीय लोगों का दावा इलाके के लोगों का आरोप है कि पेड़ों की कटाई का काम कई दिनों से जारी है। लोगों का कहना है कि सुबह और देर शाम कुछ लोग मशीनों और औजारों के साथ पहुंचते हैं और धीरे-धीरे पेड़ों को काटा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने यह भी दावा किया कि कई पेड़ों की शाखाएं पहले काटी गईं और बाद में पूरे पेड़ों को गिरा दिया गया। निवासियों के अनुसार, जिस जमीन पर यह गतिविधियां हो रही हैं वह डीडीए से जुड़ी बताई जा रही है और वहां किसी प्रकार का निर्माण या कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अभी तक प्रशासन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पर्यावरण को लेकर बढ़ी चिंता स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में पहले से ही हरियाली कम होती जा रही है और ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। लोगों ने सवाल उठाया कि अगर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हो रहा है तो संबंधित विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे। दिल्ली में हाल के वर्षों में पेड़ों की कटाई और सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर कई मामले सामने आते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट तक में डीडीए और पेड़ों की कटाई को लेकर सुनवाई हो चुकी है। पुलिस बूथ के पास होने के बावजूद कार्रवाई नहीं? सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस बूथ के नजदीक यह सब होने के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने मौखिक शिकायतें भी दीं लेकिन अभी तक मौके पर कोई बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में पूरी जमीन पर कब्जा किया जा सकता है और इलाके की बची हुई हरियाली भी खत्म हो जाएगी। डीडीए और प्रशासन से जांच की मांग स्थानीय नागरिकों ने डीडीए, वन विभाग और दिल्ली प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर पेड़ों की कटाई बिना अनुमति के की जा रही है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। दिल्ली सरकार और संबंधित विभागों की तरफ से अवैध पेड़ कटाई की शिकायत के लिए हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था भी मौजूद है। स्थानीय लोगों की मांग * पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक लगे * डीडीए जमीन की जांच हो * अवैध कब्जे की कोशिश पर कार्रवाई हो * इलाके में दोबारा वृक्षारोपण कराया जाए * जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और इलाके की हरियाली बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk #DDA #DelhiNews #SouthDelhi #Chhatarpur #HargobindEnclave #TreeCutting #SaveTrees #GreenDelhi #DelhiEnvironment #IllegalEncroachment #DDAland #DelhiPolice #EnvironmentNews #BreakingNews #DelhiUpdates #SaveEnvironment #TreeFelling #DelhiIssues #LocalNews #PoliceBooth #DNFitness #CNGPump #EnvironmentalIssue #DelhiAlert #Nature #Greenery #PublicIssue #SouthDelhiNews #DelhiViral #NewsUpdate
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नई दिल्ली | छतरपुर दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर इलाके से अवैध निर्माण और एमसीडी की कार्रवाई से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। आरोप है कि जिस संपत्ति पर पहले सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई की गई थी, वहां दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, मामला C No. 1379, रवि शर्मा के प्लॉट से जुड़ा बताया जा रहा है, जो नाथ स्वीट्स के साथ मेन रोड, छतरपुर पर स्थित है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस स्थान पर पहले एमसीडी (Municipal Corporation of Delhi) द्वारा सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई की गई थी। हालांकि अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि सीलिंग के बाद कथित तौर पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि यदि सील तोड़कर निर्माण कराया गया है, तो यह नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला हो सकता है। स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल इलाके के निवासियों का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे एमसीडी की कार्रवाई की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी, तो दोबारा निर्माण शुरू होने की स्थिति कैसे बनी और इसकी निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। अधिकारियों तक पहुंची शिकायत सूत्रों के अनुसार, मामले की शिकायत संबंधित विभागों और अधिकारियों तक पहुंचाई गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि एमसीडी इस मामले में दोबारा जांच करती है या नहीं और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। सीलिंग और डिमोलिशन अभियान पर फिर चर्चा गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में एमसीडी द्वारा अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कई अभियान चलाए गए हैं। इन अभियानों के तहत कई संपत्तियों पर सीलिंग, नोटिस और डिमोलिशन जैसी कार्रवाई की गई थी। ऐसे में छतरपुर से सामने आया यह मामला एक बार फिर अवैध निर्माण, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर बहस का विषय बन गया है। @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk #Chhatarpur #DelhiNews #MCD #IllegalConstruction #DelhiBreaking #SouthDelhi #SealingAction #DemolitionDrive #MCDAction #DelhiUpdates #ConstructionNews #UrbanDevelopment #BreakingNews #DelhiLive #CivicIssues #DelhiPolitics #Encroachment #PropertyNews #LocalNews #DelhiAlert #NewsUpdate #MunicipalCorporation #IllegalWork #DelhiToday #ViralNews #PublicIssue #DelhiDevelopment #MainRoad #ChhatarpurNews #LatestNews
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मदर टेरेसा स्कीम फार्म हाउस में अवैध निर्माण के आरोप, 112 पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा दक्षिणी दिल्ली के भाटी गांव स्थित मदर टेरेसा स्कीम फार्म हाउस के फॉर्म नंबर A.12 में कथित अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों और आसपास के निवासियों का आरोप है कि बिना वैध अनुमति के निर्माण और कोठी निर्माण का कार्य लगातार जारी है, जबकि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। फॉर्म नंबर A.12 में निर्माण कार्य पर उठे सवाल स्थानीय लोगों के अनुसार, मदर टेरेसा स्कीम फार्म हाउस के फॉर्म नंबर A.12 में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण कार्य आवश्यक अनुमतियों के बिना किया जा रहा है और इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाने के बावजूद काम जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। 112 पर शिकायत दर्ज, फिर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप मामले को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर भी शिकायत दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सूचना देने के बाद भी मौके पर कोई प्रभावी हस्तक्षेप या कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत के बावजूद निर्माण गतिविधियां रुकने के बजाय पहले की तरह जारी रहीं। एमसीडी अधिकारी पर संरक्षण देने के आरोप स्थानीय निवासियों ने एमसीडी अधिकारी सुरेंद्र बेलदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित अधिकारी की ड्यूटी किसी अन्य वार्ड में सड़क निर्माण कार्य से जुड़ी बताई जाती है, लेकिन इसके बावजूद भाटी और आया नगर क्षेत्र में उनकी सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि कथित रूप से रिश्वत लेकर अवैध निर्माण को संरक्षण दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अवैध निर्माण की पुष्टि होती है तो उस पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही लोगों ने यह भी मांग की है कि जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। इलाके में बढ़ा रोष, प्रशासन से जवाब की मांग मामले को लेकर इलाके में लोगों के बीच नाराज़गी का माहौल बताया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने और बड़े स्तर पर विरोध दर्ज कराने पर विचार कर सकते हैं। #IllegalConstruction #DelhiNews #SouthDelhi #BhatiVillage #MotherTeresaScheme #FarmHouseConstruction #BreakingNews #LocalNews #DelhiUpdates #UnauthorizedConstruction #MCD #CivicIssues #PublicComplaint #DelhiDevelopment #112Complaint #NewsUpdate #GroundReport #DelhiReporter #BhatiNews #AayaNagar #ConstructionCase #DelhiAlert #LatestNews #FieldReport #UrbanIssues #DelhiLocal #InvestigationDemand #PublicVoice #NewsIndia #ViralNews @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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REMINDER दक्षिण दिल्ली के भाटी गांव स्थित थाना मैदानगढ़ी क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सरकारी वन विभाग की जमीन पर दोबारा अवैध कब्जे और निर्माण का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि पहले वन विभाग द्वारा तोड़ी जा चुकी चारदीवारी को अब दोबारा खड़ा किया जा रहा है और इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिसकर्मियों व कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। यह मामला फॉर्म नंबर-18, कृष्ण फार्म, गुरुजी आश्रम के पीछे स्थित उस भूमि से जुड़ा है जिसे वन विभाग की संपत्ति बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि यह जमीन Forest Department के अधीन आती है, जिस पर पहले भी अवैध निर्माण किया गया था और विभाग ने कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त कर दिया था। इसके बावजूद अब एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं शिकायतों के बावजूद कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है वन विभाग की जमीन पर अवध कब्जा हो रहा है । डिमोलिशन के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण कार्य स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले वन विभाग ने इस जमीन पर कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को गिराया था। मौके पर विभाग की ओर से चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया था ताकि दोबारा कब्जे की कोशिश न हो सके। लेकिन अब आरोप है कि संबंधित फार्म हाउस मालिक ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया है और पहले तोड़ी गई दीवार को दोबारा खड़ा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और मजदूरों के जरिए चारदीवारी को फिर से तैयार किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जमीन सरकारी है और पहले ही अतिक्रमण हटाया जा चुका था, तो दोबारा निर्माण शुरू होना कई सवाल पैदा करता है। लोगों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इस तरह दोबारा निर्माण संभव नहीं हो सकता। पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप, एक नाम चर्चा में मामले में सबसे गंभीर आरोप एक पुलिसकर्मी पर लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार “मनजीत” नामक पुलिसकर्मी का कई बार ट्रांसफर होने के बावजूद आज तक रिलीव न होना भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि उक्त पुलिसकर्मी का इलाके में गहरा प्रभाव है और उसी के संरक्षण में यह निर्माण कार्य दोबारा कराया जा रहा है। भाटी चौकी और थाना मैदानगढ़ी की भूमिका पर उठे सवाल आरोप यह भी है कि यह पूरा मामला मैदानगढ़ी थाना क्षेत्र में हो रहा है और स्थानीय पुलिस सबकुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रही। लोगों का कहना है कि अवैध निर्माण खुलेआम जारी है, लेकिन न तो पुलिस मौके पर रोक लगा रही है और न ही संबंधित विभाग की ओर से कोई सख्त कदम उठाया जा रहा है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत हो सकती है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे। वन विभाग की जमीन पर कब्जा गंभीर मामला? विशेषज्ञों के अनुसार, वन विभाग की जमीन पर कब्जा केवल अतिक्रमण का मामला नहीं होता, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यदि सरकारी वन भूमि पर अवैध निर्माण होता है, तो इसका सीधा असर क्षेत्र की हरियाली, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन पर पड़ता है। दक्षिण दिल्ली का भाटी क्षेत्र पहले से ही पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में वहां अवैध निर्माण बढ़ना भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी जमीनों पर कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जा होना कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आम लोगों के छोटे निर्माण पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन रसूखदार लोगों के खिलाफ प्रशासन सख्ती नहीं दिखाता। इससे जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पहले निर्माण को गिराया गया था, तो दोबारा निर्माण शुरू होने के पीछे कौन लोग हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि: वन विभाग की जमीन पर चल रहे निर्माण को तुरंत रोका जाए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए अवैध कब्जा कराने वालों की पहचान हो कथित मिलीभगत करने वाले अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए सरकारी जमीन को दोबारा सुरक्षित किया जाए लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन पर उठते बड़े सवाल भाटी गांव का यह मामला अब केवल अवैध कब्जे तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, सरकारी विभागों की कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ सरकारी एजेंसियां अवैध निर्माण हटाने का दावा करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी जमीन पर दोबारा निर्माण शुरू हो जाना कई सवालों को जन्म देता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या सरकारी जमीन को दोबारा अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकेगा या नहीं। #BhatiVillage #MaidanGarhi #BhatiThanaMaidanGarhi #Delhiforestland #ForestDepartmentDelhi #IllegalEncroachment #DelhiIllegalConstruction #BhatiNews #SouthDelhinews #DelhiLandGrab #EncroachmentCase #DelhiBreakingNews #IllegalWallConstruction #ForestLandEncroachment #DelhiPoliceAllegations #LocalNewsDelhi #GroundReportDelhi #DelhiCorruption #EncroachmentNews #DelhiCivicIssues #UnauthorizedConstruction #DelhiInvestigation #BhatiCase #EnvironmentViolation #ForestLandCase #DelhiNewsUpdate #LandMafiaDelhi #IllegalPropertyDelhi #DelhiAlert #PublicIssueDelhi @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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दक्षिण दिल्ली के भाटी गांव स्थित थाना मैदानगढ़ी क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सरकारी वन विभाग की जमीन पर दोबारा अवैध कब्जे और निर्माण का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि पहले वन विभाग द्वारा तोड़ी जा चुकी चारदीवारी को अब दोबारा खड़ा किया जा रहा है और इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिसकर्मियों व कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। यह मामला फॉर्म नंबर-18, कृष्ण फार्म, गुरुजी आश्रम के पीछे स्थित उस भूमि से जुड़ा है जिसे वन विभाग की संपत्ति बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि यह जमीन Forest Department के अधीन आती है, जिस पर पहले भी अवैध निर्माण किया गया था और विभाग ने कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त कर दिया था। इसके बावजूद अब एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। डिमोलिशन के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण कार्य स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले वन विभाग ने इस जमीन पर कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को गिराया था। मौके पर विभाग की ओर से चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया था ताकि दोबारा कब्जे की कोशिश न हो सके। लेकिन अब आरोप है कि संबंधित फार्म हाउस मालिक ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया है और पहले तोड़ी गई दीवार को दोबारा खड़ा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और मजदूरों के जरिए चारदीवारी को फिर से तैयार किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जमीन सरकारी है और पहले ही अतिक्रमण हटाया जा चुका था, तो दोबारा निर्माण शुरू होना कई सवाल पैदा करता है। लोगों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इस तरह दोबारा निर्माण संभव नहीं हो सकता। पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप, एक नाम चर्चा में मामले में सबसे गंभीर आरोप एक पुलिसकर्मी पर लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार “मनजीत” नामक पुलिसकर्मी का कई बार ट्रांसफर होने के बावजूद आज तक रिलीव न होना भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि उक्त पुलिसकर्मी का इलाके में गहरा प्रभाव है और उसी के संरक्षण में यह निर्माण कार्य दोबारा कराया जा रहा है। भाटी चौकी और थाना मैदानगढ़ी की भूमिका पर उठे सवाल आरोप यह भी है कि यह पूरा मामला मैदानगढ़ी थाना क्षेत्र में हो रहा है और स्थानीय पुलिस सबकुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रही। लोगों का कहना है कि अवैध निर्माण खुलेआम जारी है, लेकिन न तो पुलिस मौके पर रोक लगा रही है और न ही संबंधित विभाग की ओर से कोई सख्त कदम उठाया जा रहा है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत हो सकती है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे। वन विभाग की जमीन पर कब्जा गंभीर मामला? विशेषज्ञों के अनुसार, वन विभाग की जमीन पर कब्जा केवल अतिक्रमण का मामला नहीं होता, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यदि सरकारी वन भूमि पर अवैध निर्माण होता है, तो इसका सीधा असर क्षेत्र की हरियाली, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन पर पड़ता है। दक्षिण दिल्ली का भाटी क्षेत्र पहले से ही पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में वहां अवैध निर्माण बढ़ना भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी जमीनों पर कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जा होना कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आम लोगों के छोटे निर्माण पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन रसूखदार लोगों के खिलाफ प्रशासन सख्ती नहीं दिखाता। इससे जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पहले निर्माण को गिराया गया था, तो दोबारा निर्माण शुरू होने के पीछे कौन लोग हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि: वन विभाग की जमीन पर चल रहे निर्माण को तुरंत रोका जाए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए अवैध कब्जा कराने वालों की पहचान हो कथित मिलीभगत करने वाले अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए सरकारी जमीन को दोबारा सुरक्षित किया जाए लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन पर उठते बड़े सवाल भाटी गांव का यह मामला अब केवल अवैध कब्जे तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, सरकारी विभागों की कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ सरकारी एजेंसियां अवैध निर्माण हटाने का दावा करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी जमीन पर दोबारा निर्माण शुरू हो जाना कई सवालों को जन्म देता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या सरकारी जमीन को दोबारा अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकेगा या नहीं। #BhatiVillage #MaidanGarhi #BhatiThanaMaidanGarhi #Delhiforestland #ForestDepartmentDelhi #IllegalEncroachment #DelhiIllegalConstruction #BhatiNews #SouthDelhinews #DelhiLandGrab #EncroachmentCase #DelhiBreakingNews #IllegalWallConstruction #ForestLandEncroachment #DelhiPoliceAllegations #LocalNewsDelhi #GroundReportDelhi #DelhiCorruption #EncroachmentNews #DelhiCivicIssues #UnauthorizedConstruction #DelhiInvestigation #BhatiCase #EnvironmentViolation #ForestLandCase #DelhiNewsUpdate #LandMafiaDelhi #IllegalPropertyDelhi #DelhiAlert #PublicIssueDelhi @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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थाना फतेहपुर बेरी मे विलारा मीठास फॉर्मअवैध निर्माण का मामला, मैरिज होम पर कार्रवाई की मांग तेज दक्षिणी दिल्ली के थाना फतेहपुर बेरी इलाके में अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, मेन रोड फतेहपुर बेरी स्थित वीलोरा मिठास फार्म और पुराना अशोका फार्म परिसर में नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह निर्माण केनरा बैंक के सामने, शादी के बड़े-बड़े पंडाल बनाए जा रहे हैं स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिना अनुमति के लोहे की चादरों और अन्य सामग्री से ढांचा खड़ा किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ सरकारी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्र में अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें भी की गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मामला थाना फतेहपुर बेरी के संज्ञान में भी बताया जा रहा है, वहीं लोगों ने संबंधित विभागों से जल्द से जल्द जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अवैध निर्माण आगे चलकर बड़ी समस्या का रूप ले सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाता है और अवैध निर्माण पर लगाम लगाता है। #DelhilllegalConstruction #BhatiNews #SouthDelhinews #DelhiLandGrab #EncroachmentCase #DelhiBreakingNews #IlegalWallConstruction #ForestLandEncroachment #DelhiPoliceAllegations #LocalNewsDelhi #GroundReportDelhi #DelhiCorruption #EncroachmentNews #DelhiCiviclssues #UnauthorizedConstruction #Delhilnvestigation #BhatiCase #EnvironmentViolation #ForestLandCase #DelhiNewsUpdate #LandMafiaDelhi #llegalPropertyDelhi #Delhi #PubliclssueDelhi@PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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नई दिल्ली के भाटी गांव, थाना मैदानगढ़ी इलाके से एक बार फिर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि भाटी चौकी के पुलिसकर्मी की इस पूरे मामले में मिलीभगत है और वह अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, फॉर्म नंबर 18, कृष्ण फार्म, गुरुजी आश्रम के पीछे स्थित भूमि, जो Forest Department के अंतर्गत आती है, उस पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। डिमोलिशन के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन पर पहले वन विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को गिरा दिया गया था और मौके पर विभाग का बोर्ड भी लगाया गया था। इसके बावजूद अब आरोप है कि संबंधित फार्म हाउस मालिक ने फिर से कब्जा कर लिया है और पहले तोड़ी गई दीवार को दोबारा खड़ा किया जा रहा है। भाटी थाना मैदानगढ़ी में मिलीभगत के आरोप मामले में गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह अवैध निर्माण Delhi Police के भाटी थाना मैदानगढ़ी क्षेत्र में हो रहा है, जहां स्थानीय पुलिस और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बावजूद दोबारा निर्माण शुरू होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। पर्यावरण नियमों की अनदेखी विशेषज्ञों के अनुसार, वन विभाग की जमीन पर इस तरह का अवैध कब्जा और निर्माण न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण नियमों का भी गंभीर उल्लंघन है। इससे क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। इलाके के निवासियों में इस घटना को लेकर भारी नाराज़गी है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जा होना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। सख्त कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित विभागों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर तुरंत निर्माण कार्य को रोका जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। भाटी गांव का यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। #BhatiVillage #MaidanGarhi #BhatiThanaMaidanGarhi #Delhiforestland #ForestDepartmentDelhi #IllegalEncroachment #DelhiIllegalConstruction #BhatiNews #SouthDelhinews #DelhiLandGrab #EncroachmentCase #DelhiBreakingNews #IllegalWallConstruction #ForestLandEncroachment #DelhiPoliceAllegations #LocalNewsDelhi #GroundReportDelhi #DelhiCorruption #EncroachmentNews #DelhiCivicIssues #UnauthorizedConstruction #DelhiInvestigation #BhatiCase #EnvironmentViolation #ForestLandCase #DelhiNewsUpdate #LandMafiaDelhi #IllegalPropertyDelhi #DelhiAlert #PublicIssueDelhi @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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वन विभाग की जमीन पर दोबारा कब्जे का आरोप, डिमोलिशन के बाद फिर खड़ी हो रही दीवार नई दिल्ली के भाटी गांव थाना मैदानगढ़ी इलाके से एक बार फिर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, फॉर्म नंबर 18, कृष्ण फार्म, गुरुजी आश्रम के पीछे स्थित भूमि, जो Forest Department के अंतर्गत आती है, उस पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।  डिमोलिशन के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन पर पहले वन विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को गिरा दिया गया था और मौके पर विभाग का बोर्ड भी लगाया गया था। इसके बावजूद अब आरोप है कि संबंधित फार्म हाउस मालिक ने फिर से कब्जा कर लिया है और पहले तोड़ी गई दीवार को दोबारा खड़ा किया जा रहा है। भाटी थाना मैदानगढ़ी में मिलीभगत के आरोप मामले में गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह अवैध निर्माण Delhi Police के भाटी थाना मैदानगढ़ी क्षेत्र में हो रहा है, जहां स्थानीय पुलिस और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बावजूद दोबारा निर्माण शुरू होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।  पर्यावरण नियमों की अनदेखी विशेषज्ञों के अनुसार, वन विभाग की जमीन पर इस तरह का अवैध कब्जा और निर्माण न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण नियमों का भी गंभीर उल्लंघन है। इससे क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। इलाके के निवासियों में इस घटना को लेकर भारी नाराज़गी है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जा होना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। सख्त कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित विभागों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर तुरंत निर्माण कार्य को रोका जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। भाटी गांव का यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। #BhatiVillage #MaidanGarhi #BhatiThanaMaidanGarhi #Delhiforestland #ForestDepartmentDelhi #IllegalEncroachment #DelhiIllegalConstruction #BhatiNews #SouthDelhinews #DelhiLandGrab #EncroachmentCase #DelhiBreakingNews #IllegalWallConstruction #ForestLandEncroachment #DelhiPoliceAllegations #LocalNewsDelhi #GroundReportDelhi #DelhiCorruption #EncroachmentNews #DelhiCivicIssues #UnauthorizedConstruction #DelhiInvestigation #BhatiCase #EnvironmentViolation #ForestLandCase #DelhiNewsUpdate #LandMafiaDelhi #IllegalPropertyDelhi #DelhiAlert #PublicIssueDelhi @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk

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वन विभाग की जमीन पर दोबारा कब्जे का आरोप, डिमोलिशन के बाद फिर खड़ी हो रही दीवार नई दिल्ली के भाटी गांव थाना मैदानगढ़ी इलाके से एक बार फिर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, फॉर्म नंबर 18, कृष्ण फार्म, गुरुजी आश्रम के पीछे स्थित भूमि, जो Forest Department के अंतर्गत आती है, उस पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।  डिमोलिशन के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन पर पहले वन विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को गिरा दिया गया था और मौके पर विभाग का बोर्ड भी लगाया गया था। इसके बावजूद अब आरोप है कि संबंधित फार्म हाउस मालिक ने फिर से कब्जा कर लिया है और पहले तोड़ी गई दीवार को दोबारा खड़ा किया जा रहा है। भाटी थाना मैदानगढ़ी में मिलीभगत के आरोप मामले में गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह अवैध निर्माण Delhi Police के भाटी थाना मैदानगढ़ी क्षेत्र में हो रहा है, जहां स्थानीय पुलिस और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बावजूद दोबारा निर्माण शुरू होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।  पर्यावरण नियमों की अनदेखी विशेषज्ञों के अनुसार, वन विभाग की जमीन पर इस तरह का अवैध कब्जा और निर्माण न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण नियमों का भी गंभीर उल्लंघन है। इससे क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। इलाके के निवासियों में इस घटना को लेकर भारी नाराज़गी है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जा होना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। सख्त कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित विभागों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर तुरंत निर्माण कार्य को रोका जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। भाटी गांव का यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। #BhatiVillage #MaidanGarhi #BhatiThanaMaidanGarhi #Delhiforestland #ForestDepartmentDelhi #IllegalEncroachment #DelhiIllegalConstruction #BhatiNews #SouthDelhinews #DelhiLandGrab #EncroachmentCase #DelhiBreakingNews #IllegalWallConstruction #ForestLandEncroachment #DelhiPoliceAllegations #LocalNewsDelhi #GroundReportDelhi #DelhiCorruption #EncroachmentNews #DelhiCivicIssues #UnauthorizedConstruction #DelhiInvestigation #BhatiCase #EnvironmentViolation #ForestLandCase #DelhiNewsUpdate #LandMafiaDelhi #IllegalPropertyDelhi #DelhiAlert #PublicIssueDelhi @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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DDA की जमीन पर अवैध बेसमेंट खुदाई का आरोप, शिकायत के बावजूद जारी काम नई दिल्ली के सतबड़ी इलाके में सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, प्लॉट नंबर C.N. 114, खसरा नंबर 429, मेन रोड सतबड़ी में बिना अनुमति बेसमेंट की खुदाई लगातार जारी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह जमीन Delhi Development Authority (DDA) के अधिकार क्षेत्र में आती है। बिना अनुमति चल रहा निर्माण कार्य सूत्रों के अनुसार, संबंधित प्लॉट पर किसी भी प्रकार की वैध स्वीकृति के बिना बेसमेंट की खुदाई की जा रही है। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आसपास के मकानों की संरचनात्मक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। इस पूरे मामले में कई सरकारी एजेंसियों पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि Municipal Corporation of Delhi (MCD), DDA, राजस्व विभाग और थाना मैदान गढ़ी की पुलिस के बीच कथित मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं हो रही। 112 पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं मामले को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन आरोप है कि शिकायत के बाद भी न तो काम रोका गया और न ही मौके पर प्रभावी कार्रवाई की गई। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों में नाराज़गी इलाके के निवासियों का कहना है कि यह निर्माण काफी समय से जारी है, लेकिन संबंधित विभाग या तो मौके पर नहीं पहुंचे या फिर कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। इससे लोगों में नाराज़गी और असंतोष बढ़ता जा रहा है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, बिना अनुमति बेसमेंट की खुदाई करना न केवल अवैध है बल्कि इससे आसपास की इमारतों की नींव कमजोर हो सकती है। यह सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों का गंभीर उल्लंघन है। कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, अवैध निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सतबड़ी का यह मामला केवल एक अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि संबंधित एजेंसियां इस पर कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करती हैं। #DDAillegalconstruction #Satbariillegalbasement #Delhiillegaldigging #DDAlandencroachment #SouthDelhinews #Satbarinews #illegalbasementDelhi #Delhiconstructionscam #MCDcorruption #DDAcorruption #Delhinewstoday #breakingnewsDelhi #illegalconstructionIndia #basementexcavationdanger #urbanplanningviolation #Delhipolicenegligence #112complaintignored #Delhicivicissues #groundreportDelhi #HindinewsDelhi #Delhiviralnews #constructionmafiaDelhi #illegalpropertyDelhi #Delhidevelopmentauthoritynews #localnewsDelhi #Satbarimainroadcase #Delhisafetyissue #unauthorizedconstruction #Delhiinvestigationnews #civicbodyfailure @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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राजधानी दिल्ली के थाना फतेहपुर बेरी क्षेत्र के डेरा मंडी और घिटोरनी में बड़ा खुलासा: फर्जी कागज़ों पर चल रही अवैध बोरिंग नई दिल्ली (दक्षिण दिल्ली क्षेत्र)- राजधानी दिल्ली थाना फतेहपुर बेरी क्षेत्र के डेरा मंडी और घिटोरनी इलाके में अवैध बोरिंग (भूमिगत जल दोहन) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ फार्म हाउसों पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बोरिंग कराई जा रही है, जिसमें कथित तौर पर स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत और रिश्वतखोरी शामिल है। किन जगहों पर लगे आरोप? शिकायत में दो प्रमुख लोकेशन का जिक्र किया गया है: अशोक एवेन्यू, डेरा मंडी (नया रोड) फार्म हाउस नंबर C-286 पर कथित तौर पर जुगाड़ मशीन से अवैध बोरिंग कराई जा रही है। एक्जीक्यूटिव क्लब ड्राइव, घिटोरनी गांव फार्म हाउस नंबर 37 पर भी इसी तरह फर्जी परमिशन के आधार पर बोरिंग होने का आरोप है। इन दोनों मामलों में आरोप है कि बिना वैध अनुमति के भूमिगत जल निकासी की जा रही है, जो कानूनन प्रतिबंधित है। फर्जी परमिशन और दस्तावेज़ों का खेल शिकायत के अनुसार: -बोरिंग के लिए फर्जी परमिशन लेटर तैयार किए गए हैं -इन दस्तावेज़ों पर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) भनोट के नकली साइन और सील का इस्तेमाल हुआ है -परमिशन को वैध दिखाने के लिए सरकारी मुहरों की नकल की गई है -यह पूरा मामला दस्तावेज़ों की जालसाजी और प्रशासनिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। रिश्वतखोरी और अधिकारियों की कथित भूमिका शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि: -बीट ऑफिसर (राम रतन) पर रिश्वत लेकर अवैध बोरिंग की अनुमति देने का आरोप -थाना फतेहपुर बेरी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत का दावा -BDO, SDM (छतरपुर), और अन्य प्रशासनिक इकाइयों पर भी सवाल अवैध बोरिंग क्यों है गंभीर मुद्दा? दिल्ली में भूमिगत जल स्तर पहले से ही संकट में है। ऐसे में: -अवैध बोरिंग से जल स्तर तेजी से गिरता है -पर्यावरण संतुलन प्रभावित होता है -सरकारी नियमों और जल संरक्षण नीतियों का उल्लंघन होता है दिल्ली में बिना अनुमति बोरिंग कराना कानूनी अपराध है, जिस पर जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान है। कानून क्या कहता है? दिल्ली में बोरिंग कराने के लिए: -संबंधित प्राधिकरण से वैध अनुमति अनिवार्य है -जल बोर्ड और भूजल प्राधिकरण के नियम लागू होते हैं -नियमों के उल्लंघन पर सीलिंग, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई संभव है -प्रशासन की जिम्मेदारी और अगला कदम ऐसे मामलों में जरूरी है कि: -शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो -फर्जी दस्तावेज़ों की फोरेंसिक जांच कराई जाए -दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई हो डेरा मंडी और घिटोरनी में सामने आए ये आरोप केवल अवैध बोरिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सिस्टम में संभावित भ्रष्टाचार और नियमों के दुरुपयोग की ओर भी संकेत करते हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पर्यावरण और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। location- maps.google.com/maps?q=28.4376… #DelhiNews #BreakingNews #HindiNews #DelhiBreaking #WaterScam #BoringScam #IllegalBoring #GroundwaterCrisis #WaterMafia #DelhiCrime #SouthDelhi #DeraMandi #Ghitorni #FatehpurBeri #FarmhouseScam #Corruption #ScamExposed #FakePermission #BDOScam #IndiaNews #LatestNews #ViralNews #NewsUpdate #GroundReport #DelhiUpdates #EnvironmentCrisis #WaterCrisis #Expose #TrendingNews #NewsAlert @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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Archaeological Survey of India की जमीन पर अवैध निर्माण और गैरकानूनी बोरिंग, तुगलकाबाद एक्सटेंशन के Jagdamba Road से शिकायत दर्ज . दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन इलाके में अवैध निर्माण का एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार यह निर्माण RZ 1737 और RZ 1738, गली नंबर 368 और 37, Main Jagdamba Road पर किया गया है। आरोप है कि बिना किसी वैध अनुमति के Archaeological Survey of India (ASI) की जमीन पर कब्जा करके अवैध निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही हरे भरे पेड़ों की कटाई खुलेआम की जा रही है जो कानून का सीधा उल्लंघन है। Archaeological Survey of India (ASI) की जमीन पर कब्जे का आरोप दरअसल ASI की जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण सख्त नियमों के तहत आता है और बिना अनुमति किया गया निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है। लेकिन फिर भी ये कार्य खुलेआम किया जा रहा है। बताया गया है कि बिना sanctioned map के multi-storey building बनाई जा रही है, बेसमेंट खुदाई और structural काम नियमों के खिलाफ किया गया, बिना DPCC अनुमति के groundwater extraction (बोरिंग) की जा रही है साथ ही निर्माण सामग्री सड़क पर फेंककर public safety को खतरे में डाला गया। यह सभी गतिविधियां DMC Act 1957 और MPD नियमों का उल्लंघन हैं। ASI की जमीन पर Illegal Boring का भी आरोप शिकायत में यह भी सामने आया है कि संबंधित प्रॉपर्टी पर गैरकानूनी बोरिंग (illegal boring) दिन रात चल रही है। जबकि बिना अनुमति पानी निकालना पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। इससे भूजल स्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।  यह स्थानीय प्रशासन और जल प्राधिकरण के नियमों के खिलाफ है। साथ ही ये भी देखा गया कि शिकायत को आधिकारिक सिस्टम में दर्ज कर लिया गया है और इसे प्रोसेस में डाल दिया गया है। लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। इस पूरे मामले में चार बड़े नियमों का उल्लंघन सामने आता है: Unauthorized Construction (बिना अनुमति निर्माण) ASI Protected Land पर अतिक्रमण Illegal Boring (गैरकानूनी जल दोहन) हरे भरे पेड़ो की कटाई(cutting down green trees) ये चारो ही उल्लंघन कानून के तहत गंभीर अपराध माने जाते हैं। दस्तावेज में साफ तौर पर लिखा गया है कि, “Action will be taken in due course of time” यानी संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब शिकायतकर्ता की मांग है कि मामले को लेकर साइट निरीक्षण, निर्माण की वैधता की जांच, ASI नियमों के तहत कार्रवाई, अवैध निर्माण पर demolition (तोड़फोड़) और illegal boring को बंद करवाया जाए क्यों है मामला महत्वपूर्ण? ASI की जमीन पर अतिक्रमण: देश की विरासत और संरक्षित क्षेत्रों के लिए खतरा है कानून व्यवस्था को चुनौती देता है भविष्य में बड़े कानूनी विवादों को जन्म दे सकता है वहीं लगातार हो रही illegal boring जल संकट को बढ़ा सकती है और पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ सकती है Jagdamba Road का यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ASI की जमीन पर कब्जा और गैरकानूनी बोरिंग जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। यह केस इस बात का उदाहरण है कि शहरी क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी किस तरह बड़े स्तर पर हो रही है, और अब प्रशासन के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी हो गई है। #unauthorizedconstruction #illegalconstruction #asilandencroachment #archaeologicalsurveyofindia #illegalboring #groundwatertheft #delhinews #delhiillegalconstruction #governmentlandencroachment #propertyviolation #civicissue #mcdaction #buildingbylaws #constructionrules #illegalproperty #urbanviolation #waterlawviolation #delhiviral #breakingnewsindia #localnewsdelhi #encroachmentcase #publicissue #delhicase #indiavirusalnews #newsupdateindia #realestatescam #landdispute #illegalactivities #delhiupdates #indiabreakingnews @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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Kinni Times Complaint Desk@KinniTimes·
छतरपुर, दक्षिणी दिल्ली का 100 फुटा रोड पर स्थित प्लॉट नंबर D-93 इन दिनों एक बड़े विवाद का केंद्र बना हुआ है, जहाँ अवैध निर्माण, प्रशासनिक निष्क्रियता और राजनीतिक प्रभाव के गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। यह मामला नया नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रहा है और सबसे अहम बात यह है कि पहले शिकायतों और कार्रवाई के बावजूद आज भी निर्माण गतिविधियाँ जारी बताई जा रही हैं और जमीन से शुरू हुआ ये निर्माण का खेल आज 6 मंजिला इमारत का रूप ले चुका है। इस निर्माण की शिकायत एक शिकायतकर्ता द्वारा 1 सितंबर 2025 को की गई थी उस समय दिल्ली में प्रदूषण अपने चरम पर था और GRAP-3 जैसे सख्त प्रतिबंध लागू थे, जिनके तहत किसी भी प्रकार की गैर-जरूरी निर्माण गतिविधि, खुदाई और भारी मशीनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक थी। इसके बावजूद इस साइट पर जेसीबी और अन्य भारी मशीनों के जरिए दिन-रात काम किया गया, जो सीधे तौर पर पर्यावरण नियमों और सरकारी आदेशों की अनदेखी को दर्शाता है। उस समय स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन निर्माण कार्य पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई गई। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को भी इस मामले को लेकर शिकायतें और कार्रवाई की बातें सामने आईं, लेकिन स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। अंततः 11 फरवरी 2026 को प्रशासन ने इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डिमोलिशन किया था और साइट को सील कर दिया। उस समय यह माना जा रहा था कि अब इस अवैध निर्माण पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। हालांकि, सबसे चौंकाने वाला मोड़ इसके बाद सामने आया। जब सील तोड़कर दोबारा उसी स्थान पर निर्माण शुरू कर दिया गया और अब वहाँ कमर्शियल बेसमेंट के साथ लगभग 6 मंजिला इमारत, जिसे स्थानीय लोग “मिनी मॉल” कह रहे हैं, तेजी से खड़ी की जा रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है, बल्कि कानून के प्रति खुलेआम चुनौती भी मानी जा रही है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नोटिफाइड/सरकारी भूमि है, जिस पर बिना किसी स्वीकृत नक्शे के निर्माण किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 की धारा 14 और 29 का उल्लंघन है, साथ ही नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 343 और 345A के अंतर्गत भी यह एक गंभीर अपराध बनता है। इस पूरे मामले में अमरोहा से सांसद कंवर सिंह तंवर का नाम सामने आना इसे और संवेदनशील बना देता है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने अपने पद और राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए इस निर्माण को संरक्षण दिया। इतना ही नहीं, निर्माण स्थल पर उनका नाम-बोर्ड लगाए जाने और राजनीतिक दबाव बनाए जाने की भी बात कही जा रही है। मामले को और विवादित बनाता है यह आरोप कि निर्माण स्थल पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें लगाकर कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश की गई। यदि ऐसा है, तो यह न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि देश के सर्वोच्च पद की छवि का दुरुपयोग भी माना जा सकता है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की साफ-सुथरी और ईमानदार छवि, जो देश-विदेश में स्थापित है, उसे खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही SDM साकेत, MCD ग्रीन पार्क के संबंधित अधिकारी, थाना मैदानगढ़ी और हौज खास तहसील के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि या तो इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया या फिर जानबूझकर इस अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया गया। यहां तक कि करोड़ों रुपये की कथित रिश्वत और मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं, जो इस मामले को और गंभीर बना देते हैं। कानूनी रूप से देखें तो इस प्रकरण में कई धाराओं के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है, जिनमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 218, IPC की धारा 217 और 218, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 तथा दिल्ली विकास और नगर निगम से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पुलिस, DDA, MCD और राजस्व विभाग सहित कई अधिकारियों को बार-बार शिकायतें दीं, लेकिन किसी भी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि यह मामला अब सिर्फ एक अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक संरक्षण का प्रतीक बन गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले में संसद की याचिका समिति, CBI और ACB से निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों और नामित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, निर्माण को तुरंत रोकने, दोबारा डिमोलिशन और सीलिंग की कार्रवाई करने, तथा दोषी अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है। इसके अलावा वित्तीय लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड की जांच तथा उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग की भी मांग उठाई गई है। यह मामला अब एक बड़े सवाल के रूप में सामने खड़ा है-क्या कानून केवल आम नागरिकों के लिए है, या फिर राजनीतिक प्रभाव के सामने नियमों की कोई अहमियत नहीं रह जाती? छतरपुर का यह विवाद न केवल पर्यावरण और शहरी नियोजन से जुड़ा मुद्दा है, बल्कि यह शासन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी कड़ी परीक्षा बन चुका है। . #DelhiNews #ChhatarpurNews #IllegalConstruction #BreakingNews #ViralNews #MiniMall #SixFloorBuilding #DelhiScam #PoliticalPressure #KanwarSinghTanwar #PMModi #ModiPhotoControversy #BJPNews #DelhiPolitics #CorruptionCase #PowerMisuse #SystemFailure #GroundReport #ExposeNews #ConstructionScam #DelhiUpdates #IndiaNews #ScamAlert #NewsUpdate #PublicIssue #LawAndOrder #DDALandIssue #MCDAction #DelhiPolice #PoliticalControversy . @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @CBIHeadquarters @CMODelhi @gupta_rekha @DMSouthDelhi @CVCIndia @official_dda @nacbdelhi @RahulGandhi @yadavakhilesh @priyankagandhi @AtishiAAP @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk
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