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Vibha Singh
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Vibha Singh
@krantihai
सत्य सनातन धर्म, कट्टर हिंदू , पहले राष्ट्र उसके बाद सब, जय श्री राम 🙏
कुंभ की नगरी Katılım Mart 2026
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जागो हो तुम नंदकुमार,
बलि-बलि जाऊँ मुखारविंद की, गोसुत मेलो करो शृंगार ॥१॥
आज कहा सोवत त्रिभुवनपति, और वार तुम उठत सवार।
वारंबार जगावत माता, कमल-नयन भयो भवन उजियार ॥२॥
दधि मथौं, नवनीत देहौं, संग सखा ठाढ़े सिंहद्वार।
उठो क्यों न मोहि वदन दिखावो, सूरदास के प्राण आधार ॥३॥
प्रातःकाल की मधुर बेला है—व्रज में भोर की हल्की आभा फैल चुकी है, घर-घर मंथन की ध्वनि गूँज रही है। ऐसी सुहावनी घड़ी में मैया यशोदा अपने लालन नंदकुमार को बड़े कोमल भाव से जगाने आती हैं। वे प्रेम से निहारते हुए कहती हैं—हे त्रिभुवन के स्वामी, अब तक क्यों सो रहे हो? तुम्हारे उठते ही तो सारा भवन, सारा व्रज उजियारा हो जाता है।
मैया बार-बार स्नेहभरी मनुहार करती हैं—उठो लाला, मुखारविंद दिखाओ, मैं तुम्हारा शृंगार करूँ, ताज़ा माखन खिलाऊँ। द्वार पर सखा भी प्रतीक्षा में खड़े हैं, सब तुम्हारी राह देख रहे हैं। इस प्रकार यशोदा जी का मातृ-हृदय वात्सल्य से भरकर, अत्यंत कोमलता और प्रेमपूर्ण आग्रह से श्रीकृष्ण को जगाने में लीन है—जहाँ हर शब्द में ममता और हर भाव में अनुराग झलकता है।

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