prem lohana

151.9K posts

prem lohana banner
prem lohana

prem lohana

@lohanaprem

मुक्ति मिले ना श्री राम के बिना भक्ति मिले ना हनुमान के बिना…

Surat Katılım Ağustos 2013
395 Takip Edilen21.7K Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
prem lohana
prem lohana@lohanaprem·
हँसते रहा करो दोस्तों .... चिंता करने के लिए तो..... बुढ़ापा आयेगा।......
हिन्दी
1
0
2
1.5K
prem lohana retweetledi
ગુજરાતી શાયરી
🌹મારા શબ્દોનું માગું લઇને આવું છું, તારી એક ગઝલ કુંવારી રાખજે.
GU
2
6
32
823
prem lohana retweetledi
Oyinkansola🎀💐
Oyinkansola🎀💐@Oyinkansol73072·
One of my favorite scenes 🎥🍿
English
64
247
3K
162.3K
prem lohana retweetledi
उम्दा_पंक्तियां
तुम कृपाल जा पर अनुकूला। ताहि न व्याप त्रिविध भव शूला ।।
उम्दा_पंक्तियां tweet media
हिन्दी
38
251
4K
23K
prem lohana retweetledi
Ranchhod Das Chanchad
Ranchhod Das Chanchad@rdchanchad·
गधे कभी दौड़ का हिस्सा नहीं बनते, वो सिर्फ हसते हैं उन घोड़़ो पर जो दौड़़ में हार गए
हिन्दी
1
7
43
817
prem lohana retweetledi
🍁Ek khwaab 🍁
🍁Ek khwaab 🍁@Vikaspa1207·
कमाने पर ध्यान दो जमाने पर नहीं l कमाना साथ देगा , जमाना नहीं ..!!
हिन्दी
4
69
396
11.1K
prem lohana retweetledi
Atul Navodayan
Atul Navodayan@NavodayanAtul·
पैसा देख कर लोग अपनी बेटियां तक दे देते हैं और तुम इज्जत की बात करते हो।
हिन्दी
2
93
501
9.5K
prem lohana retweetledi
Aviii
Aviii@aviiiiii31·
Good morning :
Aviii tweet media
English
35
324
3.7K
61.8K
prem lohana retweetledi
Atul Navodayan
Atul Navodayan@NavodayanAtul·
बेटियां भाग्य या सौभाग्य से होती हैं और लड़के झाड़ फूंक और प्रार्थना से 😅
हिन्दी
1
53
272
6.8K
prem lohana retweetledi
Radhe Krishna
Radhe Krishna@AshaPatel3031·
ધારો એટલો પૈસો મળી જાય તો પણ ધારો એટલું માણી શકાતું નથી...! જય દ્વારકાધીશ
GU
3
9
59
899
prem lohana retweetledi
अभद्र
अभद्र@StfuIsUser·
आप जितना मर्जी चारा डाले अगर आपकी लाठी में दम नहीं है तो आपकी भैंस का दूध कोई और ही निकालेंगे
हिन्दी
0
14
83
2.2K
prem lohana retweetledi
ज़िन्दगी गुलज़ार है !
जिनके पेट भरे होते है वो दूसरों को नसीहतें बहुत देते हैं !!!!
हिन्दी
5
115
619
18.9K
prem lohana retweetledi
Harsh Goenka
Harsh Goenka@hvgoenka·
Life runs on three rules: Paradox - stop trying to figure everything out. Humor - learn to laugh, especially at yourself. Change - nothing stays the same.
English
55
131
906
21.3K
prem lohana retweetledi
तर्क साहित्य
अपनी लकड़ी खुद काटो, और यह तुम्हें दो बार गरमाएगी। ~ हेनरी फोर्ड
हिन्दी
1
21
252
7K
prem lohana retweetledi
तर्क साहित्य
विश्वास पहाड़ हिला सकता है, किन्तु शक पहाड़ खड़ा कर सकता है। ~ अज्ञात
हिन्दी
1
36
294
6.6K
prem lohana retweetledi
गुलजार की किताब !
किसी का कर्जा लौटाकर खुद को बड़ा मत समझिये, बड़ा अब भी वही है जिन्होंने बुरे वक़्त में आपको उधार दिया था..
हिन्दी
7
140
786
23.5K
prem lohana retweetledi
𝐒𝐡𝐚𝐫𝐦𝐚𝐣𝐢
इस भ्रम में ना रहें कि भाग्य मे जो हैं वही होगा बल्कि यह विश्वास रखें कि जैसा आप करेंगे वैसा ही भाग्य होगा!!
𝐒𝐡𝐚𝐫𝐦𝐚𝐣𝐢 tweet media
हिन्दी
11
20
67
708
prem lohana retweetledi
Harsh Goenka
Harsh Goenka@hvgoenka·
What a beautiful ad. Rare to see something that touches your heart!
English
57
295
1.5K
81.8K
prem lohana retweetledi
AstroCounselKK 🇮🇳
AstroCounselKK 🇮🇳@AstroCounselKK·
EPIC 😅 Kid deserves a Bharat Ratna for this reply ..
AstroCounselKK 🇮🇳 tweet media
English
16
136
645
23.2K
prem lohana retweetledi
Mr. Rumi
Mr. Rumi@Mahsar_khan·
ईश्वर को मानना आसान है, स्वयं को जानना कठिन है और इसलिए लोग ईश्वर को चुनते हैं। ~ओशो
हिन्दी
0
14
67
1.5K
prem lohana retweetledi
राजू वाल्मीकि चौहान
कोर्ट में पेपर पर आखिरी साइन होते ही वकील मुस्कुराया और बोला, “लो मैडम, अब आपका डिवोर्स हो गया है। कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर दिए हैं, और आपको हर महीने खर्च के लिए 10,000 रुपये मिलते रहेंगे। क्या अब आप खुश हैं?” वह थोड़ा मुस्कुराई और बोली, “हाँ… मैं खुश हूँ… मुझे अब किसी से कुछ नहीं चाहिए।” वकील ने पेपर्स इकट्ठा करना शुरू कर दिया और अश्विनी अपने मम्मी-पापा के साथ बाहर चली गई। नवनाथ—उसका पति—कोने में खड़ा चुपचाप सब कुछ देख रहा था। अश्विनी ने एक बार भी उसकी तरफ नहीं देखा। कार का दरवाज़ा बंद हो गया…और रिश्ता भी। पहला महीना - घर में सब लोग बड़े प्यार से पेश आते थे। अश्विनी को लगा…यही आज़ादी है…यही शांति है! दूसरा महीना - घरवालों का माहौल थोड़ा बदलने लगा। कभी भाई गुस्से में बोलता, भाभी ताना मारती…“बड़ी हो गयी हो, कुछ ज़िम्मेदारी लो…” भतीजे भी कहने लगे, “बुवा, तुम यहाँ कब तक रहोगे?” तीसरा महीना— घर का माहौल बदलने लगा। जहाँ पहले प्यार था, अब वहाँ बोझ था। अश्विनी शांत रहती थी…लेकिन उसके दिल में दर्द बढ़ता जा रहा था। चौथा महीना— वे उसकी हर हरकत पर नज़र रखने लगे। जब भी वह बाहर जाती, पड़ोसी फुसफुसाते— “उसका तलाक हो गया है…क्या अब वह इसी घर में रहेगी?” अश्विनी के अंदर कुछ टूट रहा था। पहली बार उसे एहसास हुआ— ससुराल का रिश्ता मुश्किल था, लेकिन वह उसका अपना घर था। इस घर पर वह न तो मेहमान थी और न ही घर की सदस्य—बस एक बोझ। एक रात, छत पर बैठकर वह सोचने लगी, "मुझे पैसे मिल गए... मुझे आज़ादी मिल गई... लेकिन इज़्ज़त? प्यार? और एक घर?" उसने खुद से फुसफुसाया, "मैंने गलती की... मैंने फ़ैसले लेते समय सिर्फ़ दर्द देखा, लेकिन उसके नतीजे नहीं देखे..." उसे एहसास हुआ कि रिश्ता टूटने के बाद एक औरत को सबसे ज़्यादा सहारे की ज़रूरत होती है, लेकिन समाज उसे पहले जज करता है। और पीहर…? “पीहर तो है, लेकिन कोई अधिकार नहीं है। मैंने अपने अहंकार की वजह से अपना असली घर छोड़ दिया…” उसकी आँखों में आँसू आ गए। अब उसे इस फैसले की कीमत समझ में आई। चार महीने बीत चुके थे… अश्विनी को हर दिन एक ही सवाल परेशान करने लगा…“मैंने क्या खोया…? मैंने इतना बड़ा फैसला सिर्फ़ गुस्से और तानों की वजह से लिया…?” वह आसमान की तरफ़ देखती रहती… नवनाथ की यादें उसके पीछे दौड़ती रहतीं…उसकी आदतें, छोटे-मोटे झगड़े, और सबसे बढ़कर?…उसका साथ देना। एक रात, उसका दिल पूरी तरह टूट गया। उसने फ़ोन उठाया…नंबर डायल किया। “हेलो?”, नवनाथ अश्विनी ने कांपती आवाज़ में कहा, “नवनाथ… क्या हम… अपने रिश्ते को एक और मौका दे सकते हैं? मैं तुम्हें बहुत मिस करती हूँ… मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ…” दोनों तरफ़ एक पल की खामोशी… नवनाथ ने धीरे से कहा, “मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता… यह हमारी गलती थी, हम दोनों को मिलकर इसे सुधारना होगा। अगर तुम ‘हाँ’ कहो… तो मैं अभी चला जाऊँगा।” अश्विनी के गालों पर आँसू बहने लगे। “हाँ… मैं तैयार हूँ।” रात के 12 बज रहे थे। नवनाथ ने कार ली और निकल गया। ठंडी, सुनसान सड़क… लेकिन उसके मन में बस एक ही आवाज़ थी…“मैं उसे वापस घर लाना चाहता हूँ।” वह लगातार 5 घंटे गाड़ी चलाता रहा। वह न रुका और न ही थका। सुबह 5 बजे, वह अश्विनी के घर के दरवाज़े पर खड़ा था। अश्विनी बाहर आई… डरी हुई, शर्मिंदा… लेकिन चेहरे पर राहत लिए। उसके मम्मी-पापा ने दरवाज़ा खोला। नवनाथ ने विनम्रता से सिर झुकाया। अश्विनी ने बैग उठाया। कोई बात नहीं, कोई बहस नहीं। दोनों जानते थे कि यह फैसला दिल से लिया गया था। कार स्टार्ट हुई…और अश्विनी अपने घर—अपने असली घर की ओर चल पड़ी। दोस्तों… रिश्ते टूटते नहीं। कभी-कभी आपको बस उन पर से धूल झाड़ने की ज़रूरत होती है। सही समय पर उठाया गया एक छोटा सा कदम पूरी ज़िंदगी बचा सकता है… नमोस्तुते! स्वाती गाडेकर की FB पेज से साभार…
राजू वाल्मीकि चौहान tweet media
हिन्दी
68
309
1.4K
154.2K