ब्रजवासी 🪈🐄
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ब्रजवासी 🪈🐄
@lucifer_ved
Optimistic Engineer # Learner 📚 🌾

वही मैं सोच रहा था कि, अभी तक पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कोई डिफेंड करने क्यों नहीं आया। चित्रा जी के हिसाब से 7 रुपए कोई बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है, 70 रुपए बढ़ेगा तो सवाल पूछा जाएगा।



वो मै कर लूंगा आप निश्चिंत रहे उस चीज के लिए!😳😲 हॉ-हॉ बिलकुल मैने कहा है ना कि कुछ लोगो ने मेरे से शिकायत की है मै कह रहा हू आपके सामने भी कह रहा हू कि नर्सिंग के संविदा पर जो लोग है उनसे भी पैसे ले देकर लगाता है और जो पिछले 8-10-12 साल से संविदा पर काम कर रहे थे उन्हे हटा दिया है - भागचंद टाकडा (विधायक बांदीकुई)


@NekadiGanesh एडल्ट लोगो के फैसले पे मैं सवाल नहीं करता, वो सही है या ग़लत, ये वक्त बताता है




@Rajasthan_Radio बढ़िया है






@grok जी ये कौन महाशय हैं जो मोदीजी से मिलने पहुंच गए हैं?, क्या इन्होंने अपॉइंटमेंट लिया है?



@RajasthanScion राजस्थान तुम्हारी पिताजी की पुश्तैनी वसियत है?


मेरे भाई। पहले थोड़ा अध्ययन कर लो। राजस्थानी भाषा को स्कूलों में पढ़ाने का फैसला अरविंद चोटिया ने नहीं दिया है। यह फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बहुत लंबी सुनवाई के बाद दिया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में आपसे और हमसे ज्यादा समझदार, ज्यादा अध्ययनशील, ज्यादा पढ़े लिखे लोग बैठते हैं। उन्होंने फैसला दिया है तो काफी सोच विचार के बाद दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले कोई हवा में नहीं आते हैं। आप कुछ ज्यादा ही उत्साह में हैं। आपको ज्यादा ही दिक्कत है तो आप भी सुप्रीम कोर्ट जाइए। हमें हड़काने से काम नहीं चल पाएगा। हमें पता है कि आपके पास कोई काम नहीं है ट्वीट करने के अलावा। इसलिए आप दिन भर राजस्थानी भाषा के खिलाफ ट्वीट कर सकते हैं लेकिन ट्वीट करने से फैसले नहीं बदला करते हैं। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए पिछले 90 साल से संघर्ष चल रहा है। अनेक लोगों ने अपना जीवन खपा दिया है। मान्यता अभी भी मिली नहीं है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में यह भाषा पहले से पढ़ाई जा रही है। अब स्कूलों में भी पढ़ाई जाएगी यह आदेश आया है। एक दिन हमारी राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता भी मिलेगी। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि वह मान्यता भी हमारे जीवन काल में मिले तो हम एक संतुष्टि के साथ यह संसार छोड़ें। इसके अलावा कोई विवाद का विषय है ही नहीं। बाकी आप चाहे जितने ट्वीट करने के लिए स्वतंत्र हैं।

मेरे भाई। पहले थोड़ा अध्ययन कर लो। राजस्थानी भाषा को स्कूलों में पढ़ाने का फैसला अरविंद चोटिया ने नहीं दिया है। यह फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बहुत लंबी सुनवाई के बाद दिया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में आपसे और हमसे ज्यादा समझदार, ज्यादा अध्ययनशील, ज्यादा पढ़े लिखे लोग बैठते हैं। उन्होंने फैसला दिया है तो काफी सोच विचार के बाद दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले कोई हवा में नहीं आते हैं। आप कुछ ज्यादा ही उत्साह में हैं। आपको ज्यादा ही दिक्कत है तो आप भी सुप्रीम कोर्ट जाइए। हमें हड़काने से काम नहीं चल पाएगा। हमें पता है कि आपके पास कोई काम नहीं है ट्वीट करने के अलावा। इसलिए आप दिन भर राजस्थानी भाषा के खिलाफ ट्वीट कर सकते हैं लेकिन ट्वीट करने से फैसले नहीं बदला करते हैं। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए पिछले 90 साल से संघर्ष चल रहा है। अनेक लोगों ने अपना जीवन खपा दिया है। मान्यता अभी भी मिली नहीं है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में यह भाषा पहले से पढ़ाई जा रही है। अब स्कूलों में भी पढ़ाई जाएगी यह आदेश आया है। एक दिन हमारी राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता भी मिलेगी। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि वह मान्यता भी हमारे जीवन काल में मिले तो हम एक संतुष्टि के साथ यह संसार छोड़ें। इसके अलावा कोई विवाद का विषय है ही नहीं। बाकी आप चाहे जितने ट्वीट करने के लिए स्वतंत्र हैं।

आज आप सभी X के साथियों से एक बात पूछना चाहता हूँ कि कथित राजस्थानी को राजभाषा बनाने से फ़ायदा क्या होगा?? आप जितने फ़ायदे गिनाओगे उसी को आधार बनाकर मैं इसे राजभाषा बनाने के नुक़सान बताऊँगा! बताइए फ़ायदे??? #नहीं_चाहिए_राजस्थानी_भाषा
















