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Katılım Ocak 2019
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🌄🙏 बुद्धमं शरणम् गच्छामि 🙏🌄सभी खुशनसीब दोस्तों को मेरा सस्नेह 🌹🙏🌹हम बुद्ध की शरण में जाते हैं, यानि विवेक/बुद्धि मान की शरण में जाते है,धम्मंम शरणम्/धर्म में नैतिकता,संघम्म् शरणम्/सबका साथ,घर हो बाहर या देश भी समझदारी और धैर्य के प्रतीक हैं।सबके प्रति निस्वार्थ भाव होना,
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@gyan_arora स्वागत धन्यवाद ज्ञान जी आपका दिन शुभ रहे 🌞💐 ओ
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@Tere_do_nainaaa वो 4 के अलावा बाकी पत्थर दिल हो नहीं सकते जो इस गीत से भावुक ना हों 💕
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@darshan0128 वैसे ये तो खुद भी बीजेपी की बखिया उधेड़ती थी डिबेट में,कांग्रेसियों की चार धाम😂यात्रा में शामिल होने पर खुद पर बीती तब 👁️खुली😊
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Fr Darshan Naik
Fr Darshan Naik@darshan0128·
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Fr Darshan Naik
Fr Darshan Naik@darshan0128·
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satish kumar tangri
satish kumar tangri@SatishTangri·
ज़िंदगी के सफ़र में बहुत दूर तक जब कोई दोस्त आया न हम को नज़र हम ने घबरा के तन्हाइयों से 'सबा' एक दुश्मन को ख़ुद हम-सफ़र कर लिया सबा अकबराबादी #शत्रु #लेखनी
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Fr Darshan Naik
Fr Darshan Naik@darshan0128·
Just clicked 🪻🪻🪻😍
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🍯FaBA🐝 फाबा
🍯FaBA🐝 फाबा@MukeshPathakji·
मैं इतना बड़ा आदमी बनना चाहता हूं कि मुझे फोन रखने की जरूरत ना पड़े। और यदि कोई जरूरी फोन आए तो मेरा सहयोगी मेरे पास आकर बताए कि फाबा जी, मोदी जी का फोन आ रहा है 😎
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@upmanyuofficial स्वागत धन्यवाद मनीष जी शुभ दिन की शुभ कामनाएं 🌞💐🙏
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स्वागत धन्यवाद आपका दर्शन जी खूबसूरत नज़ारे के साथ आपका दिन खुशनुमा रहे 🌞💐🙏
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Fr Darshan Naik@darshan0128

@lucythecurious बहुत खूब वाह सुप्रभात लूसीजी 💐🙏

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@abha_nanda स्वागत धन्यवाद आपका आभा जी💐 आपका दिन शुभ रहे 🌞💐
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@MukeshPathakji स्वागत मुकेश जी 🙏 आपका दिन मंगलमय रहे 🌞 मंगवा लिया है हमने फ़ाबा हनी कल डिलीवर होगा धन्यवाद 💐🙏
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Arpita Gupta
Arpita Gupta@Ar81200·
प्रणव मुखर्जी ने कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए कहा “अगर मोदी जी सही समय पर प्रधानमंत्री नहीं बनते, तो कांग्रेस भारत को बर्बाद कर देती।”। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता Pranab Mukherjee समय-समय पर कांग्रेस पार्टी की स्थिति, नेतृत्व और वैचारिक दिशा को लेकर अपने विचार रखते रहे थे। उनके कई बयानों को राजनीतिक विश्लेषकों ने कांग्रेस के लिए “आत्ममंथन का संदेश” माना। अपने सार्वजनिक भाषणों और पुस्तक *The Coalition Years* सहित अन्य लेखन में उन्होंने संकेत दिया था कि कांग्रेस की सबसे बड़ी शक्ति उसका व्यापक राष्ट्रीय ढांचा, वैचारिक संतुलन और संगठनात्मक अनुशासन था, लेकिन समय के साथ पार्टी जमीनी स्तर पर कमजोर होती गई। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए केवल एक परिवार या कुछ नेताओं पर अत्यधिक निर्भरता लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है। Pranab Mukherjee ने कई अवसरों पर यह भी कहा कि कांग्रेस को केवल “विरोध की राजनीति” तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे स्पष्ट वैकल्पिक नीति, मजबूत संगठन और स्थानीय नेतृत्व तैयार करना होगा। उनके अनुसार, भारतीय राजनीति में जनता भावनात्मक नारों से अधिक स्थिर नेतृत्व और विश्वसनीय प्रशासन को महत्व देती है। उन्होंने कांग्रेस की पुरानी कार्यसंस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा था कि पहले पार्टी के भीतर विचार-विमर्श, बहस और संगठनात्मक संवाद की परंपरा अधिक मजबूत थी। बाद के वर्षों में यह प्रक्रिया कमजोर हुई, जिससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हुई। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, Pranab Mukherjee के बयान सीधे आक्रमण की बजाय “संस्थागत चेतावनी” की तरह थे। वे सार्वजनिक रूप से कांग्रेस की आलोचना कम करते थे, लेकिन संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व संकट और वैचारिक अस्पष्टता पर अप्रत्यक्ष रूप से चिंता व्यक्त करते रहे।
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