
Maithil Kayastha
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Maithil Kayastha
@maithilKayastha
तीर-तलवार के आगे हम कलम को अपनाते है चित्रगुप्त के वंसज हम कायस्थ कहलाते है।












कायस्थों ने मैथिली भाषा के विकास में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। मैथिली में रामायण भी कायस्थ समाज से आने वाले लाल दास जी ने लिखा। इतने बड़े योगदानों के बावजूद आज कायस्थ समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। सोचिए, जब इतनी सक्षम और योगदानशील जाति को ही साइडलाइन किया जा रहा है, तो..


अजीत भारती ने अपनी वीडियो में जो बात कही, वह काफी हद तक सटीक है। अगर अंगिका को अलग भाषा माना जाता है, तो फिर बज्जिका, ठेठी, खोरठा, सुरजापुरी जैसी बोलियों को भी उसी आधार पर भाषा का दर्जा देना पड़ेगा। ऐसे में मगही भाषियों को खोरठा से आपत्ति करना भी तर्कसंगत नहीं रहेगा। लेकिन इस पूरे विवाद का एक दूसरा पक्ष भी है। कुछ लोग राजनीतिक कारणों से मैथिली को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं यह बात सही है। परंतु सच्चाई यह भी है कि जितनी गलती बाहरी लोगों की है, उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी खुद मैथिल समाज की भी है। मैथिली पर जातीय टैग लगना, उसका क्षेत्रीय सीमाओं में बंध जाना, ये सब अचानक नहीं हुआ। इसमें कहीं न कहीं हमारे अपने समाज के लोगों की भी भूमिका रही है। जरूरत इस बात की है कि हम आत्ममंथन करें: • लोग मैथिली को अपनाने से क्यों हिचकते हैं? • क्या कारण हैं कि भाषा सीमित होती जा रही है? हमें उन कारणों पर काम करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि: 👉 मैथिली किसी जाति या क्षेत्र तक सीमित न रहे 👉 यह सभी की भाषा बने, सबकी पहचान बने तभी मैथिली मजबूत होगी, नहीं तो विवाद ही चलता रहेगा।



मैथिली ठाकुर मिथिला की बेटी है। अच्छा भजन गाती है , खूब नाम है और भाजपा से टिकट लेकर आई है अलीनगर से चुनाव लड़ रही है। लोग पागल और बताह बने हुए हैं कि मिथिला की बेटी को हर हाल में जिताकर विधानसभा भेजना है। बहुत अच्छी सोच है। लेकिन एक सवाल.. क्या पुष्पम प्रिया मिथिला की बेटी नहीं है...? क्यों नहीं पुष्पम प्रिया के लिए प्रचार कर रहे हो...पुष्पम प्रिया ने विदेश में पढ़ाई की। पुष्पम प्रिया में प्रशासनिक और पब्लिक पॉलिसी की समझ है। फिर पुष्पम प्रिया के समय सांप सूंघ जाता है तुम्हें..? या सिर्फ जो भाजपा से चुनाव लड़ रही है वही मिथिला की बेटी है..? कैसे कैसे लोग हैं भई





