मनोज मैथिल
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मनोज मैथिल
@manoj76jha
🌹🥀🌺श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव।🌹🥀🌺 🌹🌹🌺जय श्री कृष्ण🌹राधे राधे🌹🌹🌺 Finance & Taxation. जय हिंद। जय मिथिला। हिन्दू। ब्राह्मण।


भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने भारतीय पेशेवरों से स्वदेश लौटने की भावुक अपील की है। उन्होंने अमेरिका में रह रहे भारतीयों को संबोधित करते हुए खुला पत्र सोमवार को एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा, कृपया घर लौट आओ। भारत माता को आपकी प्रतिभा की जरूरत है। भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाने में मदद करें। हमारी युवा आबादी को मार्गदर्शन करने के लिए वर्षों के अनुभव से प्राप्त आपके तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता है। जोहो भारतीय बहुराष्ट्रीय टेक्नोलाजी कंपनी है जो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और क्लाउड आधारित बिजनेस टूल्स बनाने के लिए मशहूर है। इसे गूगल वर्कस्पेस का भारतीय विकल्प माना जाता है। वेंबू की यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती किए जाने की आशंकाए हैं। एच-1बी वीजा प्रोग्राम अमेरिकी प्रशासन के नए दबाव का सामना कर रहा है। एच-1बी वीजा का उपयोग अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा विदेशी श्रमिकों को काम पर रखने के लिए उपयोग किया जाता है। रिपब्लिकन सांसदों ने एच-1बी प्रोग्राम को तीन साल के लिए निलंबित करने की मांग करते हुए विधेयक पेश किया है। वेंबू ने पत्र में लिखा कि दुनियाभर में भारतीयों को जो सम्मान मिलता है, साथ ही देश की समृद्धि और सुरक्षा सब भारत की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने 37 साल पहले के उस समय को याद किया जब अमेरिका प्रवास के दौरान उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन उनके पास अच्छी शिक्षा और भारत की सांस्कृतिक विरासत थी। उन्होंने लिखा, आपने असाधारण सफलता हासिल की। अमेरिका हमारे लिए अच्छा रहा। इसके लिए हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए कृतज्ञता भारतीय तरीका है। हालांकि उन्होंने पीड़ा जाहिर करते हुए लिखा कि कई अमेरिकी मानते हैं कि भारतीय अमेरिकी नौकरियां "छीन लेते हैं" और अमेरिका में हमारी सफलता अनुचित तरीके से हासिल की गई है। अमेरिका में ऐसे विचार रखने वाले लोगों की संख्या शायद बहुमत में नहीं है, लेकिन वह बहुत कम भी नहीं है। वेंबू ने लिखा, अमेरिकी राजनीति में भारतीय महज दर्शक हैं। उनके पास दक्षिणपंथी" या वामपंथी में से चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि दोनों में से कोई भी पक्ष विदेश में भारतीयों के लिए सम्मान की गारंटी नहीं देता। वेंबू ने पोस्ट किया, अगर भारत गरीब बना रहता है, तो जागरूक वामपंथी हमें दया भाव से नैतिक उपदेश देंगे और कट्टरपंथी दक्षिणपंथी तिरस्कार से भरे अलग तरह के उपदेश देंगे। हमें भ्रमित नहीं होना चाहिए। #DainikJagran #SridharVembu #ZohoCEO









'भारत-चीन नरक जैसी जगह', ट्रंप की पोस्ट पर मचा बवाल! MEA ने कहा- भद्दी टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को रीपोस्ट किया जिससे भारत में विवाद शुरू हो गया है. पोस्ट में भारत, चीन और कुछ अन्य देशों को 'नरक जैसी जगहें' कहा गया था जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने कहा है कि इस तरह की बातें अनुचित और भद्दे किस्म की हैं. भारत में बढ़ते विरोध के बीच अमेरिकी दूतावास ने गुरुवार को इस मामले को संभालने की कोशिश की और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को एक 'महान देश' मानते हैं, जिसका नेतृत्व उनके 'बहुत अच्छे दोस्त' (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) के हाथों में है. #India #China #ATCard #AajTakSocial


अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी। लालकृष्ण आडवाणी जी उपप्रधानमंत्री थे। उन के पास गृह मंत्रालय के अलावा कार्मिक मंत्रालय भी था। उन के एक लिपिक के पुत्र को तब दूरदर्शन में हाशिए के समाचार बुलेटिन पढ़ने का काम दे दिया गया। तब अरुण जेटली जी सूचना-प्रसारण मंत्री थे। वे आडवाणी जी के बहुत क़रीब थे। तीन महीने बाद जेटली जी की जगह सुषमा स्वराज जी सूचना-प्रसारण मंत्री बन गईं। वे भी आडवाणी जी की राजनीतिक शिष्या थीं। उन के बाद रविशंकर प्रसाद जी सूचना-प्रसारण मंत्री बने। वे तो आडवाणी जी के और भी ज़्यादा क़रीब थे। रथ यात्रा के दौरान आडवाणी जी की गिरफ़्तारी हुई तो उन के वकील रहे। बाद में हवाला मामले में भी रविशंकर जी ही आडवाणी के वकील थे। सो, लिपिक के पुत्र ने जेटली जी से ले कर सुषमा जी और रविशंकर जी की प्रभातफेरी लगा-लगा कर अच्छी रफ़्तार से सीढ़ियां चढ़ीं। मगर फिर दो साल बाद डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार आ गई। घबराया हुआ लिपिक-पुत्र तब किस-किस राजनीतिक और किस-किस पत्रकार के घरों की प्रभातफेरी लगाया करता था, उन से क्या-क्या कहा करता था - इस के लंबे किस्से हैं। कांग्रेसी-सरकारों का स्वभाव प्रतिशोधी कभी वैसे भी नहीं रहा है और बाल-बच्चों को निशाना बनाने की क्षुद्रता पर पर तो वह कभी भी नहीं उतरा करती थी। हालांकि लिपिक-पुत्र उस ज़माने में दूरदर्शन का कोई महत्वपूर्ण चेहरा नहीं था, मगर फिर भी आरएसएस-पृष्ठभूमि की वज़ह से उसे विदा करने की बातें जब-जब उठीं, ऐसे-ऐसे लोगों ने ऐसा न करने की सलाह दी कि पूछिए मत। लिपिक-पुत्र और उस के पिता निजी तौर पर उन सभी से अपनी कृतज्ञता व्यक्त किया करते थे। पिछले 12 साल की अंधेर नगरी ने लिपिक-पुत्र को थोड़ा महाकाय बना दिया। अब उस का अहंकार आसमान पर है। दूरदर्शन के कार्यक्रमों में उस की भाषा सारी मर्यादाएं पार कर चुकी है। सोशल मीडिया के मंचों पर व्यक्तियों को ले कर उस की निजी टिप्पणियां फूहड़ता के चरम पर हैं। बेचारा भूल गया है कि ‘मनुज बली नहीं होत है, होत समय बलवान’ और समय है कि परिवर्तनशील है। प्रभु उसे सन्मति दें!

अखिलेश यादव ने सवर्णों के साथ कभी कुछ बुरा नहीं किया। सवर्ण केवल अखिलेश यादव की मुस्लिम-परस्त नीतियों से चिढ़ते हैं। लेकिन जब कोई यादव नहीं चिढ़ता, जब कोई दलित नहीं चिढ़ता, तो मुसलमान सवर्णों का ऐसा क्या बिगाड़ रहे थे कि सवर्णों को मुसलमानों के खिलाफ कर दिया गया?
