
इस्तीफ़ा न देने की ज़िद करके ममता बनर्जी स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था को तोड़ रही हैं। घोर नासमझी का अलोकतांत्रिक बयान है यह। चुनाव प्रक्रिया और परिणाम से जो भी उनकी शिकायत है उसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाएँ। पूरे देश को बंगाल में हुई ऐतिहासिक अनियमितताएँ, संस्थाओं का दुरुपयोग दिख रहा है। लेकिन कोई भी बनी हुई संवैधानिक व्यवस्था को मानने से ऐसे इंकार नहीं कर सकता। संवैधानिक संस्थाओं का आचरण कितना भी आपत्तिजनक हो लेकिन संविधान के विरुध्द जाना अराजकता को बुलावा और बढ़ावा देना है। अवैध है। न्याय पाने के लिए के लिए न्यायालय ही अंतिम विकल्प है। इसे भीड़तंत्र का अखाड़ा मत बनाइए।
























