Random Thought 🇮🇳
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@minku421
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PR और पॉडकास्ट वाले पत्रकारों को ये बात समझ नहीं आएगी कि बेमतलब का शोर तो उनके उन सवाल में हैं, जिसमें वे लोग इस पूरे विवाद में सिर्फ 'खान सर' को 'फैसल खान' कहे जाने पर हिन्दू-मुस्लिम एंगल वाला सॉफ्ट सिम्पैथी कार्ड लेकर बवाल कर रहे हैं.. लेकिन ये सवाल पूछने में उनकी PR वाली पत्रकारिता की पतलून गीली हो जा रही है कि क्या पटना पुलिस ने इस पूरे मामले में ढीली और एक तरफा कार्रवाई नहीं की है? बैलेंसवादी PR पत्रकारों को छोड़िये, आप बताइए, ये सवाल पूछना कैसे नाजायज है कि जब खुद पुलिस की तरफ से लिखी गई FIR में फैसल खान का नाम ये कहते हुए दर्ज है कि उसके ही कहने पर दोनों सुरक्षा गार्ड ने इलाके में फायरिंग की, वो भी दहशत फैलाने की नियत से, तब भी राजधानी की पुलिस फैसल खान को गिरफ्तार नहीं कर पाई है? वहीं दूसरे पक्ष के आरोपी रौशन आनंद को 24 घंटे के भीतर-भीतर गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेज दिया जाता है और उसके ऊपर किए गए FIR की कॉपी किसी मीडिया पोर्टल पर नहीं तैरती है कि लोग देख सकें कि आखिर रौशन आनंद पर दर्ज धाराएं क्या हत्या की कोशिश की धाराओं से ज्यादा जघन्य हैं? ये सवाल क्यों न पूछा जाए कि इस मामले में शुरू से लेकर आखिर तक पटना पुलिस और फैसल खान के बयान क्यों बदलते रहे हैं? क्या गोली चलने की बात से लेकर पुलिस के घटनास्थल पहुंचने के समय तक की बात पर फैसल खान का बयान विरोधाभासों से भरा हुआ नहीं है? पटना पुलिस के SSP कार्तिकेय शर्मा बताएंगे कि आखिर क्यों उनकी SIT फैसल खान को 5 दिनों के बाद तक भी गिरफ्तार नहीं कर सके? क्या इसलिए क्योंकि फैसल खान बच्चों को हथियार बनाकर कानून व्यवस्था को खराब करने की धमकी दे रहा था या फिर वाकई फैसल खान उर्फ खान सर पटना छोड़ फरार हो गए? @PatnaPolice24x7 @bihar_police #bihar #KhanCoachingCentre #KhanSir #PatnaPolice #biharnews
















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