MR.AJAY PARIHAR
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MR.AJAY PARIHAR
@mrajayparihar
CEO Of This X Account
Rajasthan Katılım Mayıs 2025
24 Takip Edilen7 Takipçiler

📍राजस्थान के नेताओं देखो गौर से 👇
27 अप्रैल 2026 को मेघालय में खासी & गारो भाषाओं को राजभाषा बनाया गया है !
राजस्थानी को राजभाषा कब बनवाओगे ??#Make_Rajasthani_Rajbhasha
@BhajanlalBjp @KumariDiya
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📍देश मे अन्य भाषाओं को राजभाषा बनाया जा रहा हैं तो राजस्थानी भाषा के साथ भेदभाव क्यों?
#Make_Rajasthani_Rajbhasha
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संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि - कोटि नमन! जय भीम जय भारत
#AmbedkarJayanti

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📍जैपर री राजस्थान यूनिवर्सिटी माय 30 मार्च सु पढेसरी टाबर यूनिवर्सिटी माय #राजस्थानी भाषा रो स्थायी विभाग खुलाबा री मांग नै लेर 'अनिश्चितकालीन भुख हड़ताल' पर !
गोरमेंट अर यूनिवर्सिटी गौर करे🙏
#Make_Rajasthani_Rajbhasha
@BhajanlalBjp
@KumariDiya
@Uniraj_Jaipur
@DIPRRajasthan

NE

@mrajayparihar नही छोटे होते है तो गौरे होते है बाद में काले होते है पर फिमेल काली नही होती
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ये पहला भाग था उस 1:30 मिनट के विडियो शूट का।
काले हिरणों में फिमेल के झूंड के साथ एक डोमिनेट मेल ही रहता है।और कुछ छोटे मेल बच्चे रह सकते हैं।
जब थोड़ा यंग हो जाते है तो उन्हें अलग कर दिया जाता है ओर वे किसी भी सूरत में फिमेल ग्रुप में नही रह सकते।
बड़े जो एडल्ट होते है उन सब की अपनी अपनी आखरी होती है ओर मेटिंग के दौरान उनमें भयंकर लड़ाईयां होती हैं।
एक ओरण में आठ दस आखरी हो सकती है ओर सबकी अपनी रेंज है टेरेटरी की।
वन्यजीवों में अपना वर्चस्व कायम करने का ये तरीका देखकर लगता है प्रकृति ने ये गुण सब में दिया है।
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📍जैपर री राजस्थान यूनिवर्सिटी माय 30 मार्च सु पढेसरी टाबर यूनिवर्सिटी माय #राजस्थानी भाषा रो स्थायी विभाग खुलाबा री मांग नै लेर 'अनिश्चितकालीन भुख हड़ताल' पर !
गोरमेंट अर यूनिवर्सिटी गौर करे🙏
#Make_Rajasthani_Rajbhasha
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NE

@thardesertphoto वाह भाईसाहब! कितनी मेहनत करके आप इतनी बाते लिखते है। और इससे ज्यादा मेहनत आप उन मासूम बेजुबान हिरणों को बचाने के लिए करते है।
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पश्चिमी राजस्थान के किसानों ओर वन्यजीवों का सहजीवन सदियों पुराना रहा है।यहां आगे खेत में किसान काम करते ओर पीछे हिरण उसी में आकर चरते ओर अपना हिस्सा खा लेते।
हम वो बालक थे जो ऐसे ही बड़े हुए है कई बार हमारी मॉ हमें खेजड़ी के नीचे खाट पर सुलाकर काफी दूर काम करने चली जाती थी ओर हमारे रोने की आवाज तक उनको नहीं सुनाई देती तब ये हिरण ही हमारे साथ खेलते थे मतलब इन्हे देख के हम चुप हो जाते ओर हंसने लगते थे।
थोड़ा बड़ा हुए ओर खेत में रखवाली करने जाते जुलाई की धुल भरी आँधियाँ ओर खेजड़ी की झिणी छांव में बैठे पढाई करते तब हिरणों का झुंड हमारे खेत में आ टपकता था चुपके से।पीछे देखते तब तक वो कुछ कुछ मोठ मूंग खा लेते फिर शुरू होती एक दौड़ हम चार खेत तक उन्हें भगाते फिर ओर कोई खेत के बच्चे भगाते।
हिरणों के झुंड की दौड़ में धूल का गुबार सा उड़ता पूरी कांकड़ में एक हल्ला मचता था हन(हिरण)आवे है हिरण।ओर घर आते तो घरवालों से सुनने को मिलता रूखाली सही नही की टिंगर ध्यान को राखे नी मूंग में वगाड़ करा दिया।तब बाड़ बोरड़ी के काटों की हुआ करती थी।
फिर आया एक ऐसा दौर जो इन वन्यजीवों को अपना हिस्सा खाने से रोकने लगा।खेतों के चारो ओर जाली तारबंदी होने लगी।क्यों क्योंकि गॉंव में आवारा सांडो की संख्या बढ़ने लगी थी।पहले लोग छोड़ते नहीं थे लेकिन अब छोटे छोटे बछड़ों को छोड़ दिया जाने लगा।उधर हरियाणा से नीलगाय का कुनबा राजस्थान में बढने लगा था जो कि फसलों को ज्यादा नुकसान पहुँचाते थे।
उधर सरकार बदलते ही गऊ बचाने का नारा गूंज उठा तो जो बछड़े कसाईंयो को बेचे जाते थे वो अब बंद हो चुके थे।बेसक साठिये गॉंव से टोगड़े खरीदकर ले जाते थे।
देखते ही देखते सारे खेतों में कँटीली तारबंदी हो गई।हिरण इनमें फंसकर मरने लगे कईयो के पेट चीर जाते तो कईयो के जननांग तक चमड़े के साथ अलग हो जाते उन दर्दनाक मौतों का कोई ज़िम्मेदार नही था।कोई गवाह नही था।वन्यजीवों की दुनिया में हाहाकार मचा था।मर उनकी आवाज उठाने वाला नहीं था।हालाँकि तब भी हिरण कुत्तों के हमलो से बच जाते थे क्योंकि तारबंदी के बीच में जगह थी।वन विभाग था तो सही पर उसकी जमीन नहीं थी तो वो अफसर मौन धारण कर बैठे रहे तो दूसरी ओर कृषि विभाग सब्सिडी देकर जाली तारबंदी करवा रहा था।
फिर आये सूअर ये वो प्रजाति थी जो हिरणों के मौत की कब्रगाह बन गई।क्योंकि सूअरों को रोकने के लिए किसानों ने जाली लगानी शुरू कर दी।कुत्तों के हमलों में तेज भागते हिरण जाली की नहीं देख पाते ओर उसमें फंस जाते।
जैसे जैसे जाली हुई प्राकृतिक बाड़ खत्म होती गई और हिरण उस क्षेत्र से खत्म होते गये।
अब हालात ये है कि हर खेत में आवारा कुत्ते घूम रहे है ओर हिरण खत्म हो चुके हैं।पहले से अधिक खुद को सक्षम मानने वाला किसान कुदरत के आगे आज भी रो रहा है।
पाखंडियों के प्रभाव में बहुत धार्मिक हो चुके किसानों को ये मानने में कोई दिक़्क़त नहीं होनी चाहिए कि वर्तमान में तुम्हारे आंसुओं की वजहें वो तुम्हारे इन खेतों में मरते उन हिरणों की वो करूण कराहे है।जो तुमने नज़रअंदाज़ की।गाय पाली दूध के लिए ओर बछड़ों को मरने को छोड़ दिया जो कालांतर में कई वन्यजीवों के मौत की वजह बनी।
ये सीरिज क्रमश जारी रहेगी मित्रों जुड़े रहिए

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