

bawandar nath
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पहाड़ी महिलाएं जब लकड़ी - घास लेने जंगल जाती हैं, तो पुलिस उन्हें उठा कर थाने में बंद कर देती है। और जब जंगल में आग लगती है तो वन अधिकारी आदेश देता है — “आग में कूद कर आग बुझाओ, नहीं तो एक साल की जेल होगी!” 😡 #उत्तराखंड #5thSchedule







🚨 HUSBAND : We have been separated for 16 years. I’m paying ₹15K maintenance. Please grant me divorce. WIFE : I have told him I am ready to live with him. SUPREME COURT : Keep your wife with you. HUSBAND : There are temperamental issues. We’ve lived separately for 16 years. I want divorce now. SC : See, 15k is hardly anything these days. How much permanent alimony can you pay? HUSBAND : I don’t have money. My salary is Rs 65K no pension. I’m 54 years old SC : Then continue paying ₹15,000 HUSBAND : Please grant me divorce SC : Shaanti se baithe raho. Dete raho ₹15,000, khush raho






उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने की सरकारी कंपनी है, जिसका नाम इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IMPCL) है। 26 मई 2026 को केंद्र सरकार ने इसे 121 करोड़ रुपए में मेसर्स स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया है। IMPCL कर्मचारी संघ अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत कहते हैं कि 145 करोड़ रुपए नेटवर्थ वाली सरकारी कंपनी को मात्र 121 करोड़ रुपए में निजी हाथों में बेच दिया गया। यह सीधे तौर पर खुला घोटाला है। IMPCL की स्थापना वन विभाग की 40 एकड़ जमीन पर 12 जुलाई 1978 को हुई थी। इसके पास 1200 तरह की औषधियां बनाने का लाइसेंस था और वर्तमान में 575 तरह की आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाकर देश के केंद्रीय अस्पतालों, रिसर्च संस्थानों और राज्य अस्पतालों को सप्लाई की जा रही थी।





