Mohd Nadeem Siddiqui🇮🇳
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Mohd Nadeem Siddiqui🇮🇳
@nadeemwrites
Storyteller | Author | OSINT #FactCheck #MythBusting #OSINT #BloodDonor









आज भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव का बलिदान दिवस है !! UP के जिला शाहजहांपुर में क्रांतिकारी शहीद अशफाक उल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाएं बुलडोजर से तोड़ दी गईं !! नगर निगम इस जगह का सौंदर्यीकरण करेगा, ऐसा कहा गया है।


शताब्दी लखनऊ से चलते वक्त जोश से भरी हुई होती है। मुसाफ़िर एक्टिव होते हैं। फ़ोन की घंटियां बजती रहतीं हैं और लोग बताते रहते हैं "हां, बस अभी चली है, हां-हां बैइठे हैं आराम से बैइठे हैं। क्या?.... नहीं उनका तो नहीं आया लेकिन फूफा जी की कॉल आयी थी, बता रहे थे मिठाई पहुंची नहीं" कुछ देर तक सीट अदला बदली वाले एक्टिव रहते हैं जिन्होंने टिकट साथ कराए थे लेकिन सीटें अलग अलग मिल गयीं। "ऐसा कीजिए, आप इधर आ जाइये, तो ये वाली पर इनको बुला लीजिए, इक्तीस बत्तीस उनकी है तो ये बहन जी इस पर आ जाएं, ये भाई साहब तो सिंगल हैं ये वही बैठे रहें इनका क्या है" थोड़ी देर में चाय आ जाती है, चाय भी ऐसी आती है कि पहले गरम पानी दे जाते हैं, फिर एक ट्रे में चीनी का पैकेट, दूध पाऊडर और ताबीज़ वाली चायपत्ती। चाय बनाने बनाने में दो स्टेशन निकल जाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे लोग थकना शुरु होते हैं। डिब्बे की कलेक्टिव एनर्जी "कितने स्टेशन बचे हैं" हो जाती है। बोरियत में लोग किसी रैंडम आदमी के आए कॉल को भी "और बताओ, और बताओ" करके खींचने लगते हैं। धीरे-धीरे थकान और बढ़ती है। आंखें भारी होने लगती हैं। कुछ लोग बैठे बैठे सोने लगते हैं। इटावा के आगे तक सब लोग सीट पर बैठे-बैठे पैर स्ट्रैच करने लगते हैं और नमकीन के खाली पैकटों के पीछे लिखी कंपनियों के नाम देखकर "ठेका मिला होगा कंपनी को, किसी नेता की होगी" वाली बातें भी कर चुके होते हैं। आंखे और भारी होती हैं, डिब्बे में उबासियां दिखाई देने लगती हैं। एनर्जी लेवल ज़ीरो तक छू जाता है। लेकिन तभी... इंकलाब आता है.... सामने वाला स्लाइड डोर एक तरफ खिसकता है। नीली वर्दी में कैप लगाए एक सांवला आदमी एक हाथ पर लाल-हरी ट्रे एक के ऊपर एक रखे अंदर दाखिल होता है। "चलो भैय्या खाना आ गया" हल्की सी आवाज़ गूंजती है और ये वही पल होता है जिसके बाद सब बदल जाता है। अंगड़ाइयां गूंजती हैं, पीछे झुकी कुर्सियां सीधी हो जाती हैं और फिर पूरे डिब्बे में ये आवाज़े गूंजने लगती है "लाओ भैय्या आराम से, मेरा तो वेज था। नॉनवेज में सिर्फ अंडा होगा? रोटी मशीन से बनती होगी? आप इसमें से दही ले लीजिए हम खाते नहीं है, अचार मिला लो दाल में ये लोग फीकी बनाते हैं, मेरा पैकेट सूखी सब्ज़ी कम है, अभी आइसक्रीम भी मिलेगी" सबको एक साथ खाते पीते देखकर ऐसा रंगारंग माहौल हो जाता है कि लगता है छोटे मामा के तिलक में बैठे हैं। बस, एक बार कोट पहने टीटी इतना और कह दे आकर "अरे आप लोग तो कुछ ले ही नहीं रहे हैं" तो मज़ा आ जाए






