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If only Charlie Kirk would have remained silent
If only Charlie Hebdo had not drawn cartoons
If only Samuel Paty hadn't taught his students
If only Salman Rushdie would not have written a book
If only Theo van Gogh would not have made a film
If only Lars Vilks had not done an illustration
If only Geert Wilders would stay out of politics
If only Mila did not use social media
If only Nupur Sharma did not mention Aisha
If only Kurt Westergaard stopped drawing
If only Rasmus Paludan respected the Qur'an
If only Lars Hedegaard stopped writing
If only Avijit Roy had stopped blogging
If only Jacques Hamel had not been a Catholic Priest
If only Mahsa Amini had covered herself
If only Ahmad Abu Marhia had liked women
If only Saman Abbas had been less Westernized
If only Sarah Halimi had not been Jewish
If only young Lola and Luna did not leave their homes
If only Andreas Jurca were not a politician in the AfD
If only Robert Redeker did not share his opinions
If only Robert Spencer did not go to Ireland
If only Pamela Geller didn't organize a cartoon contest
If only Bosch Fawstin did not “Draw Muhammad”
If only Michael Stürzenberger had not spoken in public
“If only”...then we could live in “peace,” right!?
If only we submit to the Left and to Islam, then we would be “safe,” right?
The Truth Behind “Peace”
In both Islam and the modern Left, peace does not mean coexistence - it means complete submission.
Their “tolerance” extends only to those who accept humiliation and live under their ideological rule.
Muhammad demanded war against all who rejected him. Within 25 years of his death, Muslim armies had overrun vast Christian, Jewish, Hindu, Buddhist, and Zoroastrian lands—territory spanning what would become more than 28 modern nations. For 1,400 years jihad continued, and to this day, not a week passes without Islamic fundamentalists killing in the name of Allah.
Muhammad himself declared: “I have been ordered to fight until they testify there is no god but Allah and Muhammad is his messenger.” In the last nine years of his life, he ordered no fewer than 65 military campaigns to enforce it. He inspired his men with promises of loot, slaves, women, and a lust-filled paradise. He beheaded captives, raped women, and enslaved children—and Muslims are still told to emulate his example.
The modern Left, rooted in communism, mirrors the same logic: stay silent, conform, bend the knee - or be destroyed. Communists slaughtered over 100 million people in the 20th century under the same justification: history had a “destined course,” and anyone who stood in its way had to be silenced, reeducated, or eliminated.
Today’s progressives dress it up with softer words - “equity,” “inclusion,” “justice” - but the reality is the same forced obedience. Dissent is crushed, speech is censored, and anyone refusing to submit is socially, politically, or financially destroyed.
Islam calls it peace. Communism calls it progress. Both mean submission.
So the question is… Who will be added to this list next?
English
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सबसे क्रूर सजा दिए जाने का जो मामला दुनिया के सामने आया था, वो ईरान की 16 वर्षीय मासूम लड़की अतीफेह रजबी सहलीह का मामला है.
और लोग कहते हैं इसी लड़की का श्राप ईरान को लगा है क्योंकि इस लड़की के फांसी के बाद से ईरान में कभी शांति नहीं रही
जब वह पांच साल की थी, तब एक कार दुर्घटना में अतेफे की मां की मृत्यु हो गई। बताया जाता है कि कुछ देर बाद उसका छोटा भाई नदी में डूब गया था। वह अपने वृद्ध दादा-दादी के साथ रहती थी।
उसकी जिंदगी का असली बुरा दौर तो तब शुरू हुआ जब एक 51 वर्ष के रीटायर्ड गॉर्ड अली दराबी की उस पर बुरी नजर पड़ी। 51 वर्ष के अली ने 15-16 साल की इस मासुम लड़की के साथ बलात्कार किया! एक या दो बार नहीं, बल्कि सैकड़ो बार!!
दरअसल रजबी के परिवार को मजदूरी जैसे कामो की वजह से सारा दिन घर से बहार रहना पड़ता था। उसी दौरान अली दराबी उसे अपनी हैवानियत का शिकार बनता था। उसने रजबी को बुरी तरह धमका दिया था कि अगर उसने किसी से कुछ भी कहा तो उसे और उसके परिवार को मार डालेगा।
डरी सहमी रजबी घुट-घुट कर जीती रही और ये दरिंदा उस मासूम बच्ची को अपनी हैवानियत का शिकार बनता रहा। यह सिलसिला पुरे तीन साल तक चलता रहा!!! कहा जाता है कि रजबी ने फिर भी अपने घर वालो को इस बारे में बताने की कोशिश की थी लेकिन उनने उसे ही फटकार के चुप करा दिया।
लेकिन जब धीरे-धीरे इस दरिंदे की हैवानियत हद से ज्यादा बढ़ने लगी तब रजबी के पिता ने परिवार के लाख आग्रह के बाद पुलिस को इस बात की सुचना दी।
हमारे कुछ बुद्धिजीवी जिस खाड़ी देश की सम्पनता का गुणगान करते नहीं थकते वहां का कानून कैसा है
पुलिस ने इस बात की खबर लगते ही आरोपी के बजाये पीड़िता (रजबी) को ही थाने बुला कर उससे कड़ी पूछताछ की, और उसे वहीँ Crimes against chastity के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
दरअसल इस्लामिक शरिया कानून के अनुसार, Crimes against chastity, सतित्वता (virginity) के उल्लंघन और यौन व्यवहार से संबंधित अपराध होता है, जिसमे गैर मर्द से किसी भी तरह के सम्बन्ध बनने पर महिला को ही सजा दी जाती है जब तक वो यह साबित न कर सके की उसने आरोपी को सम्बन्ध बनाने के लिए लालहित नहीं किया था!!
इस वजह से रजबी को सलाखों के पीछे डाल दिया गया. यहाँ उसे अली से तो छुटकारा मिला, लेकिन दरिंदगी से नहीं। जी हाँ, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रजबी को थाने में भी बेहद प्रताड़ित (टॉर्चर) किया जाता था और कई पुलिस वाले बारी-बारी से उसका दुष्कर्म भी करते थे।
काफी मशक्कत के बाद जब रजबी की दादी को उससे मिलने की इजाजत दी गई तो रिज्बी ने बताया कभी कभी तो उसके साथ इतनी दरिंदगी की जाती है कि वो अपने पैरो पर खड़ी भी नहीं हो पाती। उस दर्द कि वजह से उसे चलने के लिए भी अपने चारो हाथ-पैर के सहारे ही चलना पड़ता था।
अब अगर आपमें जरा भी मानवता होगी तो मै दावे के साथ कह सकता हु कि ये सब सुन के आपके भी रोंगटे खड़े हो गए होंगे… लेकिन अभी थोड़ी और हिम्मत रखिये, क्योकि इस सिस्टम का अभी एक और कांड उजागर होना बाकी है।
लेकिन कोर्ट में आरोपी और पुलिस ने मिलकर ऐसी-ऐसी दलीले दी की मामला रजबी के ही खिलाफ जाने लगा। फिर ऊपर से सरिया कानून!! जज हाजी रेजाई (Haji Rezai) उल्टा रजबी पर ही सजाये सुनाने लगा।
जब अतीफा रजबी को एहसास हुआ कि वह अपना केस हार रही है, तो उसने अपनी सफाई देने के लिए जल्दबाजी में अपने चेहरे से हिजाब (बुर्का) को उठा लिया और कहा कि अदालत को उसे नहीं बल्कि अली दरबी को दंडित करना चाहिए। लेकिन उस अक्ल के अंधे जज ने हिजाब हटाने को अदालत का घोर अपमान बताते हुए रजबी को उम्र कैद की सजा सुना दी।
यह सुन रिज्बी गुस्से में लाल हो गई, और होती भी क्यों न, इतना अन्याय झेलने के बाद भी उसे इन्साफ देने के बजाये वापस उस नर्क में जाने का जो कहा जा रहा था। उसे सिर्फ वो दर्दनाक पल याद आ रहे होंगे इसलिए उसने विरोध में अपनी जूती निकाल कर जज की ओर फेक दी। इससे जज हाजी रेजाई इतना बौखला गया की उसने तुरंत रिज्बी को फांसी की सजा सुना दी।
15 अगस्त 2004 को ईरान के नेका में उसे एक क्रेन से लटका कर सरेआम फांसी दी गई।
बीबीसी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील में पेश किए गए दस्तावेजों में उनकी उम्र 22 साल बताई गई है, लेकिन उनके जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र में कहा गया है कि वह 16 साल की थीं।
ये कैसा न्याय है? ये कैसा कानून है? क्या यही है मुस्लिम बहुयाद वाले देशों में मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी की असली तस्वीर?
और ये तो सिर्फ एक ऐसा मामला है जो ईरान से बाहर की दुनिया तक पहुंच पाया। ईरान, ईराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और न जाने ऐसे कितने इस्तान है जहाँ ऐसे क्रूर कानून की वजह से कितनी निर्दोष बालिकाएं मौत के घाट उतार दी जाती होगी।।

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@4thOfJuly365 Then why does he support pakistan and its terrorists who kill innocent Hindus in the name of Ghazwa e hind?
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आतंकी रऊफ की मौत पर मृतक पत्रकार डेनियल पर्ल के पिता ने गाया इजरायल राष्ट्रगान
#DanielPearl | #IndiaPakWar | #IndiaPakistanWar2025 | India-Pakistan | #IndiaPakistanWar
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मित्रों आप लोग गूगल पर भारत-पाकिस्तान ज्वाइंट डिक्लेरेशन 2009 शर्म अल शेख इजिप्ट सर्च करिए
तो आज यह जो कांग्रेसी कुत्ते इंदिरा गांधी इंदिरा गांधी कर रहे हैं आप उनके मुंह पर थूक देंगे
2009 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे सोनिया गांधी कैबिनेट से भी बड़ी NAC की चीफ थी राहुल गांधी संसद सदस्य थे
मुंबई हमलों के बाद इजिप्ट के शहर शर्म अल शेख में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ राजा गिलानी की मीटिंग हुई
और उसके बाद भारत और पाकिस्तान का एक साझा डिक्लेरेशन जारी हुआ जिसमें मनमोहन सिंह ने यह स्वीकार किया कि हमारे कुछ लोग हैं जो बलूचिस्तान में गड़बड़ी कर रहे हैं हमारे कुछ एजेंट बलूचिस्तान में आतंकवाद फैला रहे हैं और भारत बलूचिस्तान में आतंक फैला रहे भारतीय आतंकवादियों पर कार्रवाई करेगा
इस डिक्लेरेशन के सामने आने के बाद भारत में मनमोहन सिंह की बहुत-बहुत थू थू हुई थी संसद से लेकर मीडिया में मनमोहन सिंह और कांग्रेस को लोगों ने कोसा
पूछा मनमोहन सिंह ने क्या कर दिया कहां तुम्हें मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई करनी थी और कहां तुम खुद यह स्वीकार कर दिए कि भारत एक आतंकवादी देश है जो बलूचिस्तान में आतंकवाद फैलाता है
और इसी डिक्लेरेशन के बाद भारत का एक बहुत ही कमजोर पहलू सामने आया और फिर दुनिया के किसी भी देश ने आतंकवाद के मामले पर भारत का साथ नहीं दिया था
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कांग्रेसी चमचों, सेकुलर सुअरो सुन लो यह पाकिस्तान का आतंकवादी क्या बोल रहा है
बाद में सबूत मांगोगे तो बहुत कुटाई होगी
जिहादी कह रहा है कि ऐंडिया (इंडिया) ने जिहादी मसूद अज़हर के घर को निशाना बनाया, जिसमें उनके परिवार के लोगों की सब की शहादत हो गई
फिर लश्कर के हेड आफ़िस को मुरीदके में निशाना बनाया । जहां हमारे सैकड़ो जेहादीयो की शहादते हुई
पाकिस्तान सरकार झूठी तसल्ली दे रही है , हमारी सेना प्रूफ़ के साथ उतरीं गर्व है अपनी सेना पे
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