
@sapnajoshi122 इश्क़ की खुशबू फैली है सारी कायनात में
आखिर इज़हार-ए-इश्क़ की ज़रूरत क्या है
सुलगते रहते हैं अरमान तन्हा सारी रात भर
चराग़ों को जलाने की आखिर जरूरत क्या है
भीगी पलकें ही बयां कर देती हैं जब पूरी दास्तां को
आखिर स्याही, दवात और कलम की ज़रूरत क्या है
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