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National Chhatra Mahasabha (NCM)
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National Chhatra Mahasabha (NCM)
@national_studen
अधिकारों की आवाज
Madhya Pradesh Katılım Şubat 2019
1.4K Takip Edilen90 Takipçiler

माननीय सुप्रीम कोर्ट को बच्चों की इतनी चिंता हो रही है तो 08 साल से मप्र के 27% आरक्षण केस पर फैसला सुना देते।
देखने और खाने के दांत अलग हैं। #tet #mppsc
@aajtak @ABPNews @AHindinews
@JansamparkMP @CMMadhyaPradesh
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संघ लोक सेवा आयोग ने देशभर के 83 शहरों में 2,072 केंद्रों पर सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 आयोजित की
आयोग ने फर्जीवाड़े (दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने) को रोकने और परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता को मजबूत करने के लिए पहली बार परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों का रीयल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) शुरू किया
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) द्वारा विकसित यह स्वदेशी प्रणाली सभी 2,072 केंद्रों पर सफलतापूर्वक काम करती रही।
विवरण: pib.gov.in/PressReleasePa…
@EduMinOfIndia
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UPSC पेपर के बाद एक बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई है कि
सिर्फ कोचिंग नोट्स पढ़कर इस परीक्षा को निकालना लगभग असंभव है.
UPSC अब तथ्यों की जानकारी नहीं, बल्कि समझ, विश्लेषण क्षमता, interlinking और balanced thinking को परख रही है.
इसलिए तैयारी का फोकस होना चाहिए:
• NCERT (6-12) से मजबूत बेसिक समझ
• PIB Daily, सरकारी Notifications/Circulars
• योजना और कुरुक्षेत्र जैसे मैगज़ीन
• The Hindu / Indian Express के Editorials
• Budget और Economic Survey की गहरी समझ
• India Year Book जैसे authentic sources
पेपर साफ संकेत दे रहा है कि UPSC “information overload” नहीं, बल्कि “clarity of concepts + application of knowledge” देख रही है.
जो अभ्यर्थी केवल ready-made notes पर निर्भर रहेंगे,
उन्हें unpredictable और analytical questions में कठिनाई होगी.
इसलिए sources कम रखिए, लेकिन उन्हें गहराई से पढ़िए और समझ विकसित कीजिए.
एक महत्वपूर्ण बात और: प्रश्न पत्र कठिन और आसान होना रिजल्ट को ज़्यादा प्रभावित नहीं करता. आसान सवाल होंगे तो कटऑफ ऊपर जाएगा. इस बार प्रश्नपत्र मुश्किल थे, कटऑफ काफ़ी कम जाएगा.
मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभ कीजिए. शुभकामनाएँ.
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मप्र सरकार कोर्ट के आदेश को मानती ही नहीं हैं तो कोर्ट को ना अवमानना दिखती ना सम्मान,
केवल आम नागरिक तक ही ये सब नियम कायदे हैं।
#highcourtmp
#mpcourt
#mpgovt

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@DrMohanYadav51 जी 100% कर्मचारियों के वेतन वृद्धि की जाए।
ये भी बोल दिया जाए 9 बजे।
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बड़ा मज़ेदार नियम है। राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत सदस्य उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट नहीं दे सकते हैं, लेकिन वे राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में वोट भी दे सकते हैं और उम्मीदवार भी बन सकते हैं। अगर संविधान के अनुच्छेद 89 (2) के मुताबिक़ वे राज्यसभा के पूर्ण सदस्य माने जाते हैं तो फिर उन्हें उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के चुनाव में भी वोट देने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए? और सुनिए। लोकसभा के मनोनीत सदस्य भी लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव में तो मतदान नहीं कर सकते हैं, मगर सदन के उपाध्यक्ष के चुनाव में उन्हें वोट देने का अधिकार है। चार दशक से ज़्यादा संसद की कार्यवाही कवर करने के बावजूद यह चक्कर आज तक मेरी समझ में नहीं आया। कोई कृपया मेरा ज्ञानवर्द्धन करे! {प्रसंगवशः हरिवंश को फिर राज्यसभा का उपसभापति बनाने की तैयारी हो रही है।}
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सुबह का समय था। नदी बिल्कुल शांत बह रही थी। पानी इतना साफ़ कि पत्थर तक गिने जा सकें। ठंडी हवा बह रही थी एकदम चिल।
एक आदमी अपने घोड़े को वहाँ ले आया। वह घोड़ा देर तक चला था, रास्ता लंबा था। आदमी को पूरा भरोसा था कि अब तो घोड़ा ज़रूर पानी पिएगा। उसने मन ही मन सोचा “ये थक चुका है, प्यास तो लगी ही होगी। ये पानी इसके लिए अच्छा है।”
देखभाल की भावना से उसने घोड़े की लगाम पकड़ी और उसे नदी के और पास ले गया। बहुत प्यार से बोला, “चल, थोड़ा पानी पी ले।”
लेकिन घोड़ा वहीं ठहर गया। उसने न ही अपना सिर झुकाया और न पानी की ओर देखा। वह बस खड़ा रहा एकदम अडिग।
आदमी को अजीब लगा। इतना अच्छा पानी है, फिर भी क्यों नहीं पी रहा प्यास तो लगी ही होगी? उसने सोचा शायद घोड़ा समझ नहीं पा रहा। अब उसने थोड़ा और ज़ोर लगाया।
“पी लो, ये तुम्हारे लिए ही तो है।”
घोड़े ने फिर अपना शरीर पीछे कर दिया। अब आदमी की आवाज़ में बेचैनी आ गई। उसने लगाम खींची, घोड़े को आगे धकेला। जितना वह ज़ोर लगाता गया, उतना ही घोड़ा पीछे हटता गया।
एक आदमी जो भलाई चाहता था लेकिन अब जबरदस्ती पर उतर आया है। वैसे तो दोनों ही सही थे फिर भी दोनों ही परेशान हो गए। आख़िरकार आदमी थककर बैठ गया। घोड़ा भी थक गया।
तभी आदमी को समझ आया। वह घोड़े को नदी तक तो ले आया था, पर प्यास वह पैदा नहीं कर सकता था।
कुछ देर बाद, बिना किसी ज़ोर के, घोड़े ने खुद सिर झुकाया और पानी पीने लगा।
आदमी मुस्कुराया। उस दिन उसने एक बात सीख ली कि हम किसी को रास्ता दिखा सकते हैं, सही बता सकते हैं, भलाई समझा सकते हैं। लेकिन बदलाव ज़बरदस्ती नहीं आ सकता।
यह कहानी बाहर से घोड़े और आदमी की लगती है, लेकिन भीतर से यह मानव चेतना, स्वतंत्रता और विकास की कहानी है।
1. कोई व्यक्ति तब तक नहीं बदलता, जब तक उसे स्वयं यह एहसास न हो जाए कि उसे बदलने की आवश्यकता है। बिना बोध के दिया गया ज्ञान बोझ बन जाता है।
2. सत्य थोपे जाने पर झूठ जैसा लगने लगता है। जब सत्य को दबाव के साथ दिया जाता है, तो वह मुक्ति नहीं, बंधन बन जाता है। सत्य वही है जिसे व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता में स्वीकार करे।
3. प्रेम और नियंत्रण एक साथ नहीं चल सकते जहाँ नियंत्रण है, वहाँ प्रेम खो जाता है।
4. मार्गदर्शन बाहर से होता है, परिवर्तन भीतर से। शिक्षक द्वार तक ले जा सकता है, अंदर प्रवेश साधक को स्वयं करना होता है। बदलाव कोई आदेश नहीं, एक आंतरिक घटना है।
5. स्वतंत्रता विकास की पहली शर्त है जिसे चुनने की आज़ादी नहीं, वह बदल भी नहीं सकता। घोड़ा तभी पीता है जब वह चाहता है और मनुष्य भी तभी सीखता है जब वह तैयार होता है।
जीवन यात्रा... 🚶♂️

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दुश्मनो से न सगे भाई से घबराते हैं
जो बुरे लोग हैं सच्चाई से घबराते हैं
दिन के ढ़लते ही तेरी याद चली आती है
इसलिए शाम की तन्हाई से घबराते हैं
इश्क़ तो कर लें मगर इसमे है नुक़सान बहुत
हम वो बनिये हैं जो भरपाई से घबराते हैं
आईना सामने रखकर न यहां बात करो
ये वो बच्चे हैं जो परछाई से घबराते हैं
हमको इज्ज़त मिले अपनो को बुरा लगता है
इसलिए हौसला अफज़ाई से घबराते हैं
हाए वो लोग जो माँ-बाप को करते हैं ज़लील
और इक हम जो बड़े भाई से घबराते हैं
लोग तालिब हैं कि शोहरत का अलम ऊँचा हो
और हम खुद की शनासाई से घबराते हैं
बात करते हैं समन्दर में उतर जाने की
वो जो तालाब की गहराई से घबराते हैं
— उबैद नजीबाबादी🌷
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@BJP4MP को कांग्रेस के कारनामे को बढ़ाना है तो राष्ट्रवाद का चरित्र नहीं बताना चाहिए।
सरकार को कर्मचारियों की सहयोग के लिए निर्णय लेना चाहिए और कोर्ट के निर्णय को स्वीकार करना चाहिए।
#100_फीसदीवेतन दो
@BJP4India @CMMadhyaPradesh @DrMohanYadav51
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#मध्यप्रदेश_सौ_फीसदी_वेतन_दो
@BJP4India आपसे यह उम्मीद नहीं थी
@OfficeOfKNath @INCMP के काले नियम के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे है जबकि कर्मचारी को उसका हक देना चाहिए
@DrMohanYadav51 @CMMadhyaPradesh @JagdishDevdaBJP
@OfficeofSSC @JansamparkMP @GADdeptmp @aajtak
@TheSootr @ABPNews
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सरकार को कांग्रेस के कारनामे पर ही मुहर लगाने की जिद हैं तो ये राष्ट्रवादी पार्टी को खुद का विजन कुछ नहीं है।
सरकार भाजपा की कारनामे कांग्रेस के।
@DrMohanYadav51 @DainikBhaskar

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