Nitishwar Kumar IAS

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Nitishwar Kumar IAS

Nitishwar Kumar IAS

@nitishwarKumar

DSE, LSE,Behavioural Public Policy; UnMucT/उन्मुक्त, Poet/Singer/Lyricist.

New Delhi, India Katılım Mart 2015
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MANOJ SHARMA/ मनोज शर्मा
मोती डूंगरी गणेश जी। गणेश जी की कृपा आप सभी पर बनीं रहे..!!
MANOJ SHARMA/ मनोज शर्मा tweet media
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Shri Kashi Vishwanath Temple Trust
Shri Kashi Vishwanath Temple Trust@ShriVishwanath·
रंगभरी एकादशी के पावन पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की स्मृतिया
MR
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12 Jyotirlingas Of Mahadev
12 Jyotirlingas Of Mahadev@12Jyotirling·
श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन | 27.02.2026 Shri Mahakaleshwar Sandhya Aarti Darshan | 27.02.2026
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Vaishali Poddar
Vaishali Poddar@PoddarVaishali·
Eternity starts now… 20.02.2026 💕 From strangers to soulmates. ✨ Forever sealed with Major Nitin Singh ❤️ #NiShaliKiShadi
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खाटू श्याम
खाटू श्याम@Khatu_dhaam·
हारे का सहारा — बाबा श्याम हमारा!
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Nitishwar Kumar IAS
Nitishwar Kumar IAS@nitishwarKumar·
मुखड़े के शब्द शानदार हैं, अंतरे के शब्द phonetics के दृष्टिकोण से और बेहतर हो सकते हैं। गायिकी कौशिकी जी की लाजवाब है।
Raaggiri रागगीरी@Raaggiri

कौशिकी चक्रवर्ती जी मौजूदा दौर की सशक्त शास्त्रीय गायिका हैं। बड़ी लगन और तपस्या से उन्होंने माँ सरस्वती की अराधना की है। एक एक सुर ऐसे लगते हैं कि बरसों बरस की ये मेहनत समझ भी आती है। @Singer_kaushiki की संगीत साधना का सफर जारी है। #Raaggiri @YRDeshmukh @hvgoenka @sumrag

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Nitishwar Kumar IAS
Nitishwar Kumar IAS@nitishwarKumar·
पार्वती पतये हर हर
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Dharmendra Kumar
Dharmendra Kumar@Dkumarchandel·
वरिष्ठ आईएएस नीतेश्वर कुमार जी से स्नेहिल भेंट हुई, उनकी सौम्यता, सरलता और आत्मीयता बहुत प्रफुल्लित और आनंदित करती है। @nitishwarKumar @RajuMishra63 @aapka_vineet
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Nitishwar Kumar IAS
Nitishwar Kumar IAS@nitishwarKumar·
बहुत धन्यवाद साहित्य तक, हमारी रचना आपको अच्छी लगी
Sahitya Tak@sahitya_tak

फूल खिले बगिया उपवन में, स्वार्थ न उनके निज़ जीवन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। माली जब भी बाग में जाये, तोड़ पुष्प के गुछ बनाये, कुछ तो चढ़े देव के सिर पे, कुछ पहुँचें थे पैर में गिर के, गूँथ गए जो कुछ माला में, आशिक़ हाथ बंधे हाला में, कुछ ने बाँधा दो जीवन को, सात जन्म बंधन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। कुछ ने तख़्त का मान बढ़ाया, राजा ने जब गले लगाया, कुछ की महिमा बड़ी है न्यारी, पहुँच गए गजरा औ नारी, कुछ ने लाज बचाई तन की, फैशन प्यास बुझाई उनकी, कुछ तो बिछ गए प्रेम डगर में, छोड़ आन जीवन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। कुछ ने युद्ध विराम कराया, श्वेत पुष्प जब हाथ में आया, लाल लिए जब झुके हैं आशिक़, घुटने बल पर प्रणय मुनासिब, पहन के नेता गले हज़ारा, देते हैं संघर्ष का नारा, आस गई उम्मीद गई, फिर भी थे अर्थी संग में पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। कुछ फूलों की किस्मत ना थी, किसी भी मुहूर्त जरूरत ना थी, कुछ तो झुके ज़मीन में इतने, आतुर हो मिट्टी में मिलने, कुछ जो बचे थे वह मधुबन में, सोच रहे थे अपने मन में, रात की रानी तो ना खिलती, पर महके जीवन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। आज की कविता में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक @sanjeevpaliwal सुनिए @nitishwarKumar की कविता.

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Nitishwar Kumar IAS
Nitishwar Kumar IAS@nitishwarKumar·
बहुत धन्यवाद संजीव जी, हमारी रचना को सम्मान देने के लिए
Sanjeev Paliwal/संजीव पालीवाल@sanjeevpaliwal

फूल खिले बगिया उपवन में, स्वार्थ न उनके निज़ जीवन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। माली जब भी बाग में जाये, तोड़ पुष्प के गुछ बनाये, कुछ तो चढ़े देव के सिर पे, कुछ पहुँचें थे पैर में गिर के, गूँथ गए जो कुछ माला में, आशिक़ हाथ बंधे हाला में, कुछ ने बाँधा दो जीवन को, सात जन्म बंधन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। कुछ ने तख़्त का मान बढ़ाया, राजा ने जब गले लगाया, कुछ की महिमा बड़ी है न्यारी, पहुँच गए गजरा औ नारी, कुछ ने लाज बचाई तन की, फैशन प्यास बुझाई उनकी, कुछ तो बिछ गए प्रेम डगर में, छोड़ आन जीवन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। कुछ ने युद्ध विराम कराया, श्वेत पुष्प जब हाथ में आया, लाल लिए जब झुके हैं आशिक़, घुटने बल पर प्रणय मुनासिब, पहन के नेता गले हज़ारा, देते हैं संघर्ष का नारा, आस गई उम्मीद गई, फिर भी थे अर्थी संग में पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। कुछ फूलों की किस्मत ना थी, किसी भी मुहूर्त जरूरत ना थी, कुछ तो झुके ज़मीन में इतने, आतुर हो मिट्टी में मिलने, कुछ जो बचे थे वह मधुबन में, सोच रहे थे अपने मन में, रात की रानी तो ना खिलती, पर महके जीवन में, पता नहीं क्या विधि की रचना, क्या माली के मन में। नीतीश्वर कुमार @nitishwarKumar

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