बीज बोये मैंने
निशि की नीरव गोद में
अश्रु-बिंदु से सींचे सपने
मूक व्यथा की ओट में
तुम कब आओगे?
मेघ बन,करुणा बरसाने
मेरी सूनी पलकों पर
मृतप्राय स्वप्न के
दीप जलाने
मैंने तो हर पीड़ा को
माला-सा पहन लिया है
एक तुम्हारी छवि को
जीवन में वरण कर लिया है
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जय श्री राम
शुभ प्रभात
नमन
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ 🙏
देह है नश्वर, इच्छाएँ माया,
मन क्यों बाँधे स्वयं को छाया?
जिसने रची यह जीवन-यात्रा अपार,
उसी गणपति में है भवसागर पार।
"श्री गणेश"
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हर हर महादेव शिव शंभू ॐ 🙏🔱
#ॐ_गं_गणपतये_नमो_नमः 🙏🍁
#GanpatiBappaMorya