


अन्याय करने वाला तो दोषी होता ही है लेकिन उस अन्याय को देख कर आँख मूँदने वाला भी उस पाप में भागीदार होता है। आज पवन खेड़ा जी के साथ जो कृत्य किया जा रहा है उसे देश आँख मूँद के नहीं देख सकता क्यूँकि ये लड़ाई उनकी व्यक्तिगत नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो ये मानता है की लोकतंत्र में सत्ताधीशों से सवाल पूछना हमारा अधिकार है। इस लड़ाई जो मजबूत करने के लिए इस पिटीशन को साइन करिए और आगे बढ़ाइये। c.org/hx6DtXbYdd













