Ram Bilas Sharma

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Ram Bilas Sharma

Ram Bilas Sharma

@rbsharmabjp

Former Minister-Haryana Govt (Three Term) Former BJP President Haryana (Two Term) MLA Mahendergarh Assembly (Five Term)

Mahendragarh Katılım Haziran 2014
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Ram Bilas Sharma
Ram Bilas Sharma@rbsharmabjp·
माननीय मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP जी के नेतृत्व में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के #सबका_साथ_सबका_विकास वाले संकल्प को साकार करने वाला ऐतिहासिक हरियाणा राज्य का बजट-2025 आज पेश हुआ। यह बजट प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के उत्थान के लिए है।
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Ram Bilas Sharma
Ram Bilas Sharma@rbsharmabjp·
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक श्रद्धेय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। प.पू. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के आदर्श सदैव भारत की पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।
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President of India
President of India@rashtrapatibhvn·
LIVE: President Droupadi Murmu’s address at the 119th birthday and Guruvandana of Dr Sree Sree Sivakumara Mahaswamiji at Sree Siddaganga Math, Tumakuru, Karnataka twitter.com/i/broadcasts/1…
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
Assam has seen rapid development over the past decade. The people are ready to reaffirm their faith in the BJP-NDA. Watch from Gogamukh. twitter.com/i/broadcasts/1…
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Ram Bilas Sharma
Ram Bilas Sharma@rbsharmabjp·
श्री रामनवमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। भारत की आस्था और श्रद्धा के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की कृपा सभी पर सदैव बनी रहें।
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Swami Avdheshanand
Swami Avdheshanand@AvdheshanandG·
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ।। नवरात्रि का अष्टम दिवस आदिशक्ति भगवती के अति पावन, सौम्य और कल्याणमयी स्वरूप "माँ महागौरी" की उपासना को समर्पित है। देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप के रूप में पूजित माँ महागौरी निर्मलता, तप, करुणा, शान्ति और आत्मशुद्धि की दिव्य प्रतिमूर्ति हैं। उनका गौर वर्ण शंख, चन्द्रमा और कुन्द-पुष्प के समान उज्ज्वल एवं धवल है; इसी अलौकिक कान्तिमय स्वरूप के कारण वे "महागौरी" नाम से विख्यात हैं। उनके शुभ्र स्वरूप में केवल बाह्य सौन्दर्य ही नहीं, अपितु अंतःकरण की पूर्ण पवित्रता, निष्कलुषता और ब्रह्मतेज का भी अद्भुत दर्शन होता है। शास्त्रों में महागौरी को आठ वर्ष की कन्या के स्वरूप में भी वर्णित किया गया है - “अष्टवर्षा भवेद् गौरी।” यह संकेत केवल आयु का नहीं, बल्कि उस निर्मल, निष्पाप और निष्कपट चेतना का है, जो ईश्वर के सर्वाधिक समीप होती है। बाल्य की सहज पवित्रता, निष्कलुष भाव और पूर्ण समर्पण ही महागौरी-तत्त्व का आंतरिक रहस्य है। इसीलिए उनका ध्यान साधक को यह प्रेरणा देता है कि वह अपने अंतःकरण को वासनाओं, विकारों और अहंकार से मुक्त कर दिव्य सरलता की ओर उन्मुख हो। माँ महागौरी को “महादेव प्रमोददा” कहा गया है, अर्थात् वे भगवान शिव को प्रमोद प्रदान करने वाली, उनकी आह्लादिनी शक्ति हैं। शिव और शक्ति का यह अद्वैत सम्बन्ध सनातन दर्शन का अत्यंत गूढ़ रहस्य है। शिव बिना शक्ति के निष्क्रिय तत्त्व हैं, और शक्ति शिव के सहचर्य में ही सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री बनती है। "महागौरी" का स्वरूप हमें यह बोध कराता है कि परम शान्ति और परम शक्ति परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक ही दिव्य सत्य के दो आयाम हैं। उनकी शान्त, गौर, स्निग्ध छवि के भीतर ही ब्रह्माण्ड का सम्पूर्ण चेतन बल स्पंदित है। पुराणों के अनुसार माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तप किया। तप की तीव्रता से उनका शरीर कृश और मलिन हो गया; परन्तु जब शिवकृपा और गंगाजल के पावन स्पर्श से उनका स्वरूप पुनः गौर और अत्यंत दीप्तिमान हुआ, तब वे "महागौरी" कहलाईं। इस कथा का आध्यात्मिक आशय यह है कि तप, साधना और ईश्वरसमर्पण से जीव अपने ऊपर चढ़े अज्ञान, कर्ममल और वासनाओं के आवरणों को दूर कर अपने मूल शुद्ध स्वरूप को पुनः प्राप्त कर सकता है। अतः महागौरी केवल एक देवी-स्वरूप नहीं, बल्कि आत्मा की उस अन्तिम निर्मलता का प्रतीक हैं, जहाँ समस्त मलिनता का क्षय हो जाता है। जो साधक एकनिष्ठ भाव से "माँ महागौरी" की आराधना करता है, उसके समस्त पाप, संचित कल्मष और अंतःकरण की अशुद्धियाँ नष्ट होने लगती हैं। उनकी उपासना केवल लौकिक समृद्धि की प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि आन्तरिक रूपांतरण की प्रक्रिया है। वे साधक को आत्मबल, मनोबल, धैर्य, विवेक और आध्यात्मिक स्थिरता प्रदान करती हैं। साथ ही, उनकी कृपा से जीवन में सुख, शान्ति, सौभाग्य, ऐश्वर्य और अभ्युदय का भी प्रसार होता है। इस प्रकार महागौरी की आराधना में भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार का कल्याण समाहित है। नवरात्रि का अष्टम दिवस साधक के लिए यह स्मरण कराने वाला है कि जीवन की वास्तविक शोभा बाह्य अलंकरण में नहीं, बल्कि अंतःकरण की पवित्रता में है। मन जब निर्मल होता है, तभी उसमें ईश्वर का प्रकाश प्रतिबिम्बित होता है। महागौरी का ध्यान हमें संयम, सात्त्विकता, आत्मनियंत्रण, करुणा और निष्कपटता का मार्ग दिखाता है। वे हमें सिखाती हैं कि शुद्धि ही शक्ति है, सरलता ही सौन्दर्य है, और समर्पण ही सिद्धि का द्वार है। वास्तव में "माँ महागौरी" त्रैलोक्य के लिए मंगलमयी चेतना हैं। वे केवल भक्तों के कष्टों का निवारण करने वाली देवी नहीं, बल्कि आत्मोन्नति की अधिष्ठात्री, मोक्ष की प्रेरिका और दिव्य शान्ति की स्रोतस्विनी हैं। उनके चरणों में श्रद्धापूर्वक समर्पित साधक जीवन के अंधकार से प्रकाश की ओर, अशुद्धि से पवित्रता की ओर, और अशान्ति से परम शान्ति की ओर अग्रसर होता है। "माँ महागौरी" समस्त जगत्‌ को शुद्धि, शान्ति, शक्ति और कल्याण का वरदान प्रदान करें; सबके जीवन को मंगलमय, तेजोमय और आनन्दमय बनायें। #चैत्र_नवरात्रि #महागौरी #सनातन_संस्कृति #AvdheshanandG_Quotes
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Rajnath Singh
Rajnath Singh@rajnathsingh·
राम नवमी के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रभु श्रीराम की कृपा से सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और सुख का वास हो। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण की सर्वोच्च प्रेरणा है। उनका आदर्श शासन, न्याय, समानता और जनकल्याण का प्रतीक रहा है, जो आज भी हमारे समाज और देश के लिए पथ प्रदर्शक है। आइए, हम भगवान राम के दिखाए मार्ग पर चलते हुए एक सशक्त, समरस, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें। जय सिया राम!
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Amit Shah
Amit Shah@AmitShah·
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन सत्य, धर्म और कर्त्तव्य के मार्ग पर चलने की अमूल्य प्रेरणा है। प्रभु श्री राम से सभी के कल्याण और समृद्धि की कामना करता हूँ।
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
देशभर के मेरे परिवारजनों को रामनवमी की असीम शुभकामनाएं। त्याग, तप और संयम से भरे मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन से हमें हर परिस्थिति का पूरे सामर्थ्य से सामना करने की प्रेरणा मिलती है। उनके आदर्श अनंतकाल तक भारतवासियों के साथ-साथ संपूर्ण मानवता के पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे। मेरी कामना है कि भगवान राम की कृपा से सबका कल्याण हो, जिससे विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि का मार्ग प्रशस्त हो।
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Ram Bilas Sharma
Ram Bilas Sharma@rbsharmabjp·
माँ भारती की सेवा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू जी के बलिदान दिवस पर कोटिशः नमन। स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने में आपका योगदान अविस्मरमीय है। आपकी अमर गाथा वर्षों तक हमें देशप्रेम, साहस और बलिदान की प्रेरणा देती रहेगी।
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
मां चंद्रघंटा को प्रणाम! माता से प्रार्थना है कि वे हर किसी को सशक्त, समृद्ध और सौभाग्यपूर्ण जीवन का आशीष दें। पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
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Yogi Adityanath
Yogi Adityanath@myogiadityanath·
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तप‌द्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ शक्ति एवं पूर्णता की प्रतीक, जगज्जननी जगदम्बा के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा के आशीर्वाद से समस्त भक्तों का जीवन सुख, समृद्धि एवं आरोग्यता से आलोकित हो। संपूर्ण सृष्टि का मंगल हो, यही प्रार्थना है। जय माँ कूष्माण्डा!
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के अपने सभी परिवारजनों को अनेकानेक शुभकामनाएं। भारतीय विरासत को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने वाला हमारा यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए अध्याय गढ़ने में जुटा है। मुझे विश्वास है कि विकसित बिहार के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में यहां के कर्मठ एवं ऊर्जावान लोगों का समर्पण और सामर्थ्य बहुत काम आएगा।
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
अदम्य साहस और आध्यात्मिक शक्ति की प्रतीक मां कूष्मांडा का चरण-वंदन! उनकी दिव्य ऊर्जा से हर हृदय में नवचेतना जागृत हो। सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे॥
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Yogi Adityanath
Yogi Adityanath@myogiadityanath·
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। माँ दुर्गा की उपासना के पावन पर्व चैत्र नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा अखिल सृष्टि पर बनी रहे, माँ अपने सभी साधकों को साहस और संयम के आशीर्वाद से अभिसिंचित करें, जगज्जननी से यही प्रार्थना है। जय माँ ब्रह्मचारिणी।
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Swami Avdheshanand
Swami Avdheshanand@AvdheshanandG·
"अपरोक्षानुभूति" अलातं भ्रमणेनैव वर्तुलं भाति सूर्यवत्। तद्वदात्मनि देहत्वं पश्यत्यज्ञानयोगतः।।७९।। (भगवद्पादाचार्य आदि शंकराचार्य द्वारा रचित "अपरोक्षानुभूति") भगवत्पादाचार्य भाष्यकार भगवान् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित अपरोक्षानुभूति का यह श्लोक अद्वैत वेदान्त के अत्यन्त सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक तत्त्व को सरल दृष्टान्त द्वारा प्रकाशित करता है। यहाँ “अलात” अर्थात् अग्नि से प्रज्वलित लकड़ी या मशाल का उदाहरण दिया गया है। जब उस जलती हुई लकड़ी को तीव्र गति से घुमाया जाता है, तो वह एक अखण्ड अग्नि-वृत्त के रूप में प्रतीत होती है; यद्यपि वास्तव में वहाँ कोई वृत्त नहीं है। वह केवल तीव्र गति से उत्पन्न भ्रान्ति है। उसी प्रकार, शुद्ध, निराकार, निर्विकार, साक्षीस्वरूप आत्मा में देहत्व का आरोप केवल अज्ञानजन्य भ्रान्ति है। “अलात-चक्र” का यह दृष्टान्त भगवान् गौड़पादाचार्य कृत माण्डूक्यकारिका में भी प्रसिद्ध है- “अलातशान्ति-प्रकरण” में जगत् की मायिकता को इसी उदाहरण से प्रतिपादित किया गया है। आदि शंकराचार्य उसी परम्परा के समर्थ संवाहक हैं। जब अग्निदण्ड को घुमाया जाता है, तो न कोई वास्तविक वृत्त उत्पन्न होता है, न अग्नि का आकार परिवर्तित होता है, न कोई नई सत्ता प्रकट होती है। केवल नेत्रों की सीमा और गति की निरन्तरता के कारण भ्रान्ति उत्पन्न होती है। इसी प्रकार आत्मा कभी देह नहीं बनती, न उसमें कर्तृत्व-भोक्तृत्व का कोई वास्तविक परिवर्तन होता है, न वह सीमित जीव में परिणत होती है। किन्तु अज्ञानयोगतः अविद्या के संसर्ग से आत्मा में देहत्व का आभास होता है। उपनिषद् बारम्बार उद्घोष करती हैं कि “असंगो ह्ययं पुरुषः” यह पुरुष (आत्मा) सर्वथा असंग है। “न जायते म्रियते वा कदाचित्” वह न जन्म लेता है, न मरता है।”अयमात्मा ब्रह्म” यही आत्मा ब्रह्म है। यदि आत्मा देहस्वरूप होती, तो वह जन्म, जरा, व्याधि और मृत्यु से बँध जाती। किन्तु उपनिषद् उसे सर्वथा निर्लेप और शाश्वत सिद्ध करती हैं। अतः देह का आत्मा में आरोप केवल अलात-चक्रवत् भ्रान्ति है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् कहते हैं कि “नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः”असत् का अस्तित्व नहीं, और सत् का अभाव नहीं। देह अनित्य है, परिवर्तनशील है। असत्-स्वरूप है। आत्मा नित्य, अविकार, सर्वव्यापक है; अतः सत् है। फिर भी अज्ञानवश मनुष्य कहता है कि मैं मोटा हूँ”, “मैं वृद्ध हूँ”, “मैं दु:खी हूँ।” यह “मैं” का देह में आरोप ही अज्ञानयोग है। गीता में स्पष्ट कहा गया है कि “क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि” इस शरीर-क्षेत्र में जो जानने वाला है, वही मैं हूँ। आत्मा क्षेत्रज्ञ है; देह क्षेत्र है। दोनों का अभेद-बुद्धि भ्रान्ति है। ब्रह्मसूत्र में कहा गया है कि “नात्मा शरीरस्य” आत्मा शरीर का धर्मी नहीं। शंकरभाष्य में स्पष्ट किया गया है कि आत्मा शरीर से सर्वथा भिन्न है; किन्तु अविद्या से देहाभिमान उत्पन्न होता है। यह देहाभिमान ही संसार-बन्धन का मूल है। जैसे अलात के भ्रम से वृत्त का आभास होता है, वैसे ही चैतन्य के निरन्तर प्रकाश में बुद्धि-वृत्तियों की गति से “अहं देहः’ का मिथ्या ज्ञान उत्पन्न होता है। भगवत्पाद भाष्यकार भगवान् आदि शंकराचार्य अपने ब्रह्मसूत्र-भाष्य के प्रारम्भ में ही कहते हैं कि “स्मृतिरूपः परत्र पूर्वदृष्टावभासः” अध्यास वह है, जिसमें एक वस्तु में दूसरी वस्तु का आभास होता है। आत्मा और देह का यह परस्पर अध्यास ही संसार है। आत्मा की चैतन्यता देह में आरोपित होती है, तब देह ‘जीवित’ प्रतीत होती है। देह के धर्म (जन्म, मृत्यु, रोग, शोक) आत्मा में आरोपित होते हैं, तब जीव दु:खी प्रतीत होता है। किन्तु वास्तव में आत्मा सदा अलात से भिन्न अग्नि की भाँति स्वप्रकाश है। अलात-चक्र दृष्टान्त यह भी सूचित करता है कि भ्रान्ति का उदय और लय, दोनों कालबद्ध हैं। सत्य पर उसका कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे अलात-चक्र का आभास समाप्त होते ही केवल अग्नि-दण्ड शेष रहता है, वैसे ही ब्रह्मज्ञानोदय पर देहाभिमान लीन हो जाता है, जीवत्व का मिथ्यात्व प्रकट होता है, केवल शुद्ध, अखण्ड, अद्वय ब्रह्म शेष रहता है। माण्डूक्यकारिका कहती है कि “अजातं जायते किंचित्” वास्तव में कुछ भी उत्पन्न नहीं होता। अतः देहत्व की प्रतीति भी नित्यानित्य-विवेक के अभाव से उत्पन्न एक काल्पनिक वृत्त है। जब साधक श्रवण, मनन और निदिध्यासन के द्वारा इस सत्य को आत्मसात् करता है, तब वह जानता है कि मैं देह नहीं, देह का साक्षी हूँ। ”मैं मन नहीं, मन का द्रष्टा हूँ।” “मैं चैतन्यस्वरूप ब्रह्म हूँ।” तब “अलात-वृत्त” की समस्त भ्रान्ति शान्त हो जाती है। शुद्ध आत्मा सूर्यवत् स्वयं प्रकाशमान है; उसे किसी बाह्य प्रमाण की आवश्यकता नहीं। #अपरोक्षानुभूति #अद्वैत_वेदान्त #AdvaitVedanta
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
मां ब्रह्मचारिणी के चरणों में कोटि-कोटि नमन! देवी मां सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें। दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
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Nitin Gadkari
Nitin Gadkari@nitin_gadkari·
समस्त देशवासियों को 🌼 चैत्र नवरात्रि🌼 के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।💐🌸 मां दुर्गा की शक्ति और साहस एवं वसंत ऋतु की शुरुआत के प्रतीक का यह मंगल पर्व सभी को सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करें।🙏🏻 #चैत्र_नवरात्रि #ChaitraNavratri
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Ram Bilas Sharma
Ram Bilas Sharma@rbsharmabjp·
माँ भारती के परम उपासक,राष्ट्रीय स्वयंसेवकसंघ के संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक, आदरणीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनका त्याग,अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन हम सभी को ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।
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