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Ek FIR mein saari kranti ghus gai andar


Since an FIR has been filed against me, I want to ask the Health Minister a few questions. JP Nadda ji, why is FSSAI going after those who are raising questions instead of those accused of wrongdoing? In a Democracy, does an ordinary citizen not have the right to question alleged irregularities in public institutions? We exposed alleged corruption and irregularities in FSSAI’s recruitment process. Instead of investigating the matter, FIRs are being used against those speaking in the public interest. Is this accountability or an attempt to intimidate and silence dissent?



So, Delhi Police has filed an FIR against me for exposing irregularities in FSSAI. Nice. 👏😌












जब नरेंद्र मोदी जी को देश का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला, तब उन्हें न सिर्फ पार्टी के अंदर बल्कि बाहर भी कई विरोधों का सामना करना पड़ा था। कई वरिष्ठ नेता, कई पुराने नेता, और यहां तक कि जनता के बीच भी कुछ वर्ग थे, जो उनके प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ थे। बावजूद इसके, मोदी जी ने अपनी रणनीति, दृढ़ता और जनता के विश्वास के सहारे हर विरोध को पार किया और अंततः देश के प्रधानमंत्री बने। ठीक उसी तरह, अब सम्राट चौधरी भी बिहार की राजनीति में एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां उनके लिए भी यही स्थिति है। पार्टी के अंदर कुछ लोग उनके विरोधी हैं, खुद की महत्वाकांक्षाओं के चलते जो खासकर संघ से जुड़े कुछ EWS लॉबी के नेता, जो खुद को सम्राट चौधरी के बराबर मानते हैं, वे खुलकर संघ और पार्टी के आलाकमान पर दबाव बना रहे हैं कि सम्राट जी का नाम वापस लिया जाए। लेकिन सवाल यहीं पर उठता है कि क्या नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और संघ का नेतृत्व इन दबावों के आगे झुककर अपना फैसला बदलेंगे या नहीं। यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, यह उस भरोसे का सवाल है जो बीजेपी ने बिहार की जनता से वादा किया था। जिस चेहरे को आगे रखकर बीजेपी ने बिहार में अपनी स्थिति मजबूत की, अगर उसी चेहरे के साथ विश्वासघात किया जाता है, तो जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि चुनाव पूर्व किए गए वादे और दावे सिर्फ दिखावे थे, जिनकी कोई अहमियत नहीं। इससे मोदी जी, अमित शाह, राजनाथ सिंह जैसे बड़े नेताओं के बयानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकता है। दूसरी तरफ फ्रॉड प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी की छवि को धूमिल करने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन सच यह है कि जमीन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। न तो एनडीए कमजोर हुआ, न ही बीजेपी का जनाधार डगमगाया, और न ही सम्राट जी की लोकप्रियता कम हुई। तारापुर में उन्होंने इतिहास की सबसे बड़ी मतों से जीत हासिल की, जो उनकी जनता के बीच गहरी पकड़ को दर्शाती है। अब एक बड़ा सवाल उठता है संघी होने की परिभाषा क्या है? क्या यह जरूरी है कि कोई बचपन से संघ का हिस्सा हो, या यह ज़्यादा मायने रखता है कि जब से जुड़ा है, तब से उसकी निष्ठा और सक्रियता कैसी रही है? हिमंता विश्वासरमा असम में और यूपी में योगी आदित्यनाथ, संघ से जुड़े नहीं थे फिर भी भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री बनाये गये न? #NarendraModi #AmitShah #samratchaudhary #NitishKumar #Bihar #BJP





Last person in my blood line to support this suar team




Congress approves bill barring any president from unilaterally withdrawing from NATO trib.al/fk7JMkH












