Sachin Goyal (Modi ka parivar)💉💊
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Sachin Goyal (Modi ka parivar)💉💊
@sachingoyal84
#Tweet Guru #Believe In Reality #Straight Forward #Pharmacist By Profession founder : प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति (श्री श्याम रसोई) Owner by SSG

















राजस्थान का सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा आज उपेक्षा का शिकार होकर दरक रहा है। यह बेहद चिंताजनक है कि हमारी कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित विश्वस्तरीय हेल्थ मॉडल को वर्तमान सरकार धराशाई कर रही है। RGHS के अंतर्गत बकाया भुगतान न होने के कारण एक बार फिर निजी अस्पतालों ने ओपीडी और फार्मेसी सेवाएं रोकने की तैयारी कर ली है, जिससे कर्मचारी और पेंशनर्स अधर में हैं। साथ ही, चिरंजीवी (MAA) योजना को शिथिल कर प्रदेशभर के अस्पतालों में इलाज में देरी और आवश्यक दवाइयों की भारी किल्लत पैदा कर दी गई है। जयपुर के SMS और जनाना अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों में खून की भारी कमी एक बड़ी 'हेल्थ इमरजेंसी' है, जो प्रदेशवासियों के जीवन के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सरकार को चाहिए कि निजी ब्लड बैंकों पर लगी रोक अविलंब हटाए ताकि मरीजों की समस्याओं का समाधान हो सके। चाकसू विधानसभा क्षेत्र के 108 साल के बुजुर्ग श्री गोलूराम माली ने मेरे से मिलने की इच्छा जताई जिनसे मैं कल शाम उनके गांव जाकर मिला। वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में रोकी गई योजनाओं को लेकर भाजपा सरकार के प्रति रोष जताया। जब मैं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता की इन बुनियादी समस्याओं को उठाता हूँ, तो मुख्यमंत्री जी समाधान निकालने के बजाय अपने इवेंट्स में मुझ पर व्यक्तिगत कमेंट्स करने में व्यस्त रहते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि हम जनता की पीड़ा की आवाज बन रहे हैं, और सरकार को जवाब देने के बजाय धरातल पर बिगड़ते हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

























राजस्थान में स्वास्थ्य सुविधाएँ पूरी तरह वेंटिलेटर पर पड़ी हुई हैं, और भाजपा सरकार बेख़ौफ़ तमाशबीन बनी हुई है। सरकारी अस्पताल जर्जर इमारतों में चल रहे हैं, जाँच मशीनें महीनों से बंद हैं, दवाइयाँ नदारद हैं और मरीजों को मजबूरी में निजी लैब और मेडिकल स्टोरों की लूट सहनी पड़ रही है। करोड़ों का बकाया होने से पेंशनर्स खाली हाथ लौट रहे हैं, इलाज की निरंतरता टूट चुकी है। यह कुप्रबंधन नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी की पराकाष्ठा है। भाजपा शासन में स्वास्थ्य सेवा जनकल्याण नहीं, बल्कि असंवेदनशीलता और अव्यवस्था का शिकार बन चुकी है।




