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खामोश हुकूमत....❤️
वो बिंदिया, वो काजल,
वो हँसती सी आँखें,
वो खामोश लब और
वो अनकही सी बातें।
सताती हैं मुझको
बहोत तेरी यादें ,
बेचैन करवटें और
लंबी सी रातें।
कभी पास बैठो तो
हाल-ए-दिल सुनाऊं,
कि कितनी अधूरी हैं
तुमसे मुलाकातें।
तुम्हारे बिना सब
अधूरा सा लगता है,
मेरी रूह करती क्यूँ
खुद से ये बातें ....
ज़माने की नज़रों में
'वारियर' हूँ शायद,
पर भीतर मचलती हैं
सूनी बरसातें।
वो नज़रों का झुकना,
वो दिल की इबादत,
कि तुझमें ही दिखती हैं
सारी सकाफत।
वो लहज़ा तुम्हारा,
वो रूहानी सा आलम,
कि थमने लगी हैं
अब सारी बगावतें।
नया एक मुसाफिर
चले साथ गर जो,
तो चलने लगी हैं
अब सारी क़ायनातें....🌺
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